B.Sc. BOTANY (C.G.)
Third Year – Second Question Paper
इकाई 4
दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: उत्परिवर्तन (Mutation) क्या है? यह कितने प्रकार का होता है? जीन उत्परिवर्तन का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्परिवर्तन DNA अनुक्रम में अचानक, वंशानुगत परिवर्तन है जो लक्षणों को प्रभावित करता है। यह स्वतःस्फूर्त (UV किरणें, रसायन) या प्रेरित (म्यूटेजन) हो सकता है।
प्रकार:
जीन उत्परिवर्तन (Point): एक न्यूक्लियोटाइड परिवर्तन।
गुणसूत्रीय: विलोपन, दोहराव, व्युत्क्रमण, ट्रांसलोकेशन।
संख्यात्मक: एनेप्लॉयडी (मोनोसॉमी, ट्राइसॉमी), बहुगुणिता।
जीन उत्परिवर्तन: बेस विकृति (A→G), इन्सर्शन/विलोपन (फ्रेमशिफ्ट), साइलेंट (कोडॉन परिवर्तन बिना अमीनो अम्ल बदलाव)। उदाहरण: सिकल सेल एनीमिया (GAG→GTG)।
प्रश्न 2: जीन उत्परिवर्तन क्या है? इसे किस प्रकार प्रेरित (Induced) किया जाता है?
प्रश्न 3: आर.एन.ए. (RNA) की आण्विक संरचना एवं इनके प्रकारों का उल्लेख कीजिए।
आण्विक संरचना: RNA राइबोन्यूक्लिक अम्ल, न्यूक्लियोटाइड्स (राइबोज + फॉस्फेट + बेस: A,U,G,C) का एकल श्रृंखला बहुलक। U थायमिन की जगह, 2' OH समूह। सेकेंडरी संरचना: हेयरपिन लूप, स्टेम (H-बंध)।
प्रकार:
प्रश्न 4: प्रोटीन संश्लेषण (Protein Synthesis) की क्रियाविधि को समझाइए।
क्रियाविधि (केंद्रीय dogma: DNA→RNA→प्रोटीन):
अनुलेखन (Transcription): प्रमोटर पर RNA Pol-II बंधता, TATA बॉक्स। प्रारंभ→विस्तार (5'→3')→समापन (AAUAA)। mRNA स्प्लिसिंग (इंट्रॉन हटाना)।
अनुवाद (Translation): राइबोसोम (30S+50S=70S)।
आरंभ: AUG पर initiator tRNA, IF1-3।
विस्तार: EF-Tu अमीनोऐसिल-tRNA लाता, पेप्टाइडिल ट्रांसफेरेज़ बंध बनाता, ट्रांसलोकेशन (EF-G)।
समापन: UGA/UAA/UGA पर RF1/2, रिलीज फैक्टर।
प्रश्न 5: जीन क्या है? जीन की रासायनिक प्रकृति एवं आण्विक संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।
जीन: DNA का वह कार्यात्मक खंड जो एक पॉलीपेप्टाइड/RNA कोड करता है (cistron)। बीड्स-ऑन-स्ट्रींग मॉडल।
रासायनिक प्रकृति: डबल हेलिक्स DNA, ~2000 bp/जीन।
आण्विक संरचना:
संरचनात्मक: प्रमोटर (TATA), एन्हांसर, एक्सॉन (कोडिंग), इंट्रॉन (नॉन-कोडिंग), ट्रेलर।
नियमन: ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर बंधन।
प्रोकैरियोट: ऑपरॉन (lac: प्रमोटर, ऑपरेटर, ZYA)।
यूकैरियोट में स्प्लिसोसोम।
प्रश्न 6: सेंट्रल डोग्मा (Central Dogma) पर टिप्पणी लिखिये।
सेंट्रल डोग्मा फ्रांसिस क्रिक (1958) द्वारा प्रतिपादित आणविक जीवविज्ञान का मूल सिद्धांत है, जो आनुवंशिक सूचना के एक-दिशात्मक प्रवाह को दर्शाता है: DNA → RNA → प्रोटीन। यह प्रतिकृति (DNA→DNA), अनुलेखन (DNA→mRNA) और अनुवाद (mRNA→प्रोटीन) प्रक्रियाओं पर आधारित है। अपवाद: रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ (RNA→DNA, रेट्रोवायरस में)। महत्व: जीन अभिव्यक्ति समझाता है, आनुवंशिक रोगों की व्याख्या।
