B.Sc. Chemistry (C.G.) Third Year – UNIT 4B, First Question Paper Long & Short Answer Questions

 





                                                                          B.Sc. Chemistry (C.G.)

Third Year – First Question Paper


बी.एससी. रसायन विज्ञान (सी.जी.)
तृतीय वर्ष – प्रथम प्रश्न पत्र

इकाई 4  ( ब ) 

दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न 


Q1. अकार्बनिक बहुलक से आप क्या समझते हैं? इनकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
वे बहुलक जिनकी मुख्य शृंखला (backbone) में कार्बन–कार्बन के स्थान पर अन्य तत्व जैसे Si, P, B, S, N आदि उपस्थित होते हैं, उन्हें अकार्बनिक बहुलक (Inorganic polymers) कहते हैं। उदाहरण: सिलिकोन, फॉस्फाजीन, सल्फर-नाइट्रोजन बहुलक।

विशेषताएँ:

  1. उच्च तापीय स्थिरता – ये उच्च ताप पर भी स्थिर रहते हैं।
  2. रासायनिक निष्क्रियता – अम्ल, क्षार और ऑक्सीकारकों से कम प्रभावित होते हैं।
  3. जलरोधी एवं मौसमरोधी गुण।
  4. विद्युत रोधन गुण उत्कृष्ट होते हैं।
  5. लचीलापन और कम कांच संक्रमण ताप।
  6. जैव-अक्रियता – चिकित्सा उपकरणों में उपयोगी।
  7. दीर्घायु और कम अपघटन।

इन गुणों के कारण इनका उपयोग स्नेहक, सीलेंट, रबर, इन्सुलेटर आदि में होता है।


Q2. सिलिकोन्स क्या होते हैं? सिलिकोन्स की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
सिलिकोन वे अकार्बनिक बहुलक हैं जिनकी मुख्य शृंखला में Si–O–Si (सिलोक्सेन) बंध उपस्थित होते हैं और सिलिकॉन पर एल्किल/एरिल समूह जुड़े रहते हैं।

सामान्य सूत्र: (R₂SiO)n

प्रमुख विशेषताएँ:

  1. उच्च तापीय स्थिरता (–50°C से 250°C तक स्थिर)।
  2. जलरोधी और मौसमरोधी।
  3. कम सतही तनाव – उत्कृष्ट स्नेहक।
  4. उत्कृष्ट विद्युत इन्सुलेटर।
  5. ऑक्सीकरण प्रतिरोधी।
  6. रबर जैसे लचीले या तेल जैसे तरल रूप में उपलब्ध।
  7. जैव-अनुक्रियाशील नहीं – मेडिकल उपयोग के लिए सुरक्षित।

इन्हीं कारणों से इनका उपयोग सीलेंट, ग्रीस, रबर, कुकवेयर कोटिंग, चिकित्सा उपकरणों में होता है।


Q3. सिलिकोन्स के निर्माण में प्रयुक्त विभिन्न पद तथा विधियाँ।

उत्तर:
निर्माण के मुख्य चरण:

(1) ग्रिग्नार्ड अभिक्रिया द्वारा ऑर्गेनो-क्लोरोसिलेन बनाना

SiCl₄ + RMgCl → RSiCl₃ / R₂SiCl₂

(2) हाइड्रोलिसिस

R₂SiCl₂ + H₂O → R₂Si(OH)₂ + HCl

(3) संघनन (Condensation Polymerization)

R₂Si(OH)₂ → (R₂SiO)n + H₂O

इस प्रकार सिलोक्सेन शृंखला बनती है।

उपयोगित मोनोमर:

  • डाइमेथिल डाइक्लोरोसिलेन (सबसे महत्वपूर्ण)
  • मिथाइल ट्राइक्लोरोसिलेन
  • फिनाइल क्लोरोसिलेन

Q4. सिलिकोन्स तथा ऐल्किल सिलोक्सेन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

आधारसिलिकोन्सऐल्किल सिलोक्सेन
संरचनालंबी बहुलक शृंखलाछोटे अणु
अणुभारअधिककम
अवस्थातेल/रबर/रेजिनद्रव
उपयोगसीलेंट, रबरमध्यवर्ती यौगिक
स्थिरताअधिककम

सिलिकोन्स वास्तव में ऐल्किल सिलोक्सेन के बहुलक रूप होते हैं।


Q5. सिलिकोन्स बनाते समय श्रृंखला वृद्धि को कैसे रोका जाता है?

