B.Sc. Botany (C.G.) Third Year – UNIT 1, Second Question Paper Long & Short Answer Questions

 





                                                                            B.Sc. BOTANY  (C.G.)

Third Year – Second Question Paper


बी.एससी. (सी.जी.)
तृतीय वर्ष 

इकाई 1

Cell Biology 

दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1: कोशिका की परासंरचना तथा कार्यों का वर्णन कीजिए।

कोशिका की परासंरचना इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा अध्ययन की जाती है, जिसमें केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया, क्लोरोप्लास्ट, एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम, गॉल्जी बॉडी, राइबोसोम, लाइसोसोम आदि अंगक शामिल हैं। ये अंगक विशिष्ट कार्य जैसे प्रोटीन संश्लेषण, ऊर्जा उत्पादन (माइटोकॉन्ड्रिया में ATP), प्रकाश संश्लेषण (क्लोरोप्लास्ट में), पदार्थ परिवहन और अपघटन (लाइसोसोम में) करते हैं। कोशिका भित्ति और प्लाज्मा झिल्ली बाहरी संरचना प्


कोशिका की परासंरचना इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा अध्ययन की जाती है, जिसमें केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया, क्लोरोप्लास्ट, एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम, गॉल्जी बॉडी, राइबोसोम, लाइसोसोम आदि अंगक शामिल हैं। ये अंगक विशिष्ट कार्य जैसे प्रोटीन संश्लेषण, ऊर्जा उत्पादन (माइटोकॉन्ड्रिया में ATP), प्रकाश संश्लेषण (क्लोरोप्लास्ट में), पदार्थ परिवहन और अपघटन (लाइसोसोम में) करते हैं। कोशिका भित्ति और प्लाज्मा झिल्ली बाहरी संरचना प्रदान करती हैं।

प्रश्न 2: कोशिका भित्ति की संरचना तथा कार्यों का वर्णन कीजिए।

कोशिका भित्ति प्लाज्मा झिल्ली के बाहर कठोर परत होती है, जो पादपों, कवक और बैक्टीरिया में पाई जाती है तथा मुख्यतः सेल्युलोज (40-50%), हेमीसेल्युलोज, पेक्टिन और लिग्निन से बनी होती है। इसके कार्यों में कोशिका को आकृति प्रदान करना, यांत्रिक सुरक्षा देना, स्फीति (turgor pressure) बनाए रखना, समीपवर्ती कोशिकाओं को प्लाज्मोडेस्माटा द्वारा जोड़ना और फिल्टर कार्य शामिल हैं।

प्रश्न 3: प्लाज्मा झिल्ली की संरचना एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।

प्लाज्मा झिल्ली फ्लूइड मोज़ेक मॉडल पर आधारित होती है, जिसमें फॉस्फोलिपिड बाइलेयर के बीच अंतर्निहित प्रोटीन (इंटीग्रल और पेरिफेरल), कोलेस्ट्रॉल और ग्लाइकोप्रोटीन होते हैं। इसके कार्य कोशिका को आकृति और अखंडता प्रदान करना, चयनात्मक पारगमन (निष्क्रिय विसरण, सक्रिय परिवहन, एंडोसाइटोसिस), संकेन्द्रण ग्रेडिएंट बनाए रखना और कोशिका संकेतन (सिग्नल ट्रांसडक्शन) हैं।

प्रश्न 4: राइबोसोम क्या है? राइबोसोम की संरचना, वितरण, प्रकार एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।


राइबोसोम rRNA (60%) और प्रोटीन (40%) से बने गोलाकार कण (15-25 nm व्यास) हैं, जो दो उपइकाइयों (छोटी और बड़ी) से निर्मित होते हैं। प्रकार: 70S (प्रोकैरियोटिक: 30S+50S) और 80S (यूकैरियोटिक: 40S+60S); वितरण: कोशिकाद्रव्य में स्वतंत्र (फ्री) या RER पर संबद्ध। मुख्य कार्य mRNA पर ट्रांसलेशन द्वारा प्रोटीन संश्लेषण है।

