इकाई 1 – लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर:
1. आनुवंशिकता और विभिन्नता के तत्वों को समझाइए।
उत्तर:
आनुवंशिकता वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा माता-पिता के लक्षण संतानों में संचरित होते हैं। इसके मुख्य तत्व हैं—
1. जीन – आनुवंशिक सूचना की इकाई।
2. क्रोमोसोम – जीन को वहन करने वाले संरचनाएँ।
3. DNA – आनुवंशिकता का रासायनिक आधार।
विविधता जीवों में अंतर उत्पन्न करती है जिससे हर जीव एक-दूसरे से भिन्न होता है। यह उत्परिवर्तन, लैंगिक प्रजनन आदि के कारण होती है।
2. एलिल किसे कहते हैं? समझाइए।
उत्तर:
जीन के विभिन्न रूपों को एलिल कहते हैं। ये किसी विशेष लक्षण के लिए जिम्मेदार होते हैं। उदाहरण: मटर के पौधे में बीज का रंग पीला (Y) या हरा (y) – ये Y और y दो एलिल हैं।
3. प्लॉयट्रॉपी (Pleiotropy) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
जब एक ही जीन अनेक लक्षणों को प्रभावित करता है, तो उसे प्लॉयट्रॉपी कहते हैं। उदाहरण: मनुष्यों में सिकल सेल एनीमिया – एक ही जीन से लाल रक्त कोशिकाओं की आकृति, हीमोग्लोबिन स्तर आदि प्रभावित होते हैं।
4. मेण्डल के आनुवंशिक नियमों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मेण्डल ने तीन नियम दिए—
1. एकल गुणसूत्र का पृथक्करण नियम।
2. स्वतंत्र संयोग का नियम।
3. प्रभावीता और अप्रभावीता का नियम।
इनसे आनुवंशिक लक्षणों का संचरण स्पष्ट होता है।
5. अपूर्ण प्रभाविता एवं सह-प्रभाविता को समझाइए।
उत्तर:
अपूर्ण प्रभाविता में संतान में दोनों एलिलों के बीच मध्यवर्ती गुण प्रकट होता है। उदाहरण: लाल और श्वेत फूल के बीच गुलाबी फूल।
सह-प्रभाविता में दोनों एलिल अपने-अपने प्रभाव को समान रूप से दर्शाते हैं। उदाहरण: MN रक्त समूह।
6. बहुलक जीन क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
किसी विशेष लक्षण को प्रभावित करने वाले अनेक जीनों को बहुलक जीन कहते हैं। उदाहरण: त्वचा का रंग, ऊँचाई – ये बहुलक जीनों द्वारा नियंत्रित होते हैं।
7. अनुवांशिक उत्परिवर्तन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
यह स्थायी परिवर्तन है जो जीन या DNA अनुक्रम में होता है। यह प्राकृतिक या कृत्रिम कारणों से होता है। उत्परिवर्तन से विभिन्नता आती है, परंतु यह रोगों का कारण भी बन सकता है।
8. पॉलीजीन अथवा बहुजीनी आनुवंशिकता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
किसी लक्षण का नियंत्रण यदि अनेक जीन मिलकर करते हैं, तो उसे पॉलीजीन या बहुजीनी आनुवंशिकता कहते हैं। ये लक्षण मात्रात्मक होते हैं जैसे—मानव ऊँचाई।
9. प्रवर्तन किसे कहते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर:
DNA की ऐसी अवस्था जिसमें वह विशेष लक्षण प्रकट करने लगता है, प्रवर्तन कहलाता है। यह बाह्य पर्यावरण या रासायनिक प्रभावों से हो सकता है।
10. सहलग्नता से आप क्या समझते हैं? संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
जब दो या अधिक जीन एक ही क्रोमोसोम पर स्थित होते हैं और साथ में संचरित होते हैं, इसे सहलग्नता कहते हैं।
11. पूर्ण सहलग्नता एवं अपूर्ण सहलग्नता को समझाइए।
उत्तर:
पूर्ण सहलग्नता – जीन कभी पृथक नहीं होते।
अपूर्ण सहलग्नता – जीन क्रॉसिंग ओवर के कारण कभी-कभी अलग हो जाते हैं।
12. सहलग्नता मानचित्र (Linkage map) पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जीनों के बीच की दूरी को दर्शाने वाला मानचित्र, सहलग्नता मानचित्र कहलाता है। इसे क्रॉसिंग ओवर की आवृत्ति के आधार पर बनाया जाता है।
13. क्रॉसिंग ओवर के प्रकार एवं प्रक्रिया पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