प्रश्न 7: आनुवंशिक कूट (Genetic Code) क्या है? इनके निर्माण की प्रक्रिया एवं महत्व का वर्णन कीजिये।
आनुवंशिक कूट mRNA पर तीन क्षारकों (ट्रिपलेट/कोडॉन) का समूह है जो एक विशिष्ट अमीनो अम्ल को निर्दिष्ट करता है (64 कोडॉन, 61 कोडिंग + 3 स्टॉप)।
निर्माण प्रक्रिया:
नीरेनबर्ग-माथाई (1961): UUU→फिनाइलएलानिन।
खुराना (1968): पूर्ण शब्दकोश।
क्रिक: त्रिअक्षरीय, वॉबल परिकल्पना (तीसरा बेस लचीला)।
विशेषताएँ: त्रिक (triplet), अपह्रासित (degenerate, e.g. CCU/CCG=प्रोलाइन), असंदिग्ध (unambiguous), सार्वत्रिक (universal), कॉमालेस (commaless), स्टार्ट (AUG), स्टॉप (UAA/UAG/UGA)।
महत्व: प्रोटीन संश्लेषण निर्देशित, उत्परिवर्तन व्याख्या, आनुवंशिक इंजीनियरिंग।
प्रश्न 8: 'एक जीन एक एंजाइम' (One gene one enzyme) सिद्धांत पर टिप्पणी लिखिए।
जॉर्ज बीडल-एडवर्ड टैटम (1941) ने न्यूरोस्पोरा क्रासा पर कार्य कर प्रतिपादित: प्रत्येक जीन एक विशिष्ट एंजाइम कोड करता है। आर्गिनिन बायोसिंथेसिस पथ में जीन A→ऑर्निथीन, B→सिट्रुलिन। उत्परिवर्ती जीन एंजाइम निष्क्रिय→पोषक आवश्यकता।
विकास: 'एक जीन-एक पॉलीपेप्टाइड' (कुछ जीन rRNA कोड)। अपवाद: बहुरूपी जीन। महत्व: आणविक जीवविज्ञान आधार, जीन कार्य सिद्ध।
प्रश्न 9: जीन क्रिया के नियमन से आप क्या समझते हैं? जीन नियमन को समझाते हुये ओपेरॉन संकल्पना (Operon Concept) को स्पष्ट कीजिए।
जीन नियमन: जीन अभिव्यक्ति (ट्रांसक्रिप्शन/अनुवाद) का ऊर्जा-बचत नियंत्रण, आवश्यकता अनुसार। प्रोकैरियोट में ट्रांसक्रिप्शनल।
ओपेरॉन संकल्पना (जैकोब-मॉनोड, 1961):
संरचना: प्रमोटर (RNA Pol बंधन), ऑपरेटर (रेप्रेसर बंधन), संरचनात्मक जीन (ZYA, lac ऑपरॉन)।
प्रकार:
प्रकार उदाहरण नियंत्रण प्रेरणीय (Inducible) lac (लैक्टोज़) लैक्टोज़ मौजूद→रेप्रेसर निष्क्रिय दमनीय (Repressible) trp (ट्रिप्टोफैन) ट्रिप्टोफैन अधिक→को-रेप्रेसर
क्रिया: lac में रेप्रेसर ऑपरेटर बाधित करता; lP (इंड्यूसर) रेप्रेसर बदलता→ट्रांसक्रिप्शन। महत्व: चयापचय नियंत्रण।
प्रश्न 10: यूकैरियोट्स में जीन अभिव्यक्ति के नियमन का वर्णन करें।
यूकैरियोट में बहु-स्तरीय नियमन (ट्रांसक्रिप्शन से पोस्ट-ट्रांसलेशनल):
स्तर:
ट्रांसक्रिप्शनल: प्रमोटर (TATA), एन्हांसर/साइलेंसर, ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर (TFIID), मिथाइलेशन (दमन), हिस्टोन एसीटाइलेशन (सक्रियण)।
प्रोसेसिंग: स्प्लिसिंग (ऑल्टरनेटिव), कैपिंग, पॉली-A।
mRNA स्थिरता: miRNA (dicer), siRNA (RISC, जीन साइलेंसिंग)।
अनुवादीय: eIF, miRNA।
