B.Sc. 2nd year chemisry 2nd paper organic chemistry unit 6 2025

NOTE:-     In this blog there are only questions and answers of 6th unit of organic chemistry.

________________________________

बी.एस-सी. द्वितीय वर्ष – रसायन (प्रथम प्रश्न-पत्र)

प्रश्न-सूची (छत्तीसगढ़)

__________________इकाई 6 __________________

1

2


 यूनिट 6

दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न:

प्रश्न 1. ओस्टवाल्ड के तनुकरण नियम और उसकी सीमाओं पर चर्चा करें। इसका सत्यापन कैसे किया जाता है?

Ostwald’s Dilution Law यह बताता है कि किसी कमजोर इलेक्ट्रोलाइट की आयनिक विघटन स्थिरांक (dissociation constant, Ka) उसके तनुकरण पर निर्भर करती है।
इस नियम के अनुसार:

Ka=Cα21−αK_a = \frac{C\alpha^2}{1 - \alpha}Ka​=1−αCα2​

जहाँ,

  • CCC = प्रारंभिक सांद्रता (initial concentration),

  • α\alphaα = आयनीकरण की डिग्री (degree of ionization)

यदि α\alphaα बहुत छोटा हो (i.e. α≪1\alpha \ll 1α≪1), तो 1−α≈11 - \alpha \approx 11−α≈1, और

Ka≈Cα2K_a \approx C\alpha^2Ka​≈Cα2

सीमाएँ (Limitations):

  1. यह केवल कमजोर इलेक्ट्रोलाइट्स (weak acids/bases) पर लागू होता है।

  2. यह तभी मान्य होता है जब सॉल्यूशन पर्याप्त तनु (dilute) हो।

  3. प्रबल इलेक्ट्रोलाइट्स (strong electrolytes) पर लागू नहीं होता क्योंकि वे पूरी तरह आयनीकृत होते हैं।

सत्यापन (Verification):
इस नियम को सत्यापित करने के लिए किसी कमजोर इलेक्ट्रोलाइट जैसे acetic acid (CH₃COOH) का conductance मेज़र करके विभिन्न dilution पर α निकाली जाती है और फिर Ka की गणना की जाती है। अगर Ka का मान सभी dilution पर समान आता है तो नियम सत्य सिद्ध होता है।


प्रश्न 2. प्रबल विद्युत अपघट्यों के लिए डेबाई-ह्केल सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।

Debye-Hückel Theory प्रबल इलेक्ट्रोलाइट्स की कंडक्टिविटी को समझाने के लिए प्रयोग की जाती है। इस सिद्धांत के अनुसार, solution में ions एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और एक ionic atmosphere बनाते हैं जो किसी ion की गति को धीमा कर देती है।

Debye-Hückel Limiting Law:

λ=λ0−Az2C\lambda = \lambda^0 - A z^2 \sqrt{C}λ=λ0−Az2C​

जहाँ,

  • λ\lambdaλ = molar conductivity at concentration C

  • λ0\lambda^0λ0 = molar conductivity at infinite dilution

  • AAA = constant depending on solvent and temperature

  • zzz = ionic charge

  • CCC = concentration

यह सिद्धांत strong electrolytes की conductivity के dilution पर निर्भरता को सही तरह से समझाता है, जिसे Ostwald का नियम नहीं समझा पाता।


प्रश्न 3. आयनिक गतिशीलता को समझाइए।

Ionic Mobility (आयनिक गतिशीलता) वह वेग (velocity) है जो कोई आयन एक यूनिट इलेक्ट्रिक फील्ड में प्राप्त करता है।

u=vEu = \frac{v}{E}u=Ev​

जहाँ,

  • uuu = आयनिक गतिशीलता

  • vvv = आयन की गति

  • EEE = विद्युत क्षेत्र की तीव्रता

मापन: आयनिक गतिशीलता को conductance measurements से भी निकाला जा सकता है।
यह आयन के आकार, चार्ज और solvent के viscosity पर निर्भर करता है।


प्रश्न 4. परिवहन संख्या से आप क्या समझते हैं? आप कैसे सिद्ध करेंगे कि धनायन और ऋणायन की परिवहन संख्याओं का योग एक होता है?