यह एक प्रक्रिया है जिसमें होमोलॉगस क्रोमोसोम के बीच DNA का आदान-प्रदान होता है। यह लक्षणों में विभिन्नता उत्पन्न करता है। इसके दो प्रकार हैं—
1. एकल क्रॉसिंग ओवर
2. द्विक क्रॉसिंग ओवर
14. लिंग निर्धारण एवं वंशागति पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मानवों में लिंग निर्धारण X और Y क्रोमोसोम द्वारा होता है। पुरुष (XY) और स्त्री (XX)। वंशागति से लिंग संबंधी लक्षण पीढ़ी दर पीढ़ी जाते हैं।
15. बहुपर्यायी बहुविकल्प पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जब एक जीन के तीन या अधिक एलिल होते हैं, तो उसे बहुपर्यायी बहुविकल्प कहा जाता है। उदाहरण: ABO रक्त समूह।
16. निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए—
(i) लिंग विभेदन – नर एवं मादा का पृथक्करण।
(ii) बहुप्रभावी जीन – जो कई लक्षणों को नियंत्रित करता है।
(iii) प्रवर्तन – जीन की सक्रियता की अवस्था।
(iv) त्रायतीय जीन – ऐसे जीन जो अन्य जीनों के प्रभाव को नियंत्रित करते हैं।
17. मनुष्य में लिंग गुणसूत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
मनुष्य में कुल 46 क्रोमोसोम होते हैं, जिनमें 2 लिंग गुणसूत्र होते हैं। पुरुष में XY और स्त्री में XX।
18. लिंग सहलग्न वंशागति से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
वे लक्षण जो X या Y क्रोमोसोम से जुड़े होते हैं, वे लिंग सहलग्न कहलाते हैं। उदाहरण: रंग अंधता, हीमोफीलिया।
इकाई 2 – लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर:
1. एक-एक एंजाइम परिकल्पना को समझाइए।
उत्तर:
एक जीन-एक एंजाइम परिकल्पना को बीडल और टैटम ने प्रस्तुत किया था। इसके अनुसार, हर जीन किसी विशेष एंजाइम को नियंत्रित करता है। यह परिकल्पना बताती है कि जीन प्रोटीन संश्लेषण में कैसे भाग लेते हैं। बाद में इसे संशोधित कर एक जीन-एक पॉलीपेप्टाइड परिकल्पना बना दिया गया क्योंकि सभी प्रोटीन एंजाइम नहीं होते।
2. जीन की ओपेरॉन संरचना पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
ओपेरॉन एक जीन संरचना है जो बैक्टीरिया में पाई जाती है। इसका प्रमुख उदाहरण लैक ओपेरॉन है। इसमें चार प्रमुख घटक होते हैं:
1. प्रमोटर – RNA पॉलीमरेज के लिए बाइंडिंग साइट।
2. ऑपरेटर – रेप्रेसर प्रोटीन के लिए बाइंडिंग साइट।
3. स्ट्रक्चरल जीन – आवश्यक प्रोटीन का निर्माण करते हैं।
4. रेगुलेटर जीन – रेप्रेसर प्रोटीन का निर्माण करता है।
ओपेरॉन मॉडल जीन की अभिव्यक्ति को नियंत्रित करता है।
3. बैक्टीरियल ट्रांसफॉर्मेशन पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
बैक्टीरियल ट्रांसफॉर्मेशन वह प्रक्रिया है जिसमें बैक्टीरिया अपने आसपास के वातावरण से DNA अणु को ग्रहण करके अपने जीन में सम्मिलित कर लेता है। इसे ग्रिफिथ के प्रयोग द्वारा सिद्ध किया गया। इससे बैक्टीरिया नए लक्षण प्राप्त कर लेते हैं जैसे– रोग प्रतिरोधक क्षमता।
4. जीवाणुओं में लैंगिक प्रजनन की विभिन्न विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जीवाणुओं में लैंगिक प्रजनन के तीन प्रमुख तरीके हैं:
1. ट्रांसफॉर्मेशन – DNA का बाहरी स्रोत से ग्रहण।
2. ट्रांसडक्शन – बैक्टीरियोफेज वायरस द्वारा DNA का स्थानांतरण।
3. कंजुगेशन – दो जीवाणु कोशिकाओं के बीच प्लाज्मिड का स्थानांतरण।
इन विधियों से आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है।
5. मॉडल जीवों की उपयोगिता बताइए।
उत्तर:
मॉडल जीवों का उपयोग जैविक शोध में होता है क्योंकि इनका जीवन चक्र छोटा होता है, इनकी अनुवांशिक रचना ज्ञात होती है, और इन्हें प्रयोगशाला में आसानी से पाला जा सकता है। उदाहरण:
1. ई. कोलाई – बैक्टीरिया
2. ड्रोसोफिला – फल मक्खी
3. चूहा (Mouse) – स्तनधारी
