B.Sc. 2nd year chemisry 2nd paper organic chemistry unit 3 2025

  NOTE:-     In this blog there are only questions and answers of 3rd unit of organic chemistry 4th and 6th unit will be available in the next blog because this increases the size of the  blog page  a lot.

                  

                   

                       


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बी.एस-सी. द्वितीय वर्ष – रसायन (प्रथम प्रश्न-पत्र)

प्रश्न-सूची (छत्तीसगढ़)

__________________इकाई 3 __________________

1

2

3

4

5

6


                                📘 इकाई 3                                

डाइकार्बोक्सिलिक एवं हाइड्रॉक्सी अम्ल


प्रश्न 1: क्या होता है, जब (केवल समीकरण दीजिए) –

(i) लैक्टिक अम्ल को HI के साथ गर्म करते हैं?

उत्तर:
CH₃–CH(OH)–COOH + 4HI → CH₃–CH₂–CH₃ + 2H₂O + I₂
(
लैक्टिक अम्ल से प्रोपेन बनता है)


(ii) डाइमेथिल मैलोनिक अम्ल को गर्म किया जाता है?

उत्तर:
(CH₃)₂C(COOH)₂ →Δ→ (CH₃)₂CH–COOH + CO₂
(Decarboxylation
होकर आइसोब्यूट्रिक अम्ल बनता है)


(iii) टार्टरिक अम्ल को HBr एवं HI से अलग-अलग अभिकृत किया जाता है?

उत्तर:
(a) HBr
के साथ:
HOOC–CHOH–CHOH–COOH + 2HBr → HOOC–CHBr–CHBr–COOH + 2H₂O
(
टार्टरिक अम्ल डाइब्रोमो succinic acid)

(b) HI के साथ:
HOOC–CHOH–CHOH–COOH + 4HI → HOOC–CH₂–CH₂–COOH + 2H₂O + I₂
(Succinic acid
बनता है)


प्रश्न 2:

(अ) α, β एवं γ-हाइड्रॉक्सी अम्ल पर ऊष्मा का प्रभाव?

उत्तर:

  • α-हाइड्रॉक्सी अम्ललैक्टोन या ऐल्डिहाइड/कीटोन बनता है
    CH₃–CH(OH)–COOH → CH₃–CHO + CO₂
  • β-हाइड्रॉक्सी अम्लα,β-unsaturated acid बनता है (H₂O हटती है)
    CH₂OH–CH₂–COOH → CH₂=CH–COOH + H₂O
  • γ-हाइड्रॉक्सी अम्ललैक्टोन बनाता है (इंट्रामोलिक्यूलर एस्टर)
    HO–(CH₂)₃–COOH → γ-lactone + H₂O

(ब) ऑक्जेलिक अम्ल बनाइये:

(i) सायनोजन (CN)₂ से:

(CN)₂ + 4H₂O → (COOH)₂ + 2NH₃

(ii) ग्लाइकोलिक अम्ल से:

HO–CH₂–COOH + [O] → (COOH)₂
(
ऑक्सीकरण द्वारा ऑक्जेलिक अम्ल बनता है)


प्रश्न 3: डाइकार्बोक्सिलिक अम्लों पर ऊष्मा का प्रभाव लिखिए।

उत्तर:
डाइकार्बोक्सिलिक अम्लों (–COOH)₂ को गर्म करने पर डिकार्बॉक्सिलेशन होती है, जिससे CO₂ गैस निकल जाती है:

R–CH₂–(COOH)₂ → R–CH₃ + 2CO₂ (Elevated temp.)

उदाहरण:
HOOC–CH₂–COOH → CH₃–COOH + CO₂
(
मैलोनिक अम्ल से ऐसीटिक अम्ल बनता है)


प्रश्न 4:

(अ) टार्टरिक अम्ल का संश्लेषण:

(i) आर्गल से:
आर्गल (potassium hydrogen tartrate, KHC₄H₄O₆) को जल अपघटन और अम्लीकरण द्वारा टार्टरिक अम्ल प्राप्त होता है।

(ii) कार्बन एवं हाइड्रोजन से:
Hydrocarbon chain
में controlled oxidation से टार्टरिक अम्ल बनता है।
Example: Butane
या Succinic acid को ऑक्सीडाइज कर सकते हैं।

(ब)

इमली में उपस्थित अम्ल:
टार्टरिक अम्ल (Tartaric Acid)
यही इमली का खट्टा स्वाद देता है।


प्रश्न 5:

(अ) टार्टरिक अम्ल पर निम्न क्रियाएँ:

(i) सान्द्र H₂SO₄:
Carbonization होती है, जिससे काला पदार्थ बनता है (dehydration)

(ii) Tollen's reagent:
टार्टरिक अम्ल एक अत्यधिक अभिक्रियाशील reducing agent है, जिससे silver mirror बनता है।

(iii) ऊष्मा:
Decarboxylation होती है, succinic acid या फ्यूमरिक acid बन सकता है।

(iv) Fenton reagent (Fe²⁺ + H₂O₂):
Oxidation द्वारा CO₂ H₂O बनते हैं।

(v) HI:
Complete reduction, succinic acid बनता है।


(ब) ऑक्जेलिक एवं टार्टरिक अम्ल में अंतर:

गुण

ऑक्जेलिक अम्ल

टार्टरिक अम्ल

कार्बन संख्या

2

4

संरचना

HOOC–COOH

HOOC–CHOH–CHOH–COOH

रासायनिक गुण

Simple dicarboxylic acid

Hydroxy dicarboxylic acid

क्रिया

अधिक acidic

Reducing properties


(स) सूत्र व नाम:

C₆H₈O₇:
Citric Acid
HOOCCH₂–C(OH)(COOH)CH₂–COOH

C₄H₆O₆:
Tartaric Acid
HOOCCHOHCHOHCOOH


प्रश्न 6: (अ) परिवर्तन कैसे करेंगे –

(i) सक्सिनिक अम्ल टार्टरिक अम्ल:
हाइड्रॉक्सीलेशन द्वारा दोनों α-H पर –OH जोड़ें।

(ii) लैक्टिक अम्ल ऐलानीन:
अमीनोकरण करें (–OH को –NH₂ में बदलें)

(iii) टार्टरिक अम्ल पाइरूविक अम्ल:
ऑक्सीकरण और decarboxylation करें।

(iv) लैक्टिक अम्ल पाइरूविक अम्ल:
Mild oxidation: CH₃–CH(OH)COOH CH₃–COCOOH

(v) ऐसीटिक अम्ल प्रोपिऑनिक अम्ल:
एथाइल मैग्नीशियम ब्रोमाइड (Grignard reagent) से रिएक्शन करके।

(vi) टार्टरिक अम्ल ऑक्जेलिक अम्ल:
शक्तिशाली ऑक्सीकरण द्वारा (HNO₃ या KMnO₄ के साथ)

प्रश्न6.  (ब): एसिटिक एसिड से निम्नलिखित यौगिक कैसे प्राप्त करें?