Transport Number (t⁺ or t⁻) वह अनुपात है जिससे कोई आयन total current में योगदान देता है।

t+=Current carried by cationTotal currentऔरt−=Current carried by anionTotal currentt^+ = \frac{\text{Current carried by cation}}{\text{Total current}} \quad \text{और} \quad t^- = \frac{\text{Current carried by anion}}{\text{Total current}}t+=Total currentCurrent carried by cation​औरt−=Total currentCurrent carried by anion​

सिद्ध करना:
चूँकि current केवल cation और anion के movement से ही generate होता है,
इसलिए,

t++t−=1t^+ + t^- = 1t++t−=1

उदाहरण के लिए, यदि NaCl का transport number हो t+=0.39t^+ = 0.39t+=0.39 और t−=0.61t^- = 0.61t−=0.61,
तो t++t−=1t^+ + t^- = 1t++t−=1, सिद्ध हुआ।


प्रश्न 5. प्रबल विद्युत अपघट्यों के लिए DHO समीकरण लिखिए।

DHO equation (Debye-Hückel-Onsager equation) किसी strong electrolyte के लिए molar conductivity के dilution पर निर्भरता को दर्शाता है।

λ=λ0−(A+Bλ0)C\lambda = \lambda^0 - (A + B \lambda^0)\sqrt{C}λ=λ0−(A+Bλ0)C​

जहाँ,

  • λ\lambdaλ = molar conductivity at concentration C

  • λ0\lambda^0λ0 = molar conductivity at infinite dilution

  • A,BA, BA,B = constants depending on temperature and solvent

  • CCC = electrolyte concentration

यह समीकरण strong electrolytes के behavior को dilute solutions में accurately explain करता है।


प्रश्न 6: (ए) स्थानांतरण संख्या (Transport Number) पर संक्षिप्त टिप्पणी: स्थानांतरण संख्या (या ट्रांसपोर्ट नंबर) यह दर्शाती है कि किसी विद्युत अपघट्य में कुल विद्युत धारा का कितना भाग किसी विशिष्ट आयन द्वारा वहन किया जाता है। यह धनायन (cation) और ऋणायन (anion) दोनों के लिए निर्धारित की जाती है। इसे निम्न प्रकार से परिभाषित किया जाता है:

जहाँ:

  • = धनायन की गतिशीलता

  • = ऋणायन की गतिशीलता

महत्व: यह किसी विद्युत अपघट्य की विद्युत चालकता और इलेक्ट्रोलिसिस के दौरान उत्पाद बनने की दर को प्रभावित करता है।

(बी) हिटडोर्फ़ विधि का सिद्धांत: हिटडोर्फ विधि का उपयोग स्थानांतरण संख्या ज्ञात करने के लिए किया जाता है। इसका सिद्धांत इस तथ्य पर आधारित है कि विद्युत धारा प्रवाहित करने पर इलेक्ट्रोलाइट के विभिन्न भागों में आयनों की सान्द्रता में परिवर्तन होता है। यदि धारा नियंत्रित समय तक प्रवाहित की जाए और किसी एक इलेक्ट्रोड के समीप सान्द्रता परिवर्तन को मापा जाए, तो स्थानांतरण संख्या ज्ञात की जा सकती है।

उदाहरण के लिए:

या


प्रश्न 7: चल सीमा विधि द्वारा स्थानांतरण संख्या का निर्धारण चल सीमा विधि (Moving Boundary Method) स्थानांतरण संख्या मापने की एक सटीक तकनीक है। इसमें दो इलेक्ट्रोलाइट्स को एक ट्यूब में इस प्रकार रखा जाता है कि उनकी सीमाएँ स्पष्ट रहें। एक इलेक्ट्रोलाइट में वह आयन होता है जिसकी ट्रांसपोर्ट संख्या मापनी होती है, जबकि दूसरा इंडिकेटर इलेक्ट्रोलाइट होता है।