इन जीवों से जीन की कार्यप्रणाली, रोगों का अध्ययन एवं दवाओं की जाँच होती है।
6. गुणसूत्रों में संरचनात्मक परिवर्तनों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
गुणसूत्रों में संरचनात्मक परिवर्तन वे परिवर्तन हैं जो गुणसूत्र की आकृति, आकार या क्रम में होते हैं। इसके मुख्य प्रकार हैं:
· विलोपन (Deletion) – गुणसूत्र का कोई भाग हट जाता है।
· गुणन (Duplication) – किसी भाग की पुनरावृत्ति हो जाती है।
· उलटन (Inversion) – कोई खंड उलटकर पुनः जुड़ जाता है।
· स्थानांतरण (Translocation) – एक गुणसूत्र का भाग दूसरे गुणसूत्र में जुड़ जाता है।
ये परिवर्तन आनुवंशिक बीमारियों और कैंसर जैसे रोगों का कारण बन सकते हैं।
7. बहुलकिता पर निबंध लिखिए।
बहुलकिता (Polyploidy) वह दशा है जिसमें जीव की कोशिकाओं में सामान्य से अधिक गुणसूत्र होते हैं। सामान्यतः द्विगुणित (2n) कोशिकाएँ होती हैं, परंतु बहुलकिता में गुणसूत्रों की संख्या तीन गुना (3n), चार गुना (4n) या अधिक होती है।
· प्रकार:
o त्रिगुणित (Triploid) – 3n
o चतुष्गुणित (Tetraploid) – 4n
· महत्व:
o पौधों में अधिक उत्पादन, बड़ी कोशिकाएँ, रोग प्रतिरोध।
o उदाहरण: गेहूँ, कपास।
· मनुष्यों में बहुलकिता घातक होती है।
8. उत्परिवर्तन (Mutation) पर निबंध लिखिए।
उत्परिवर्तन जीन या गुणसूत्र में स्थायी परिवर्तन है, जिससे आनुवंशिक लक्षण बदल जाते हैं।
· प्रकार:
o जीन उत्परिवर्तन – DNA के स्तर पर।
o गुणसूत्र उत्परिवर्तन – गुणसूत्र की संख्या/संरचना में।
· कारण: विकिरण, रसायन, वायरस आदि।
· महत्व:
o सकारात्मक – नये लक्षण, विविधता।
o नकारात्मक – बीमारियाँ (हीमोफीलिया, सिकल सेल एनीमिया)।
9. आनुवंशिक बीमारियाँ क्या हैं? उदाहरण देकर वर्णन कीजिए।
आनुवंशिक बीमारियाँ वे रोग हैं जो माता-पिता से जीन के माध्यम से संतानों में आते हैं।
· उदाहरण:
o हीमोफीलिया – रक्त न रुकना।
o सिकल सेल एनीमिया – RBC का आकार विकृत।
o थैलेसीमिया – हीमोग्लोबिन दोष।
इनका कारण DNA में परिवर्तन या दोषपूर्ण जीन होता है। ये बीमारियाँ स्थायी होती हैं और इलाज कठिन होता है।
10. जीन सम्बन्धित रोग क्या होते हैं? मनुष्य में पाये जाने वाले विभिन्न जीन सम्बन्धित रोगों का वर्णन कीजिए।
जीन सम्बन्धित रोग वे रोग हैं जो एकल या कई जीनों में विकृति के कारण होते हैं।
· प्रकार:
o एकल जीन रोग – सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया।
o लिंक्ड रोग – हीमोफीलिया (X-गुणसूत्र)।
o माइटोकॉन्ड्रियल रोग – ऊर्जा उत्पादन में दोष।
· उदाहरण:
o डाउन्स सिंड्रोम – 21वें गुणसूत्र की त्रिकिता।
o टर्नर सिंड्रोम – एक X गुणसूत्र।
इन रोगों का निदान और प्रबंधन जेनेटिक टेस्टिंग से किया जाता है।
11. गुणसूत्र विसंगतियों पर निबंध लिखिए।
गुणसूत्र विसंगतियाँ वह स्थिति है जिसमें गुणसूत्रों की संख्या या संरचना असामान्य होती है।
· संख्यात्मक विसंगति:
o डाउन्स सिंड्रोम – 47 गुणसूत्र।
o क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम – XXY।
· संरचनात्मक विसंगति:
o विलोपन, गुणन, स्थानांतरण।
· लक्षण: शारीरिक एवं मानसिक विकृति।
यह स्थिति भ्रूण विकास में रुकावट और जन्मजात विकारों का कारण बनती है।
12. एकल जीन विसंगतियों से आप क्या समझते हैं? विस्तृत वर्णन कीजिए।
एकल जीन विसंगति तब होती है जब किसी एक जीन में परिवर्तन होता है और वह रोग उत्पन्न करता है।
· प्रकार:
o प्रभावकारी – एक दोषपूर्ण जीन से रोग।
o दब्बे (Recessive) – दोनों जीन दोषपूर्ण।
· उदाहरण:
o सिकल सेल एनीमिया, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया।
इसमें रोग विशेष जीन द्वारा नियंत्रित होता है और पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित होता है।
13. एपिजेनेटिक्स क्या है?