(i) एथिल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) प्राप्त करना:

विधि:
एसिटिक अम्ल का पहले एसीटाइल क्लोराइड (CH₃COCl) में रूपांतरण करें, फिर उसका रिडक्शन करें।

चरण 1:
CH₃COOH + PCl₅ → CH₃COCl + POCl₃ + HCl

चरण 2:
CH₃COCl + 4[H] → CH₃CH₂OH + HCl
(
रिडक्शन: Zn/Hg + HCl या LiAlH₄)


(ii) मिथाइल ब्रोमाइड (Methyl Bromide) प्राप्त करना:

विधि:
पहले एसिटिक अम्ल से मेथेन (CH₄) बनाओ, फिर उसे ब्रॉमिनेट करो।

Step 1:
CH₃COOH + NaOH + heat → CH₄ + Na₂CO₃ (Soda lime decarboxylation)

Step 2:
CH₄ + Br₂ → CH₃Br + HBr
(UV light
की उपस्थिति में)


(iii) एथिल एसीटेट (Ethyl Acetate) प्राप्त करना:

विधि:
एसिटिक अम्ल की एथेनॉल (C₂H₅OH) के साथ एस्टरीकरण प्रतिक्रिया कराएं।

CH₃COOH + C₂H₅OH CHCOOCH + HO
(Conc. H₂SO₄
की उपस्थिति में, heat के साथ)
यह Fischer esterification कहलाती है।


(iv) एसिटिक एनहाइड्राइड (Acetic Anhydride) प्राप्त करना:

विधि:
एसिटिक अम्ल को P₂O₅ (फॉस्फोरस पेंटॉक्साइड) के साथ गर्म करें।

2CH₃COOH + P₂O₅ → (CH₃CO)₂O + H₂O
(Acetic acid dehydration reaction)

प्रश्न 7. एसिटिक एनहाइड्राइड को एथिल अल्कोहल के साथ अभिक्रिया कराया जाता है तो क्या होता है?

उत्तर:
जब एसिटिक एनहाइड्राइड [(CH₃CO)₂O] को एथिल अल्कोहल (C₂H₅OH) के साथ अभिक्रिया कराते हैं, तो एथिल एसीटेट (CH₃COOC₂H₅) का निर्माण होता है, साथ ही एसिटिक अम्ल (CH₃COOH) भी बनता है।

अभिक्रिया:
(CH₃CO)₂O + C₂H₅OH → CH₃COOC₂H₅ + CH₃COOH


प्रश्न 8.एसिटाइल क्लोराइड से N-मिथाइल एसिटामाइड के संश्लेषण के लिए अभिक्रिया लिखिए।

उत्तर:
एसिटाइल क्लोराइड (CH₃COCl) को मिथाइल एमाइन (CH₃NH₂) के साथ अभिक्रिया कराने पर N-मिथाइल एसिटामाइड बनता है।

अभिक्रिया:
CH₃COCl + CH₃NH₂ → CH₃CONHCH₃ + HCl


प्रश्न 9.

(a) जब एसिटाइल क्लोराइड को निर्जल सोडियम एसीटेट के साथ अभिक्रिया कराया जाता है तो क्या होता है?

उत्तर:
जब एसिटाइल क्लोराइड को निर्जल सोडियम एसीटेट (CH₃COONa) के साथ अभिक्रिया कराते हैं, तो एसिटिक एनहाइड्राइड प्राप्त होता है।

अभिक्रिया:
CH₃COCl + CH₃COONa → (CH₃CO)₂O + NaCl


(b) मैलिक अम्ल में समावयवता की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
मैलिक अम्ल (Malic acid) एक डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल है जिसका रासायनिक सूत्र है: HOOC–CH₂–CHOH–COOH
यह यौगिक ऑप्टिकल आइसोमरिज्म (optical isomerism) दर्शाता है क्योंकि इसमें एक chiral carbon (CHOH) उपस्थित होता है। अतः इसके D- और L- समावयव (enantiomers) होते हैं, जो एक-दूसरे के अपवर्तक होते हैं।


प्रश्न 10. निम्नलिखित अभिक्रियाएँ पूरी करें:

(i) (CH₃COO)₂Ca + (HCOO)₂Ca →
उत्तर:
Ca(CH₃COO)₂ + Ca(HCOO)₂ → 2CH₃CHO + 2HCHO + 2CaCO₃
(
डिस्टिलेशन से)

(ii) RCOOR' + 4[H] —Na/C₂H₅OH→
उत्तर:
RCOOR' + 4[H] → RCH₂OH + R'OH
(
एस्टर का रिडक्शन दो एल्कोहॉल में)

(iii) A NH₃→ B ऊष्मा C P₂O₅→ D + H CH₃CH₂NH₂
(
यह multistep conversion है, स्पष्ट नहीं है कि A क्या है — कृपया A का फॉर्मूला बताएं)


प्रश्न 11.CH₃CN H₂O→(A) NH₃→(B) ऊष्मा(C) Br₂/KOH→(D)

उत्तर:

  1. CH₃CN + H₂O/H⁺ → CH₃CONH₂ (A)
  2. CH₃CONH₂ + NH₃ → CH₃CONH₂ (no change here)
  3. CH₃CONH₂ → CH₃COOH (B)
  4. CH₃COOH + Br₂/KOH → CH₂BrCOOH (C)
    (Hell-Volhard-Zelinsky Reaction)
  5. CH₂BrCOOH + excess NH₃ → CH₂NH₂COOH (D)
    (D) = Glycine

प्रश्न 12.α-हैलो अम्ल बनाने की विधि लिखिए।

उत्तर:
Hell-Volhard-Zelinsky (HVZ) Reaction
द्वारा α-हैलो अम्ल बनाए जाते हैं।

अभिक्रिया:
R–CH₂–COOH + Br₂ + PBr₃ → R–CHBr–COOH + HBr


प्रश्न 13.असंतृप्त मोनोकार्बोक्सिलिक अम्लों के दो उदाहरण दीजिए। किसी एक असंतृप्त अम्ल बनाने की विधि लिखिए।

उत्तर:

उदाहरण:

  1. एक्रिलिक अम्ल (CH₂=CH–COOH)
  2. क्रोटोनिक अम्ल (CH₃–CH=CH–COOH)

एक्रिलिक अम्ल बनाने की विधि:

CH₂=CHCN + 2H₂O → CH₂=CH–COOH + NH₃
(Hydrolysis of acrylonitrile)


प्रश्न 14.क्लेजेन संघनन पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:
क्लेजेन संघनन (Claisen condensation) एक कार्बोनेटेड कम्पाउंड (ester) के दो अणुओं के बीच आधार (base) की उपस्थिति में होने वाली संघनन प्रतिक्रिया है, जिससे β-किटो एस्टर बनता है।

