B.Sc. ZOOLOGY (C.G.)
Third Year – First Question Paper
इकाई 4
An Overview of Ecology, Ecosystem and Population Ecology
दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न
1. पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) पर एक निबंध लिखिए।
उत्तर:
पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) वह प्राकृतिक इकाई है जिसमें जीवित (Biotic) तथा निर्जीव (Abiotic) घटक एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करते हुए ऊर्जा और पदार्थ का आदान-प्रदान करते हैं। किसी भी पारिस्थितिक तंत्र के मुख्य घटक उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक होते हैं। उत्पादक जैसे हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की सहायता से प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं और ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत बनते हैं। उपभोक्ता इस ऊर्जा को विभिन्न ट्रॉफिक स्तरों के माध्यम से प्राप्त करते हैं, जैसे शाकाहारी, मांसाहारी और सर्वाहारी। अपघटक मृत जैव पदार्थ को विघटित करके पोषक तत्वों को पुनः मिट्टी में लौटाते हैं।
ऊर्जा का प्रवाह एक दिशा में होता है जबकि पोषक तत्वों का चक्रण निरंतर चलता रहता है। पारिस्थितिक तंत्र छोटे (तालाब) से लेकर बड़े (वन या महासागर) तक विभिन्न आकार के हो सकते हैं। संतुलित पारिस्थितिक तंत्र पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखते हैं और पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक हैं।
2. स्वच्छ जलीय पारिस्थितिक तंत्र का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्वच्छ जलीय पारिस्थितिक तंत्र (Freshwater Ecosystem) में नदियाँ, झीलें, तालाब और झरने शामिल होते हैं। इनका जल कम लवणीय होता है और ये मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसमें प्रमुख उत्पादक शैवाल और जलीय पौधे होते हैं जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। उपभोक्ताओं में मछलियाँ, कीट, उभयचर और जलपक्षी शामिल हैं। अपघटक जैसे बैक्टीरिया और कवक मृत जीवों को विघटित करते हैं।
इस पारिस्थितिक तंत्र में तापमान, प्रकाश और घुलित ऑक्सीजन का स्तर जीवों के वितरण को प्रभावित करता है। प्रदूषण, अति-शिकार और जलवायु परिवर्तन इनके संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। इसलिए स्वच्छ जलीय पारिस्थितिक तंत्र का संरक्षण मानव अस्तित्व और जैव विविधता दोनों के लिए आवश्यक है।
3. संसार के वृहद पारिस्थितिक तंत्र का वर्णन कीजिए। समुद्री पारिस्थितिक तंत्र को विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
पृथ्वी पर पाए जाने वाले बड़े पारिस्थितिक तंत्रों को बायोम कहा जाता है। इनमें वन, घासभूमि, मरुस्थल, टुंड्रा और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र शामिल हैं। इन बायोमों की विशेषता जलवायु, वनस्पति और जीवों की विविधता पर आधारित होती है।
समुद्री पारिस्थितिक तंत्र पृथ्वी का सबसे बड़ा पारिस्थितिक तंत्र है जो महासागरों और समुद्रों में फैला हुआ है। इसमें फाइटोप्लैंकटन प्रमुख उत्पादक होते हैं, जो वैश्विक ऑक्सीजन का बड़ा भाग उत्पन्न करते हैं। उपभोक्ताओं में मछलियाँ, व्हेल, डॉल्फिन और समुद्री पक्षी शामिल हैं। समुद्री पारिस्थितिक तंत्र में विभिन्न क्षेत्र होते हैं जैसे तटीय क्षेत्र, खुला समुद्र और गहरा समुद्र। यह जलवायु नियंत्रण, भोजन और खनिज संसाधनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