प्रश्न 5: एण्डोप्लाज्मिक रेटिकुलम (ER) की संरचना एवं कार्यों का वर्णन कीजिए।

ER झिल्ली-युक्त नलिकाओं, थैलियों (सिस्टर्नी) और वेसिकल्स का जाल है, जो दो प्रकार का होता है: खुरदुरा ER (RER, राइबोसोम युक्त) और सुगम ER (SER)। RER प्रोटीन संश्लेषण, फोल्डिंग, ग्लाइकोसिलेशन और गॉल्जी की ओर परिवहन करता है; SER लिपिड/स्टेरॉयड संश्लेषण, detoxification (लिवर में), ग्लाइकोजन ब्रेकडाउन और कैल्शियम भंडारण।

प्रश्न 6: गॉल्जीकाय (Golgi Body) क्या है? इसकी संरचना, रासायनिक संगठन तथा कार्यों का वर्णन कीजिए।

गॉल्जी बॉडी 4-8 चपटी सिस्टर्नी (झिल्ली थैलियाँ) से बनी होती है, जिसमें सिस-गोल्जी नेटवर्क (Cis face), मीडियन सिस्टर्नी और ट्रांस-गोल्जी नेटवर्क (Trans face) होते हैं। रासायनिक संगठन में फॉस्फोलिपिड्स, प्रोटीन, एंजाइम (ग्लाइकोसिल ट्रांसफरेस) और बहुलक प्रमुख हैं। कार्य: प्रोटीन/लिपिड संश्लेषण और संशोधन, लाइसोसोम/स्रावी पुटिकाएँ बनाना, पादपों में पेक्टिन/हेमीसेल्युलोज संश्लेषण।

प्रश्न 7: निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए

(a) माइटोकॉन्ड्रिया


माइटोकॉन्ड्रिया दोहरी झिल्ली युक्त (बाहरी चिकनी, आंतरिक क्रिस्टी युक्त) कोशिकांग है, जिसे कोशिका का 'शक्ति गृह' कहा जाता है। यह मैट्रिक्स में स्वयं का DNA रखता है और ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलेशन द्वारा ATP ऊर्जा उत्पन्न करता है।

(b) हरित लवक (Chloroplast)

हरित लवक दोहरी झिल्ली, स्ट्रोमा और थायलाकॉइड (ग्रेनम) से बना पादप कोशिकांग है, जिसमें क्लोरोफिल रंगद्रव्य होता है। मुख्य कार्य प्रकाश संश्लेषण द्वारा कार्बोहाइड्रेट संश्लेषण।

(c) लाइसोसोम

लाइसोसोम एकल झिल्ली युक्त थैली है, जिसमें हाइड्रोलिटिक एंजाइम (प्रोटीज, लाइपेज) होते हैं। कार्य: मैक्रोमॉलिक्यूल्स का पाचन, स्व-भक्षण (ऑटोफैगी) और 'सुसाइड बैग' के रूप में कोशिका मृत्यु।

(d) पराक्सीसोम

पराक्सीसोम एकल झिल्ली युक्त, मैट्रिक्स में कैटालेस एंजाइम वाला कोशिकांग है। कार्य: हाइड्रोजन पेरोक्साइड विघटन, वसा अम्ल β-ऑक्सीकरण और detoxification।

(e) कोशिका अंतस्थ या अन्तर्द्रव्य (Cell Inclusions)

कोशिका अंतस्थ गैर-जीवित, स्थायी पदार्थ जैसे ग्लाइकोजन कण, वसा बूंदें, स्टार्च दाने हैं। ये चयापचय उत्पाद हैं, भंडारण कार्य करते हैं लेकिन विभाजन में भाग नहीं लेते।