सामान्य अभिक्रिया:
2 R–COOR' + NaOR → R–CH(COOR')–CO–R + R'OH

यह प्रतिक्रिया तब होती है जब एस्टर के α-कार्बन पर हाइड्रोजन उपस्थित हो।

प्रश्न 15. निम्नलिखित अभिक्रियाएँ पूरी करें:


(i) CH₃–C≡N + 2H₂O (अम्ल)
उत्तर:
CH₃CN + 2H₂O/H⁺ → CH₃COOH + NH₃
(Hydrolysis of nitrile to carboxylic acid)


(ii) CH₃–ONa + CO (उच्च तापमान 160°C) → A → HCl → B
उत्तर:
CH₃ONa + CO → CH₃COONa (A)
CH₃COONa + HCl → CH₃COOH (B)
(Methoxide reacts with CO to form sodium acetate which on acidification gives acetic acid)


(iii) CH₂(COOH)₂ + P₂O₅ → Δ
उत्तर:
HOOC–CH₂–COOH + P₂O₅ → CH₂=C=O (Ketene)
(Dehydration of malonic acid gives ketene)


(iv) CH₃COCl + CH₂N₂ → A → (Δ, Ag, H₂O) → B
उत्तर:
CH₃COCl + CH₂N₂ → CH₃COCH₃ (A)
CH₃COCH₃ → (on hydrolysis) → CH₃COCH₃ (B)
(Diazomethane reacts with acyl chloride to give methyl ketone - Acetone)


(v) C₆H₆ + CH₃COCl (AlCl₃) →
उत्तर:
C₆H₆ + CH₃COCl → (AlCl₃) → C₆H₅COCH₃ (Acetophenone)
(Friedel–Crafts acylation reaction)


(vi) O=CClCl + 2NH₃ →
उत्तर:
COCl₂ (Phosgene) + 2NH₃ → NH₂CO–NH₂ (Urea) + 2HCl
(Urea formation from phosgene and ammonia)


(vii) CH₃–COOH + A –POCl₃ –HCl → B –KCN (H₂O⁺) → C
उत्तर:
CH₃COOH + NH₃ → CH₃CONH₂ (A)
CH₃CONH₂ –POCl₃ → CH₃CN (B)
CH₃CN + KCN + H₂O → CH₃CH(CN)COOH (C)
(Malonic ester-type chain extension using KCN)


(viii) CH₂CONH₂ + NaNO₂ + HCl →
उत्तर:
CH₂CONH₂ + NaNO₂ + HCl → CH₂OHCOOH (glycolic acid)
(Diazotization followed by hydrolysis of amide)


(ix) C₂H₅COOH + CH₃MgBr →
उत्तर:
C₂H₅COOH + CH₃MgBr → C₂H₅COOMgBr + CH₄
(Grignard reagent reacts with carboxylic acid to give salt and methane gas)


(x) R–COONa + NaOH → (CaO, heat) →
उत्तर:
CH₃COONa + NaOH → CH₄ + Na₂CO₃
(Decarboxylation reaction, soda lime reaction)

 

प्रश्न 16: संक्षिप्त टिप्पणियाँ

(i) कोल्बे इलेक्ट्रोलिसिस प्रतिक्रिया
कोल्बे इलेक्ट्रोलिसिस प्रतिक्रिया एक महत्वपूर्ण अभिक्रिया है, जिसमें कार्बन-कार्बन बंधों का निर्माण किया जाता है। यह प्रतिक्रिया दो समान्य अणुओं (जैसे आर-सीओओएच) का इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा विघटन कर, अल्काइल हालेड या अल्कीन में परिवर्तित होती है। यह प्रक्रिया कार्बन के दो अणुओं के बीच बंधन स्थापित करने में सहायक होती है।

(ii) अर्न्ड्ट-ईस्टर्ट संश्लेषण
अर्न्ड्ट-ईस्टर्ट संश्लेषण एक अभिक्रिया है जो कार्बोक्सिलिक अम्लों और एस्टरों के निर्माण में उपयोग की जाती है। इसमें एक कार्बोक्सिलिक अम्ल और एसीटिल क्लोराइड या अन्य क्लोरीनयुक्त रियेक्टिव एजेंट की प्रतिक्रिया होती है, जिससे एस्टर का निर्माण होता है। यह प्रक्रिया रासायनिक सिंथेसिस में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।

(iii) डिकार्बोक्सिलेशन
डिकार्बोक्सिलेशन एक रासायनिक अभिक्रिया है, जिसमें कार्बोक्सिल समूह (-COOH) हटता है और इसके साथ एक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन होता है। यह प्रतिक्रिया विभिन्न रासायनिक संश्लेषणों में प्रयुक्त होती है, जैसे कि हेटेरोसायकल्स के निर्माण में।


प्रश्न 17: टिप्पणियाँ

(i) हन्सडीकर अभिक्रिया
हन्सडीकर अभिक्रिया एक महत्वपूर्ण अभिक्रिया है, जिसका उपयोग एकसाथ दो तत्वों को जोड़ने के लिए किया जाता है। इसमें आमतौर पर एक एल्डिहाइड और एक एसील हालेड के बीच अभिक्रिया होती है, जिससे अल्कील हालेड का निर्माण होता है। इस अभिक्रिया में दोनों तत्वों के बीच एक नया बंधन बनता है।

(ii) रोसेनमंड रिडक्शन
रोसेनमंड रिडक्शन एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें एसील हालेड या एस्टर को हाइड्रोजन और एक रिड्यूसिंग एजेंट (जैसे Zn) के साथ रिड्यूस किया जाता है, जिससे अल्कोहल या अन्य यौगिक बनते हैं। यह प्रक्रिया कार्बन-ऑक्सीजन बंधों की टूटने और पुनर्निर्माण में सहायक है।


प्रश्न 18: अभिक्रियाएँ पूरी करें

(i) आर-COOH + LiAlH4 → आर-CH2OH
(ii)
आर-CONH2 + Br2 + 4KOH → आर-COOH + 2KBr + 2H2O
(iii) CH3-CHO + Br-CH2-COOC2H5 (1) Zn/
ईथर, (2) H2O/H+ → CH3-CH2-COOC2H5
(iv) Cl-COOC2H5 + NH3 → CH3-CO-NH2 + C2H5NH2
(v) CH3-CO-COOH + Na/Hg, 2H → CH3-CH2-COOH


प्रश्न 19: अभिक्रियाएँ पूरी करें

(i) H2N-CO-NH2 + 2HNO2 → CO2 + N2 + H2O
(ii) CH3-CO-O-CO-CH3 + H2O + P2O5 → CH3COOH + CH3OH
(iii) CH3-CO-NH2 + P2O5 → CH3CN
(iv) CH3-COCl + CH3MgBr → CH3-CO-CH3 (Acetone)
(v) CH3-COCl + H2 + Pd/BaSO4 → CH3-CH3 (Ethane)
(vi) CH3COOH + PCl5 → CH3COCl + POCl3
(vii) CH3COOH + P2O5 → CH3COOPO3
(viii) CH3COOH + SOCl2 → CH3COCl + SO2 + HCl