एपिजेनेटिक्स वह अध्ययन है जिसमें बिना DNA अनुक्रम बदले, जीन की क्रियाशीलता में परिवर्तन होता है।
· प्रभाव: जीवनशैली, भोजन, पर्यावरण।
· उदाहरण:
o DNA मिथाइलेशन, हिस्टोन मॉडिफिकेशन।
· महत्व: कैंसर, मधुमेह, मानसिक रोगों में भूमिका।
एपिजेनेटिक परिवर्तन वंशानुगत हो सकते हैं और यह नई उपचार विधियों के लिए उपयोगी है।
14. वंशावली विश्लेषण किसे कहते हैं?
वंशावली विश्लेषण एक चार्ट है जिससे पीढ़ियों में किसी लक्षण/रोग का प्रसार देखा जाता है।
· उपयोग:
o आनुवंशिक रोगों की पहचान।
o विवाह पूर्व परामर्श।
· चिन्ह:
o पुरुष – □, महिला – ○।
o रोगी – काला चिन्ह।
यह रोगों के वंशानुगत स्वरूप को समझने में सहायक है।
15. जेनेटिक काउंसलिंग किसे कहते हैं?
जेनेटिक काउंसलिंग वह प्रक्रिया है जिसमें लोगों को आनुवंशिक रोगों की जानकारी, जोखिम और निर्णय लेने में मदद दी जाती है।
· उद्देश्य:
o रोग जोखिम का मूल्यांकन।
o परीक्षण की सलाह।
o नैतिक निर्णय में सहायता।
यह विशेष रूप से दंपतियों और रोगियों के लिए उपयोगी है जिनमें आनुवंशिक रोगों का इतिहास होता है।
इकाई 3 – लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर:
1. गैमेटोजेनेसिस (Gameto-genesis) क्या है? शुक्राणुजनन की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
गैमेटोजेनेसिस का अर्थ:
गैमेटोजेनेसिस एक जैविक प्रक्रिया है जिसमें जनन अंगों (गोनैड्स) में युग्मकों (गैमेट्स) का निर्माण होता है।
· नर में: इसे शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) कहते हैं।
· मादा में: इसे अण्डाणुजनन (Oogenesis) कहा जाता है।
शुक्राणुजनन (Spermatogenesis) की प्रक्रिया – विस्तार से
यह प्रक्रिया वृषण (Testes) की वृषण नलिकाओं (Seminiferous Tubules) में होती है। इसमें चार चरण होते हैं:
1. प्रजनन चरण (Multiplication Phase):
· स्पर्मेटोगोनिया नामक कोशिकाएँ बार-बार माइटोसिस करती हैं और संख्या बढ़ाती हैं।
2. वृद्धि चरण (Growth Phase):
· स्पर्मेटोगोनिया आकार में बढ़कर प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट (Primary Spermatocyte) बनाते हैं।
3. परिपक्वता चरण (Maturation Phase):
· प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट मीओसिस-I करता है → दो द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट (Secondary Spermatocyte) बनते हैं।
· द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट मीओसिस-II करता है → चार स्पर्मेटिड (Spermatid) बनते हैं।
4. परिवर्धन चरण (Spermiogenesis):
· स्पर्मेटिड परिपक्व होकर शुक्राणु (Sperm) बनते हैं।
संपूर्ण प्रक्रिया का निष्कर्ष:
· 1 स्पर्मेटोगोनिया से 4 सक्रिय शुक्राणु बनते हैं।
· यह प्रक्रिया यौवन में शुरू होकर जीवन भर चलती रहती है।
शुक्राणु की संरचना:
भाग | कार्य / विशेषता |
शीर्ष (Head) | नाभिक में DNA, एक्रोसोम में एंजाइम – अण्डाणु में प्रवेश हेतु |