जैसे-जैसे विद्युत धारा प्रवाहित होती है, सीमारेखा (boundary) एक दिशा में चलती है। इस गति के आधार पर ट्रांसपोर्ट संख्या को निम्नलिखित सूत्र द्वारा मापा जाता है:

जहाँ:

  • = सीमारेखा की गति

  • = इलेक्ट्रोलाइट की सान्द्रता

  • = ट्यूब का क्रॉस सेक्शन क्षेत्रफल

  • = प्रवाहित धारा


प्रश्न 8: (ए) उत्क्रमणीय एवं अनुत्क्रमणीय सेल:

  • उत्क्रमणीय सेल (Reversible Cell): ऐसी सेल जिसमें बाह्य वोल्टेज द्वारा उसकी रासायनिक अभिक्रिया को रिवर्स किया जा सके। जैसे - डैनियल सेल।

  • अनुत्क्रमणीय सेल (Irreversible Cell): ऐसी सेल जिसमें रासायनिक अभिक्रिया एक बार होती है और पुनः नहीं हो सकती। जैसे - Zn और H2SO4 से बनी सेल।

(बी) विद्युत रासायनिक कोशिका (Electrochemical Cell): यह ऐसी प्रणाली है जिसमें रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में या विद्युत ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदला जाता है। इसे निम्न प्रकार प्रदर्शित किया जाता है:

उदाहरण:

यहाँ पर:

  • Zn ऑक्सीडाइज होकर Zn²⁺ बनाता है।

  • Cu²⁺ रिड्यूस होकर Cu बनता है।

  • EMF के रूप में विद्युत धारा उत्पन्न होती है।


प्रश्न 9: इलेक्ट्रोड तथा सेल अभिक्रियाएँ: (i) Zn | Zn²⁺ || Cu²⁺ | Cu

  • Oxidation: Zn → Zn²⁺ + 2e⁻

  • Reduction: Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu

  • Cell reaction: Zn + Cu²⁺ → Zn²⁺ + Cu

(ii) Zn | Zn²⁺ || Fe³⁺ | Fe²⁺

  • Oxidation: Zn → Zn²⁺ + 2e⁻

  • Reduction: Fe³⁺ + e⁻ → Fe²⁺

  • Cell reaction: Zn + 2Fe³⁺ → Zn²⁺ + 2Fe²⁺

(iii) Cd(Hg) | CdSO₄·8/3H₂O(s), Hg₂SO₄(s) | Hg

  • Anode: Cd(Hg) → Cd²⁺ + 2e⁻

  • Cathode: Hg₂SO₄ + 2e⁻ → 2Hg + SO₄²⁻

(iv) Pt | Tl (a=1), Tl³⁺(a=1) || Cl⁻(a=1) | Hg₂Cl₂(s) | Hg

  • Anode: Tl → Tl³⁺ + 3e⁻

  • Cathode: Hg₂Cl₂ + 2e⁻ → 2Hg + 2Cl⁻

(v) Pb | Pb²⁺ || I₃⁻, I⁻ | Pt

  • Oxidation: Pb → Pb²⁺ + 2e⁻

  • Reduction: I₃⁻ + 2e⁻ → 3I⁻

(vi) Pt | H₂(1 atm) | HCl (a=1) | Cl₂(1 atm) | Pt

  • Anode: H₂ → 2H⁺ + 2e⁻

  • Cathode: Cl₂ + 2e⁻ → 2Cl⁻

(vii) Mg | Mg²⁺ || Cl₂, Cl⁻ | Pt

  • Anode: Mg → Mg²⁺ + 2e⁻

  • Cathode: Cl₂ + 2e⁻ → 2Cl⁻

(viii) Al | Al³⁺ || Cu²⁺ | Cu

  • Anode: Al → Al³⁺ + 3e⁻

  • Cathode: Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu

(ix) Pt, H₂(1 atm) | HCl || AgCl | Ag

  • Anode: H₂ → 2H⁺ + 2e⁻

  • Cathode: AgCl + e⁻ → Ag + Cl⁻


प्रश्न 10: सेल विभव (Cell Potential) क्या है? इसे कैसे मापा जाता है?

