B.Sc. Chemistry (C.G.)
Third Year – First Question Paper
दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न
Q1. जैव-अकार्बनिक रसायन क्या है? समझाइये।
जैव-अकार्बनिक रसायन (Bioinorganic Chemistry) रसायन विज्ञान की वह शाखा है जिसमें जीवित तंत्रों में उपस्थित अकार्बनिक तत्वों, धातुओं तथा उनके यौगिकों की संरचना, गुण, कार्य एवं भूमिका का अध्ययन किया जाता है। जीवित शरीर में केवल कार्बनिक अणु ही महत्वपूर्ण नहीं होते, बल्कि अनेक धातु आयन जैसे Fe, Cu, Zn, Mg, Ca आदि भी अत्यंत आवश्यक होते हैं। ये धातु आयन एन्जाइमों के सक्रिय केंद्र (active site) में उपस्थित होकर जैव अभिक्रियाओं को तीव्र करते हैं। उदाहरण के लिए हीमोग्लोबिन में Fe²⁺ ऑक्सीजन परिवहन करता है, क्लोरोफिल में Mg²⁺ प्रकाश संश्लेषण में सहायक होता है तथा Zn²⁺ अनेक एन्जाइमों में सह-कारक (cofactor) के रूप में कार्य करता है। इस प्रकार जैव-अकार्बनिक रसायन जीवन प्रक्रियाओं और अकार्बनिक तत्वों के बीच संबंध को स्पष्ट करता है।
Q2. जैविक प्रक्रियाओं में आवश्यक तत्वों का वर्णन कीजिये।
मानव शरीर तथा अन्य जीवों में लगभग 25 तत्व आवश्यक माने जाते हैं। इन्हें तीन वर्गों में बाँटा जाता है:
-
मुख्य तत्व (Major elements):
C, H, O, N, P, S — ये शरीर के लगभग 96% भाग बनाते हैं और प्रोटीन, DNA, कार्बोहाइड्रेट आदि के निर्माण में भाग लेते हैं। -
मैक्रो मिनरल्स:
Na, K, Ca, Mg, Cl — ये आयनिक संतुलन, तंत्रिका संचरण, मांसपेशी संकुचन और हड्डियों के निर्माण में सहायक होते हैं। -
सूक्ष्म तत्व (Trace elements):
Fe, Cu, Zn, Co, Mn, Mo आदि — कम मात्रा में आवश्यक होते हैं परंतु एन्जाइम क्रिया, ऑक्सीजन परिवहन और हार्मोन निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इन तत्वों की कमी या अधिकता से विभिन्न रोग उत्पन्न हो सकते हैं।
Q3. अधिक मात्रा में CO (कार्बन मोनोऑक्साइड) के कारण मृत्यु हो सकती है, समझाइए।
कार्बन मोनोऑक्साइड एक अत्यंत विषैली गैस है। यह हीमोग्लोबिन के Fe²⁺ आयन से ऑक्सीजन की तुलना में लगभग 200 गुना अधिक दृढ़ता से जुड़ती है और कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन (HbCO) बनाती है। परिणामस्वरूप हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को वहन नहीं कर पाता और शरीर के ऊतकों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है। इससे कोशिकीय श्वसन बाधित हो जाता है और मस्तिष्क तथा हृदय जैसे अंगों को ऑक्सीजन नहीं मिलती। इसके लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर, बेहोशी और अंततः मृत्यु शामिल हैं। बंद कमरे में अंगीठी या वाहन का धुआँ CO विषाक्तता का सामान्य स्रोत है।