गर्दन (Neck) | केन्द्रक – ऊर्जा और गति से जुड़ा भाग |
मध्य भाग | माइटोकॉन्ड्रिया – ऊर्जा प्रदान करता है |
पूंछ (Tail) | गति हेतु – अण्डाणु तक पहुँचने के लिए |
2. ओजेनोसिस (Oogenesis) की प्रक्रिया – विस्तार से
अर्थ:
Oogenesis एक जैविक प्रक्रिया है जिसमें डिम्बग्रंथि (Ovary) में अण्डाणु (Ovum) का निर्माण होता है।
चरण:
1. प्रजनन चरण:
· भ्रूण अवस्था में ओगोनीयम कोशिकाएँ माइटोसिस द्वारा विभाजित होती हैं।
2. वृद्धि चरण:
· ओगोनीयम बढ़कर प्राथमिक अण्डाणु कोशिका में बदलती है।
3. परिपक्वता चरण:
· मीओसिस-I:
o प्राथमिक अण्डाणु → एक द्वितीयक अण्डाणु + एक ध्रुवक (Polar body)
· मीओसिस-II:
o द्वितीयक अण्डाणु → एक परिपक्व अण्डाणु (Mature Ovum) + एक ध्रुवक
मुख्य तथ्य:
· एक ओगोनीयम → एक अण्डाणु
· यह प्रक्रिया रजोनिवृत्ति (Menopause) तक सीमित है।
3. शुक्राणुजनन और अण्डाणुजनन की तुलना
विशेषता | शुक्राणुजनन | अण्डाणुजनन |
स्थान | वृषण (Testes) | डिम्बग्रंथि (Ovary) |
अवधि | यौवन से मृत्यु तक | भ्रूण अवस्था से शुरू, रजोनिवृत्ति तक |
उत्पाद | 1 कोशिका → 4 शुक्राणु | 1 कोशिका → 1 अण्डाणु + 3 ध्रुवक |
विभाजन | सम विभाजन | विषम विभाजन |
4. अण्डों के प्रकार – योल्क के आधार पर
प्रकार | योल्क की मात्रा | उदाहरण |
एलेसीथल | योल्क नहीं | मानव |
मेसोलैसिथल | मध्यम योल्क | मेंढक |
टेलोलेसिथल | अधिक योल्क, एक ओर | मुर्गी |
सेंट्रोलैसिथल | योल्क केन्द्र में | कीट |
ठीक है भाई, अब मैं इकाई 3 के सवालों के सभी जवाब और अच्छे से विस्तार में दे रहा हूँ – एकदम इंपॉर्टेंट पॉइंट्स के साथ क्लियर समझ में आने वाला। पढ़ने में आसान और याद करने में मज़ा आएगा।
5. फर्टिलाइजेशन पर टिप्पणी लिखिए।
फर्टिलाइजेशन (निषेचन) क्या है?
यह वह जैविक प्रक्रिया है जिसमें नर युग्मक (शुक्राणु) और मादा युग्मक (अंडाणु) आपस में मिलते हैं और डिप्लॉयड युग्मनज (Zygote) बनता है।
प्रक्रिया:
1. स्पर्म अंडाणु तक पहुँचता है।
2. एक स्पर्म अंडाणु में प्रवेश करता है।
3. दोनों नाभिक मिलते हैं और एक नई कोशिका – युग्मनज का निर्माण होता है।
महत्त्व:
· नई संतति का निर्माण होता है।
· आनुवंशिक गुण माता-पिता से संतान में आते हैं।
· जैव विविधता को बनाए रखता है।
6. निषेचन की प्रक्रिया व महत्त्व
प्रक्रिया:
1. स्पर्म अंडाणु से मिलता है।
2. एंजाइम्स द्वारा अंडाणु की झिल्ली में प्रवेश करता है।
3. नाभिकों का संलयन होता है और युग्मनज बनता है।
महत्त्व:
· जीवन की शुरुआत यहीं से होती है।
· आनुवंशिक जानकारी संतान को मिलती है।
· यह विकास की पहली सीढ़ी है।
7. निषेचन का रासायनिक पहलू
· एक्रोसोमल एंजाइम्स (जैसे हायलूरोनीडेस) अंडाणु की झिल्ली को भेदते हैं।
· केल्शियम आयन की मदद से अंडाणु की झिल्ली एक स्पर्म के बाद बंद हो जाती है।
· कोर्टिकल प्रतिक्रिया से अन्य स्पर्म प्रवेश नहीं कर पाते।
8. पॉलिस्पर्मी को कैसे रोका जाता है?