प्रश्न 8: केन्द्रक (Nucleus) की परासंरचना तथा कार्यों का वर्णन कीजिए।

केन्द्रक दोहरी झिल्ली (न्यूक्लियर लैमिना सहित), न्यूक्लियोप्लाज्म, न्यूक्लियोलस और क्रोमाटिन से बना प्रमुख कोशिकांग है। कार्य: आनुवंशिक सूचना संग्रहण (DNA), mRNA संश्लेषण (ट्रांसक्रिप्शन), राइबोसोम निर्माण (न्यूक्लियोलस द्वारा) और कोशिका विभाजन नियंत्रण।

प्रश्न 9: गुणसूत्र (Chromosome) की रचना का वर्णन कीजिए।

गुणसूत्र DNA और हिस्टोन प्रोटीन से बने क्रोमाटिन के सर्पिलित धागे हैं, जो मेटाफेज में संकुचित होकर दिखाई देते हैं। इसमें सेंट्रोमियर (केंद्रीय संकुचन), टेलोमियर (अग्रसिरा), क्रोमैटिड (दो समान भाग), जीन और क्वैंड (बैंड) होते हैं।

प्रश्न 10: गुणसूत्र की परासंरचना (Ultrastructure) का वर्णन कीजिए।

गुणसूत्र की परासंरचना में न्युक्लियोसोम (DNA हिस्टोन के चारों ओर लिपटा), सोलनॉइड, लूप और स्कैफोल्ड प्रोटीन संरचना शामिल है। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में 30 nm फाइबर, रेडियल लूप मॉडल (300-700 लूप) और सेंट्रोमियर पर काइनेटोकोर दिखता है।

प्रश्न 11: विशिष्ट प्रकार के गुणसूत्रों की संरचना एवं कार्यों पर एक लेख लिखिए।

विशिष्ट गुणसूत्रों में एक्रोसेंट्रिक (सेंट्रोमियर एक सिरे पर), मेटासेंट्रिक (केंद्रीय), सबमेटासेंट्रिक (सबकेंद्रीय), टेलोसेंट्रिक (अंत पर) और होलोसेंट्रिक (पूरे लंबाई पर) प्रकार होते हैं। एक्रोसेंट्रिक में छोटा उपभुजा (p आर्म) पर सैटेलाइट/NOR (न्यूक्लियोलर ऑर्गनाइजर रीजन) rRNA जीन के लिए; मेटासेंट्रिक सममित विभाजन हेतु। कार्य: सेंट्रोमियर काइनेटोकोर बंधन, टेलोमियर स्थिरता, सेकंडरी कंस्ट्रिक्शन rRNA संश्लेषण।

प्रश्न 12: कोशिका चक्र (Cell Cycle) तथा उसकी प्रावस्थाओं का वर्णन कीजिए।

कोशिका चक्र इंटरफेज (G1, S, G2) और M-फेज (मेटाफेज, एना-, टेलो-, साइटोकाइनेसिस) से मिलकर लगभग 24 घंटे का चक्र है। G1: वृद्धि/प्रोटीन संश्लेषण; S: DNA प्रतिकृति; G2: तैयारी; M: गुणसूत्र विभाजन। चेकपॉइंट्स (G1/S, G2/M) CDK साइक्लिन नियंत्रित।

प्रश्न 13: कोशिका विभाजन एवं उसकी प्रावस्थाओं का वर्णन कीजिए।


कोशिका विभाजन कोशिका चक्र का M-फेज है, जिसमें कैरियोकीनेसिस (नाभिक विभाजन) और साइटोकाइनेसिस (कोशिकाद्रव्य विभाजन) होता है। प्रावस्थाएँ: पूर्वावस्था (गुणसूत्र संघनन), मध्यावस्था (विषुवत् रेखा पर संरेखण), पश्चावस्था (क्रोमैटिड पृथक्करण), अन्त्यावस्था (नाभिक पुनर्निर्माण)।

प्रश्न 14: समसूत्री विभाजन (Mitosis) की विभिन्न प्रावस्थाओं का वर्णन कीजिए तथा यह किस प्रकार अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis) से भिन्न है? विवेचना करें।