प्रश्न 20:

(a) एसीटिल क्लोराइड से निम्नलिखित कैसे प्राप्त करेंगे:

(i) एसिटिक एनहाइड्राइड
एसीटिल क्लोराइड और एसिटिक अम्ल का अभिक्रिया कर एसिटिक एनहाइड्राइड प्राप्त किया जा सकता है।
CH3COCl + CH3COOH → (CH3CO)2O (
एसिटिक एनहाइड्राइड)

(ii) एथिल एसीटेट
एसीटिल क्लोराइड और एथिल अल्कोहल के साथ अभिक्रिया से एथिल एसीटेट प्राप्त होता है।
CH3COCl + C2H5OH → CH3COOC2H5

(iii) एसीटामाइड
एसीटिल क्लोराइड और अमोनिया के साथ अभिक्रिया से एसीटामाइड प्राप्त होता है।
CH3COCl + NH3 → CH3CONH2

(b) एसिटिक अम्ल से एसिटाइल क्लोराइड
एसिटिक अम्ल और SOCl2 के साथ अभिक्रिया कर एसिटाइल क्लोराइड प्राप्त किया जा सकता है।
CH3COOH + SOCl2 → CH3COCl + SO2 + HCl


प्रश्न 21:

(a) जब एसीटिल क्लोराइड डाइएथिल कैडमियम के साथ अभिक्रिया करता है तो क्या होता है?
यह अभिक्रिया एक कोंडेन्सेशन प्रतिक्रिया है जिसमें एसीटिल क्लोराइड डाइएथिल कैडमियम के साथ अभिक्रिया करके एथिल एसीटेट का निर्माण करता है।

(b) जब एसिटिक एनहाइड्राइड PCl5 के साथ अभिक्रिया करता है तो क्या होता है?
PCl5
के साथ एसिटिक एनहाइड्राइड की अभिक्रिया से एसीटाइल क्लोराइड और POCl3 का निर्माण होता है।


प्रश्न 22:

(a) आप एसीटोन से निम्नलिखित कैसे प्राप्त करेंगे:

(i) 2,3-डाइमिथाइलब्यूटीन-2
एसीटोन से 2,3-डाइमिथाइलब्यूटीन-2 प्राप्त करने के लिए इसे एक उपयुक्त ग्रिग्नार्ड रिएक्टिव एजेंट के साथ अभिक्रिया कराना होगा।

(ii) 2-मिथाइलप्रोपियोनिक एसिड
एसीटोन के साथ उपयुक्त अभिक्रियाओं से 2-मिथाइलप्रोपियोनिक एसिड प्राप्त किया जा सकता है।

(b) हेक्साडेसीनोइक अम्ल का सूत्र
हेक्साडेसीनोइक अम्ल का सूत्र C16H30O2 है।

(c) निम्नलिखित अभिक्रियाएँ पूरी करें:

R-COOH + SOCl2 → R-COCl
A + Pd-BaSO4 → B
NaOH → C (decaboxylation)
(
ऊष्मा) → D

प्रश्न 23: अभिक्रियाएँ पूरी करें

(a) निम्नलिखित अभिक्रियाएँ पूरी करें:

(i) सीसीएल3COOH + 2NaOH →
यह प्रतिक्रिया त्राइकलोरोएसीटेटिक अम्ल (CCl₃COOH) और सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ होती है, जिसके परिणामस्वरूप सोडियम त्राइकलोरोएसीटेट (CCl₃COONa) और पानी बनता है।
CCl₃COOH + 2NaOH → CCl₃COONa + H₂O

(ii) HOOC-COOH ऊष्मा
यह प्रतिक्रिया एक डिकार्बोक्सिलेशन प्रक्रिया है, जिसमें सक्सिनिक अम्ल (HOOC-COOH) से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन होता है और मैलिक अम्ल (C₄H₆O₄) प्राप्त होता है।
HOOC-COOH → C₄H₆O₄ + CO₂

(iii) CH₂COOH + Br₂ →
यह प्रतिक्रिया एक ब्रोमोएसिटिक एसिड निर्माण प्रक्रिया है, जिसमें फॉर्मिक एसिड (CH₂COOH) और ब्रोमीन (Br₂) के साथ अभिक्रिया होती है। परिणामस्वरूप ब्रोमाइनयुक्त एसिटिक एसिड (BrCH₂COOH) बनता है।
CH₂COOH + Br₂ → BrCH₂COOH

(iv) NH₂-CO-NH₂ + SOCl₂ →
यह प्रतिक्रिया एसिटामाइड (NH₂CO-NH₂) और सोडियम क्लोराइड (SOCl₂) के साथ होती है, जिससे असिंथेटिक अमाइड (SO₂Cl₂) बनता है।
NH₂CO-NH₂ + SOCl₂ → NH₂COCl + SO₂ + HCl

(v) CH₃COCH₃ + Br-CH₂-COOC₂H₅ H₂O/N₂ Zn/ईथर
यह प्रतिक्रिया एक क्लोरीनकृत अल्काइल एसीटेट को सुधारने के लिए होती है, जिसके परिणामस्वरूप एथाइल एसीटेट (C₂H₅COOH) और केटो बृहदाकार उत्पाद बनता है।
CH₃COCH₃ + Br-CH₂-COOC₂H₅ → CH₃COOC₂H₅ + C₂H₅COOH

(b) समीकरण पूरा करें:

(i) CH₂OH-COOH + 2[O] →
यह प्रतिक्रिया ऑक्सीकरण प्रक्रिया है, जिसमें ग्लाइकोलिक अम्ल से ग्लाइकोलिक ऐसिड (COOH) बनेगा।
CH₂OH-COOH + 2[O] → H₂CO3 + H2O

(ii) CH₃COOH + NH₃ → A - H₂O → B
यह प्रतिक्रिया अमोनिया के साथ एसिटिक एसिड की प्रतिक्रिया से एसिटामाइड (A) का निर्माण होगा और पानी के निष्कर्षण से में परिणत होगा।
CH₃COOH + NH₃ → CH₃CONH₂ - H₂O → CH₃CONH₂

(iii) CH₃CHOH-COOH + PCl₅ →
यह एक प्लास्टिक क्लोराइड प्रतिक्रिया है, जिसमें एसीटेडिहाइड और फॉर्मिक एसिड के संयोजन से परिणामस्वरूप केटो क्लोराइड प्राप्त होता है।
CH₃CHOH-COOH + PCl₅ → CH₃COCOCl + POCl₃ + HCl

(iv) HCHO + HCN → A H₂O → B
यह प्रतिक्रिया हाइड्रोजन और साइनाइड से शुरू होकर हाइड्रोक्सी एसिड (B) की ब्रोमोसर हो सकती है।
HCHO + HCN → HCO-CN + H₂O