Q4. आवश्यक तत्वों के जैविक कार्यों का वर्णन कीजिये।
आवश्यक तत्व शरीर में अनेक महत्वपूर्ण कार्य करते हैं:
- Fe: ऑक्सीजन परिवहन (हीमोग्लोबिन)
- Ca: हड्डियों व दाँतों का निर्माण, रक्त का थक्का जमना
- Mg: ATP क्रियाओं और प्रकाश संश्लेषण में भूमिका
- Na और K: तंत्रिका आवेग संचरण और द्रव संतुलन
- Zn: एन्जाइम सक्रियण और DNA संश्लेषण
- Cu: ऑक्सीकरण-अपचयन एन्जाइमों में भागीदारी
ये तत्व एन्जाइमों के सह-कारक, संरचनात्मक घटक तथा आयनिक संतुलन बनाए रखने में आवश्यक हैं। इनके बिना जीवन प्रक्रियाएँ सामान्य रूप से नहीं चल सकतीं।
Q5. जैविक तंत्र में Cu (कॉपर) तथा Zn (जिंक) का योगदान लिखिए।
कॉपर (Cu):
कॉपर कई ऑक्सीडेज एन्जाइमों में उपस्थित रहता है जैसे साइटोक्रोम ऑक्सीडेज। यह इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला में भाग लेकर ऊर्जा उत्पादन में सहायक होता है। कॉपर हीमोग्लोबिन के निर्माण और आयरन के चयापचय में भी भूमिका निभाता है।
जिंक (Zn):
जिंक 300 से अधिक एन्जाइमों का सह-कारक है। यह DNA और RNA संश्लेषण, प्रतिरक्षा प्रणाली तथा घाव भरने में महत्वपूर्ण है। कार्बोनिक एनहाइड्रेज एन्जाइम में Zn²⁺ उपस्थित होता है जो CO₂ के परिवहन में सहायक है।
Q6. लाभकारी एवं विषैले तत्व क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
जीवित तंत्र में उपस्थित तत्वों को उनके प्रभाव के आधार पर लाभकारी (Beneficial) तथा विषैले (Toxic) तत्वों में विभाजित किया जाता है।
लाभकारी तत्व वे होते हैं जो शरीर की सामान्य जैविक क्रियाओं के लिए आवश्यक होते हैं और उचित मात्रा में शरीर के विकास तथा स्वास्थ्य को बनाए रखते हैं। उदाहरण के लिए Fe, Cu, Zn, Ca, Mg आदि तत्व एन्जाइम क्रिया, ऑक्सीजन परिवहन, हड्डियों के निर्माण तथा तंत्रिका संचरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसके विपरीत विषैले तत्व वे होते हैं जो शरीर में प्रवेश करने पर जैविक क्रियाओं को बाधित करते हैं और रोग उत्पन्न करते हैं। उदाहरण के लिए Pb (सीसा), Hg (पारा), Cd (कैडमियम), As (आर्सेनिक) आदि एन्जाइमों को निष्क्रिय कर देते हैं। कई बार आवश्यक तत्व भी अधिक मात्रा में विषैले बन जाते हैं, जैसे अधिक मात्रा में Cu या Fe। इसलिए इन तत्वों की संतुलित मात्रा अत्यंत आवश्यक है।
Q7. हीमोग्लोबिन के संदर्भ में सहकारिता या बोहर प्रभाव (Bohr Effect) क्या है?