पोस्ट-ट्रांसलेशनल: फॉस्फोरिलेशन, उबिक्विटिनेशन (अपघटन)।
उदाहरण: ग्लूकोकॉर्टिकॉइड रिसेप्टर→एन्हांसर बंधन। महत्व: विकास, कैंसर (p53), भेदभाव।
प्रश्न 11: पादप ऊतक संवर्धन (Plant Tissue Culture) क्या है? इसकी विधि एवं महत्व का वर्णन कीजिए।
पादप ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला में नियंत्रित वातावरण में पादप कोशिकाओं, ऊतकों या अंगों को कृत्रिम पोषक माध्यम पर उगाने की तकनीक है। यह स्टेराइल परिस्थितियों में ऑक्सिन और साइटोकाइनिन जैसे हार्मोनों के अनुपात पर आधारित है।
विधि:
एक्सप्लांट चयन: पत्ती, तना, जड़ से ऊतक निकालना।
अजर्मीकरण: HgCl₂/इथेनॉल से सफाई।
संवर्धन: MS माध्यम (खनिज लवण, विटामिन, सुक्रोज) पर, 25°C, 16 hr प्रकाश।
कॉलस/पुनरुत्पादन: मूल/प्ररोह → पूर्ण पौधा → मिट्टी स्थानांतरण।
महत्व: रोगमुक्त पौधे, हाइब्रिड बीज, संकटग्रस्त प्रजाति संरक्षण, औषधीय यौगिक उत्पादन।
प्रश्न 12: निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए
(a) परागकोष या परागकण संवर्धन (Anther/Pollen Culture)
परागकोष संवर्धन हैप्लॉइड (n) पौधे उत्पन्न करता है। परागकण माइक्रोस्पोरोजेनेसिस चरण पर संवर्धित → एम्ब्रेयॉइड → डिहैप्लॉइड (2n) पौधा (कोल्चिसिन)। महत्व: होमोजाइगस लाइन।
(b) अण्डाशय संवर्धन (Ovary Culture)
अपरिपक्व अण्डाशय संवर्धित कर गर्भपत्र उगाना, असंगत परागण परिपक्वता हेतु। परिपक्व बीज प्राप्ति।
(c) भ्रूण संवर्धन (Embryo Culture)
अपरिपक्व भ्रूण निकालकर संवर्धन, दूरस्थज प्रजाति संकरण (हाइब्रिड बचाव)। उदाहरण: ड्यूरम×ब्रेड गेहूँ।
(d) संवर्धन माध्यम या पोषक माध्यम (Culture Media)
MS (मूर्शिगे-स्कूग) सबसे लोकप्रिय: मैक्रो/माइक्रो लवण (NH₄NO₃, KNO₃, CaCl₂), लोहा-EDTA, विटामिन (B1,B6), सुक्रोज (3%), अगर (0.8%), pH 5.7। हार्मोन: NAA, BAP।
(e) सूक्ष्म प्रसारण अथवा सूक्ष्म प्रवर्धन (Micropropagation)
एक्सप्लांट से कलमरहित प्रसारण। चरण: स्थापना→गुणन (प्ररोह)→रूटिंग→कठोरन। लाभ: तेज, एकरूप, वर्षभर।
(f) अजर्मीकरण (Sterilization)
सूक्ष्मजीव नाश: 0.1% HgCl₂ (5-10 मिनट), 70% इथेनॉल (30 सेकंड), सोडियम हाइपोक्लोराइट। उपकरण: ऑटोक्लेव (121°C, 15 psi, 20 मिनट), लैमिनार फ्लो।
प्रश्न 13: पूर्णशक्तता अर्थात् टोटीपोटेन्सी (Totipotency) पर निबन्ध लिखिए।
परिचय: पूर्णशक्तता पादप कोशिका की वह क्षमता है जो उसे पूर्ण पौधा उत्पन्न करने में सक्षम बनाती है। हैबरलैंड्ट (1902) ने प्रतिपादित।
संकल्पना: प्रत्येक कोशिका में पूर्ण जीनोम होता है। उचित पोषण (हार्मोन, माध्यम) से डिडिफरेंशिएशन→रिडिफरेंशिएशन। पादप अद्वितीय (पशु में सीमित)।
प्रमाण: कारोटेक्स (1950): रेडियोएक्टिव लेबल से कोशिका विभेदन। स्टुअर्ट (1950): गाजर रूफ से पूर्ण पौधा।