पॉलिस्पर्मी:
जब अंडाणु में एक से अधिक स्पर्म प्रवेश कर जाते हैं।
रोकने के तरीके:
1. तेज ब्लॉक (Fast block): झिल्ली का आवेश बदलता है।
2. धीमा ब्लॉक (Slow block): झिल्ली कठोर हो जाती है।
3. कोर्टिकल ग्रेन्यूल्स झिल्ली में अवरोध बनाते हैं।
9. ब्लास्टुला क्या है? इसका महत्व?
ब्लास्टुला:
यह युग्मनज के विखंडन से बनी खोखली गोलाकार संरचना है, जिसमें तरल भरा होता है (ब्लास्टोसिल)।
महत्त्व:
· यह आगे गैस्ट्रुला में बदलती है।
· भ्रूण के अंगों का विकास इससे शुरू होता है।
10. विखंडन (Cleavage) पर टिप्पणी
विखंडन:
युग्मनज का तेजी से माइटोटिक विभाजन, जिससे कोशिकाओं की संख्या बढ़ती है।
विशेषताएँ:
· कोशिकाएँ छोटी होती जाती हैं।
· कोई वृद्धि नहीं होती, सिर्फ विभाजन।
· ब्लास्टोमियर कोशिकाएँ बनती हैं।
11. भ्रूण ध्रुव-अक्ष का निर्माण
· अंडाणु में पश्च और पृष्ठ ध्रुव तय होते हैं।
· निषेचन के बाद भ्रूण का शीर्ष-पृष्ठीय, अग्र-पश्च अक्ष बनता है।
· इससे अंगों की स्थिति तय होती है।
12. शरीर योजना (Body Plan) व समरूपता (Symmetry)
समरूपता:
· द्विपार्श्व समरूपता (Bilateral): एक समान दो भाग – मानव।
· त्रिविम समरूपता (Radial): किसी भी दिशा से समान – स्टारफिश।
शरीर योजना:
· सिर, धड़, अंग – जैसे कशेरुकी जीवों में।
13. ब्लास्टुला के मानचित्र का वर्णन
· इसे फेट मैप (Fate Map) कहते हैं।
· यह दिखाता है कि भ्रूण की कौन-सी कोशिकाएँ भविष्य में कौन-से अंग बनाएँगी।
14. मुर्गी के अंडे से जन्म तक की प्रक्रिया
1. फर्टिलाइजेशन → विखंडन → ब्लास्टुला
2. गैस्ट्रुलेशन: तीन परतें बनती हैं – एक्टोडर्म, मेसोडर्म, एंडोडर्म।
3. अंगों का निर्माण → भ्रूण → चूजा का जन्म।
15. न्यूरुलेशन क्या है?
· भ्रूण में तंत्रिका तंत्र के निर्माण की प्रक्रिया।
· न्यूरल प्लेट → न्यूरल ट्यूब → मस्तिष्क व मेरु रज्जु।
16. मॉर्फोजेनेटिक ग्रेडिएंट
· भ्रूण में रासायनिक पदार्थों की एकाग्रता का अंतर।
· इससे अंगों का विकास और दिशा तय होती है।
17. फेट मैप क्या है?
· ब्लास्टुला की कोशिकाओं का मानचित्र, जिसमें पता चलता है कि आगे ये कौन-से अंग बनाएँगी।
18. जीवोत्पत्ति (Organogenesis)
· भ्रूण की तीन परतों से अंगों का विकास।
· एक्टोडर्म → त्वचा, मस्तिष्क
· मेसोडर्म → हृदय, हड्डियाँ
· एंडोडर्म → फेफड़े, आँतें
19. संदमन (Inhibition)
· एक अंग या प्रक्रिया दूसरे के विकास को रोकती है।
उदाहरण: कुछ हार्मोन अंगों की वृद्धि को सीमित करते हैं।
20. प्रेरण (Induction)
· एक अंग या ऊतक दूसरे अंग के विकास को प्रेरित करता है।
उदाहरण: न्यूरल ट्यूब की प्रेरणा।
21. कोशिका भर्ती (Cell Recruitment)
· अन्य कोशिकाओं को एकत्र कर किसी अंग के निर्माण में लगाना।
· जैसे घाव भरते समय कोशिकाओं का सक्रिय होना।
22. संरचना की अव्यवस्था
· भ्रूण में किसी अंग या ऊतक की बनावट में गड़बड़ी।
· जन्मजात विकृति होती है।
23. शारीरिक निर्धारण
· भ्रूण में कोशिकाओं का भविष्य तय होना कि कौन-सी कोशिका क्या बनेगी।
24. विभेदन व स्तर
· कोशिका का विशेष कार्य वाली कोशिका बनना।
स्तर | विवरण |
टोटिपोटेंट | कोई भी अंग बना सके। |
प्लूरिपोटेंट | कई अंग बना सके। |
यूनिपोटेंट | एक ही प्रकार की कोशिका बने। |
25. वृद्धि (Growth)
· शरीर का आकार और कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि।
26. एपिथेलियोन पर टिप्पणी
· भ्रूण की बाहरी परत, जो त्वचा, बाल, नाखून आदि का निर्माण करती है।
ठीक है भाई, अब मैं इकाई 4 के सभी सवालों के जवाब बहुत अच्छे से, क्लियर और समझ में आने वाले तरीके से तैयार कर रहा हूँ। हर उत्तर को पॉइंट्स में समझाऊँगा ताकि रिवीजन में भी टाइम बचे और अच्छे मार्क्स मिलें। चलो शुरू करते हैं।
�� इकाई 4 – लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. अंडजनन (Parthenogenesis) की परिभाषा व प्रकार
परिभाषा:
जब बिना निषेचन (fertilization) के ही अंडाणु से नया जीव उत्पन्न होता है, तो इस प्रक्रिया को अंडजनन कहते हैं।
प्रकार:
1. प्राकृतिक (Natural): मधुमक्खी, छिपकली आदि में।
2. कृत्रिम (Artificial): वैज्ञानिक प्रयोगों में।
2. पुनरुत्पादन क्या है?