Bohr effect वह परिघटना है जिसमें रक्त का pH और CO₂ की मात्रा हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन के प्रति बन्धुता को प्रभावित करती है। जब शरीर के ऊतकों में CO₂ की मात्रा अधिक हो जाती है, तो CO₂ पानी से मिलकर कार्बोनिक अम्ल बनाता है जिससे pH कम हो जाता है। कम pH की स्थिति में हीमोग्लोबिन की O₂ के प्रति बन्धुता घट जाती है और वह ऑक्सीजन को आसानी से छोड़ देता है।
इसके विपरीत फेफड़ों में pH अधिक होने के कारण हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को आसानी से ग्रहण करता है। यह प्रक्रिया शरीर के विभिन्न भागों तक ऑक्सीजन की उचित आपूर्ति सुनिश्चित करती है। इसी कारण इसे सहकारी प्रभाव भी कहते हैं क्योंकि एक ऑक्सीजन अणु के जुड़ने से अन्य ऑक्सीजन अणुओं के जुड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
Q8. जैव अणुओं में संक्रमण धातुओं की भूमिका क्या है? धातु युक्त अणुओं का वर्गीकरण समझाइए।
संक्रमण धातुएँ जैसे Fe, Cu, Co, Mn, Mo जैविक तंत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनमें परिवर्ती ऑक्सीकरण अवस्थाएँ और समन्वय बनाने की क्षमता होती है। ये एन्जाइमों के सक्रिय केंद्र में उपस्थित होकर रेडॉक्स अभिक्रियाओं को संचालित करते हैं। उदाहरण के लिए Fe हीमोग्लोबिन में ऑक्सीजन परिवहन करता है और Co विटामिन B₁₂ में उपस्थित होता है।
धातु युक्त जैव अणुओं का वर्गीकरण:
- Metalloproteins – जिनमें धातु आयन सीधे प्रोटीन से जुड़े होते हैं (हीमोग्लोबिन)।
- Metalloenzymes – जिनमें धातु एन्जाइम क्रिया में भाग लेती है (कार्बोनिक एनहाइड्रेज)।
- Metal-activated enzymes – जिनमें धातु सहायक होती है (Mg²⁺ एन्जाइम)।
Q9. हीमोग्लोबिन तथा मायोग्लोबिन के लिए ऑक्सीजन-वियोजन वक्र समझाइए।
ऑक्सीजन-वियोजन वक्र (Oxygen dissociation curve) वह ग्राफ है जो ऑक्सीजन दाब और ऑक्सीजन संतृप्ति के बीच संबंध दर्शाता है।
हीमोग्लोबिन का वक्र S-आकार (sigmoidal) होता है क्योंकि इसमें सहकारिता होती है; एक O₂ के जुड़ने से अन्य O₂ का जुड़ना आसान हो जाता है।
इसके विपरीत मायोग्लोबिन का वक्र हाइपरबोलिक होता है क्योंकि यह एक ही O₂ अणु को बाँधता है और इसमें सहकारिता नहीं होती। मायोग्लोबिन की ऑक्सीजन के प्रति बन्धुता अधिक होती है, इसलिए यह मांसपेशियों में ऑक्सीजन संग्रह करता है जबकि हीमोग्लोबिन परिवहन करता है।
Q10. विभिन्न अधातुओं की विषाक्तता की विवेचना कीजिए।
कई अधातु भी शरीर के लिए विषैले होते हैं। उदाहरण के लिए फ्लोरीन अधिक मात्रा में दाँत और हड्डियों को क्षति पहुँचाता है। क्लोरीन गैस श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है। फॉस्फोरस की अधिक मात्रा यकृत और गुर्दों को नुकसान पहुँचाती है। सल्फर डाइऑक्साइड श्वसन समस्याएँ उत्पन्न करता है।
ये तत्व एन्जाइमों को निष्क्रिय कर देते हैं या कोशिकाओं की संरचना को नुकसान पहुँचाते हैं। विषाक्तता की गंभीरता मात्रा, संपर्क की अवधि और शरीर की संवेदनशीलता पर निर्भर करती है। इसलिए इन तत्वों का नियंत्रित उपयोग आवश्यक है।
Q11. मर्करी (पारा) जैव अभिक्रियाओं में किस तरह कार्य करता है?
मर्करी (Hg) एक अत्यंत विषैला भारी धातु है जो शरीर में प्रवेश करने पर एन्जाइमों की क्रिया को बाधित करता है। यह विशेष रूप से प्रोटीन के सल्फहाइड्रिल (–SH) समूहों से दृढ़ता से जुड़ जाता है, जिससे एन्जाइम निष्क्रिय हो जाते हैं। परिणामस्वरूप कोशिकीय चयापचय और ऊर्जा उत्पादन रुक जाता है। मिथाइल मरकरी (CH₃Hg⁺) इसका सबसे विषैला रूप है जो जल में रहने वाले जीवों में जमा होकर खाद्य श्रृंखला के माध्यम से मनुष्य तक पहुँचता है। यह तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और स्मृति ह्रास, दृष्टि दोष तथा मांसपेशियों के नियंत्रण में कमी उत्पन्न करता है। इसलिए पारा प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
Q12. शरीर में सीसा (Lead) का चयापचय समझाइए। लेड विषाक्तता नष्ट करने का उपाय क्या है?