(v) C₆H₆ + CH₃COCl शुष्क AlCl₃ →
यह एक फ्रेडल्स क्राफ्ट्स एसीलनैट्रेशन प्रतिक्रिया है, जिसमें बेंजीन और एसीटाइल क्लोराइड के साथ शुष्क AlCl₃ (एल्यूमिनियम क्लोराइड) के साथ अभिक्रिया करने पर एसीटोटोबेंजो (C₆H₅CO-CH₃) बनता है।
C₆H₆ + CH₃COCl → C₆H₅COCH₃

() निम्नलिखित अभिक्रियाएँ पूरी करें

(i) RCONH₂ + NaOBr →
यह प्रतिक्रिया सोड़ा ब्रोमाइड की उपस्थिति में सोनेटामाइड की ब्रोमिनेशन प्रतिक्रिया हो सकती है।
RCONH₂ + NaOBr → RCOBr + NaOH

() निम्नलिखित अभिक्रियाएँ पूरी करें:

(i) CH₃COOH + C₂H₅OH H₂SO₄ ऊष्मा
यह एस्ट्रीफिकेशन प्रक्रिया है, जिसमें एसिटिक एसिड और एथिल अल्कोहल एथिल एसीटेट के रूप में उत्पादित होते हैं।
CH₃COOH + C₂H₅OH → CH₃COOC₂H₅ + H₂O


प्रश्न 24: टिप्पणियाँ

() डाइकार्बोक्सिलिक अम्लों पर ऊष्मा का प्रभाव
डाइकार्बोक्सिलिक अम्लों पर ऊष्मा का प्रभाव डिकार्बोक्सिलेशन प्रक्रिया को प्रेरित करता है। जब डाइकार्बोक्सिलिक अम्लों को ऊष्मा दी जाती है, तो इनमें से एक कार्बोक्सिल समूह (-COOH) हटता है और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन होता है। इससे एक सिंगल कार्बोक्सिल अम्ल या अन्य उपोत्पाद बनते हैं, जैसे कि ऐल्कीन और अन्य बाइप्रोडक्ट्स।

(बी) श्मिट प्रतिक्रिया
श्मिट प्रतिक्रिया एक ऑर्गेनिक रासायनिक प्रतिक्रिया है, जिसमें यूरील या अमोनियम ऐलिमिनेट्स को अभिक्रिया द्वारा अन्य केटो अम्ल के रूप में परिवर्तित किया जाता है। यह प्रतिक्रिया मुख्यतः हाइड्रोज़ोनल डिकंपोज़िशन द्वारा प्रक्रिया होती है।


प्रश्न 25: o-नाइट्रोबेंजोइक अम्ल की अम्लीयता बेंजोइक अम्ल से अधिक होती है, क्यों?
o-
नाइट्रोबेंजोइक अम्ल की अम्लीयता बेंजोइक अम्ल से अधिक होती है, क्योंकि नाइट्रोग्रुप (NO₂) इलेक्ट्रॉन को खींचने वाला होता है, जिससे बेंजोइक अम्ल के कार्बोक्सिल समूह के हाइड्रोजन को आसानी से छोड़ने में मदद मिलती है। यह नाइट्रोग्रुप का प्रभाव बेंजोइक अम्ल की तुलना में o-नाइट्रोबेंजोइक अम्ल को अधिक अम्लीय बना देता है।


प्रश्न 26: फॉर्मिक एसिड, एसिटिक एसिड और क्लोरोएसिटिक एसिड की सापेक्षिक शक्ति की व्याख्या करें
फॉर्मिक एसिड (HCOOH) की अम्लीयता एसिटिक एसिड (CH₃COOH) से अधिक होती है, क्योंकि फॉर्मिक एसिड में माइट्रोजेन-कार्बन बंधन के बिना सीधे-सीधे कार्बोक्सिल समूह होता है, जो इसे और अधिक नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। क्लोरोएसिटिक एसिड में क्लोरीन (Cl) होता है, जो इलेक्ट्रॉन खींचने वाला प्रभाव डालता है, जिससे इस एसिड की अम्लीयता दोनों से अधिक होती है।


प्रश्न 27:

(a) अम्लों की प्रबलता पर संरचना का क्या प्रभाव पड़ता है?
अम्लों की प्रबलता पर संरचना का प्रभाव इस प्रकार होता है: यदि अम्ल का कार्बोक्सिल समूह अधिक स्थिर होता है, तो अम्ल की प्रबलता अधिक होती है। उदाहरण के लिए, यदि अम्ल में इलेक्ट्रॉन खींचने वाले समूह होते हैं, तो यह कार्बोक्सिल समूह को अधिक असंयोजित कर देता है, जिससे अम्लीयता बढ़ती है।

(b) बेंजोइक अम्ल एसिटिक अम्ल से अधिक अम्लीय है, क्यों?
बेंजोइक अम्ल की अम्लीयता एसिटिक अम्ल से अधिक होती है, क्योंकि बेंजोइक अम्ल में बेंजोइक रिंग द्वारा अधिक स्थिरता मिलती है, जबकि एसिटिक अम्ल में एसील समूह अधिक असरदार नहीं होता है।


प्रश्न 28:
लैक्टिक अम्ल की संरचना:
CH₃CH(OH)COOH


प्रश्न 29:एस्टर और एस्ट्रीफिकेशन क्या हैं? एक उपयुक्त उदाहरण दीजिए।
एस्टर एक रासायनिक यौगिक है, जो एसील समूह और एक ऑक्सीजन अणु के बीच बंधन से बनता है। एस्ट्रीफिकेशन प्रक्रिया एक रासायनिक अभिक्रिया है, जिसमें एक कार्बोक्सिलिक अम्ल और एक अल्कोहल के बीच प्रतिक्रिया होती है, जिससे एस्टर और पानी बनता है। उदाहरण:
CH₃COOH + C₂H₅OH → CH₃COOC₂H₅ + H₂O


प्रश्न 30:एस्टर के हाइड्रोलिसिस से आप क्या समझते हैं? इसका तंत्र लिखिए।
एस्टर के हाइड्रोलिसिस में एस्टर और पानी के बीच अभिक्रिया होती है, जिसके परिणामस्वरूप कार्बोक्सिलिक अम्ल और अल्कोहल प्राप्त होते हैं। इसका तंत्र:
RCOOR' + H₂O → RCOOH + R'OH


प्रश्न 31:
(
) एसिटामाइड के निर्माण की विधियाँ, गुण और उपयोग लिखिए।
एसिटामाइड (CH₃CONH₂) एसीटाइल क्लोराइड और अमोनिया की प्रतिक्रिया से प्राप्त होता है। इसका उपयोग एनेस्थेटिक्स, दवाओं, और पॉलिमर के निर्माण में किया जाता है।

(b) एसिटामाइड के अम्लीय और क्षारीय गुणों की व्याख्या करें।
एसिटामाइड एक संयोजक अम्ल है, जो जल में नियंत्रित क्षारीय और अम्लीय गुण प्रदर्शित करता है। यह उष्मा प्रदान करता है और अम्लीय क्षेत्रों में प्रतिक्रिया करता है।


