B.A./B.SC/B.COM/BHSC FOUNDATION HINDI LANGUAGE -PART III unit 3 रहीम चाचा : शानी, निमित्त : भीष्म साहनी, कार्यालयीन पत्र




  B.A./B.SC/B.COM/BHSC 

FOUNDATION HINDI LANGUAGE -PART III

बी.ए./ बी.एस-सी./ बी.कॉम./ बी.एच.एस.सी. 

भाग-तीन (तृतीय वर्ष)  

हिंदी भाषा 


इकाई 3

भाग (क)

रहीम चाचा : शानी


प्रश्न 1


Rahim Chacha book cover 

'रहीम चाचा' कहानी का सारांश लिखिए।

गुलशेर खाँ शानी की कहानी 'रहीम चाचा' एक गरीब मुस्लिम बुजुर्ग रहीम की जीवन गाथा है, जो गाँव में सभी के प्रिय बने रहते हैं। वे बीमारी, विवाह या किसी विपत्ति में सबसे पहले सहायता को पहुँचते हैं, भले स्वयं गरीबी में जीते हों। जब वे गंभीर रूप से बीमार पड़ते हैं तो हिंदू-मुस्लिम सभी गाँववासी उनके घर पहुँचकर सेवा करते हैं, जो उनकी नेकी का प्रतिफल दर्शाता है।

रहीम चाचा का चित्र सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है।

प्रश्न 2

रहीम चाचा का चरित्र चित्रण कीजिए।

रहीम चाचा नेकदिल, परोपकारी और सहनशील व्यक्ति हैं, जो गरीबी के बावजूद दूसरों की सेवा को प्राथमिकता देते हैं। वे धार्मिक सीमाओं से परे सभी को परिवार का हिस्सा मानते हैं, जिससे वे गाँव के 'चाचा' बन जाते हैं। उनकी मृत्यु तक संघर्षपूर्ण जीवन जीने के बावजूद मानवता का संदेश देते हैं।

प्रश्न 3

लेखक 'रहीम चाचा' चरित्र के माध्यम से कौन से सामाजिक मूल्य प्रस्तुत करना चाहता है?

लेखक मानवता, भाईचारा, धार्मिक सद्भाव और सेवा भाव को प्रमुखता देते हैं। रहीम चाचा के माध्यम से दिखाते हैं कि सच्चा धर्म इंसानियत है, जो हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करता है। गरीबी में भी नेकी कभी व्यर्थ नहीं जाती, यह सामाजिक मूल्य स्थापित करता है।


निमित्त : भीष्म साहनी

प्रश्न 1


Bhisham Sahni's Nimitt 

'निमित्त' कहानी का सारांश लिखिए।

भीष्म साहनी की कहानी 'निमित्त' भारत विभाजन के दंगों के दौरान घटित होती है। एक भाग्यवादी बुजुर्ग मैनेजर अपने मुस्लिम कर्मचारी इमामुद्दीन की जान बचाने के लिए शेर सिंह को भेजते हैं। मैनेजर का विश्वास है कि "दाने-दाने पर मोहर" लिखी होती है, किंतु शेर सिंह का पुरुषार्थ इमामुद्दीन को दंगों से बचाकर लाता है। यह भाग्य और कर्म के द्वंद्व को दर्शाती है।

कहानी के पात्र विभाजन की त्रासदी में मानवीय संवेदनाओं को उजागर करते हैं।

प्रश्न 2

'निमित्त' कहानी का विश्लेषणात्मक विवेचना कीजिए।

कहानी भाग्यवाद बनाम कर्मवाद के दार्शनिक द्वंद्व पर केंद्रित है, जहाँ मैनेजर का निष्क्रिय भाग्य-विश्वास शेर सिंह के सक्रिय पुरुषार्थ से टकराता है। भाषा सरल किंतु गहन है, जिसमें मठरी खाने का प्रसंग सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। भीष्म साहनी ने विभाजन की हिंसा के बीच मानवीय करुणा को उभारकर यथार्थवाद की पराकाष्ठा दिखाई है।

प्रश्न 3

'निमित्त' कहानी की सामाजिक प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

यह कहानी विभाजन की त्रासदी में धार्मिक सद्भाव और मानवता की विजय दिखाती है, जो आज के ध्रुवीकरण वाले समाज में प्रासंगिक है। भाग्य के बहाने निष्क्रियता की आलोचना कर सक्रिय सामाजिक जिम्मेदारी सिखाती है। हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश, विशेषकर 2026 के भारत में, साम्प्रदायिक सद्भाव की आवश्यकता पर बल देता है।

भाग (ख)