समसूत्री विभाजन कायिक कोशिकाओं में होता है: पूर्वावस्था (क्रोमैटिन गुणसूत्र → क्रोमैटिड, केन्द्रक विघटन), मध्यावस्था (सेन्ट्रोमियर मध्य रेखा पर), पश्चावस्था (क्रोमैटिड विपरीत ध्रुव), अन्त्यावस्था (नाभिक निर्माण)। अर्द्धसूत्री से भिन्न: एक विभाजन vs दो, समरूप संतति vs अगुणित विविध संतति, कोई क्रॉसिंग ओवर नहीं vs होता है।

प्रश्न 15: समसूत्री एवं अर्द्धसूत्री विभाजन में अन्तर लिखिए।

विशेषतासमसूत्री विभाजनअर्द्धसूत्री विभाजन
स्थानकायिक कोशिकाएँजनन कोशिकाएँ
विभाजन संख्याएकदो (I और II)
संतति कोशिकाएँ2 द्विगुणित, समरूप4 अगुणित, विविध
क्रॉसिंग ओवरअनुपस्थितउपस्थित (प्रोफेज-I)
गुणसूत्र व्यवस्थामेटाफेज में द्विगुणित जोड़ेमेटा-I में एकल, मेटा-II में द्विगुणित 

प्रश्न 16: अर्द्धसूत्री विभाजन क्या है? पौधों में अर्द्धसूत्री विभाजन की विभिन्न प्रावस्थाओं का सचित्र वर्णन कीजिये तथा इसका महत्व लिखिये।

अर्द्धसूत्री विभाजन जनन कोशिकाओं में अगुणित गैमेट निर्माण हेतु दो क्रमिक विभाजन है। पौधों में प्रावस्थाएँ: मियोसिस-I (प्रोफेज-I: लेप्टोटीन, जाइगोटीन-क्रॉसिंग ओवर, पॅकिटीन, डिप्लोटीन, डiakinesis; मेटा-I: द्विगुणित विषुवत्; अना-I: होमोलॉगस पृथक; टेलो-I), मियोसिस-II (समसूत्री जैसा)। महत्व: आनुवंशिक विविधता, गैमेट निर्माण।

प्रश्न 17: गुणसूत्रीय विपथन (Chromosomal Aberrations) या परिवर्तन क्या है? गुणसूत्रों की संरचना में होने वाले प्रमुख परिवर्तनों का सचित्र वर्णन कीजिए।

गुणसूत्रीय विपथन गुणसूत्र संख्या या संरचना में परिवर्तन है। संरचनात्मक: विलोपन (Deletion: भाग गायब, क्राई-डू-चैट), दोहराव (Duplication), व्युत्क्रमण (Inversion: उल्टा), ट्रांसलोकेशन (आदान-प्रदान), रिंग/आइसोक्रोमोसोम। संख्यात्मक: एनेप्लॉयडी (ट्राइसॉमी-21 डाउन सिंड्रोम)।

प्रश्न 18: बहुगुणिता (Polyploidy) क्या है? यह किस प्रकार उत्पन्न होती है? इसके प्रकारों तथा महत्वों का संक्षेप में वर्णन कीजिये।

बहुगुणिता गुणसूत्र संख्या में पूर्ण गुणज (3n, 4n आदि) वृद्धि है। उत्पत्ति: पूर्ण विफलता (अन्युक्लियर मियोसिस), अंतःप्रजनन (अनरिप्ड गैमेट), कोल्चिसिन। प्रकार: ऑटोपॉलीप्लॉयडी (एक प्रजाति, e.g. ट्रायप्लॉयड केला), एलोपॉलीप्लॉयडी (दो प्रजातियाँ, e.g. गेहूँ)। महत्व: बड़ा आकार, बंध्यता (ट्रायप्लॉयड), फसल सुधार (गेहूँ 6x), विकास।


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