सीसा (Pb) शरीर में श्वसन या भोजन के माध्यम से प्रवेश करता है और रक्त में लाल रक्त कणिकाओं से जुड़ जाता है। यह हड्डियों, यकृत तथा गुर्दों में जमा हो जाता है और लंबे समय तक शरीर में बना रहता है। सीसा हीम संश्लेषण को बाधित करता है, जिससे एनीमिया उत्पन्न होता है। यह तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित करता है, विशेषकर बच्चों में मानसिक विकास बाधित होता है।
लेड विषाक्तता को दूर करने के लिए Chelation therapy का उपयोग किया जाता है। इसमें EDTA या BAL जैसे यौगिक दिए जाते हैं जो Pb²⁺ आयनों से जुड़कर उन्हें मूत्र के माध्यम से बाहर निकाल देते हैं। स्वच्छ जल और पोषक आहार भी विषाक्तता कम करने में सहायक हैं।
Q13. आर्सेनिक विषाक्तता पर टिप्पणी लिखिए।
आर्सेनिक (As) एक अत्यंत विषैला तत्व है जो प्रायः दूषित जल के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। यह कोशिकीय श्वसन को बाधित करता है क्योंकि यह एन्जाइमों के सल्फर समूहों से जुड़ जाता है। इसके कारण ATP का निर्माण रुक जाता है और कोशिकाएँ ऊर्जा नहीं बना पातीं। आर्सेनिक विषाक्तता के लक्षणों में त्वचा पर धब्बे, पेट दर्द, उल्टी, तंत्रिका विकार और कैंसर तक शामिल हैं। लंबे समय तक संपर्क रहने पर त्वचा, फेफड़े और यकृत का कैंसर हो सकता है। उपचार के लिए chelating agents जैसे BAL का उपयोग किया जाता है और दूषित जल से बचाव अत्यंत आवश्यक है।
Q14. कैडमियम की विषाक्तता से क्या समझते हैं? इसका चयापचय कैसे होता है?
कैडमियम (Cd) एक विषैली भारी धातु है जो औद्योगिक प्रदूषण और धूम्रपान के माध्यम से शरीर में प्रवेश करती है। यह शरीर में धीरे-धीरे जमा होती है और मुख्यतः गुर्दों और हड्डियों को प्रभावित करती है। कैडमियम प्रोटीन से जुड़कर मेटालोथायोनीन नामक यौगिक बनाता है जो गुर्दों में जमा होकर क्षति पहुँचाता है। इससे हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं और गुर्दों की कार्यक्षमता घट जाती है। जापान में “Itai-itai” रोग कैडमियम विषाक्तता का प्रसिद्ध उदाहरण है। उपचार में कैडमियम के स्रोत से बचाव और पोषण सुधार शामिल है।
Q15. क्लोरोफिल पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए (संरचना सहित)।
क्लोरोफिल हरे पौधों में पाया जाने वाला प्रमुख वर्णक है जो प्रकाश संश्लेषण के लिए जिम्मेदार है। इसकी संरचना पोर्फिरिन रिंग जैसी होती है जिसके केंद्र में Mg²⁺ आयन उपस्थित होता है। इसमें एक लंबी फाइटोल श्रृंखला भी होती है जो इसे झिल्ली से जोड़ती है। क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश को अवशोषित कर रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है और CO₂ तथा पानी से ग्लूकोज का निर्माण करता है। यह पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह खाद्य श्रृंखला की शुरुआत करता है और वातावरण में ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है।
प्रश्न 16: हीम प्रोटीन किसे कहते हैं?
