B.Sc. BOTANY (C.G.)
Third Year – Second Question Paper
इकाई 2
दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1: मेण्डल कौन थे? मेण्डल की सफलता के कारणों को लिखते हुए मेण्डल के वंशानुगति के नियमों का उचित उदाहरण देते हुए व्याख्या कीजिए।
ग्रेगर जोहान मेंडल (1822-1884) एक ऑस्ट्रियाई भिक्षु और वैज्ञानिक थे, जिन्हें आधुनिक आनुवंशिकी का जनक कहा जाता है। उन्होंने 1856-1863 तक मॉरेवियन मठ के बगीचे में मटर (Pisum sativum) के पौधों पर 7 वर्षों तक लगभग 29,000 पौधों का अध्ययन किया और वंशागति के वैज्ञानिक नियम प्रतिपादित किए, जो 1865 में प्रकाशित हुए।
मेण्डल की सफलता के कारण:
शुद्धबंशी (pure breeding) लाइनों का चयन - लंबे और बौने पौधों जैसे।
मात्रात्मक आंकड़ों का रिकॉर्ड (3:1, 9:3:3:1 अनुपात)।
एक या दो लक्षणों पर एकाग्रता, जटिलता से बचाव।
सांख्यिकीय विश्लेषण और गणितीय अनुपातों की खोज।
मेण्डल के तीन नियम उदाहरण सहित:
प्रभाविता का नियम (Law of Dominance): अप्रभावी लक्षण प्रभावी के सामने दब जाता है। उदाहरण: TT (लंबा) × tt (बौना) → F1 सभी Tt लंबे; F2 में 3 लंबे:1 बौना।
पृथक्करण का नियम (Law of Segregation): युग्मज एलील मादा-नर गैमेट में अलग हो जाते हैं। F2 में जीनोटाइप 1 TT:2 Tt:1 tt (1:2:1), फेनोटाइप 3:1।
स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment): विभिन्न लक्षणों के एलील स्वतंत्र रूप से वितरित होते हैं। द्विसंकर: RY/ry × ry/ry → F2 9 गोल-पीली:3 गोल-हरी:3 झुर्री-पीली:1 झुर्री-हरी।
प्रश्न 2: निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये
(a) द्वि-प्रसंकरण परीक्षण संकरण (Dihybrid Test Cross)
यह F1 द्विगुणित संकर (RrYy, गोल-पीली) को द्विगुणित अप्रभावी माता (rryy, झुर्री-हरी) से संकरण है। अपेक्षित अनुपात 1:1:1:1 (गोल-पीली:गोल-हरी:झुर्री-पीली:झुर्री-हरी) स्वतंत्र अपव्यूहन की पुष्टि करता है। यदि सहलग्नता हो तो अनुपात भिन्न होता है। यह जीनोटाइप निर्धारण के लिए उपयोगी है।
(b) जीन प्रारूप एवं लक्षण प्रारूप (Genotype and Phenotype)
जीन प्रारूप (Genotype): आनुवंशिक संरचना, जैसे TT (समयुग्मजी प्रभावी), Tt (विषमयुग्मजी), tt (समयुग्मजी अप्रभावी)। लक्षण प्रारूप (Phenotype): दृश्य/मापनीय लक्षण, जैसे लंबाई। एकिसंकर F2 में जीनोटाइप 1:2:1, फेनोटाइप 3:1; द्विसंकर में 1:2:1:2:4:2:1:2:1 जीनोटाइप, 9:3:3:1 फेनोटाइप। पर्यावरण भी फेनोटाइप प्रभावित करता है।
(c) द्वि-प्रसंकरण प्रयोग (Dihybrid Cross Experiment)