उत्तर:
सेल विभव (Cell Potential) वह विभव अंतर होता है जो किसी गैल्वैनिक सेल (electrochemical cell) के दो इलेक्ट्रोड्स के बीच उत्पन्न होता है जब सेल में रासायनिक अभिक्रिया होती है। इसे EMF (Electromotive Force) भी कहते हैं।

मापन विधि: सेल विभव को मापने के लिए सेल को एक वैज्ञानीक वोल्टमीटर से जोड़कर मापा जाता है। किसी एक इलेक्ट्रोड को मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) से जोड़ा जाता है, जिसकी विभव को शून्य (0.00 V) माना जाता है। दूसरे इलेक्ट्रोड का विभव इसी के सापेक्ष मापा जाता है।

उदाहरण: Zn∣Zn2+∣∣Cu2+∣CuZn | Zn^{2+} || Cu^{2+} | CuZn∣Zn2+∣∣Cu2+∣Cu

EMF = ECu2+/Cu−EZn2+/ZnE_{Cu^{2+}/Cu} - E_{Zn^{2+}/Zn}ECu2+/Cu​−EZn2+/Zn​


प्रश्न 11: नर्न्स्ट समीकरण (Nernst Equation) क्या है? किसी उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:
Nernst Equation यह बताती है कि किसी इलेक्ट्रोड या सेल का विभव, आयन की सान्द्रता पर कैसे निर्भर करता है।

Nernst Equation (25°C पर): E=E∘−0.0591nlog⁡[Products/Reactants]E = E^\circ - \frac{0.0591}{n} \log [\text{Products} / \text{Reactants}]E=E∘−n0.0591​log[Products/Reactants]

जहाँ:

  • EEE = इलेक्ट्रोड या सेल विभव

  • E∘E^\circE∘ = मानक विभव

  • nnn = ट्रांसफर होने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या

  • Reactants, Products = आयनों की सान्द्रता

उदाहरण: Zn | Zn²⁺ (0.1 M) || Cu²⁺ (1.0 M) | Cu

EMF = Ecell∘−0.05912log⁡([Zn2+][Cu2+])E^\circ_{cell} - \frac{0.0591}{2} \log \left( \frac{[Zn^{2+}]}{[Cu^{2+}]} \right)Ecell∘​−20.0591​log([Cu2+][Zn2+]​)
= 1.10 - 0.02955 × log(0.1 / 1)
= 1.10 - 0.02955 × (–1) = 1.1295 V


प्रश्न 12: मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (Standard Hydrogen Electrode - SHE) क्या है?

उत्तर:
Standard Hydrogen Electrode (SHE) एक प्राथमिक संदर्भ इलेक्ट्रोड होता है जिसका विभव 0.00 V माना जाता है। इसका उपयोग अन्य इलेक्ट्रोड्स के विभव को मापने के लिए किया जाता है।

संरचना:

  • Pt electrode होता है

  • 1 atm पर H₂ गैस प्रवाहित की जाती है

  • 1M H⁺ आयन की सान्द्रता होती है

प्रतिक्रिया: H2→2H++2e−(oxidation)H_2 \rightarrow 2H^+ + 2e^- \quad (\text{oxidation})H2​→2H++2e−(oxidation)
या
2H++2e−→H2(reduction)2H^+ + 2e^- \rightarrow H_2 \quad (\text{reduction})2H++2e−→H2​(reduction)


प्रश्न 13: गैल्वैनिक सेल और इलेक्ट्रोलाइटिक सेल में अंतर लिखिए।

उत्तर:

विशेषता

गैल्वैनिक सेल

इलेक्ट्रोलाइटिक सेल

ऊर्जा रूपांतरण

रासायनिक → विद्युत

विद्युत → रासायनिक

EMF

उत्पन्न होता है

आवश्यक होता है

अभिक्रिया

स्वतः चलती है

बाहरी वोल्टेज से चलाई जाती है

उपयोग

बैटरी, विद्युत धारा उत्पादन

इलेक्ट्रोप्लेटिंग, रिफाइनिंग


प्रश्न 14: EMF मापने के लिए सॉल्ट ब्रिज का क्या कार्य होता है?

