FOUNDATION HINDI LANGUAGE -PART III
भाग-तीन (तृतीय वर्ष)
हिंदी भाषा
इकाई 2
भाग (क)
सूखी डाली : उपेन्द्रनाथ अश्क
प्रश्न 1
उपेन्द्रनाथ 'अश्क' द्वारा रचित 'सूखी डाली' का सारांश लिखिए।
'सूखी डाली' उपेन्द्रनाथ 'अश्क' द्वारा रचित एक सामाजिक एकांकी है जो संयुक्त परिवार प्रणाली के महत्व को दर्शाती है। दादा मूलराज के संयुक्त परिवार में छोटी बहू बेला आधुनिक विचारों वाली शिक्षित युवती है, जो एकल परिवार की पक्षधर होकर परिवार विघटन का कारण बनती है। दादाजी की बुद्धिमत्ता से बेला की भावनाओं का समाधान होता है और परिवार एकता के सूत्र में बंध जाता है, जो देश की अखंडता का प्रतीक है।
प्रश्न 2
'सूखी डाली' एकांकी के अनुसार बेला दुःखी क्यों है? लिखिए।
बेला दुःखी है क्योंकि वह संयुक्त परिवार में सबसे छोटी बहू होने पर भी सभी को अपना नहीं समझा जाता। परिवार के सदस्यों के बीच उसकी उपेक्षा और एकल परिवार की इच्छा से वह वटवृक्ष की सूखी डाली की भांति अकेली महसूस करती है। उसकी आधुनिक शिक्षा और स्वतंत्रता की चाहत परिवार के पारंपरिक ढांचे से टकराती है।
प्रश्न 3
"बेला की मान्यता है कि कोई उसे अपना नहीं समझता।" क्या आपका भी यही मत है?
हाँ, बेला की यह मान्यता सही है क्योंकि संयुक्त परिवार में छोटी बहू की भावनाओं की उपेक्षा आम समस्या है। वह पढ़ी-लिखी होने पर भी परिवार में सम्मान और स्वीकृति पाने से वंचित रहती है, जो उसके मनोवैज्ञानिक द्वंद्व को दर्शाता है। दादाजी के हस्तक्षेप से ही उसकी यह भावना शांत होती है।
प्रश्न 4
"दादाजी की सहायता से ही परिवार टूटने से बचा।" इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
पूर्णतः सहमत हूँ क्योंकि दादाजी मूलराज परिवार के मुखिया के रूप में बुद्धिमान और संयमित थे, जिन्होंने बेला के मन की बात समझकर संकट टाला। उनकी तुलना वटवृक्ष से की गई है जो सूखी डाली को भी सहारा देता है। बिना उनके हस्तक्षेप के बेला का एकल परिवार का विचार परिवार विघटन का कारण बन जाता।
प्रश्न 5
'संयुक्त परिवार का सुख' इस पर अपने विचार लिखिए।
संयुक्त परिवार भावनात्मक सहारा, आर्थिक स्थिरता और सामूहिक सुख प्रदान करता है। यह संस्कार, मर्यादा और आपसी सहयोग से जीवन को समृद्ध बनाता है, जहाँ बच्चे बुजुर्गों से सीखते हैं। आधुनिक एकल परिवार में अकेलापन बढ़ा है, जबकि संयुक्त परिवार चुनौतियों में एकजुटता लाता है।
प्रश्न 6
प्रस्तुत एकांकी पुरातन एवं आधुनिक जीवन शैलियों के टकराव एवं सामंजस्य को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है। उपयुक्त उदाहरण द्वारा इस कथन का औचित्य सिद्ध कीजिए।
यह कथन सही है क्योंकि एकांकी बेला (आधुनिक, एकल परिवार पक्षधर) और दादाजी (पुरातन, संयुक्त परिवार समर्थक) के टकराव को दर्शाती है। उदाहरणस्वरूप, बेला सूखी डाली बनने से इनकार करती है, किंतु दादाजी उसे समझाते हुए कहते हैं, "मैंने एक परिवार को टूटने से बचाया", जो सामंजस्य स्थापित करता है। यह टकराव पारिवारिक एकता के माध्यम से समाधानित होता है।
प्रश्न 7
दादा मूलराज और बेला के चरित्र की तीन-तीन विशेषताएँ लिखिए।
दादा मूलराज: बुद्धिमान और संयमित मुखिया, पारिवारिक एकता के प्रतीक, आधुनिक परिवर्तनों को स्वीकारने वाले।
