B.Sc. Chemistry (C.G.)
Third Year – First Question Paper
दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न
Q1. अकार्बनिक बहुलक से आप क्या समझते हैं? इनकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
वे बहुलक जिनकी मुख्य शृंखला (backbone) में कार्बन–कार्बन के स्थान पर अन्य तत्व जैसे Si, P, B, S, N आदि उपस्थित होते हैं, उन्हें अकार्बनिक बहुलक (Inorganic polymers) कहते हैं। उदाहरण: सिलिकोन, फॉस्फाजीन, सल्फर-नाइट्रोजन बहुलक।
विशेषताएँ:
- उच्च तापीय स्थिरता – ये उच्च ताप पर भी स्थिर रहते हैं।
- रासायनिक निष्क्रियता – अम्ल, क्षार और ऑक्सीकारकों से कम प्रभावित होते हैं।
- जलरोधी एवं मौसमरोधी गुण।
- विद्युत रोधन गुण उत्कृष्ट होते हैं।
- लचीलापन और कम कांच संक्रमण ताप।
- जैव-अक्रियता – चिकित्सा उपकरणों में उपयोगी।
- दीर्घायु और कम अपघटन।
इन गुणों के कारण इनका उपयोग स्नेहक, सीलेंट, रबर, इन्सुलेटर आदि में होता है।
Q2. सिलिकोन्स क्या होते हैं? सिलिकोन्स की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सिलिकोन वे अकार्बनिक बहुलक हैं जिनकी मुख्य शृंखला में Si–O–Si (सिलोक्सेन) बंध उपस्थित होते हैं और सिलिकॉन पर एल्किल/एरिल समूह जुड़े रहते हैं।
सामान्य सूत्र: (R₂SiO)n
प्रमुख विशेषताएँ:
- उच्च तापीय स्थिरता (–50°C से 250°C तक स्थिर)।
- जलरोधी और मौसमरोधी।
- कम सतही तनाव – उत्कृष्ट स्नेहक।
- उत्कृष्ट विद्युत इन्सुलेटर।
- ऑक्सीकरण प्रतिरोधी।
- रबर जैसे लचीले या तेल जैसे तरल रूप में उपलब्ध।
- जैव-अनुक्रियाशील नहीं – मेडिकल उपयोग के लिए सुरक्षित।
इन्हीं कारणों से इनका उपयोग सीलेंट, ग्रीस, रबर, कुकवेयर कोटिंग, चिकित्सा उपकरणों में होता है।
Q3. सिलिकोन्स के निर्माण में प्रयुक्त विभिन्न पद तथा विधियाँ।
उत्तर:
निर्माण के मुख्य चरण:
(1) ग्रिग्नार्ड अभिक्रिया द्वारा ऑर्गेनो-क्लोरोसिलेन बनाना
SiCl₄ + RMgCl → RSiCl₃ / R₂SiCl₂
(2) हाइड्रोलिसिस
R₂SiCl₂ + H₂O → R₂Si(OH)₂ + HCl
(3) संघनन (Condensation Polymerization)
R₂Si(OH)₂ → (R₂SiO)n + H₂O
इस प्रकार सिलोक्सेन शृंखला बनती है।
उपयोगित मोनोमर:
- डाइमेथिल डाइक्लोरोसिलेन (सबसे महत्वपूर्ण)
- मिथाइल ट्राइक्लोरोसिलेन
- फिनाइल क्लोरोसिलेन
Q4. सिलिकोन्स तथा ऐल्किल सिलोक्सेन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| आधार | सिलिकोन्स | ऐल्किल सिलोक्सेन |
|---|---|---|
| संरचना | लंबी बहुलक शृंखला | छोटे अणु |
| अणुभार | अधिक | कम |
| अवस्था | तेल/रबर/रेजिन | द्रव |
| उपयोग | सीलेंट, रबर | मध्यवर्ती यौगिक |
| स्थिरता | अधिक | कम |
सिलिकोन्स वास्तव में ऐल्किल सिलोक्सेन के बहुलक रूप होते हैं।
Q5. सिलिकोन्स बनाते समय श्रृंखला वृद्धि को कैसे रोका जाता है?