उत्तर:
सॉल्ट ब्रिज (Salt Bridge) इलेक्ट्रोलाइटिक सेल में दो हाफ़-सेल्स को जोड़ने का कार्य करता है ताकि विद्युत संतुलन बना रहे।

कार्य:

  1. आयनों की आवाजाही के द्वारा चार्ज का संतुलन बनाए रखना।

  2. इलेक्ट्रोलाइट्स के मिश्रण को रोकना (diffusion रोकना)।

  3. लिक्विड जंक्शन पोटेंशियल को कम करना।

सामग्री:
सॉल्ट ब्रिज में अक्सर KCl या NH₄NO₃ जैसे इनर्ट इलेक्ट्रोलाइट होते हैं जो आयन तो देते हैं पर किसी इलेक्ट्रोड के साथ रिएक्ट नहीं करते।


प्रश्न 15. इलेक्ट्रोड विभव का नर्नस्ट सिद्धांत क्या है? विलयन और आसमाटिक दबाव इसका क्या प्रभाव डालते हैं?

उत्तर:
Nernst सिद्धांत (Nernst Equation) किसी इलेक्ट्रोड का विभव (Electrode Potential) उसकी आयनों की सांद्रता पर कैसे निर्भर करता है, यह दर्शाता है।

Nernst Equation (25°C पर):

E=E∘−0.0591nlog⁡[Red][Ox]E = E^\circ - \frac{0.0591}{n} \log \frac{[ \text{Red} ]}{[ \text{Ox} ]}E=E∘−n0.0591​log[Ox][Red]​

जहाँ,

  • EEE = इलेक्ट्रोड का वास्तविक विभव

  • E∘E^\circE∘ = मानक इलेक्ट्रोड विभव

  • nnn = इलेक्ट्रॉनों की संख्या

  • [Red] और [Ox] = रेड्यूस्ड व ऑक्सीडाइज़्ड अवस्था की सांद्रता

विलयन (Solution) का प्रभाव:
यदि किसी इलेक्ट्रोलाइट का सांद्रण बढ़ता है तो उसका इलेक्ट्रोड विभव बदलता है, क्योंकि यह आयन की उपलब्धता को प्रभावित करता है।

आस्मिक दबाव (Osmotic Pressure) का प्रभाव:
अधिक आस्मिक दबाव से आयनों की गति व उपलब्धता बदलती है, जिससे इलेक्ट्रोड विभव पर असर पड़ता है। उच्च आस्मिक दबाव अधिक आयनों को इलेक्ट्रोड के पास खींचता है जिससे विभव बढ़ सकता है।


प्रश्न 16. विद्युत-रासायनिक श्रेणी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर:
विद्युत-रासायनिक श्रेणी (Electrochemical Series) एक क्रम है जिसमें तत्वों को उनके मानक इलेक्ट्रोड विभव (Standard Electrode Potential) के आधार पर सजाया गया है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • इसमें हाइड्रोजन का विभव 0 V माना जाता है।

  • जिन धातुओं का विभव ऋणात्मक होता है, वे अधिक क्रियाशील होती हैं (जैसे: K, Na, Ca)।

  • जिन धातुओं का विभव धनात्मक होता है, वे कम क्रियाशील होती हैं (जैसे: Cu, Ag, Au)।

उपयोग:

  • धातुओं की रासायनिक सक्रियता की तुलना

  • रिडॉक्स अभिक्रियाओं की भविष्यवाणी

  • विस्थापन अभिक्रिया का निर्धारण


प्रश्न 17. विभवमापी अनुमानन का सचित्रा वर्णन कीजिए।

उत्तर:
विभवमापी अनुमानन (Potentiometric Titration) एक विधि है जिसमें टाइट्रेशन के दौरान वोल्टेज (Potential) को मापा जाता है, न कि रंग परिवर्तन को देखा जाता है।

मुख्य भाग:

  • संकेतक इलेक्ट्रोड (Indicator electrode)

  • संदर्भ इलेक्ट्रोड (Reference electrode)

  • पोटेंशियोमीटर / वोल्टमीटर

  • टाइट्रेशन फ्लास्क

प्रक्रिया:

  1. संकेतक व संदर्भ इलेक्ट्रोड को टाइट्रेशन मिश्रण में डुबोया जाता है।

  2. टाइट्रेंट धीरे-धीरे मिलाया जाता है।

  3. हर बूँद के बाद वोल्टेज मापा जाता है।

  4. वक्र (Graph) बनाकर अंतिम बिंदु (End Point) निर्धारित किया जाता है।

चित्र (वर्णन):
चित्र में दो इलेक्ट्रोड टाइट्रेशन फ्लास्क में दिखाए जाते हैं, जो पोटेंशियोमीटर से जुड़े रहते हैं। x-axis पर टाइट्रेंट की मात्रा और y-axis पर विभव होता है।


प्रश्न 18. सांद्रण सेल से आप क्या समझते हैं? इलेक्ट्रोड सांद्रण सेल के विद्युत चालक बल के लिए व्यंजक व्युत्पन्न करें।

उत्तर:
सांद्रण सेल (Concentration Cell) एक ऐसा गैल्वैनिक सेल होता है जिसमें दोनों इलेक्ट्रोड एक जैसे होते हैं लेकिन उनके घोलों की सांद्रता भिन्न होती है।

उदाहरण:
Zn | Zn²⁺ (0.1 M) || Zn²⁺ (1 M) | Zn

EMF व्यंजक का व्युत्पादन:

E=0.0591nlog⁡C2C1E = \frac{0.0591}{n} \log \frac{C_2}{C_1}E=n0.0591​logC1​C2​​

जहाँ,

  • C2C_2C2​ = अधिक सांद्रता वाला घोल

  • C1C_1C1​ = कम सांद्रता वाला घोल

  • nnn = इलेक्ट्रॉनों की संख्या

EMF केवल सांद्रता के अंतर पर निर्भर करता है।


प्रश्न 19. pH को परिभाषित करें। ग्लास इलेक्ट्रोड द्वारा इसके निर्धारण की विधि का वर्णन करें।

उत्तर:
pH घोल में H⁺ आयनों की सांद्रता को मापने का एक मात्रक है।

pH=−log⁡[H+]\text{pH} = -\log [H^+]pH=−log[H+]

ग्लास इलेक्ट्रोड द्वारा pH मापन:

  • ग्लास इलेक्ट्रोड एक विशेष प्रकार का सेंसर होता है जो केवल H⁺ आयनों के प्रति संवेदनशील होता है।

  • इसे संदर्भ इलेक्ट्रोड (जैसे: कैलमेल) के साथ मिलाकर एक विद्युत सेल बनता है।

  • इस सेल का विभव pH के अनुसार बदलता है।

  • pH मीटर इस विभव को पढ़कर pH दर्शाता है।

लाभ:

  • सटीक

  • आसान

  • प्रयोगशाला व औद्योगिक उपयोग के लिए उपयुक्त


प्रश्न 20. कंडक्टोमेट्रिक अनुमापन पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर:
कंडक्टोमेट्रिक अनुमापन (Conductometric Titration) वह टाइट्रेशन विधि है जिसमें प्रतिक्रिया के दौरान घोल की चालकता (Conductance) को मापा जाता है।

सिद्धांत:
जैसे-जैसे टाइट्रेंट मिलाया जाता है, आयनों की संख्या में परिवर्तन होता है जिससे चालकता बदलती है।

उदाहरण:

  • Strong acid और strong base का टाइट्रेशन

  • Weak acid और strong base

लाभ:

  • रंगहीन घोलों में भी प्रयोग संभव

  • अंतिम बिंदु स्पष्ट

  • सटीक और सरल


प्रश्न 21. चालकता मापन के दो अनुप्रयोग लिखिए।

उत्तर:

  1. जल की शुद्धता की जाँच:

    • शुद्ध जल की चालकता बहुत कम होती है।

    • अशुद्धियों से चालकता बढ़ जाती है।

  2. इलेक्ट्रोलाइट की ताकत मापना:

    • मजबूत और कमजोर इलेक्ट्रोलाइट में अंतर चालकता द्वारा किया जा सकता है।

    • इससे आयनों की कुल उपस्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।







एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