B.Sc. Botany (C.G.) Third Year – UNIT 3, Second Question Paper Long & Short Answer Questions

 




                                                                         B.Sc. BOTANY  (C.G.)

Third Year – Second Question Paper


बी.एससी. (सी.जी.)
तृतीय वर्ष 

इकाई 3

Genetic Material

दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न


प्रश्न 1: आनुवंशिक पदार्थ क्या है? डी.एन.ए. (DNA) का रासायनिक संगठन, प्रकार एवं इसकी आण्विक संरचना की व्याख्या कीजिए।

आनुवंशिक पदार्थ वह रासायनिक पदार्थ है जो लक्षणों की सूचना संग्रहीत करता है, वंशागति करता है तथा कोशिका विभाजन में प्रतिकृति बनाता है। हर्षे-चेज प्रयोग (1952) से सिद्ध हुआ कि DNA ही आनुवंशिक पदार्थ है, क्योंकि ³²P (DNA में) जीवाणु में प्रवेश कर गया जबकि ³⁵S (प्रोटीन में) नहीं।

DNA का रासायनिक संगठन: DNA डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल है, जो न्यूक्लियोटाइड्स का बहुलक है। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड = डीऑक्सीराइबोज शर्करा (5C) + फॉस्फोरिक अम्ल + नाइट्रोजन बेस (प्यूरीन: एडेनिन A, ग्वानिन G; पाइरिमिडीन: साइटोसिन C, थायमिन T)। A=T, G≡C हाइड्रोजन बंध।

प्रकार:

  • B-DNA (सर्वाधिक, 10 बेस/टर्न, 3.4 nm व्यास, δεह्रदाहक)।

  • A-DNA (RNA-DNA हाइब्रिड, छोटा-मोटा)।

  • Z-DNA (बाएं मोड़, जेनेटिक स्विच)।

आण्विक संरचना (वाटसन-क्रिक मॉडल, 1953): दो प्रतिसमानांतर पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाएँ दाहिने मोड़ वाली दोहरी हेलिक्स बनाती हैं। प्रमुख खांचा (major groove) और लघु खांचा (minor groove)। 0.34 nm बेस/चरण, 3.4 nm/टर्न (10 बेस), 2 nm व्यास। एंटी-पैरलल (5'→3', 3'→5')।

प्रश्न 2: DNA प्रतिलिपि या द्विगुणन (Replication) क्या है? यह कितने प्रकार का होता है? DNA द्विगुणन की अर्द्धसंरक्षी (Semi-conservative) विधि का वर्णन कीजिए।


DNA replication diagram 

DNA द्विगुणन: S-फेज (इंटरफेज) में DNA की सटीक प्रतिलिपि बनाना, ताकि प्रत्येक पुत्री कोशिका को पूर्ण जीनोम मिले। मेसलसन-स्टाल प्रयोग (¹⁵N→¹⁴N) से अर्द्धसंरक्षी सिद्ध।

प्रकार:

  • अर्द्धसंरक्षी: एक पुराना + एक नया स्ट्रैंड (सिद्ध)।

  • पूर्णसंरक्षी/असंरक्षी: (खारिज)।

अर्द्धसंरक्षी विधि (वाटसन-क्रिक):

  1. प्रारंभ: ओरिजिन (ori) पर हेलिकेज/टोपोआइसोमेरेज हाइड्रोजन बंध तोड़कर हेलिक्स खोलता है (रेप्लिकेशन फोर्क/Y-आकार)। SSB प्रोटीन स्ट्रैंड अलग रखते हैं।

  2. प्राइमर: प्राइमेज RNA प्राइमर (10-12 न्यूक्लियोटाइड) बनाता है।

  3. संश्लेषण: DNA पॉलीमरेज-III 5'→3' दिशा में dNTP जोड़ता है (A-T, G-C पूरक)।

    • लीडिंग स्ट्रैंड: सतत (3'→5' टेम्पलेट पर)।

    • लैगिंग स्ट्रैंड: असतत ओकाजाकी फ्रैगमेंट्स (1000-2000 bp), DNA पॉलीमरेज-I RNA प्राइमर हटाकर D.N.A. भरता, लाइगेज जोड़ता।