उत्तर:
वे प्रोटीन जिनमें हीम (heme) समूह उपस्थित होता है, उन्हें हीम प्रोटीन कहते हैं।
हीम एक लौह-पोर्फिरिन (Fe-porphyrin) संरचना होती है जिसमें Fe²⁺ आयन पोर्फिरिन रिंग के बीच में होता है।
उदाहरण: हीमोग्लोबिन, मायोग्लोबिन, साइटोक्रोम।
प्रश्न 17: हीमोग्लोबिन की संरचना का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
हीमोग्लोबिन एक गोलाकार (globular) प्रोटीन है जो RBC में पाया जाता है। इसकी संरचना:
- यह टेट्रामर होता है → 4 उपइकाइयाँ (subunits)
- संरचना: α₂β₂ (दो α और दो β chains)
-
प्रत्येक उपइकाई में:
- एक हीम समूह
- एक Fe²⁺ आयन (जो O₂ को बाँधता है)
इस प्रकार एक हीमोग्लोबिन अणु 4 O₂ अणु बाँध सकता है।
प्रश्न 18: हीमोग्लोबिन की जैविक क्रिया का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
मुख्य कार्य ऑक्सीजन का परिवहन है।
-
फेफड़ों में:
Hb + O₂ → HbO₂ (ऑक्सीहीमोग्लोबिन) -
ऊतकों में:
HbO₂ → Hb + O₂ (ऑक्सीजन मुक्त)
अन्य कार्य:
- CO₂ का आंशिक परिवहन
- रक्त का pH संतुलन (buffer की तरह)
प्रश्न 19: हीमोग्लोबिन का सहकारी प्रभाव किसे कहते हैं?
उत्तर:
जब एक O₂ अणु हीमोग्लोबिन से जुड़ता है तो बाकी O₂ अणुओं के जुड़ने की क्षमता बढ़ जाती है — इसे Cooperative effect कहते हैं।
इसे समझो ऐसे:
पहला O₂ जुड़ना कठिन → बाद वाले आसानी से जुड़ते हैं।
इसी कारण Hb की O₂ binding curve sigmoidal (S-shape) होती है।
प्रश्न 20: हीमोग्लोबिन द्वारा CO₂ के स्थानान्तरण को समझाइये।
उत्तर:
CO₂ तीन रूपों में परिवहन होता है:
-
70% → बाइकार्बोनेट (HCO₃⁻) के रूप में
CO₂ + H₂O → H₂CO₃ → H⁺ + HCO₃⁻ -
20–25% → कार्बामिनोहीमोग्लोबिन
Hb + CO₂ → HbCO₂ - 5–10% → घुला हुआ CO₂
प्रश्न 20 अ
(अ) नाइट्रोजन स्थिरीकरण को समझाइये।
उत्तर:
वायुमंडलीय N₂ को उपयोगी यौगिकों (NH₃) में बदलना नाइट्रोजन स्थिरीकरण कहलाता है।
मुख्यतः बैक्टीरिया करते हैं:
Rhizobium आदि।
प्रतिक्रिया:
N₂ + 8H⁺ + 8e⁻ → 2NH₃ + H₂
एंजाइम: नाइट्रोजनेज
प्रश्न 20 ब
(ब) मायोग्लोबिन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
उत्तर:
मायोग्लोबिन मांसपेशियों में पाया जाने वाला हीम प्रोटीन है।
विशेषताएँ:
- Monomer (एक ही chain)
- केवल 1 हीम समूह
- O₂ को संग्रह (storage) करता है
- O₂ affinity हीमोग्लोबिन से अधिक होती है
- इसकी binding curve hyperbolic होती है
प्रश्न 21: हीमोग्लोबिन तथा मायोग्लोबिन में अन्तर समझाइये।
उत्तर:
| आधार | हीमोग्लोबिन (Hb) | मायोग्लोबिन (Mb) |
|---|---|---|
| स्थान | RBC (रक्त) | मांसपेशियाँ |
| संरचना | टेट्रामर (α₂β₂) | मोनोमर |
| हीम समूह | 4 | 1 |
| कार्य | O₂ का परिवहन | O₂ का भंडारण |
| O₂ affinity | कम | अधिक |