उत्तर:
Chain stopping agents का उपयोग किया जाता है।

उदाहरण:
(CH₃)₃SiCl

यह शृंखला के सिरों को बंद कर देता है।

Reaction:
Si–OH + (CH₃)₃SiCl → Si–O–Si(CH₃)₃

इससे आगे polymerization नहीं होता।
इसे end-capping कहते हैं।


Q6. सिलिकोन्स का सामान्य सूत्र तथा उपयोग।

उत्तर:
सामान्य सूत्र: (R₂SiO)n

उपयोग:

  1. स्नेहक (lubricants)
  2. जलरोधी कोटिंग
  3. रबर एवं सीलेंट
  4. विद्युत इन्सुलेटर
  5. कुकवेयर नॉन-स्टिक कोटिंग
  6. मेडिकल इम्प्लांट
  7. पॉलिश और ग्रीस

Q7. सिलिकोन बनाने में प्रारम्भिक यौगिक और जल-अपघटन।

उत्तर:
प्रारम्भिक यौगिक: ऑर्गेनो क्लोरोसिलेन (R₂SiCl₂)

हाइड्रोलिसिस:
R₂SiCl₂ + 2H₂O → R₂Si(OH)₂ + 2HCl

इसके बाद संघनन:
n R₂Si(OH)₂ → (R₂SiO)n + nH₂O

इस प्रकार सिलिकोन बहुलक बनते हैं।

Q8. सिलिकोन बहुलकों के वर्गीकरण को समझाइये।

उत्तर:
सिलिकोन बहुलकों को उनकी संरचना और क्रॉस-लिंकिंग के आधार पर तीन भागों में बाँटा जाता है:

(1) सिलिकोन तेल (Silicone oils)

ये रैखिक (linear) बहुलक होते हैं जिनकी शृंखला लंबी और लचीली होती है। इनका अणुभार कम होता है और ये तरल अवस्था में रहते हैं। इनका उपयोग स्नेहक, पॉलिश तथा हाइड्रोलिक द्रव के रूप में होता है।

(2) सिलिकोन रबर (Silicone rubber)

ये हल्के क्रॉस-लिंक्ड बहुलक होते हैं। ये लचीले, ताप-प्रतिरोधी और मौसमरोधी होते हैं। इनका उपयोग गैस्केट, सील, ट्यूब आदि बनाने में किया जाता है।

(3) सिलिकोन रेजिन (Silicone resins)

ये अत्यधिक क्रॉस-लिंक्ड त्रि-आयामी संरचना वाले ठोस बहुलक होते हैं। ये कठोर और ताप-प्रतिरोधी होते हैं। इनका उपयोग वार्निश, पेंट तथा विद्युत इन्सुलेटर में होता है।


Q9. कार्बनिक एवं अकार्बनिक बहुलक में अन्तर समझाइये।

उत्तर:

आधारकार्बनिक बहुलकअकार्बनिक बहुलक
मुख्य शृंखलाC–C बन्धSi–O, P–N आदि
ताप स्थिरताकमअधिक
रासायनिक स्थिरताकमअधिक
जलरोधकताकमअधिक
उदाहरणप्लास्टिक, रबरसिलिकोन, फॉस्फाजीन

अकार्बनिक बहुलक अधिक तापीय और रासायनिक स्थिर होते हैं।


Q10. सिलिकोन्स की शक्ति तथा अक्रियता के कारण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
सिलिकोन्स की मजबूती का मुख्य कारण Si–O बन्ध है।

कारण:

  1. Si–O बन्ध की ऊर्जा बहुत अधिक होती है।
  2. बन्ध लंबा और लचीला होता है → तनाव सहन करता है।
  3. सिलिकॉन पर एल्किल समूह जल को दूर रखते हैं।
  4. Si–O बन्ध आक्सीकरण से प्रभावित नहीं होता।
  5. सूर्य प्रकाश और ताप से कम प्रभावित होते हैं।

इसी कारण सिलिकोन्स बहुत टिकाऊ और रासायनिक रूप से निष्क्रिय होते हैं।


Q11. सिलिकोन्स जल प्रतिकर्षी क्यों होते हैं?