मेंडल ने गोल-पीली बीज (RY/RY) × झुर्री-हरी (ry/ry) संकरण किया। F1 सभी RrYy (गोल-पीली); F2 में 9:3:3:1 अनुपात (315:101:108:32)। यह स्वतंत्र अपव्यूहन सिद्ध करता है, अर्थात् आकार और रंग के जीन अलग गुणसूत्रों पर हैं। आधुनिक रूप से 4 जीनोटाइप वर्गों में वर्गीकृत।
(d) समयुग्मजी एवं विषम युग्मजी (Homozygous and Heterozygous)
समयुग्मजी (Homozygous): दोनों एलील समान - TT/tt (शुद्ध, स्वपरागण से समरूप संतति)। विषमयुग्मजी (Heterozygous): एलील भिन्न - Tt (संकर, स्वपरागण से 3:1 भिन्न संतति)। समयुग्मजी परीक्षण संकरण से पहचाने जाते हैं।
(e) बैक क्रॉस या प्रतीप या पूर्वज संकरण (Back Cross)
F1 संकर (Tt) को अप्रभावी माता (tt) से संकरण। अनुपात 1 लंबा:1 बौना विषमयुग्मजिता सिद्ध करता है। सुधारित बैक क्रॉस प्रभावी माता से भी। उपयोग: संकरता जाँच, पादप प्रजनन।
प्रश्न 3: सहलग्नता (Linkage) क्या है? उदाहरण सहित इसकी व्याख्या कीजिए।
सहलग्नता: एक ही गुणसूत्र पर स्थित जीनों का एक साथ वंशागति होना, मेण्डल के स्वतंत्र अपव्यूहन का अपवाद। थॉमस हंट मॉर्गन ने ड्रोसोफिला में खोजा।
प्रकार:
पूर्ण सहलग्नता: कोई क्रॉसिंग ओवर नहीं, पैतृक संयोजन बरकरार (ग्रे बॉडी-लॉन्ग विंग)।
अपूर्ण सहलग्नता: क्रॉसिंग ओवर से रीकॉम्बिनेंट (RF = क्रॉसओवर/कुल × 100)।
उदाहरण: ड्रोसोफिला X-कणिका पर y (पीली बॉडी) और w (श्वेत आँख) जीन सहलग्न। मादा yw/+ + × नर yw/Y → मादा संतति में 100% पैतृक (yw या ++), लेकिन क्रॉसओवर से रीकॉम्बिनेंट। जीन दूरी मैपिंग के लिए उपयोगी। महत्व: जीन मैपिंग, आनुवंशिक मानचित्र।
प्रश्न 4: टिप्पणी लिखिए
(a) अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete Dominance)
अपूर्ण प्रभाविता में न तो प्रभावी और न ही अप्रभावी एलील पूर्णतः प्रभावी होता है, बल्कि F1 में दोनों का मिश्रण (मध्यवर्ती) लक्षण प्रकट होता है। उदाहरण: मिराबिलिस जलापा (श्वानबल) के पुष्प रंग में लाल फूल (RR) × सफेद (rr) → F1 गुलाबी (Rr); F2 में 1 लाल: 2 गुलाबी: 1 सफेद (जीनोटाइप 1:2:1, फेनोटाइप भी 1:2:1)। यह मेण्डल के प्रभाविता नियम का अपवाद है क्योंकि कोई पूर्ण प्रभाविता नहीं होती।
(b) सह-प्रभाविता (Co-dominance)
सह-प्रभाविता में दोनों विपरीत एलील एक साथ पूर्ण रूप से अभिव्यक्त होते हैं, कोई मिश्रण नहीं। उदाहरण: मनुष्य में ABO रक्त समूह - IAIB जीनोटाइप वाले AB रक्त समूह में A और B दोनों एंटीजन RBC पर मौजूद। लाल (RR) × सफेद (rr) से F1 में दोनों लक्षण अलग-अलग दिखते हैं। F2 अनुपात भी 1:2:1।
(c) बहुरूपी जीन (Pleiotropic Gene)