  4. समापन: टेलोमरेज टेलोमियर बनाता, टोपोआइसोमेरेज तनाव दूर करता।

प्रश्न 3: केरन्स (Cairns) के ऑटोरेडियोग्राफी प्रयोग का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

जॉन केरन्स ने 1963 में E. coli जीवाणु पर ऑटोरेडियोग्राफी प्रयोग किया, जिसमें थायमिडीन के रेडियोधर्मी समस्थानिक ³H-थायमिडीन का उपयोग कर DNA द्विगुणन की प्रक्रिया को दृश्यमान बनाया।

प्रयोग प्रक्रिया:

  • E. coli को ³H-थायमिडीन युक्त माध्यम में S-फेज के दौरान उगाया।

  • कोशिकाओं को कोल्ड थायमिडीन से धोया, हल्के ताप पर संवर्धित किया।

  • कोशिकाओं को सूखा, सिल्वर ग्रेन फिल्म पर रखा (ऑटोरेडियोग्राफी)।

  • विकिरण से फिल्म पर चांदी के ग्रेन घनित होकर काले धब्बे बने।

परिणाम: DNA θ-आकार (थीटा स्ट्रक्चर) दिखा - एक सर्कुलर द्विगुणन काँटा (replication fork) के साथ द्विगुणन। एक ओरिजिन से दोहरी फोर्क बनकर पूर्ण वृत्त पूर्ण हुआ। इससे DNA का सर्कुलर स्वरूप और अर्द्धसंरक्षी द्विगुणन सिद्ध हुआ।

प्रश्न 4: DNA द्विगुणन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं का विस्तृत वर्णन कीजिए।

DNA द्विगुणन इंटरफेज के S-चरण में होता है, अत्यंत विशिष्ट और त्रुटिरहित (error rate 10⁻⁹)।

महत्वपूर्ण पहलू:

1. एन्जाइम्स की भूमिका

एन्जाइमकार्य
हेलिकेज/टोपोआइसोमेरेजH-बंध तोड़कर हेलिक्स खोलना, सुपरकॉइलिंग दूर करना (DNA gyrase) 
SSB प्रोटीनअलग स्ट्रैंड्स को स्थिर रखना
प्राइमेज (RNA pol)RNA प्राइमर संश्लेषण (5'-3')
DNA Pol-IIIनई DNA श्रृंखला संश्लेषण (लीडिंग/लैगिंग), proofreading
DNA Pol-IRNA प्राइमर हटाना, गैप भरना
DNA लाइगेजओकाजाकी फ्रैगमेंट्स जोड़ना (निकल सीलिंग)
टेलोमरेजटेलोमियर संश्लेषण (रैप्लिकेटिंग एंड समस्या) 

2. लीडिंग vs लैगिंग स्ट्रैंड

  • लीडिंग: 3'→5' टेम्पलेट पर सतत संश्लेषण।

  • लैगिंग: 5'→3' टेम्पलेट पर असतत ओकाजाकी फ्रैगमेंट्स (1000-2000 bp)।

3. ओरिजिन ऑफ रेप्लिकेशन (ori)

  • प्रोकैरियोट: 1 oriC।

  • यूकैरियोट: अनेक (AR साइट्स) - तेज द्विगुणन।

4. प्रमाणन (Proofreading) और सुधार

DNA Pol-III की 3'→5' एक्सोन्यूक्लिएज गतिविधि त्रुटि सुधारती है। Mismatch repair (Mut S, L, H) पोस्ट-रेप्लिकेशन सुधार।

5. मेसलसन-स्टाल प्रयोग


¹⁵N → ¹⁴N बैक्टीरिया में CsCl घनत्व ग्रेडिएंट से हाइब्रिड DNA (मध्यम घनत्व) सिद्ध।

महत्व: जीनोम स्थिरता, कोशिका विभाजन, उत्परिवर्तन नियंत्रण, कैंसर संबंध।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