उत्तर:
सिलिकोन्स की सतह पर हाइड्रोफोबिक (जल-विकर्षी) एल्किल समूह उपस्थित होते हैं।

कारण:

  1. सतह पर –CH₃ समूह होते हैं।
  2. ये जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध नहीं बनाते।
  3. सतही तनाव बहुत कम होता है।
  4. जल की बूंदें सतह पर फैलती नहीं, फिसल जाती हैं।

इसी कारण सिलिकोन्स को वाटरप्रूफ कोटिंग में उपयोग किया जाता है।


Q12. सिलिकेट्स क्या हैं? संरचना का सिद्धांत समझाइए।

उत्तर:
सिलिकेट्स वे यौगिक हैं जिनमें मूल इकाई SiO₄⁴⁻ टेट्राहेड्रॉन होती है।

संरचना सिद्धांत:

  1. Si चार O से टेट्राहेड्रल संरचना बनाता है।
  2. प्रत्येक ऑक्सीजन अन्य Si से जुड़ सकता है।
  3. इस प्रकार विभिन्न संरचनाएँ बनती हैं — शृंखला, पत्रक, जाल।

SiO₄ इकाइयों के जुड़ने से विभिन्न प्रकार के सिलिकेट बनते हैं।


Q13. सिलिकेट्स का वर्गीकरण कीजिए।

उत्तर:
SiO₄ इकाइयों के जुड़ाव के आधार पर:

  1. ऑर्थोसिलिकेट — अलग इकाइयाँ (SiO₄⁴⁻)
  2. पाइरोसिलिकेट — दो इकाइयाँ जुड़ी
  3. चक्रीय सिलिकेट — रिंग संरचना
  4. श्रृंखला सिलिकेट — लंबी शृंखला
  5. पत्रक सिलिकेट — शीट संरचना
  6. त्रि-आयामी सिलिकेट — नेटवर्क संरचना (क्वार्ट्ज)

Q14. चक्रीय तथा श्रृंखला सिलिकेट की संरचना।

उत्तर:

(1) चक्रीय सिलिकेट (Cyclic silicate)

SiO₄ इकाइयाँ रिंग बनाती हैं।
उदाहरण: Be₃Al₂Si₆O₁₈ (बेरिल)
संरचना: (Si₆O₁₈)¹²⁻ रिंग

(2) श्रृंखला सिलिकेट (Chain silicate)

SiO₄ इकाइयाँ लंबी शृंखला बनाती हैं।
उदाहरण: पायरॉक्सीन
संरचना: (SiO₃)n

Q15. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए: (अ) एस्बेस्टस (ब) जियोलाइट (स) अल्ट्रामरीन

उत्तर:
(अ) एस्बेस्टस: यह एक रेशेदार (fibrous) श्रृंखला सिलिकेट है। यह अग्निरोधी, ऊष्मा रोधी और विद्युत इन्सुलेटर होता है। इसका उपयोग छत, ब्रेक लाइनिंग और अग्निरोधी कपड़ों में होता है।

(ब) जियोलाइट: ये जलयुक्त ऐल्युमिनो-सिलिकेट होते हैं जिनमें सूक्ष्म छिद्र (pores) होते हैं। ये आयन-विनिमय और उत्प्रेरक के रूप में उपयोगी हैं। जल शोधन और पेट्रोकेमिकल उद्योग में महत्वपूर्ण हैं।

(स) अल्ट्रामरीन: यह एक नीला रंगद्रव्य है जिसमें सोडियम ऐल्युमिनो-सिलिकेट संरचना होती है। इसका उपयोग पेंट, कपड़ा और सौंदर्य प्रसाधनों में होता है।


Q16. सिलिका परत क्या है? इसकी संरचना समझाइए।

silika
उत्तर:

सिलिका (SiO₂) में प्रत्येक Si चार O से जुड़कर त्रि-आयामी जाल (network) बनाता है।
संरचना में हर ऑक्सीजन दो सिलिकॉन से जुड़ी होती है।
यह एक विशाल सहसंयोजी जाल संरचना है जिसमें कोई स्वतंत्र अणु नहीं होता।
इसी कारण सिलिका कठोर, उच्च गलनांक और रासायनिक रूप से निष्क्रिय होती है।
क्वार्ट्ज इसका प्रमुख उदाहरण है।


Q17. (अ) अकार्बनिक बहुलक फॉस्फाजीन्स क्या हैं? (ब) वर्गीकरण

उत्तर:
फॉस्फाजीन्स वे अकार्बनिक बहुलक हैं जिनकी मुख्य शृंखला –P=N– से बनी होती है।
सामान्य सूत्र: (NPX₂)n

वर्गीकरण:

  1. रैखिक फॉस्फाजीन्स
  2. चक्रीय फॉस्फाजीन्स
  3. क्रॉस-लिंक्ड फॉस्फाजीन्स

Q18. फॉस्फाजीन्स बहुलक बनाने की विधि।

उत्तर:
स्टेप्स:

  1. PCl₅ + NH₄Cl → (NPCl₂)n
  2. फिर Cl का प्रतिस्थापन ऑर्गेनिक समूह से किया जाता है।
    इस प्रकार स्थिर फॉस्फाजीन बहुलक बनते हैं।

Q19. फॉस्फाजीन्स के गुण।

उत्तर:

  1. उच्च ताप स्थिरता
  2. अग्निरोधी
  3. जलरोधी
  4. रासायनिक प्रतिरोधी
  5. लचीले
  6. विद्युत इन्सुलेटर
  7. ऑक्सीकरण प्रतिरोधी

Q20. वायु में रखने पर क्या होता है?