4. ज्वारनदमुखी (Estuarine) पारिस्थितिक तंत्र पर एक विस्तृत निबंध लिखिए।
उत्तर:
ज्वारनदमुखी पारिस्थितिक तंत्र वह क्षेत्र है जहाँ नदी का मीठा पानी समुद्र के खारे पानी से मिलता है। इसे अत्यधिक उत्पादक पारिस्थितिक तंत्र माना जाता है। यहाँ पोषक तत्वों की प्रचुरता होती है, जिससे जैव विविधता अधिक पाई जाती है।
इस क्षेत्र में मैंग्रोव वनस्पति, केकड़े, मछलियाँ और विभिन्न पक्षी पाए जाते हैं। ज्वार-भाटा के कारण जल स्तर में लगातार परिवर्तन होता है, जिससे यहाँ रहने वाले जीव विशेष अनुकूलन विकसित करते हैं। यह पारिस्थितिक तंत्र समुद्री जीवों के प्रजनन और विकास के लिए नर्सरी का कार्य करता है। प्रदूषण और तटीय विकास इसके लिए खतरा बन रहे हैं, इसलिए संरक्षण आवश्यक है।
5. स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र का विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर:
स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र भूमि पर पाए जाने वाले पारिस्थितिक तंत्र हैं, जैसे वन, घासभूमि और मरुस्थल। इनमें जलवायु, मिट्टी, तापमान और वर्षा प्रमुख कारक होते हैं। वनों में वृक्ष प्रमुख उत्पादक होते हैं और यहाँ जैव विविधता अत्यधिक होती है। घासभूमि में घास प्रमुख वनस्पति है और शाकाहारी जीवों की अधिकता होती है। मरुस्थलों में पानी की कमी के कारण विशेष अनुकूलित पौधे और जीव पाए जाते हैं।
स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र कार्बन चक्र, जल चक्र और ऑक्सीजन उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मानव गतिविधियाँ जैसे वनों की कटाई और प्रदूषण इनके संतुलन को प्रभावित कर रहे हैं, इसलिए इनके संरक्षण के लिए जागरूकता और उचित प्रबंधन आवश्यक है।
6. सीमान्तकारी कारक (Limiting factors) संबंधित नियम की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
सीमान्तकारी कारक से संबंधित प्रमुख नियम लिबिग का न्यूनतम नियम (Liebig’s Law of Minimum) तथा शेलफोर्ड का सहनशीलता नियम (Shelford’s Law of Tolerance) हैं। लिबिग के अनुसार किसी जीव की वृद्धि उस पोषक तत्व पर निर्भर करती है जो न्यूनतम मात्रा में उपलब्ध होता है। उदाहरण के लिए, यदि मिट्टी में नाइट्रोजन कम है तो पौधों की वृद्धि उसी से सीमित होगी।
शेलफोर्ड के सहनशीलता नियम के अनुसार प्रत्येक जीव किसी भी पर्यावरणीय कारक के लिए न्यूनतम और अधिकतम सीमा सहन कर सकता है। इन सीमाओं से बाहर जीव जीवित नहीं रह पाता। यह नियम दर्शाता है कि जीवों का वितरण तापमान, प्रकाश, जल और पोषक तत्वों की उपलब्धता पर निर्भर करता है। ये नियम पारिस्थितिकी में जीवों के वितरण और उत्पादन क्षमता को समझने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
7. सीमान्तकारी कारक को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर:
सीमान्तकारी कारक वे पर्यावरणीय तत्व हैं जो जीवों की वृद्धि, विकास और वितरण को सीमित करते हैं। इनमें तापमान, प्रकाश, जल, पोषक तत्व, ऑक्सीजन और pH प्रमुख हैं। यदि कोई कारक बहुत कम या बहुत अधिक हो जाए, तो वह जीव के लिए हानिकारक बन जाता है।
उदाहरण के लिए, मरुस्थल में पानी की कमी पौधों की वृद्धि को सीमित करती है, जबकि जलीय पारिस्थितिक तंत्र में ऑक्सीजन की कमी मछलियों के जीवन को प्रभावित करती है। इस प्रकार, जीवों की संख्या और वितरण इन कारकों पर निर्भर करता है। यह अवधारणा पर्यावरण संरक्षण और कृषि उत्पादन को समझने में सहायक है।