कार्यालयीन पत्र

प्रश्न 1

कार्यालयीन पत्र किसे कहते हैं? इसके स्वरूप का उल्लेख कीजिए।

कार्यालयीन पत्र वे औपचारिक पत्र हैं जो सरकारी, अर्ध-सरकारी कार्यालयों, संस्थानों या विभागों के मध्य आदान-प्रदान के लिए लिखे जाते हैं। इनका प्रयोग शासनादेश, अधिसूचना, आवेदन, प्रतिवेदन या प्रशासनिक संचार के लिए होता है।

स्वरूप:

  • प्रेषक विवरण: दायें ऊपर कार्यालय का नाम, पता, पिन कोड।

  • प्राप्तकर्ता: बायें 'सेवा में' के बाद पदनाम, कार्यालय, पता।

  • दिनांक: बायें भाग में।

  • विषय: संक्षिप्त शीर्षक।

  • मुख्य भाग: परिचय, विवरण, निष्कर्ष (उत्तम पुरुष 'मैं/हम' का त्याग)।

  • समापन: भवदीय/सद्भावनापूर्वक, हस्ताक्षर, पदनाम, मोहर।

प्रश्न 2

कार्यालयीन पत्रों की क्या विशेषताएँ हैं? लिखिए।

कार्यालयीन पत्रों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।

  • सुस्पष्टता: पत्र का उद्देश्य बिना किसी भ्रम के स्पष्ट हो।

  • संक्षिप्तता: अनावश्यक विस्तार से बचकर संक्षेप में लिखा जाए।

  • शिष्टाचार: औपचारिक और विनम्र भाषा का प्रयोग।

  • पूर्णता: सभी आवश्यक तथ्य और विवरण शामिल हों।

  • यथार्थता: आंकड़े और जानकारी सटीक हों।

  • एकात्मकता: केवल विषय से संबंधित बातें क्रमबद्ध रूप से।

  • प्रभावशीलता: पाठक पर तत्काल प्रभाव डाले।

प्रश्न 3

परिपत्र में किन बातों का उल्लेख किया जाता है? बताइए।

परिपत्र कार्यालयीन पत्र का एक प्रकार है जो एक ही सूचना को अनेक विभागों/कार्यालयों को एक साथ भेजा जाता है। इसमें निम्नलिखित बातों का उल्लेख होता है:

  • शीर्षक: सबसे ऊपर मध्य में 'परिपत्र' शब्द।

  • पत्रांक/संख्या: दायें ऊपर क्रमांक, दिनांक।

  • प्रेषक विवरण: बायें कार्यालय का नाम, पदनाम।

  • विषय: संक्षिप्त शीर्षक।

  • मुख्य भाग: नवीन निर्णय, नीति परिवर्तन, निर्देश, सूचना या कार्यवाही के लिए अनुरोध।

  • समापन: 'कृपया' या 'उपयुक्त कार्यवाही हेतु' जैसे वाक्य, हस्ताक्षर, पदनाम।

यह संक्षिप्त, स्पष्ट और एक ही विषय पर केंद्रित होता है।

प्रश्न 4

परिपत्र एवं प्रतिवेदन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

परिपत्र और प्रतिवेदन कार्यालयीन पत्राचार के दो भिन्न प्रकार हैं। निम्न तालिका में इनका अंतर स्पष्ट है:

आधारपरिपत्रप्रतिवेदन
परिभाषाएक ही सूचना/निर्देश अनेक प्राप्तकर्ताओं को।किसी घटना/जांच का विस्तृत विवरण, निष्कर्ष।
उद्देश्यसामान्य सूचना, नीति परिवर्तन, निर्देश देना।तथ्यों का विश्लेषण, सुझाव, समाधान प्रस्तुत।
प्राप्तकर्ताअनेक विभाग/कार्यालय।उच्च अधिकारी/समिति।
स्वरूपसंक्षिप्त, शीर्षक 'परिपत्र'।विस्तृत, शीर्षक, प्रस्तावना, निष्कर्ष।
भाषासरल, आदेशात्मक।विश्लेषणात्मक, तार्किक।

परिपत्र सामूहिक संचार है जबकि प्रतिवेदन जांच-आधारित विश्लेषण।

प्रश्न 5

अनुस्मारक की परिभाषा दीजिए एवं इसकी विशेषता बताइए।

परिभाषा: अनुस्मारक (Reminder) वे कार्यालयीन पत्र हैं जो पूर्व भेजे गए पत्र का उत्तर न मिलने पर प्राप्तकर्ता को स्मरण कराने के लिए लिखे जाते हैं। जब 15-30 दिनों में कोई कार्यवाही न हो तो उच्च कार्यालय अधीनस्थ को पुनः पत्र लिखता है।

विशेषताएँ:

  • मूल पत्र के समान स्वरूप (ज्ञापन/परिपत्र) में लिखा जाता है।

  • मूल पत्र का क्रमांक, दिनांक और विषय का स्पष्ट संदर्भ।

  • उत्तर न मिलने पर खेद प्रकट करना और कार्य अवरुद्ध होने का उल्लेख।

  • संक्षिप्त, सांकेतिक भाषा; कभी सख्त लहजा।

  • प्रथम पत्र की भाषा दोहराई जाती है।


प्रश्न 6

निम्नांकित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए- (i) ज्ञापन, (ii) पृष्ठांकन, (iii) आदेश।

(i) ज्ञापन: ज्ञापन कार्यालयों में समकक्ष या अधीनस्थ अधिकारियों को साधारण सूचना, प्रार्थना पत्र की पावती या गैर-आदेशात्मक संदेश भेजने के लिए लिखा जाता है। इसमें संबोधन-अधोलेख नहीं होता, केवल हस्ताक्षर और प्राप्तकर्ता का नाम होता है। उदाहरण: कर्मचारी स्थानांतरण या वेतन वृद्धि की सूचना।

(ii) पृष्ठांकन: पृष्ठांकन (Endorsement) एक पत्र को आगे किसी अन्य को भेजते समय उसके ऊपर लिखा जाने वाला संक्षिप्त टिप्पणी है। यह पत्र के मुख्य भाग पर लिखा जाता है और प्रेषण का कारण बताता है। उदाहरण: "कृपया आवश्यक कार्यवाही कर सूचित करें"।

(iii) आदेश: कार्यालय आदेश सक्षम अधिकारी द्वारा अधीनस्थों को कार्यान्वयन हेतु बाध्यकारी निर्देश हैं। इसमें संबोधन-विषय-अधोलेख नहीं होता, केवल पत्रांक, दिनांक और स्पष्ट आदेश होता है। उदाहरण: छुट्टी स्वीकृति या विभागीय नियम परिवर्तन।

प्रश्न 7

अधिसूचना से क्या तात्पर्य है? इसका प्रकाशन किसमें होता है और उसके विषय क्या होते हैं?

तात्पर्य: अधिसूचना सरकारी या अधिकृत प्राधिकरण द्वारा जारी औपचारिक सार्वजनिक सूचना है, जो कानून, नियम, निर्णय, नियुक्ति या परिवर्तन की जानकारी जनता को देती है।

प्रकाशन: मुख्यतः राजपत्र (गजट) में अनिवार्य रूप से प्रकाशित होती है, आवश्यकतानुसार समाचार पत्रों में भी।

विषय: नियुक्तियाँ, स्थानांतरण, सेवानिवृत्ति, नियम-संशोधन, निषेधाज्ञा, नीति घोषणा, तिथियाँ, दरें आदि।

प्रश्न 8

अधिसूचना एवं परिपत्र में अन्तर बताइये।

अधिसूचना और परिपत्र कार्यालयीन पत्राचार के दो भिन्न प्रकार हैं। निम्न तालिका में इनका अंतर स्पष्ट है:

आधारअधिसूचनापरिपत्र
परिभाषासरकारी निर्णय/कानून की सार्वजनिक सूचना।एक ही सूचना अनेक विभागों को सामूहिक रूप से।
प्रकाशनराजपत्र/समाचार पत्र में।आंतरिक रूप से कार्यालयों को।
उद्देश्यजनता को विधिवत सूचित करना।नीति/निर्देश प्रसार।
प्राप्तकर्ताअसंख्य जनता/सार्वजनिक।विशिष्ट विभाग/कार्यालय।
स्वरूपविधिवत, कानूनी मान्यता।संक्षिप्त, शीर्षक 'परिपत्र'।
भाषाऔपचारिक, विधिनिषेधात्मक।निर्देशात्मक, कार्यवाही हेतु।

अधिसूचना सार्वजनिक और बाध्यकारी होती है, जबकि परिपत्र आंतरिक प्रशासनिक होता है।

प्रश्न 9

शासकीय पत्रों की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

शासकीय पत्र सरकारी विभागों के मध्य औपचारिक संचार के साधन हैं। इनकी प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं:

  • औपचारिकता: संबोधन, विषय, अधोलेख और हस्ताक्षर के साथ विधिवत स्वरूप।

  • स्पष्टता: उद्देश्य और आवश्यक जानकारी बिना अस्पष्टता के।

  • संक्षिप्तता: केवल प्रासंगिक तथ्य, अनावश्यक विस्तार से मुक्त।

  • वस्तुनिष्ठता: व्यक्तिगत भावनाओं के बजाय तथ्य और नियम आधारित।

  • शिष्टाचार: विनम्र भाषा ('कृपया', 'आपकी दयनीयता') का प्रयोग।

  • निरंतरता: पत्रांक, दिनांक, संदर्भ क्रमवार।

  • कानूनी मान्यता: राजपत्र/अधिकारी हस्ताक्षर से प्रामाणिक।


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