उत्तर:
अनसब्स्टिट्यूटेड फॉस्फाजीन्स नमी से अभिक्रिया करते हैं और अपघटित हो जाते हैं।
लेकिन ऑर्गेनिक प्रतिस्थापन करने पर ये स्थिर हो जाते हैं।
उदाहरण: (NPCl₂)n → हाइड्रोलिसिस।


Q21. फॉस्फाजीन्स के उपयोग।

उत्तर:

  1. अग्निरोधी पदार्थ
  2. रबर और प्लास्टिक
  3. इन्सुलेटर
  4. कोटिंग
  5. जैव चिकित्सा उपकरण

Q22. (अ) ट्राइफॉस्फाजीन में बन्धन की प्रकृति की व्याख्या कीजिए। (ब) डाइफॉस्फाजीन की संरचना का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
फॉस्फाजीन यौगिकों में मुख्य शृंखला में –P=N– बन्ध उपस्थित होते हैं। ट्राइफॉस्फाजीन (N₃P₃X₆) में फॉस्फोरस और नाइट्रोजन परमाणु वैकल्पिक रूप से जुड़े रहते हैं और एक छः-सदस्यीय रिंग संरचना बनाते हैं। इस रिंग में P–N बन्ध की प्रकृति साधारण एकल बन्ध नहीं होती बल्कि इसमें आंशिक द्वि-बन्ध (partial double bond character) पाया जाता है। यह pπ–dπ बैक-बॉन्डिंग के कारण होता है, जिसमें नाइट्रोजन के p-कक्षक और फॉस्फोरस के रिक्त d-कक्षक के बीच इलेक्ट्रॉन घनत्व का वितरण होता है। इसी कारण P–N बन्ध की लंबाई सामान्य एकल बन्ध से कम होती है और रिंग समतलीय (planar) बन जाती है।

डाइफॉस्फाजीन में P₂N₂ का चार-सदस्यीय चक्रीय ढाँचा बनता है। इसमें भी P और N वैकल्पिक रूप से जुड़े रहते हैं तथा बन्ध में आंशिक द्वि-बन्ध गुण पाए जाते हैं। यह संरचना तनावयुक्त होती है इसलिए कम स्थिर होती है।


Q23. सिलिकोन्स तथा फॉस्फाजीन्स सम-इलेक्ट्रॉनिक यौगिक हैं — समानताओं की विवेचना कीजिये।

उत्तर:
सिलिकोन्स और फॉस्फाजीन्स दोनों महत्वपूर्ण अकार्बनिक बहुलक हैं और इन्हें सम-इलेक्ट्रॉनिक (isoelectronic) कहा जाता है क्योंकि उनकी शृंखला संरचना में इलेक्ट्रॉनों का वितरण और बन्धन का प्रकार काफी समान होता है। सिलिकोन्स में मुख्य शृंखला –Si–O–Si– होती है जबकि फॉस्फाजीन्स में –P=N– शृंखला होती है, परन्तु दोनों में ही π-बैक बॉन्डिंग के कारण आंशिक द्वि-बन्ध गुण उत्पन्न होते हैं।

दोनों बहुलकों की प्रमुख समानताएँ:

  1. उच्च तापीय स्थिरता और अग्निरोधी गुण।
  2. जल प्रतिरोधी तथा रासायनिक रूप से निष्क्रिय।
  3. उत्कृष्ट विद्युत इन्सुलेटर।
  4. लचीली शृंखला के कारण रबर जैसे गुण।
  5. तेल, रबर और रेजिन तीनों रूपों में प्राप्त होते हैं।

इन्हीं समान गुणों के कारण दोनों का उपयोग सीलेंट, कोटिंग, इन्सुलेटर और उच्च ताप वाले उपकरणों में किया जाता है।