बहुरूपी जीन एकल जीन द्वारा एक से अधिक लक्षणों का नियंत्रण। उदाहरण: मटर में स्टार्च संश्लेषण जीन (B/b) - BB बड़े स्टार्च दाने, चिकने बीज; bb छोटे दाने, झुर्रीदार बीज; साथ ही बीज का आकार, स्वाद भी प्रभावित। सिकल सेल एनीमिया (HbS) में हीमोग्लोबिन जीन रक्तकोशिका आकार, ऑक्सीजन क्षमता दोनों प्रभावित करता है।
(d) बहुविकल्पी ऐलील्स एवं बहुविकल्पिता (Multiple Alleles)
बहुविकल्पिता में एक लक्षण के लिए दो से अधिक एलील्स (लोकस पर)। मेण्डल के दो एलील के विपरीत। उदाहरण: मनुष्य में ABO रक्त समूह (IA, IB, i) - IA, IB सह-प्रभावी, i अप्रभावी; 6 फेनोटाइप (A,B,AB,O), 8 जीनोटाइप। फर कलर में C, cd, ch, c।
प्रश्न 5: जीन की पारस्परिक क्रिया या अन्योन्य क्रिया से आप क्या समझते हैं? घातक जीन, पूरक जीन, प्रबल जीन एवं प्रतिलिपि जीन के अन्तक्रिया को उदाहरण देकर समझाइए।
जीन की पारस्परिक क्रिया: दो या अधिक जीनों का एक लक्षण पर संयुक्त प्रभाव, मेण्डल के स्वतंत्र अपव्यूहन से परे।
घातक जीन (Lethal Gene): जीन जो जीव की जीवनक्षमता समाप्त करता है। उदाहरण: माउस में पीली कोट (AY) - AY AY भ्रूण मृत, AY A भूरे-पीले। मनुष्य में हंटिंग्टन रोग प्रभावी घातक।
पूरक जीन (Complementary Gene): दो प्रभावी जीन मिलकर ही लक्षण प्रकट करते हैं। उदाहरण: मीठे मटर में बैंगनी फूल (C_ P_) - cc या pp सफेद; 9:7 अनुपात। मनुष्य में मूक-बधिरता।
प्रबल जीन (Epistatic Gene): एक जीन दूसरे जीन के प्रभाव को दबाता/निरोध करता। उदाहरण: कुत्ते में काला रंग (B_) लेकिन E_ काला; ee भूरा (9:3:4)। प्रभावी एपिस्टेसिस।
प्रतिलिपि जीन (Duplicate Gene): दो या अधिक जीन समान लक्षण के लिए, एक का अभाव दूसरे से पूरित। उदाहरण: खरगोश में आँख रंग - दो जीन, एक पर्याप्त (15:1 अनुपात)।
प्रश्न 6: बाह्य नाभिकीय या बाह्य गुणसूत्रीय अथवा कोशिकाद्रव्यीय वंशागति (Cytoplasmic Inheritance) क्या है? उदाहरण सहित समझाइये।
कोशिकाद्रव्यीय वंशागति: माइटोकॉन्ड्रिया/DNA या क्लोरोप्लास्ट DNA द्वारा वंशागति, नाभिकीय जीन से स्वतंत्र; मादा द्वारा एकपक्षीय। गुणसूत्र विभाजन में भाग नहीं लेती।
उदाहरण:
मिराबिलिस जलापा में पुष्प वर्णक (मादा वंशानुगत)।
मक्का में स्ट्रिकलीफ पैटर्न (प्लास्मागीन)।
ड्रोसोफिला में CO2 संवेदनशीलता (maternal)।
प्रश्न 7: निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये
(a) माइटोकॉण्ड्रियल वंशागति
माइटोकॉन्ड्रियल DNA (mtDNA) द्वारा वंशागति, मादा एकपक्षीय (वीर्य में न्यून mtDNA)। उदाहरण: मांसपेशी रोग (Leber's), मातृ वंशानुगत। mtDNA 37 जीन, ATP उत्पादन।
(b) पौधों (मक्का) में नर बन्ध्यता (Male Sterility in Plants)
मक्का में CMS (Cytoplasmic Male Sterility) - माइटोकॉन्ड्रियल प्लास्मिड टेक्सिन द्वारा परागकोश अपकृष्ट। हाइब्रिड बीज उत्पादन में उपयोगी (F1 में बंध्य, restorer जीन से पुनः उर्वर)। Tx1, S प्लास्मिड।