बेला: आधुनिक शिक्षित युवती, भावुक और स्वतंत्रता चाहने वाली, संयुक्त परिवार में उपेक्षित अनुभव करने वाली।
प्रश्न 8
एकांकी के तत्व के आधार पर 'सूखी डाली' की समीक्षा कीजिए।
'सूखी डाली' एकांकी के तत्वों से युक्त है - एक ही घटना (परिवार विघटन का संकट), एक स्थान (घर), सीमित पात्र और संक्षिप्त कथानक। यह संयुक्त परिवार बनाम एकल परिवार के द्वंद्व को प्रभावी ढंग से चित्रित करती है। दादाजी के माध्यम से सामंजस्य का संदेश शक्तिशाली है, भाषा सरल और प्रतीकात्मक।
प्रश्न 9
'सूखी डाली' का केन्द्रीय भाव स्पष्ट कीजिए।
केन्द्रीय भाव संयुक्त परिवार की एकता और महत्व है, जहाँ सूखी डाली भी वटवृक्ष का हिस्सा बनी रहती है। यह पुरानी और नई पीढ़ी के टकराव के बीच सामंजस्य की आवश्यकता दर्शाता है।
प्रश्न 10
समय की माँग के अनुसार परिवर्तित पारिवारिक मान्यताओं को दादाजी किस प्रकार स्वीकृति देते हैं? स्पष्ट कीजिए।
दादाजी बेला को अलग कमरा और आधुनिक सुविधाएँ देकर नई पीढ़ी की स्वतंत्रता को स्वीकार करते हैं। वे कहते हैं कि "परिवर्तन आवश्यक है", किंतु एकता बनाए रखने पर जोर देते हैं। यह उनकी प्रगतिशीलता को दर्शाता है।
प्रश्न 11
'सूखी डाली' एकांकी के माध्यम से संयुक्त परिवार की आवश्यकता और अच्छाइयों की ओर संकेत किया गया है। इसे समझाइये।
एकांकी दर्शाती है कि संयुक्त परिवार में भावनात्मक सहारा, आर्थिक सुरक्षा और पारस्परिक समझ होती है। बेला का संकट दादाजी के हस्तक्षेप से हल होता है, जो एकल परिवार के अकेलेपन के विपरीत एकता का सुख दिखाता है।
प्रश्न 12
उपेन्द्रनाथ 'अश्क' का संक्षिप्त परिचय लिखिए।
उपेन्द्रनाथ 'अश्क' (1910-1998) हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार, उपन्यासकार और कहानीकार थे। प्रगतिशील लेखन धारा से जुड़े, उन्होंने 'सूखी डाली' जैसी एकांकी से सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डाला। उनकी रचनाएँ यथार्थवादी और परिवार-केंद्रित हैं।
प्रश्न 1
'अपोलो का रथ' कहानी का सारांश लिखिए।
श्रीकांत वर्मा का 'अपोलो का रथ' एक यात्रा-वृत्तांत है जिसमें लेखक यूरोप (यूनान, इटली, फ्रांस आदि) की यात्रा के दौरान प्राचीन सभ्यता के अवशेषों और आधुनिक जीवन के द्वंद्व को चित्रित करते हैं। अपोलो के रथ को कला, ज्ञान और चिंतन का प्रतीक बनाकर अपनी आंतरिक यात्रा का वर्णन किया गया है। यात्रा के माध्यम से अतीत की महानता, वर्तमान की खोखलापन और मानवीय एकाकीपन पर प्रकाश डाला गया है।
प्रश्न 2
'अपोलो का रथ' कहानी का विश्लेषणात्मक विवेचना कीजिए।
यह वृत्तांत भौतिक यात्रा से परे दार्शनिक चिंतन है, जहाँ अपोलो का रथ प्रकाश और आत्मबोध का प्रतीक है। लेखक यूनान के एथेंस में प्राचीन गौरव और आधुनिक क्षय की तुलना करते हुए सभ्यता के चक्र पर विचार करते हैं। प्रमुख विषय हैं- कला का अवमूल्यन, व्यक्तिवाद का अकेलापन, तथा भारतीय चेतना बनाम पश्चिमी तर्क। भाषा काव्यात्मक और प्रतीकात्मक है, जो पाठक को आंतरिक यात्रा पर ले जाती है।
प्रश्न 3
'अपोलो का रथ' कहानी में तकनीकी प्रगति और मानवीय संवेदना के बीच संघर्ष को कैसे प्रस्तुत किया गया है?