Q24. पॉली फॉस्फेट क्या हैं? सामान्य पॉली फॉस्फेट का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
वे अकार्बनिक बहुलक जिनमें अनेक फॉस्फेट (PO₄³⁻) इकाइयाँ आपस में P–O–P बन्ध द्वारा जुड़कर लंबी शृंखला या चक्र बनाती हैं, उन्हें पॉलीफॉस्फेट कहते हैं। इनका सामान्य सूत्र (MPO₃)n होता है, जहाँ M क्षार धातु जैसे Na या K होता है।

पॉलीफॉस्फेट की संरचना में प्रत्येक फॉस्फोरस टेट्राहेड्रल रूप में चार ऑक्सीजन से जुड़ा होता है, जिनमें से दो ऑक्सीजन अन्य फॉस्फोरस से जुड़कर शृंखला बनाते हैं। इस प्रकार लंबी रैखिक या चक्रीय संरचनाएँ बनती हैं।

गुण:

  1. जल में घुलनशील
  2. धातु आयनों को बाँधने की क्षमता (sequestering agent)
  3. जल को मुलायम बनाने में सहायक

उपयोग:
डिटर्जेंट, जल शोधन, खाद उद्योग, खाद्य संरक्षक तथा जल को कठोरता से मुक्त करने में इनका व्यापक उपयोग होता है।

Q25. (अ) लंबी श्रृंखला वाले पॉलीफॉस्फेट (रेखीय फॉस्फेट): ग्राहम लवण, मेड्रेल लवण, कुरोल लवण क्या हैं? (ब) चक्रीय पॉलीफॉस्फेट (मेटाफॉस्फेट) क्या हैं?

उत्तर:
लंबी शृंखला वाले पॉलीफॉस्फेट वे होते हैं जिनमें PO₄ टेट्राहेड्रा P–O–P बन्धों द्वारा जुड़कर रैखिक शृंखला बनाते हैं। इनका सामान्य सूत्र (NaPO₃)n होता है और ये जल को मुलायम बनाने तथा धातु आयनों को बाँधने में उपयोगी होते हैं।

(i) ग्राहम लवण (Graham’s salt):
यह सोडियम हेक्सामेटाफॉस्फेट है। यह लंबी शृंखला वाला पॉलीफॉस्फेट है और जल शोधन तथा डिटर्जेंट उद्योग में प्रयुक्त होता है।

(ii) मेड्रेल लवण (Maddrell’s salt):
यह सोडियम पॉलीफॉस्फेट का काँच जैसा ठोस रूप है। यह जल में धीरे-धीरे घुलता है और जल की कठोरता कम करने में उपयोगी है।

(iii) कुरोल लवण (Kurrol’s salt):
यह उच्च अणुभार वाला लंबी शृंखला पॉलीफॉस्फेट है जिसकी संरचना रेशेदार होती है और यह जल में कम घुलनशील होता है।

(ब) चक्रीय पॉलीफॉस्फेट (मेटाफॉस्फेट):
जब PO₄ इकाइयाँ रिंग बनाती हैं, तब चक्रीय पॉलीफॉस्फेट बनते हैं। सामान्य सूत्र (MPO₃)n है। उदाहरण: (NaPO₃)₃. इनका उपयोग डिटर्जेंट और जल शोधन में होता है।


Q26. निम्न अभिक्रियाओं में क्या होता है?

उत्तर:

(i) PCl₅ + NH₃ की अभिक्रिया:
फॉस्फोरस पेन्टाक्लोराइड अमोनिया से अभिक्रिया करके फॉस्फोनाइट्रिल क्लोराइड बनाता है, जो आगे चलकर फॉस्फाजीन बहुलकों का निर्माण करता है।
मुख्य उत्पाद: (NPCl₂)n + NH₄Cl

(ii) SOCl₂ की उपस्थिति में S₄N₄ की क्रिया PCl₃ से:
इस अभिक्रिया में थायोफॉस्फोरिल यौगिक बनते हैं और फॉस्फोरस–नाइट्रोजन–सल्फर प्रणाली के यौगिक प्राप्त होते हैं, जो फॉस्फाजीन रसायन के मध्यवर्ती यौगिक होते हैं।

(iii) (NPCl₂)₃ का जल-अपघटन:
जल के साथ अभिक्रिया करने पर Cl समूह –OH में बदल जाते हैं और आगे चलकर फॉस्फेट तथा अमोनिया बनते हैं। यह हाइड्रोलिसिस से अपघटित हो जाता है।

(iv) (NPCl₂)₃ + अधिक NH₃:
अमोनिया Cl का प्रतिस्थापन कर देता है और अमीनो-फॉस्फाजीन यौगिक बनते हैं, जो अधिक स्थिर और कम प्रतिक्रियाशील होते हैं।


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