प्रश्न 8: जीन विनिमय (Crossing Over) को परिभाषित करते हुए इसकी क्रियाविधि, इसके प्रकार एवं महत्व का सचित्र वर्णन कीजिए।
परिभाषा: जीन विनिमय अर्द्धसूत्री विभाजन-I की प्रोफेज-I (जाइगोटीन/पैकिटीन अवस्था) में समजात गुणसूत्रों के नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच जीनों/खण्डों की अदला-बदली है। इससे नये जीन संयोजन बनते हैं।
क्रियाविधि (चरणबद्ध):
सिनैप्सिस: जाइगोटीन में समजात गुणसूत्र जोड़े बनाते हैं (टेट्राड/वाइवैलेंट)।
पैकिटीन: क्रोमैटिड्स कुण्डली बनाकर लिपटते हैं, चिआज़्माटा (X-आकार) बनते हैं।
टूटन: चिआज़्माटा पर एंडोन्यूक्लिएज से नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स टूटते हैं।
विनिमय: टूटे खण्डों की अदला-बदली (रिकॉम्बिनेशन), लाइगेज से पुनर्जोड़।
टर्मिनलाइजेशन: डिप्लोटीन में चिआज़्माटा ध्रुवों की ओर सरकते हैं।
प्रकार:
अभिन्नीय (Terminal): चिआज़्माटा छोर पर।
अन्तःखण्डीय (Interstitial): मध्य में।
एक/बहु-चिआज़्माटा: एक या अनेक।
महत्व: आनुवंशिक विविधता, जीन मैपिंग, विकासीय अनुकूलन, हाइब्रिड फसलें।
प्रश्न 9: लिंग निर्धारण (Sex determination) क्या है? समझाइये।
लिंग निर्धारण: भ्रूण में नर/मादा लिंग का विकास नियंत्रित करने वाली आनुवंशिक/पर्यावरणीय प्रक्रिया।
प्रकार:
क्रोमोसोमल: XX-मादा, XY-नर (मानव, ड्रोसोफिला); ZW-ZZ (पक्षी); XO (टिड्डी)।
मानव में: नर XY (44+XY), मादा XX (44+XX)। शुक्राणु X/Y (50:50), अंडाणु X → XX (मादा 50%), XY (नर 50%)।
जीन नियंत्रण: SRY जीन (Y पर) टेस्टिस निर्धारण, TDF (Testis Determining Factor)।
अन्य: पर्यावरणीय (कछुए-तापमान), हैप्लो-डिप्लॉयड (मधुमक्खी-नर ड्रोन)।
प्रश्न 10: लिंग सहलग्न वंशागति (Sex-linked Inheritance) से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित समझाइये।
लिंग सहलग्न वंशागति: लिंग गुणसूत्रों (X/Y) पर स्थित जीनों की वंशागति, क्रॉस-क्रॉस पैटर्न।
प्रकार:
X-सहलग्न: X पर (Y पर समकक्ष नहीं), अप्रभावी - क्रिस-क्रॉस (पिता→पुत्री, माता→पुत्र/पुत्री)।
Y-सहलग्न: Y पर, पिता→पुत्र।
XY-सहलग्न: दोनों पर समजात।
उदाहरण:
वर्णान्धता (Colour Blindness): Xc जीन। सामान्य महिला (XC XC) × वर्णान्ध पुरुष (Xc Y) → पुत्री वाहक (XC Xc), पुत्र सामान्य (XC Y)।
वाहक महिला (XC Xc) × सामान्य पुरुष → 50% पुत्र वर्णान्ध।हीमोफीलिया: Xh जीन, रक्त का थक्का न जमना। समान पैटर्न।
ड्रोसोफिला: सफेद आँख (w) X-सहलग्न।



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