श्रीकांत वर्मा 'अपोलो का रथ' में अपोलो के रथ को वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक बनाते हुए चंद्रयान यात्रा का उल्लेख करते हैं, जहाँ तकनीक मनुष्य को चाँद तक पहुँचा देती है किंतु आंतरिक शून्यता बनी रहती है। यूरोपीय शहरों के आधुनिक स्थापत्य के विपरीत प्राचीन खंडहर मानवीय संवेदनाओं की गहराई दिखाते हैं, जो तकनीकी उन्नति के अमानवीय पक्ष को उजागर करता है। यह द्वंद्व लेखक के चिंतन से प्रकट होता है कि भौतिक गति के साथ नैतिक मूल्य क्षीण हो रहे हैं।
प्रश्न 4
'अपोलो का रथ' कहानी किस प्रकार आधुनिक सभ्यता पर व्यंग्य करता है?
कथा आधुनिक सभ्यता के बाह्य वैभव पर व्यंग्य करती है, जहाँ अपोलो का रथ प्रकाश-ज्ञान का प्रतीक होते हुए भी वर्तमान यूरोप में अंधकार और एकाकीपन का रूप धारण कर लेता है। लेखक यूनान के प्राचीन गौरव की तुलना आधुनिक स्वार्थपरता से करते हुए पश्चिमी अंधानुकरण की आलोचना करते हैं। परिवार विघटन, प्रदूषण और स्वार्थी व्यक्तिवाद के माध्यम से यह खोखलेपन पर करारा प्रहार है।
भाग (ख)
विभिन्न संरचनाएँ
प्रश्न 1
अभिव्यक्ति कितने प्रकार की होती है? प्रत्येक के दो-दो उदाहरण दीजिए।
अभिव्यक्ति मुख्यतः दो प्रकार की होती है - शाब्दिक (मौखिक/लिखित) और गैर-शाब्दिक (शारीरिक/हावभाव)।
शाब्दिक अभिव्यक्ति: "मुझे भूख लगी है।", "धन्यवाद भाई।"
गैर-शाब्दिक अभिव्यक्ति: मुस्कुराना (खुशी दर्शाने के लिए), सिर हिलाना (सहमति के लिए)।
प्रश्न 2
विनम्रतासूचक संरचनाओं से क्या तात्पर्य है? उदाहरण सहित लिखिए।
विनम्रतासूचक संरचनाएँ वे वाक्य हैं जो वक्ता के शिष्टाचार, सम्मान और विनम्रता को प्रकट करते हैं, जैसे 'कृपया', 'आपकी दया', 'क्षमा करें'।
उदाहरण: "कृपया आपका समय देकर मार्गदर्शन करें।", "मुझे क्षमा कीजिए यदि मैंने गलती की।"
प्रश्न 3
काल-बोधक संरचना से क्या तात्पर्य है? कालबोधक शब्दों का प्रयोग करते हुए सात वाक्य बनाइए।
काल-बोधक संरचना वे वाक्य हैं जो क्रिया के काल (भूत, वर्तमान, भविष्य) या समय शब्दों से घटना के समय का बोध कराते हैं।
सात वाक्य:
कल मैं बाजार गया था। (भूतकाल)
अभी वर्षा हो रही है। (वर्तमान)
कल सुबह हम यात्रा करेंगे। (भविष्य)
पहले यह गाँव बहुत समृद्ध था। (भूत)
अभी डॉक्टर आ रहे हैं। (वर्तमान)
अगले सप्ताह परीक्षा होगी। (भविष्य)
हर रविवार को पूजा होती है। (सामान्य काल)
प्रश्न 4
निषेधात्मक (निषेधपरक) संरचना क्या है? विभिन्न प्रकार की निषेधात्मक संरचना उदाहरण के रूप में लिखिए।