प्रश्न 32:यूरिया तैयार करने की मुख्य विधियाँ:
यूरिया तैयार करने की प्रमुख विधि हैबर प्रक्रिया है, जिसमें अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग किया जाता है। इसके मुख्य गुण अम्लीयता, ठोस रूप, और उपयोग में खाद्य पदार्थों में होते हैं।

प्रश्न 33: निम्नलिखित अभिक्रियाएँ पूरी करें:

(i) RCOOAg + Br₂ CCl₄ रिफ्लक्स
यह एक हैलोफॉर्म प्रतिक्रिया है, जिसमें सिल्वर एस्टेट (RCOOAg) और ब्रोमीन (Br₂) के साथ रिफ्लक्स करते समय हैलोफॉर्म (CHX₃) उत्पन्न होता है। इस प्रतिक्रिया में, एस्टेट के कार्बोक्सिल समूह से हैलोफॉर्म (जैसे, ब्रोमोफॉर्म) और सोडियम ब्रोमाइड (NaBr) बनता है।
RCOOAg + Br₂ → RCOOH + CHX₃ (
हैलोफॉर्म)

(ii) NH₂CONH₂ 150°C →
यह एक डिकार्बोक्सिलेशन प्रक्रिया है, जिसमें यूरेआ (NH₂CONH₂) को 150°C पर गर्म करने पर साइनामाइड (HN=CH₂) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन होता है।
NH₂CONH₂ → HN=CH₂ + CO₂


प्रश्न 34: α, β, γ और δ-हाइड्रॉक्सी अम्लों पर ऊष्मा का प्रभाव लिखिए।

α, β, γ और δ-हाइड्रॉक्सी अम्लों पर ऊष्मा का प्रभाव:

1.                    α-हाइड्रॉक्सी अम्लों (Alpha-Hydroxy Acids):
जब α-हाइड्रॉक्सी अम्लों को ऊष्मा दी जाती है, तो ये कार्बोक्सिल समूह से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) छोड़ते हुए α, β-एसीलनैट्रेशन या लैक्टोन (साइक्लिक एस्टर) के रूप में परिवर्तित हो सकते हैं।
उदाहरण:
CH₃CH(OH)COOH → CH₃CH=O + CO₂

2.                    β-हाइड्रॉक्सी अम्लों (Beta-Hydroxy Acids):
β-
हाइड्रॉक्सी अम्लों में, ऊष्मा पर β-हाइड्रॉक्सी अम्ल डिकार्बोक्सिलेशन द्वारा α, β-अल्फा, β-एल्डिहाइड में परिवर्तित हो सकता है, और फिर यह हाइड्रॉक्सील समूह के टूटने से एल्डिहाइड प्राप्त कर सकता है। यह प्रतिक्रिया क्रॉस-लिंकेज को प्रेरित करती है।
उदाहरण:
CH₂OH-COOH → CH₂=O + CO₂

3.                γ-हाइड्रॉक्सी अम्लों (Gamma-Hydroxy Acids):
γ-
हाइड्रॉक्सी अम्लों में, साइलिक रिंग बनने की प्रक्रिया होती है। इन रिंग संरचनाओं में साइकलिक एल्डिहाइड या साइक्लिक हाइड्रॉक्सिल्स का निर्माण होता है, और इनकी संरचना में एक नया बंधन बनता है।
उदाहरण:
CH₃CH₂COOH + OH →
साइक्लिक एल्डिहाइड

4.                    δ-हाइड्रॉक्सी अम्लों (Delta-Hydroxy Acids):
δ-
हाइड्रॉक्सी अम्लों पर ऊष्मा का प्रभाव अधिक जटिल हो सकता है। यहाँ पर यह साधारण कार्बोक्सिल अम्ल से एक दूसरे एस्टर यौगिक में परिवर्तित हो सकता है, जैसे कि एक बृहदाकार लैक्टोन या साइक्लिक संरचना।
उदाहरण:
CH₄C₄₂ + H₂O + OH →
एस्टर

संक्षेप में, ऊष्मा से α, β, γ और δ-हाइड्रॉक्सी अम्लों में डिकार्बोक्सिलेशन, साइक्लिक संरचनाएँ और एस्टराइजेशन जैसी प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न होती हैं, जो रासायनिक रूप से स्थिर और अधिक मजबूत संरचनाओं का निर्माण करती हैं।

----------------------------------------------------------------

प्रश्न 35: निम्नलिखित प्रतिक्रियाओं को पूरा करें:

1.                    RCOOH + HN₃ (सांद्र H₂SO₄ के साथ 50-55°C पर):
यह एक Azidation प्रतिक्रिया है। जब कार्बोक्सिलिक एसिड (RCOOH) और एज़ाइड (HN₃) को सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड (H₂SO₄) के साथ गर्म किया जाता है, तो RCOOH और HN₃ के बीच अज़ाइड समूह की एडिशन होती है, और परिणामस्वरूप अज़ाइड एसिड (RCO-N₃) बनता है।
RCOOH + HN₃ → RCO-N₃

 

2.                                RCOOH के साथ (i) SOCl₂ और (ii) NaN₃, उसके बाद H₂O:--

SOCl₂ के साथ RCOOH को प्रतिक्रिया करने पर RCOCl (एसीटाइल क्लोराइड) बनता है।
RCOOH + SOCl₂ → RCOCl + SO₂ + HCl

फिर RCOCl को NaN₃ (सोडियम अज़ाइड) के साथ अभिक्रिया करने पर RCO-N₃ (अज़ाइड यौगिक) प्राप्त होता है।
RCOCl + NaN₃ → RCO-N₃ + NaCl

 

 

बाद में H₂O के साथ हाइड्रोलाइज करने पर RCOOH वापस प्राप्त होता है।
RCO-N₃ + H₂O → RCOOH + N₂

 

 

3.            आरसीओआर' + CH₃-COH:
यह एक युग्मन प्रतिक्रिया है, जिसमें एस्टर (आरसीओआर') और एसीटैल्डेहाइड (CH₃-COH) मिलकर एक β-हाइड्रॉक्सी एस्टर या β-हाइड्रॉक्सी कार्बोक्सिलिक एसिड बनाते हैं।
RCOR' + CH₃-COH → β-
हाइड्रॉक्सी एस्टर


प्रश्न 36: यूरिया की संरचना लिखिए।

यूरिया की संरचना इस प्रकार है:
NH₂CONH₂
यह एक कार्बमाइड है जिसमें दो एमिनो समूह (NH₂) एक कार्बोनाइल समूह (C=O) से जुड़े होते हैं।


प्रश्न 37: डाइकार्बोक्सिलिक एसिड तैयार करने की सामान्य विधियाँ:

डाइकार्बोक्सिलिक एसिड (जिसमें दो कार्बोक्सिल समूह होते हैं) की तैयारी की सामान्य विधियाँ:

1.      डाइकार्बोक्सिलेशन:
कुछ सिंथेटिक मार्गों में एक ही यौगिक से दो कार्बोक्सिल समूह प्राप्त किए जा सकते हैं। उदाहरण: सक्सीनिक एसिड का संश्लेषण विट्रीफाइड ऐल्डिहाइड (जैसे, सॉडियम बाइकार्बोनेट से) से किया जा सकता है।

2.      स्ट्रेफ्लिक एसिड प्रक्रिया (Hofmann कार्बोक्सिलेशन):
जब कोई आर-सीओओ-हाइड्रोजन यौगिक NaOH में प्रतिक्रिया करता है, तो दो कार्बोक्सिल समूहों वाले यौगिक तैयार होते हैं।


प्रश्न 38: एसिटिक एनहाइड्राइड की तैयारी की विधि और मुख्य गुण:

तैयारी:

Acetic acid + Acetyl chloride:
एसिटिक एसिड और एसीटाइल क्लोराइड को प्रतिक्रिया करने से एसिटिक एनहाइड्राइड प्राप्त होता है।
CH₃COOH + (CH₃CO)Cl → (CH₃CO)₂O + HCl

Acetic acid + Phosphorus pentachloride (PCl₅):
PCl₅
के साथ अभिक्रिया करके भी एसिटिक एनहाइड्राइड तैयार किया जा सकता है।
CH₃COOH + PCl₅ → (CH₃CO)₂O + POCl₃

मुख्य गुण:

·      यह एक तरल होता है जो बेंज़ीन जैसी गंध वाला होता है।

·      यह जल में घुलनशील होता है।

·      यह एसीटाइल समूह (CH₃CO) का स्रोत है।

·      इसका उपयोग एस्टर बनाने के लिए और हाइड्रोलिसिस से एसिटिक एसिड प्राप्त करने के लिए होता है।


प्रश्न 39: निम्नलिखित प्रतिक्रियाएँ पूरी करें:

1.                        NH₂CONH₂ + CH₃-C-CH₂COOC₂H₅:
यह प्रतिक्रिया हाइड्रोक्सी अमाइड के संश्लेषण की ओर अग्रसर होती है। जब यूरेआ और एसीटाइल प्रोपियोनेट के साथ अभिक्रिया होती है, तो हाइड्रोक्सी अमाइड प्राप्त होता है।
NH₂CONH₂ + CH₃-C-CH₂COOC₂H₅ →
हाइड्रोक्सी अमाइड

2.                        CH₃COOC₂H₅ + CH₃COOC₂H₅ के साथ C₂H₅ONa:
यह एक सोडियम एस्टर हाइड्रोलिसिस प्रक्रिया है, जिसमें दो एस्टरों के बीच अभिक्रिया होती है और एथिल एसीटेट बनता है।
CH₃COOC₂H₅ + C₂H₅ONa →
एथिल एसीटेट


प्रश्न 40: कार्बोक्सिलिक एसिड बनाने की सामान्य विधियाँ:

कार्बोक्सिलिक एसिड बनाने की सामान्य विधियाँ निम्नलिखित हैं:

·        एस्टर हाइड्रोलिसिस:
एस्टरों का हाइड्रोलिसिस करके कार्बोक्सिलिक एसिड बनाया जा सकता है।
RCOOR' + H₂O → RCOOH + R'OH

·        ऑक्सीकरण विधियाँ:
अल्कोहल या एल्डिहाइड को ऑक्सीकरण करके कार्बोक्सिलिक एसिड प्राप्त किया जा सकता है।
R-CH₂OH + [O] → RCOOH

·        सोडियम बाइकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया:
कार्बन डाइऑक्साइड को सोडियम बाइकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया करके कार्बोक्सिलिक एसिड प्राप्त किया जा सकता है।


प्रश्न 41: अम्लीय एनहाइड्राइड की तुलना में अम्लीय हैलाइड अधिक अभिक्रियाशील क्यों होते हैं?

अम्लीय हैलाइड (जैसे, एसिटाइल क्लोराइड) अधिक अभिक्रियाशील होते हैं क्योंकि:

·                 हैलाइड आयन (Cl⁻) एक अच्छा पोषक समूह होता है जो प्रतिक्रिया में आसानी से निकल सकता है।

·                 हैलाइड आयन छोड़ने के बाद, केवल कार्बोक्सिलिक एसिड या अन्य उत्पाद बने रहते हैं।

·                 इसके विपरीत, एनहाइड्राइड में O-C बंधन अधिक स्थिर होता है, जिससे यह कम अभिक्रियाशील होता है।


प्रश्न 42: (i) सक्सीनिक एसिड, (ii) मैलोनिक एसिड, और (iii) ऑक्सालिक एसिड पर गर्मी के प्रभाव को बताएं:

·         सक्सीनिक एसिड:
ऊष्मा पर, सक्सीनिक एसिड में डिकार्बोक्सिलेशन होता है और यह ब्यूटीन या लैक्टोन के रूप में परिवर्तित हो सकता है।
HOOC-CH₂-COOH → C₄H₆O₂ + CO₂

·         मैलोनिक एसिड:
इसे गर्म करने पर α, β- डिकार्बोक्सिलेशन प्रतिक्रिया होती है और यह एथिलीन के रूप में परिवर्तित हो सकता है।
HOOC-CH₂COOH → C₂H₄ + CO₂

·         ऑक्सालिक एसिड:
इसे गर्म करने पर यह सोडियम ऑक्सालेट में परिवर्तित हो सकता है।
HOOC-COOH → CO₂ + CO


प्रश्न 43: एसिड बनाने की विधियाँ:
(
यह सवाल पहले ही पूछा गया है, कृपया पिछले उत्तर को देखें।)


प्रश्न 44: 

               (a) डाइकार्बोक्सिलिक अम्लों के संश्लेषण को समझाइए।

डाइकार्बोक्सिलिक अम्लों के संश्लेषण: डाइकार्बोक्सिलिक अम्लों को विभिन्न विधियों द्वारा संश्लेषित किया जा सकता है। एक सामान्य विधि साइट्रिक एसिड से सक्सीनिक एसिड बनाने की है, जिसमें वांछित डिकार्बोक्सिलेशन द्वारा कार्बोक्सिल समूह जोड़े जाते हैं।

(b) ब्रोमोएसिटिक अम्ल का संश्लेषण लिखिए।

ब्रोमोएसिटिक अम्ल का संश्लेषण:
एसिटिक एसिड के साथ ब्रोमिन के अभिक्रिया से ब्रोमोएसिटिक अम्ल तैयार किया जा सकता है।
CH₃COOH + Br₂ → CH₂BrCOOH


प्रश्न 45: फॉर्मेलिन क्या है?