पुनरुत्पादन वह जैविक प्रक्रिया है जिससे जीव अपनी संतति का निर्माण करते हैं।
उदाहरण:
मनुष्य, पशु, पौधों में संतान का जन्म।
3. एम्फिमिक्सिस
यह वह अवस्था है जिसमें स्पर्म व अंडाणु के नाभिक मिलकर युग्मनज (Zygote) बनाते हैं।
4. भ्रूणीय कलाएँ व उनका विन्यास
भ्रूण में तीन कलाएँ बनती हैं:
1. एक्टोडर्म: त्वचा, तंत्रिका तंत्र
2. मेसोडर्म: हड्डियाँ, रक्त
3. एंडोडर्म: फेफड़े, पाचन तंत्र
5. एम्नियोसिन्थेसिस
यह एक चिकित्सकीय परीक्षण है, जिसमें गर्भवती महिला की अम्नियोटिक द्रव से भ्रूण की बीमारियों की जाँच की जाती है।
6. स्तनधारी में स्तनपान के प्रकार
1. प्रलम्बित स्तनपान: माँ लंबे समय तक दूध पिलाती है।
2. संक्षिप्त स्तनपान: कम समय का स्तनपान।
7. स्तनपान का महत्व
· शिशु को पोषण व रोग प्रतिरोधकता मिलती है।
· माँ और शिशु में भावनात्मक संबंध बनता है।
8. प्लेसेंटा व अम्बिलिकल कॉर्ड
· प्लेसेंटा: माँ और भ्रूण के बीच पोषण, गैस विनिमय का अंग।
· अम्बिलिकल कॉर्ड: भ्रूण और प्लेसेंटा को जोड़ती है।
· महत्व: भ्रूण को जीवनदायी सपोर्ट मिलता है।
9. सहायक प्रजनन तकनीक
प्रजनन में सहायता देने वाली तकनीकें:
· IVF (In vitro fertilization)
· IUI (Intrauterine Insemination)
· सरोगेसी (Surrogacy)
10. स्टेम कोशिकाओं पर निबंध
· परिभाषा: ऐसी कोशिकाएँ जो स्वयं को विभाजित कर सकती हैं और किसी भी ऊतक में बदल सकती हैं।
· उपयोग: कैंसर, रीढ़ की चोट, मधुमेह उपचार में।
11. न्यूक्लर स्टेम कोशिकाओं पर टिप्पणी
· न्यूक्लियर स्टेम सेल्स में नाभिक का क्लोनिंग द्वारा उपयोग होता है।
· वैज्ञानिक प्रयोगों में अंग प्रत्यारोपण हेतु।
12. कोशिका की विभाजन क्षमता के आधार पर प्रकार
1. टोटिपोटेंट: संपूर्ण जीव बना सके।
2. प्लूरिपोटेंट: कई ऊतक बना सके।
3. मल्टीपोटेंट: कुछ ऊतक बना सके।
13. जीन बैंक और जीन भंडार
· जीन बैंक: विभिन्न जीवों की जीन संरचना को संग्रहित करने की प्रणाली।
· महत्त्व: जैव विविधता को बचाने में सहायक।
14. स्पर्म बैंक
· वह केंद्र जहाँ शुक्राणुओं को संग्रहित किया जाता है ताकि आवश्यक समय पर उपयोग हो सके।
· सहायक प्रजनन में इसका महत्व है।
15. टिप्पणी लिखिए:
(a) सुपरओव्यूलेशन:
· कृत्रिम रूप से अधिक अंडाणु उत्पन्न करवाना।
(b) हिमपरिरक्षण (Cryopreservation):
· शुक्राणु/अंडाणु को फ्रीज कर संग्रहित करना।
(c) इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF):
· लैब में निषेचन कर भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित करना।
(d) भ्रूण स्थानांतरण:
· लैब में बने भ्रूण को महिला के गर्भ में डालना।
�� इकाई 5 – लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. पृथ्वी पर जीवन के विकास को समझाइए
· पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत लगभग 3.5 अरब वर्ष पहले हुई थी।