उत्तर:
Chain stopping agents का उपयोग किया जाता है।
उदाहरण:
(CH₃)₃SiCl
यह शृंखला के सिरों को बंद कर देता है।
Reaction:
Si–OH + (CH₃)₃SiCl → Si–O–Si(CH₃)₃
इससे आगे polymerization नहीं होता।
इसे end-capping कहते हैं।
Q6. सिलिकोन्स का सामान्य सूत्र तथा उपयोग।
उत्तर:
सामान्य सूत्र: (R₂SiO)n
उपयोग:
- स्नेहक (lubricants)
- जलरोधी कोटिंग
- रबर एवं सीलेंट
- विद्युत इन्सुलेटर
- कुकवेयर नॉन-स्टिक कोटिंग
- मेडिकल इम्प्लांट
- पॉलिश और ग्रीस
Q7. सिलिकोन बनाने में प्रारम्भिक यौगिक और जल-अपघटन।
उत्तर:
प्रारम्भिक यौगिक: ऑर्गेनो क्लोरोसिलेन (R₂SiCl₂)
हाइड्रोलिसिस:
R₂SiCl₂ + 2H₂O → R₂Si(OH)₂ + 2HCl
इसके बाद संघनन:
n R₂Si(OH)₂ → (R₂SiO)n + nH₂O
इस प्रकार सिलिकोन बहुलक बनते हैं।
Q8. सिलिकोन बहुलकों के वर्गीकरण को समझाइये।
उत्तर:
सिलिकोन बहुलकों को उनकी संरचना और क्रॉस-लिंकिंग के आधार पर तीन भागों में बाँटा जाता है:
(1) सिलिकोन तेल (Silicone oils)
ये रैखिक (linear) बहुलक होते हैं जिनकी शृंखला लंबी और लचीली होती है। इनका अणुभार कम होता है और ये तरल अवस्था में रहते हैं। इनका उपयोग स्नेहक, पॉलिश तथा हाइड्रोलिक द्रव के रूप में होता है।
(2) सिलिकोन रबर (Silicone rubber)
ये हल्के क्रॉस-लिंक्ड बहुलक होते हैं। ये लचीले, ताप-प्रतिरोधी और मौसमरोधी होते हैं। इनका उपयोग गैस्केट, सील, ट्यूब आदि बनाने में किया जाता है।
(3) सिलिकोन रेजिन (Silicone resins)
ये अत्यधिक क्रॉस-लिंक्ड त्रि-आयामी संरचना वाले ठोस बहुलक होते हैं। ये कठोर और ताप-प्रतिरोधी होते हैं। इनका उपयोग वार्निश, पेंट तथा विद्युत इन्सुलेटर में होता है।
Q9. कार्बनिक एवं अकार्बनिक बहुलक में अन्तर समझाइये।
उत्तर:
| आधार | कार्बनिक बहुलक | अकार्बनिक बहुलक |
|---|---|---|
| मुख्य शृंखला | C–C बन्ध | Si–O, P–N आदि |
| ताप स्थिरता | कम | अधिक |
| रासायनिक स्थिरता | कम | अधिक |
| जलरोधकता | कम | अधिक |
| उदाहरण | प्लास्टिक, रबर | सिलिकोन, फॉस्फाजीन |
अकार्बनिक बहुलक अधिक तापीय और रासायनिक स्थिर होते हैं।
Q10. सिलिकोन्स की शक्ति तथा अक्रियता के कारण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सिलिकोन्स की मजबूती का मुख्य कारण Si–O बन्ध है।
कारण:
- Si–O बन्ध की ऊर्जा बहुत अधिक होती है।
- बन्ध लंबा और लचीला होता है → तनाव सहन करता है।
- सिलिकॉन पर एल्किल समूह जल को दूर रखते हैं।
- Si–O बन्ध आक्सीकरण से प्रभावित नहीं होता।
- सूर्य प्रकाश और ताप से कम प्रभावित होते हैं।
इसी कारण सिलिकोन्स बहुत टिकाऊ और रासायनिक रूप से निष्क्रिय होते हैं।
Q11. सिलिकोन्स जल प्रतिकर्षी क्यों होते हैं?