| बाइंडिंग कर्व | Sigmoidal | Hyperbolic |
| Cooperative effect | होता है | नहीं होता |
प्रश्न 22: “हीमोग्लोबिन के Fe²⁺ आयन का Fe³⁺ आयन में ऑक्सीकरण नहीं होता है।” स्पष्ट कीजिये।
उत्तर:
हीमोग्लोबिन में Fe²⁺ आयन पोर्फिरिन रिंग और ग्लोबिन प्रोटीन से सुरक्षित रहता है।
- ग्लोबिन का हिस्टिडिन अवशेष Fe²⁺ से जुड़ा रहता है।
- यह Fe²⁺ को ऑक्सीकरण से बचाता है।
- यदि Fe²⁺ → Fe³⁺ बन जाए तो मेटहीमोग्लोबिन बनता है, जो O₂ नहीं बाँध सकता।
इसलिए प्रोटीन संरचना Fe²⁺ को स्थिर रखती है।
प्रश्न 23: CO तथा CN हानिकारक प्रभाव उत्पन्न करते हैं। समझाइये।
उत्तर:
(1) CO (कार्बन मोनोऑक्साइड)
- Hb से O₂ की तुलना में 200 गुना अधिक मजबूती से जुड़ता है।
- बनाता है: कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन (HbCO)
- परिणाम: शरीर को O₂ नहीं मिलता → दम घुटना।
(2) CN⁻ (सायनाइड)
- साइटोक्रोम ऑक्सीडेज एंजाइम को रोकता है।
- कोशिकीय श्वसन बंद → ATP बनना बंद → शीघ्र मृत्यु।
प्रश्न 24: कारण स्पष्ट कीजिये
(i) हीमोग्लोबिन का रंग लाल होता है।
Fe²⁺ आयन और पोर्फिरिन रिंग दृश्य प्रकाश को अवशोषित करते हैं और लाल रंग परावर्तित करते हैं। इसलिए रक्त लाल दिखता है।
(ii) हरी सब्जियों में हीमोग्लोबिन नहीं होता फिर भी एनीमिया में दी जाती हैं।
क्योंकि इनमें लौह (Fe), फोलिक अम्ल, विटामिन B₁₂ होते हैं जो RBC और Hb बनाने में मदद करते हैं।
(iii) pH कम होने पर Hb की O₂ बन्धुता कम हो जाती है।
इसे Bohr effect कहते हैं।
कम pH (अधिक CO₂) → ऊतकों में O₂ की अधिक आवश्यकता → Hb आसानी से O₂ छोड़ देता है।
प्रश्न 25: क्षार तथा क्षारीय मृदा धातु आयनों का जैविक महत्व समझाइए।
उत्तर:
(A) क्षार धातु आयन (Na⁺, K⁺)
Na⁺ (सोडियम):
- शरीर के द्रव संतुलन में
- तंत्रिका आवेग संचरण
K⁺ (पोटैशियम):
- हृदय गति नियंत्रण
- कोशिकीय कार्य
(B) क्षारीय मृदा धातु आयन (Mg²⁺, Ca²⁺)
Mg²⁺ (मैग्नीशियम):
- ATP सक्रियण
- एंजाइम क्रियाएँ
Ca²⁺ (कैल्शियम):
- हड्डियाँ व दाँत
- रक्त का थक्का बनना
-
मांसपेशी संकुचन
प्रश्न 26: सोडियम तथा पोटैशियम के जैविकीय योगदान का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
Na⁺ और K⁺ शरीर के सबसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट हैं।
Na⁺ (सोडियम):
- शरीर के द्रव एवं परासरण दाब (osmotic pressure) का नियंत्रण
- तंत्रिका आवेग (nerve impulse) संचरण
- मांसपेशियों का संकुचन
- अम्ल-क्षार संतुलन बनाए रखना
K⁺ (पोटैशियम):
- कोशिका के अंदर मुख्य धनायन
- हृदय की धड़कन को नियंत्रित करता है
- एंजाइम क्रियाओं को सक्रिय करता है
- Na⁺/K⁺ पम्प के माध्यम से झिल्ली विभव बनाए रखता है
दोनों मिलकर तंत्रिका और मांसपेशी कार्यों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