तंत्र: जीन डिडिफरेंशिएशन, प्लास्टिड/माइटोकॉन्ड्रिया सक्रियण। हार्मोन: साइटोकाइनिन विभेदन।
महत्व: ऊतक संवर्धन आधार, क्लोनल प्रजनन, संकटप्रथा संरक्षण, जीन ट्रांसफर।
निष्कर्ष: टोटीपोटेन्सी पादप विकास का मूल।
प्रश्न 14: प्रोटोप्लास्ट संवर्धन क्या है? इसकी क्रियाविधि समझाइये।
प्रोटोप्लास्ट संवर्धन कोशिका भित्ति रहित प्रोटोप्लास्ट (प्लाज्मोलिसिस) को संवर्धित कर पौधा उत्पन्न करना।
क्रियाविधि:
प्रोटोप्लास्ट अलगाव: एंजाइम (सेल्युलेज+पेक्टिनेज) 0.5-1 M मैन्निटॉल में।
शुद्धिकरण: फिल्टर/सेंट्रीफ्यूज।
संवर्धन: तरल→अगर माध्यम, B5/MS।
पुनर्जनन: कोशिका भित्ति (2-3 दिन)→कोशिका विभेदन→कॉलस→मूल/प्ररोह→पौधा।
प्रश्न 15: कायिक संकरण (Somatic Hybridization) का क्या तात्पर्य है? इसके विभिन्न चरणों का वर्णन कीजिए।
कायिक संकरण कायिक कोशिकाओं (प्रोटोप्लास्ट) का संलयन कर हाइब्रिड पौधा बनाना, लैंग (1978)।
चरण:
प्रोटोप्लास्ट अलगाव: दो प्रजातियों से।
संलयन: PEG/इलेक्ट्रोफ्यूजन (विद्युत क्षेत्र)।
चयन: दोहरी प्रतिरोधकता (Xylose+E8)।
पुनर्जनन: हाइब्रिड प्रोटोप्लास्ट→कॉलस→पौधा।
चरित्रीकरण: आइसोएंजाइम/सीक्वेंस।
उदाहरण: आलू+टमाटर=पोमाटो। महत्व: यौन असंगति दूर।
प्रश्न 16: टिप्पणी लिखिए
(a) साइब्रिड (Cybrid) या कोशिकाद्र्यीय संकर
साइब्रिड प्रोटोप्लास्ट संलयन से बने कोशिकाद्रव्यीय संकर हैं, जहाँ एक नाभिक के साथ दो विभिन्न कोशिकाद्रव्यों (माइटोकॉन्ड्रिया/क्लोरोप्लास्ट) का मिश्रण होता है। एक नाभिक को चयनात्मक नष्ट किया जाता है (X-किरण/iBrudin)। उदाहरण: तंबाकू में निकोटियाना+डेटुरा साइब्रिड। महत्व: CMS (साइटोप्लाज्मिक मेल स्टेरिलिटी) स्थानांतरण, मातृ वंशागति अध्ययन।
(b) काय प्रतिरूप विभिन्नताएँ या सोमाक्लोनल विभिन्नताएँ (Somaclonal Variations)
ऊतक संवर्धन से पुनर्जनित क्लोनल पौधों में अनपेक्षित आनुवंशिक परिवर्तन (DNA परिवर्तन, मिथाइलेशन)। लार्किन-स्कूवक्रॉफ्ट (1981)। कारण: कॉलस चरण में उत्परिवर्तन। महत्व: रोग प्रतिरोधकता (टॉमेटो Fusarium), नये जीनोटाइप, लेकिन अवांछित भिन्नता।
प्रश्न 17: निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए
(a) कृत्रिम बीज (Artificial Seeds)
सिंथेटिक बीज या सुप्राणु - नग्न भ्रूण/प्ररोह/कॉलस को हाइड्रोजेल (सोडियम एल्जिनेट+CaCl₂ कैप्सूल) में लपेटना। लाभ: भंडारण (6-12 माह), यांत्रिक रोपण, विषमसंकर बचाव। उदाहरण: गन्ना सोमाक्लोन। MS+सुक्रोज माध्यम।
(b) द्वितीयक मेटाबोलाइट्स (Secondary Metabolites)
प्राथमिक चयापचय से बने गैर-आवश्यक कार्बनिक यौगिक (अल्कलॉइड, टेरपेनॉइड, फेनोलिक्स)। तनाव/पर्यावरण प्रतिक्रिया। ऊतक संवर्धन से उत्पादन: टैक्सोल (कैंसर दवा, टैक्सस), शाकुनालीन (मोरिंगा)। महत्व: औषधि, सुगंध, रोग प्रतिरोध।



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