निषेधात्मक संरचना वे वाक्य हैं जो किसी कार्य को रोकने या न करने का आदेश/भाव प्रकट करते हैं, मुख्यतः 'न', 'ना', 'मत', 'निषेध' आदि से।
प्रकार:
प्रश्न 5
दिशा बोधक संरचना से क्या तात्पर्य है? सात अलग-अलग दिशा बोधक शब्दों का प्रयोग करते हुए सात वाक्य बनाइए।
दिशा बोधक संरचना वे वाक्य हैं जो दिशा (पूर्व, पश्चिम आदि) या स्थिति (आगे, पीछे) का बोध कराते हैं।
सूर्य पूर्व दिशा से निकलता है।
पश्चिम में सूर्यास्त होता है।
उत्तर की ओर पहाड़ हैं।
दक्षिण दिशा में नदी बहती है।
घर के आगे पार्क है।
पीछे की ओर बगीचा है।
दायें हाथ पर मंदिर है।
प्रश्न 6
विधिसूचक संरचना को स्पष्ट करते हुए पाँच वाक्य बनाइये।
विधिसूचक संरचना वे वाक्य हैं जो आज्ञा, नियम या कार्य करने की विधि बताते हैं।
हमेशा सत्य बोलना चाहिए।
किताब को सावधानी से पढ़ो।
नियमों का पालन करो।
फल को धोकर खाओ।
दरवाजा बंद करके जाओ।
प्रश्न 7
निम्नलिखित के पाँच-पाँच उदाहरण दीजिए- (1) कालबोधक, (2) निषेधपरक, (3) स्थानबोधक, (4) कारण-कार्य, (5) विधिसूचक, (6) विनम्रतासूचक, (7) दिशाबोधक।
कालबोधक: कल आना।, अभी जाओ।, अगले हफ्ते मिलेंगे।, पहले सो जाओ।, हर रोज पढ़ो।
निषेधपरक: यहाँ मत आओ।, न जाओ बाहर।, ऐसा मत करो।, छूना मत।, कभी न बोलना झूठ।
स्थानबोधक: घर में रहो।, मेज पर रखो।, कक्षा में बैठो।, बगीचे में खेलो।, छत पर जाओ।
कारण-कार्य: बारिश हुई इसलिए कीचड़ हो गया।, मेहनत की अतः सफलता मिली।, बीमार था इसलिए न आया।, पढ़ा इसलिए पास हुआ।, गलती की तो दंड मिला।
विधिसूचक: चाय बनाओ।, सफाई करो।, खाना खाओ।, पत्र लिखो।, सो जाओ।
विनम्रतासूचक: कृपया बैठिए।, क्षमा कीजिए।, आपकी दया से।, कृपया मदद करें।, धन्यवाद कहिए।
दिशाबोधक: पूर्व में मंदिर है।, पश्चिम की ओर जाओ।, ऊपर देखो।, नीचे उतरो।, बायें मुड़ो।
प्रश्न 8
अनुक्रम से क्या तात्पर्य है? इसका प्रयोग किस रूप में होता है?
अनुक्रम वाक्यों में घटनाओं या विचारों की क्रमबद्धता (क्रमानुसार) को दर्शाता है। इसका प्रयोग सूचीबद्धता, चरणबद्ध वर्णन या घटना-प्रवाह में होता है।
प्रश्न 9
कारण-कार्य संबंध संरचना को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
कारण-कार्य संबंध संरचना कारण (why) और परिणाम (what happens) के मध्य संबंध स्थापित करती है।
उदाहरण: "वर्षा हुई इसलिए सड़कें गीली हो गईं।" (कारण: वर्षा, कार्य: गीली सड़कें।)
"मेहनत की अतः सफलता मिली।" (कारण: मेहनत, कार्य: सफलता।)



0 टिप्पणियाँ