प्रश्न 27: (अ) कैल्सियम आयन का जैविक महत्व। (ब) Ca²⁺ तथा Mg²⁺ का महत्व।
उत्तर:
(अ) Ca²⁺ का महत्व
- हड्डियों व दाँतों का निर्माण
- रक्त का थक्का जमना
- मांसपेशियों का संकुचन
- हार्मोन स्राव में भाग
(ब) Ca²⁺ व Mg²⁺
Mg²⁺:
- ATP को सक्रिय करता है
- 300+ एंजाइम क्रियाओं में सहायक
- क्लोरोफिल का केंद्रीय धातु आयन
Ca²⁺:
- कोशिका संकेत (cell signalling)
- तंत्रिका कार्य
- हृदय क्रिया
प्रश्न 28: (अ) नाइट्रोजीनेज एन्जाइम द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण। (ब) नाइट्रोजन रिडक्टेज का महत्व।
उत्तर:
(अ) Nitrogenase enzyme
N₂ → NH₃ में परिवर्तन को नाइट्रोजन स्थिरीकरण कहते हैं।
यह प्रक्रिया Rhizobium बैक्टीरिया में होती है।
प्रतिक्रिया:
N₂ + 8H⁺ + 8e⁻ → 2NH₃ + H₂
(ब) Nitrogen reductase
- इलेक्ट्रॉन प्रदान करता है
- ATP की सहायता से N₂ को सक्रिय करता है
- बिना इसके नाइट्रोजन स्थिरीकरण सम्भव नहीं।
प्रश्न 29: प्रकृति में नाइट्रोजन चक्र समझाइए।
उत्तर:
नाइट्रोजन चक्र में मुख्य चरण:
- Nitrogen fixation → N₂ → NH₃
- Nitrification → NH₃ → NO₂⁻ → NO₃⁻
- Assimilation → पौधे NO₃⁻ को प्रोटीन में बदलते हैं
- Ammonification → मृत जीव → NH₃
- Denitrification → NO₃⁻ → N₂ वापस वातावरण में
यह चक्र जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न 30: हीमोग्लोबिन तथा मायोग्लोबिन में O₂ स्थानान्तरण की क्रिया।
उत्तर:
- फेफड़ों में Hb O₂ से जुड़कर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाता है।
- ऊतकों में O₂ रिलीज करता है।
- मायोग्लोबिन मांसपेशियों में O₂ संग्रह करता है।
Hb → परिवहन
Mb → भंडारण
प्रश्न 31: Zn²⁺, Mg²⁺, Ca²⁺ का जैविक योगदान।
उत्तर:
Zn²⁺:
- इंसुलिन का घटक
- एंजाइम (कार्बोनिक एनहाइड्रेज) में उपस्थित
- DNA संश्लेषण
Mg²⁺:
- ATP उपयोग में आवश्यक
- क्लोरोफिल का केंद्र
Ca²⁺:
- रक्त का थक्का
- मांसपेशी संकुचन
- हड्डियों का निर्माण
प्रश्न 32: क्लोरोफिल तथा हीमोग्लोबिन में संबंध बताइये।
उत्तर:
| क्लोरोफिल | हीमोग्लोबिन |
|---|---|
| Mg²⁺ केंद्र | Fe²⁺ केंद्र |
| प्रकाश संश्लेषण | O₂ परिवहन |
| पौधों में | जानवरों में |
| हरा रंग | लाल रंग |
दोनों में पोर्फिरिन रिंग संरचना समान होती है।
प्रश्न 33: T-संरचना एवं R-संरचना में अंतर।
उत्तर:
| T-state (Tense) | R-state (Relaxed) |
|---|---|
| O₂ affinity कम | O₂ affinity अधिक |
| DeoxyHb रूप | OxyHb रूप |
| स्थिर संरचना | ढीली संरचना |
| ऊतकों में पाया जाता है | फेफड़ों में पाया जाता है |
O₂ के जुड़ने पर Hb T → R में बदल जाता है।



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