8. पारिस्थितिक अनुक्रमण (Ecological Succession) को विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
पारिस्थितिक अनुक्रमण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी क्षेत्र में समय के साथ जीव समुदायों का क्रमिक विकास होता है। यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब कोई क्षेत्र निर्जीव या क्षतिग्रस्त हो जाता है, जैसे ज्वालामुखी विस्फोट या बाढ़ के बाद।
अनुक्रमण दो प्रकार का होता है—प्राथमिक और द्वितीयक। प्राथमिक अनुक्रमण उस क्षेत्र में होता है जहाँ पहले कोई जीवन नहीं था, जैसे नंगी चट्टान। द्वितीयक अनुक्रमण उस क्षेत्र में होता है जहाँ पहले जीवन मौजूद था लेकिन किसी कारण नष्ट हो गया।
इस प्रक्रिया में प्रारंभिक प्रजातियाँ (Pioneer species) जैसे काई और लाइकेन सबसे पहले आती हैं। धीरे-धीरे झाड़ियाँ और वृक्ष विकसित होते हैं और अंत में स्थिर समुदाय (Climax community) बनता है। यह प्रक्रिया पारिस्थितिक संतुलन और जैव विविधता बनाए रखने में महत्वपूर्ण है।
9. पारिस्थितिक तंत्र के कार्यों का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर:
पारिस्थितिक तंत्र के प्रमुख कार्य निम्न हैं—
- ऊर्जा प्रवाह: सूर्य से ऊर्जा उत्पादकों तक और फिर उपभोक्ताओं तक पहुँचती है।
- पोषक चक्रण: कार्बन, नाइट्रोजन और जल चक्र के माध्यम से पोषक तत्व पुनः उपयोग में आते हैं।
- अपघटन: मृत जीवों का विघटन करके पोषक तत्व मिट्टी में लौटते हैं।
- जैव विविधता का संरक्षण: विभिन्न जीवों को आवास प्रदान करता है।
यदि इसे चित्र द्वारा दर्शाया जाए तो सूर्य → पौधे → शाकाहारी → मांसाहारी → अपघटक का प्रवाह दिखाया जाता है। यह कार्य पृथ्वी पर जीवन को संतुलित बनाए रखते हैं।
10. विस्तृत वर्णन कीजिए— (i) खाद्य श्रृंखला, (ii) खाद्य जाल, (iii) पिरामिड।
उत्तर:
(i) खाद्य श्रृंखला (Food Chain):
यह ऊर्जा के प्रवाह का सरल मार्ग है जिसमें एक जीव दूसरे को खाता है। उदाहरण—घास → हिरण → शेर। इसमें ट्रॉफिक स्तर होते हैं और ऊर्जा क्रमशः घटती जाती है।
(ii) खाद्य जाल (Food Web):
जब कई खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में जुड़ती हैं तो खाद्य जाल बनता है। यह अधिक स्थिर होता है क्योंकि एक जीव कई स्रोतों से भोजन प्राप्त कर सकता है।
(iii) पारिस्थितिक पिरामिड (Ecological Pyramids):
यह ट्रॉफिक स्तरों की संख्या, ऊर्जा या बायोमास को दर्शाता है। तीन प्रकार होते हैं—संख्या पिरामिड, बायोमास पिरामिड और ऊर्जा पिरामिड। ऊर्जा पिरामिड हमेशा सीधा होता है क्योंकि ऊर्जा हर स्तर पर कम होती जाती है।
11. जैव भू-रासायनिक चक्र (Bio-geochemical Cycle) पर एक निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
जैव भू-रासायनिक चक्र वे प्राकृतिक चक्र हैं जिनके माध्यम से पृथ्वी के विभिन्न रासायनिक तत्व जीवित तथा निर्जीव घटकों के बीच निरंतर संचरित होते रहते हैं। “बायो” का अर्थ जीव, “जियो” का अर्थ पृथ्वी तथा “केमिकल” का अर्थ रासायनिक तत्व है। इन चक्रों में कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, फास्फोरस और सल्फर जैसे तत्व शामिल हैं।
इन चक्रों के माध्यम से पोषक तत्व वातावरण, जलमंडल, स्थलमंडल और जीवमंडल के बीच घूमते रहते हैं। उदाहरण के लिए, पौधे कार्बन डाइऑक्साइड को प्रकाश संश्लेषण में उपयोग करते हैं, जानवर पौधों को खाकर इसे प्राप्त करते हैं और श्वसन के माध्यम से पुनः वातावरण में छोड़ देते हैं। अपघटक मृत जीवों को विघटित करके पोषक तत्व मिट्टी में वापस लाते हैं।