उत्तर:
सिलिकोन्स की सतह पर हाइड्रोफोबिक (जल-विकर्षी) एल्किल समूह उपस्थित होते हैं।
कारण:
- सतह पर –CH₃ समूह होते हैं।
- ये जल के साथ हाइड्रोजन बन्ध नहीं बनाते।
- सतही तनाव बहुत कम होता है।
- जल की बूंदें सतह पर फैलती नहीं, फिसल जाती हैं।
इसी कारण सिलिकोन्स को वाटरप्रूफ कोटिंग में उपयोग किया जाता है।
Q12. सिलिकेट्स क्या हैं? संरचना का सिद्धांत समझाइए।
उत्तर:
सिलिकेट्स वे यौगिक हैं जिनमें मूल इकाई SiO₄⁴⁻ टेट्राहेड्रॉन होती है।
संरचना सिद्धांत:
- Si चार O से टेट्राहेड्रल संरचना बनाता है।
- प्रत्येक ऑक्सीजन अन्य Si से जुड़ सकता है।
- इस प्रकार विभिन्न संरचनाएँ बनती हैं — शृंखला, पत्रक, जाल।
SiO₄ इकाइयों के जुड़ने से विभिन्न प्रकार के सिलिकेट बनते हैं।
Q13. सिलिकेट्स का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर:
SiO₄ इकाइयों के जुड़ाव के आधार पर:
- ऑर्थोसिलिकेट — अलग इकाइयाँ (SiO₄⁴⁻)
- पाइरोसिलिकेट — दो इकाइयाँ जुड़ी
- चक्रीय सिलिकेट — रिंग संरचना
- श्रृंखला सिलिकेट — लंबी शृंखला
- पत्रक सिलिकेट — शीट संरचना
- त्रि-आयामी सिलिकेट — नेटवर्क संरचना (क्वार्ट्ज)
Q14. चक्रीय तथा श्रृंखला सिलिकेट की संरचना।
उत्तर:
(1) चक्रीय सिलिकेट (Cyclic silicate)
SiO₄ इकाइयाँ रिंग बनाती हैं।
उदाहरण: Be₃Al₂Si₆O₁₈ (बेरिल)
संरचना: (Si₆O₁₈)¹²⁻ रिंग
(2) श्रृंखला सिलिकेट (Chain silicate)
SiO₄ इकाइयाँ लंबी शृंखला बनाती हैं।
उदाहरण: पायरॉक्सीन
संरचना: (SiO₃)n
Q15. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए: (अ) एस्बेस्टस (ब) जियोलाइट (स) अल्ट्रामरीन
उत्तर:
(अ) एस्बेस्टस: यह एक रेशेदार (fibrous) श्रृंखला सिलिकेट है। यह अग्निरोधी, ऊष्मा रोधी और विद्युत इन्सुलेटर होता है। इसका उपयोग छत, ब्रेक लाइनिंग और अग्निरोधी कपड़ों में होता है।
(ब) जियोलाइट: ये जलयुक्त ऐल्युमिनो-सिलिकेट होते हैं जिनमें सूक्ष्म छिद्र (pores) होते हैं। ये आयन-विनिमय और उत्प्रेरक के रूप में उपयोगी हैं। जल शोधन और पेट्रोकेमिकल उद्योग में महत्वपूर्ण हैं।
(स) अल्ट्रामरीन: यह एक नीला रंगद्रव्य है जिसमें सोडियम ऐल्युमिनो-सिलिकेट संरचना होती है। इसका उपयोग पेंट, कपड़ा और सौंदर्य प्रसाधनों में होता है।
Q16. सिलिका परत क्या है? इसकी संरचना समझाइए।
| silika |
सिलिका (SiO₂) में प्रत्येक Si चार O से जुड़कर त्रि-आयामी जाल (network) बनाता है।
संरचना में हर ऑक्सीजन दो सिलिकॉन से जुड़ी होती है।
यह एक विशाल सहसंयोजी जाल संरचना है जिसमें कोई स्वतंत्र अणु नहीं होता।
इसी कारण सिलिका कठोर, उच्च गलनांक और रासायनिक रूप से निष्क्रिय होती है।
क्वार्ट्ज इसका प्रमुख उदाहरण है।
Q17. (अ) अकार्बनिक बहुलक फॉस्फाजीन्स क्या हैं? (ब) वर्गीकरण
उत्तर:
फॉस्फाजीन्स वे अकार्बनिक बहुलक हैं जिनकी मुख्य शृंखला –P=N– से बनी होती है।
सामान्य सूत्र: (NPX₂)n
वर्गीकरण:
- रैखिक फॉस्फाजीन्स
- चक्रीय फॉस्फाजीन्स
- क्रॉस-लिंक्ड फॉस्फाजीन्स
Q18. फॉस्फाजीन्स बहुलक बनाने की विधि।
उत्तर:
स्टेप्स:
- PCl₅ + NH₄Cl → (NPCl₂)n
-
फिर Cl का प्रतिस्थापन ऑर्गेनिक समूह से किया जाता है।
इस प्रकार स्थिर फॉस्फाजीन बहुलक बनते हैं।
Q19. फॉस्फाजीन्स के गुण।
उत्तर:
- उच्च ताप स्थिरता
- अग्निरोधी
- जलरोधी
- रासायनिक प्रतिरोधी
- लचीले
- विद्युत इन्सुलेटर
- ऑक्सीकरण प्रतिरोधी
Q20. वायु में रखने पर क्या होता है?
उत्तर:
अनसब्स्टिट्यूटेड फॉस्फाजीन्स नमी से अभिक्रिया करते हैं और अपघटित हो जाते हैं।
लेकिन ऑर्गेनिक प्रतिस्थापन करने पर ये स्थिर हो जाते हैं।
उदाहरण: (NPCl₂)n → हाइड्रोलिसिस।
Q21. फॉस्फाजीन्स के उपयोग।
उत्तर:
- अग्निरोधी पदार्थ
- रबर और प्लास्टिक
- इन्सुलेटर
- कोटिंग
- जैव चिकित्सा उपकरण



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