· प्रारंभ में एककोशिकीय जीवाणु बने।
· फिर समुद्रों में जीवन विकसित हुआ।
· धीरे-धीरे जल से थल पर जीवों का आगमन हुआ और आज के विविध जीवों का विकास हुआ।
2. सबसे पहले ज्ञात जीवन रूप
· सबसे पहले एककोशिकीय प्रोकैरियोटिक जीवाणु पाए गए।
· उदाहरण: नीली-हरित शैवाल (Blue-green algae)
· ये उच्च ताप व ज्वालामुखी क्षेत्रों में रहते थे।
3. जीवन के अपूर्व एवं प्रत्यक्ष प्रमाण
अप्रत्यक्ष प्रमाण:
· जीवाश्म (Fossils)
· चट्टानों में रासायनिक संकेत
प्रत्यक्ष प्रमाण:
· बैक्टीरिया, वायरस जैसे सरल जीवों का आज भी अस्तित्व।
4. जैव-विकास क्या है? सिद्धांत
· जैव-विकास वह प्रक्रिया है जिसमें जीव धीरे-धीरे परिवर्तित होते हैं और नए जीवों की उत्पत्ति होती है।
सिद्धांत:
1. डार्विन का प्राकृतिक चयन
2. लामार्क का प्रयत्न और उपयोग-अप्रयोग सिद्धांत
3. म्युटेशन सिद्धांत (ह्यूगो डी व्रीस)
5. प्राकृतिक चयन के तीन मुख्य प्रकार
1. स्थिरीकरण चयन (Stabilizing Selection): औसत विशेषता को बढ़ावा।
2. दिशात्मक चयन (Directional Selection): एक दिशा में विशेषता का चयन।
3. विच्छेदन चयन (Disruptive Selection): दो चरम विशेषताओं का चयन।
6. जैव-विकास के प्रमाण
1. जैव रासायनिक प्रमाण: DNA, RNA समानता।
2. समरूप अंग (Homologous structures): एक जैसे अंग, कार्य अलग।
3. अवशेष अंग (Vestigial organs): पूर्वजों से मिले, अब बेकार।
4. भ्रूणीय विकास: प्रारंभिक भ्रूण सभी का समान।
7. विभिन्नता (Variation)
· एक ही प्रजाति के जीवों में छोटे-छोटे अंतर।
कारण:
· अनुवांशिक म्युटेशन
· पर्यावरण
प्रकार:
1. जैविक (Heritable)
2. अजैविक (Non-heritable)
8. उत्परिवर्तन (Mutation)
· DNA में अचानक स्थायी परिवर्तन।
· यह जैव-विकास का मुख्य कारक है।
उदाहरण:
· हीमोफीलिया, अल्बिनिज्म
9. पृथ्वी पर क्या अभिशाप है?
· पृथ्वी पर प्राकृतिक आपदाएँ, प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याएँ जीवन के लिए खतरा हैं।
10. पुनरुत्पत्ति किसे कहते हैं?
· जीवों द्वारा अपनी संतान उत्पन्न करने की प्रक्रिया।
· दो प्रकार:
1. लैंगिक (Sexual)
2. अलैंगिक (Asexual)
11. आनुवांशिक बहाव (Genetic Drift)
· जब किसी छोटे समूह में जीन की आवृत्ति केवल संयोगवश बदल जाती है।
उदाहरण:
· एक छोटा समूह अलग हो जाए और उसमें कुछ जीन नष्ट हो जाएँ।
12. प्राकृतिक एवं कृत्रिम विकास
· प्राकृतिक विकास: प्रकृति द्वारा चयन।
· कृत्रिम विकास: मानव द्वारा चयन, जैसे पालतू पशु, फसलें।
13. मानव का उद्भव कैसे हुआ?
· मनुष्य का विकास कपि (Ape)-जैसे पूर्वजों से हुआ।
· होमो इरेक्टस → होमो सेपियंस
· अफ्रीका में शुरुआत, फिर पूरी दुनिया में फैलाव।
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