ये चक्र पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि इन चक्रों में असंतुलन होता है तो पर्यावरणीय समस्याएँ जैसे ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण उत्पन्न हो सकते हैं।
12. सल्फर चक्र का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सल्फर चक्र वह प्रक्रिया है जिसमें सल्फर विभिन्न रूपों में पृथ्वी के वातावरण, जल और जीवों के बीच संचरित होता है। सल्फर ज्वालामुखी विस्फोट, जीवाश्म ईंधन के जलने और समुद्री स्प्रे के माध्यम से वातावरण में प्रवेश करता है।
वातावरण में सल्फर डाइऑक्साइड वर्षा के साथ मिलकर मिट्टी और जल में पहुँचता है। पौधे इसे सल्फेट के रूप में अवशोषित करते हैं और जानवर पौधों को खाकर इसे प्राप्त करते हैं। मृत जीवों के विघटन से सल्फर पुनः मिट्टी में लौट आता है।
मानव गतिविधियाँ जैसे उद्योग और प्रदूषण सल्फर चक्र को प्रभावित करते हैं, जिससे अम्ल वर्षा जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
13. जनसंख्या (Population) क्या है? इसके लक्षण एवं प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या से तात्पर्य किसी क्षेत्र में एक ही प्रजाति के जीवों के समूह से है। उदाहरण के लिए, किसी जंगल में रहने वाले सभी हिरण उस क्षेत्र की जनसंख्या कहलाते हैं।
जनसंख्या के प्रमुख लक्षण हैं—घनत्व, जन्म दर, मृत्यु दर, आयु संरचना और वृद्धि दर। इन लक्षणों के आधार पर जनसंख्या का आकार और वृद्धि निर्धारित होती है।
जनसंख्या को प्रभावित करने वाले कारकों में भोजन की उपलब्धता, जलवायु, रोग, प्रतिस्पर्धा और शिकार शामिल हैं। अनुकूल परिस्थितियों में जनसंख्या तेजी से बढ़ती है, जबकि प्रतिकूल परिस्थितियों में घट जाती है। यह अध्ययन संरक्षण और संसाधन प्रबंधन में महत्वपूर्ण है।
14. समष्टि (Population) को प्रभावित करने वाले कारकों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
समष्टि को प्रभावित करने वाले कारकों को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है—घनत्व-निर्भर और घनत्व-स्वतंत्र कारक।
घनत्व-निर्भर कारकों में भोजन की कमी, प्रतिस्पर्धा, रोग और शिकार शामिल हैं। जब जनसंख्या बढ़ती है तो ये कारक अधिक प्रभाव डालते हैं। घनत्व-स्वतंत्र कारकों में प्राकृतिक आपदाएँ जैसे बाढ़, सूखा और भूकंप शामिल हैं।
इसके अलावा प्रवसन (Migration), जन्म दर और मृत्यु दर भी जनसंख्या को प्रभावित करते हैं। इन कारकों के अध्ययन से जनसंख्या नियंत्रण और संरक्षण रणनीतियाँ तैयार की जाती हैं।
15. फास्फोरस चक्र पर संक्षिप्त में लिखिए।
उत्तर:
फास्फोरस चक्र एक महत्वपूर्ण जैव भू-रासायनिक चक्र है जो मुख्यतः मिट्टी और चट्टानों में पाया जाता है। वर्षा और अपक्षय के कारण चट्टानों से फास्फेट मिट्टी और जल में पहुँचता है।
पौधे इसे अवशोषित करते हैं और जानवर पौधों को खाकर इसे प्राप्त करते हैं। मृत जीवों और अपशिष्ट पदार्थों के विघटन से फास्फोरस पुनः मिट्टी में लौट आता है।
यह चक्र DNA, RNA और ATP जैसे महत्वपूर्ण जैव अणुओं के निर्माण में आवश्यक है। मानव गतिविधियाँ जैसे उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग इस चक्र को प्रभावित कर सकती हैं।
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