फॉर्मेलिन एक मुलायम फॉर्मलाडेहाइड घोल है जिसमें 37-40% फॉर्मलाडेहाइड होता है और इसमें मिथेनॉल (मेथनॉल) का एक छोटा सा अनुपात होता है, जो इसे स्थिर बनाए रखता है। यह एंटीसेप्टिक और संवेदनशीलताएँ करने में उपयोगी होता है।


प्रश्न 46: दिए गए अम्लों को उनकी अम्लीयता के क्रम में व्यवस्थित करें।
यहाँ आपको दी गई अम्लों की अम्लीयता के बारे में क्रम देना होगा, जैसे फॉर्मिक एसिड > एसिटिक एसिड > क्लोरोएसिटिक एसिड


प्रश्न 47: क्या होता है जब:

·         RMgX की CO₂ के साथ अभिक्रिया के परिणामस्वरूप निर्मित अभिवाही का जल-अपघटन होता है:
यह एक कार्बोक्सिलिक एसिड बनाने वाली प्रतिक्रिया है।
RMgX + CO₂ → RCOOH (
कार्बोक्सिलिक एसिड)

·         α-हाइड्रॉक्सी अम्ल को गर्म किया जाता है:
यह डिकार्बोक्सिलेशन प्रतिक्रिया होती है और एक क्लीन कार्बोक्सिल समूह को हटा देती है।
α-
हाइड्रॉक्सी अम्ल कार्बोक्सिलिक एसिड

·         α-हैलोएस्टर को कार्बोनिल यौगिक के साथ अभिक्रिया कराकर परिणामी उत्पाद को अम्ल की उपस्थिति में हाइड्रोलाइज किया जाता है:
इसका परिणाम एक एसीटेट (कार्बोक्सिलिक एसिड) में होता है।
α-
हैलोएस्टर + कार्बोनिल यौगिक एस्टर


प्रश्न 48: निम्नलिखित प्रतिक्रियाएँ पूरी करें:

·        CH₃COOH, NaOH और CaO के साथ:
CH₃COOH + NaOH → CH₃COONa + H₂O
CH₃COONa + CaO → CH₃COOCa + Ca(OH)₂

·        CH₃COOH के साथ PCl₅:
CH₃COOH + PCl₅ → CH₃COCl + POCl₃

·        CH₃-CHCOOH के साथ NaOH:
CH₃-CHCOOH + NaOH → CH₃CHCOONa + H₂O

------------------------------------------------------------------

प्रश्न 49: कार्बो-लिथियम यौगिक बनाने की विधि का वर्णन करें।

कार्बो-लिथियम यौगिक (organolithium compounds) बनाने की विधि में आमतौर पर एक हैलोएल्केन (alkyl halide) को लिथियम धातु (Li) के साथ अभिक्रिया कराई जाती है। यह अभिक्रिया आमतौर पर ईथर या टेट्राहाइड्रोफ्यूरान (THF) जैसे अनुप्रयुक्त विलायक में होती है। प्रक्रिया इस प्रकार होती है:

हैलोएल्केन + लिथियमकार्बो-लिथियम यौगिक

उदाहरण:-    CH₃CH₂Br + Li → CH₃CH₂Li (एथाइल लिथियम)

यह अभिक्रिया कार्बो-लिथियम यौगिक की उत्पत्ति करती है, जो एक शक्तिशाली न्युकेलियोफाइल (nucleophile) और बेस (base) होता है।


प्रश्न 50: कार्बो-लिथियम यौगिक की सहायता से आप निम्नलिखित को कैसे बनाएंगे?

(i) कीटोन:

Ø  कार्बो-लिथियम यौगिक का अभिक्रिया एक अल्डिहाइड (अल्पाणु के साथ) के साथ कराना होता है। इस प्रतिक्रिया में, कार्बो-लिथियम यौगिक एक न्यूक्लियोफाइल के रूप में कार्य करता है और अल्डिहाइड के कार्बोनिल कार्बन से जोड़ता है।

R-Li + R'CHO → R-CO-R' (कीटोन)

(ii) प्राथमिक अल्कोहल:

Ø  कार्बो-लिथियम यौगिक का अभिक्रिया ऑक्सीडाइज़ेबल कार्बोनिल यौगिक (जैसे अल्डिहाइड) के साथ करना होता है। यह अभिक्रिया एक प्राथमिक अल्कोहल उत्पन्न करती है।

R-Li + R'CHO → RCH₂OH (प्राथमिक अल्कोहल)

(iii) अमीन:

Ø  कार्बो-लिथियम यौगिक को अमोनिया (NH₃) के साथ अभिक्रिया कराना होता है, जिससे प्राथमिक अमीन बनता है।

·        R-Li + NH₃ → R-NH₂ (प्राथमिक अमीन)

(iv) थायोअल्कोहल:

Ø  कार्बो-लिथियम यौगिक का सल्फर युक्त यौगिक (जैसे, R-SH) के साथ अभिक्रिया कराना होता है, जिससे थायोअल्कोहल प्राप्त होता है।

·        R-Li + R'-SH → R-R'SH (थायोअल्कोहल)


प्रश्न 51: कार्बो-कॉपर यौगिक बनाने की विधि समझाइए तथा उनके उपयोग बताइए।

कार्बो-कॉपर यौगिक (organocuprates) बनाने की विधि में आमतौर पर एक हैलोएल्केन (alkyl halide) या अल्काइल लिथियम यौगिक (alkyl lithium compound) को कॉपर(I) लवण (CuI) के साथ अभिक्रिया कराई जाती है। यह प्रक्रिया आमतौर पर ईथर (ether) जैसे विलायक में होती है।

विधि:

R-Li + CuI → R-CuLi (कार्बो-कॉपर यौगिक)

उपयोग:

·        कार्बो-कॉपर यौगिक का उपयोग न्यूक्लियोफिलिक प्रतिक्रियाओं में किया जाता है, जैसे कि कनेक्शन-युग्मन (coupling reactions) या सिंथेसिस में।

§  विग्नेर युग्मन: ये यौगिक हैलोबेंजीन और एल्डिहाइड्स के साथ अभिक्रिया कर सकते हैं, जिससे नई कार्बन-कार्बन बंधन बनते हैं।

·        हेल्वेग संश्लेषण: इनका उपयोग कार्बन-कार्बन बंधन बनाने में किया जाता है, जिससे सघन यौगिक (complex compounds) तैयार होते हैं।


प्रश्न 52: कार्बो-कॉपर अभिकर्मक की अम्ल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया दीजिए।

कार्बो-कॉपर अभिकर्मक (organocuprates) जैसे R-CuLi का अम्ल क्लोराइड के साथ अभिक्रिया करने पर, यह हैलाइड के साथ एक न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन प्रतिक्रिया करता है। इस प्रक्रिया में R समूह का अम्ल क्लोराइड के R' से प्रतिस्थापन होता है, और नया R-R' बंधन बनता है।

समीकरण:

R-CuLi + R'-COCl → R-R' + CuCl + LiCl

यह प्रक्रिया एक कार्बन-कार्बन युग्मन प्रतिक्रिया को उत्पन्न करती है और इसमें अम्ल क्लोराइड की न्यूक्लियोफिलिक प्रतिस्थापन द्वारा नया यौगिक तैयार होता है।

 

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