B.Sc. ZOOLOGY (C.G.)
Third Year – First Question Paper
इकाई 5
Biotic Community & Environmental Degradation
दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न
1. जीवसंख्या नियमन के बारे में संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जीवसंख्या नियमन (Population regulation) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी प्रजाति की संख्या पर्यावरण की वहन क्षमता (Carrying capacity) के आसपास संतुलित रहती है। यह संतुलन जन्म दर, मृत्यु दर, प्रवसन और संसाधनों की उपलब्धता से नियंत्रित होता है।
प्राकृतिक रूप से जीवसंख्या को नियंत्रित करने वाले कारकों में भोजन की कमी, रोग, शिकार, प्रतिस्पर्धा और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं। यदि संसाधन अधिक हों तो जनसंख्या तेजी से बढ़ती है, लेकिन संसाधन सीमित होने पर वृद्धि धीमी या नकारात्मक हो जाती है।
लॉजिस्टिक वृद्धि वक्र (S-आकार) जीवसंख्या नियमन को दर्शाता है, जिसमें प्रारंभिक तेजी के बाद स्थिरता आती है। यह प्रक्रिया पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और संसाधनों के अत्यधिक उपयोग को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
2. सामुदायिक पारिस्थितिकी से आप क्या समझते हैं? समुदाय के लक्षण लिखिए।
उत्तर:
सामुदायिक पारिस्थितिकी (Community ecology) जीवों के विभिन्न समूहों और उनके परस्पर संबंधों का अध्ययन है। एक समुदाय (Community) में विभिन्न प्रजातियाँ एक ही क्षेत्र में साथ रहती हैं और संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा या सहयोग करती हैं।
समुदाय के प्रमुख लक्षण हैं—प्रजाति विविधता, प्रभुत्व (Dominance), परस्पर निर्भरता और ऊर्जा प्रवाह। समुदाय गतिशील होते हैं और समय के साथ बदलते रहते हैं।
इस अध्ययन से यह समझने में मदद मिलती है कि विभिन्न जीव किस प्रकार सह-अस्तित्व बनाए रखते हैं और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखते हैं।
3. समुदाय का आकार एवं संरचना को समझाइए।
उत्तर:
समुदाय का आकार उस क्षेत्र में मौजूद प्रजातियों की संख्या और उनके वितरण को दर्शाता है। संरचना से तात्पर्य प्रजातियों के संगठन, प्रभुत्व और ट्रॉफिक स्तरों से है।
समुदाय में कुछ प्रजातियाँ प्रमुख होती हैं जो पर्यावरण पर अधिक प्रभाव डालती हैं, जबकि अन्य कम प्रभावशाली होती हैं। संरचना में ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज वितरण शामिल होता है। उदाहरण के लिए, वन में पेड़ों की ऊँचाई के अनुसार अलग-अलग स्तर बनते हैं।
समुदाय की संरचना जैव विविधता और संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करती है और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण है।
4. सामुदायिक स्तरीकरण का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सामुदायिक स्तरीकरण (Community stratification) जीवों के विभिन्न स्तरों में वितरण को दर्शाता है। यह मुख्यतः वन पारिस्थितिक तंत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
वन में पाँच प्रमुख स्तर होते हैं—छत्र स्तर (Canopy), उप-छत्र स्तर, झाड़ी स्तर, घास स्तर और भूमि स्तर। प्रत्येक स्तर में अलग-अलग प्रकार के पौधे और जीव पाए जाते हैं।
यह स्तरीकरण संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रजातियों के सह-अस्तित्व को संभव बनाता है। इससे प्रतिस्पर्धा कम होती है और जैव विविधता बढ़ती है।
5. इकांटोन (Ecotone) एवं कोर प्रभाव (Edge effect) में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
इकांटोन वह क्षेत्र है जहाँ दो अलग-अलग पारिस्थितिक तंत्र मिलते हैं, जैसे वन और घासभूमि के बीच का क्षेत्र। यह क्षेत्र जैव विविधता से समृद्ध होता है क्योंकि यहाँ दोनों पारिस्थितिक तंत्रों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
कोर प्रभाव (Edge effect) उस स्थिति को दर्शाता है जिसमें इकांटोन क्षेत्र में प्रजातियों की संख्या और विविधता अधिक होती है। इसका कारण संसाधनों की अधिक उपलब्धता और विभिन्न आवासों का मिश्रण है।
हालाँकि, मानव गतिविधियों से इकांटोन प्रभावित हो सकते हैं, जिससे पारिस्थितिक संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
6. अंतःक्रिया की परिभाषा एवं धनात्मक तथा ऋणात्मक अंतःक्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
अंतःक्रिया (Interaction) से तात्पर्य दो या अधिक जीवों के बीच होने वाले संबंधों से है, जो उनके जीवन और अस्तित्व को प्रभावित करते हैं। पारिस्थितिकी में यह संबंध ऊर्जा प्रवाह और संसाधनों के उपयोग को नियंत्रित करते हैं।
धनात्मक अंतःक्रिया में दोनों जीवों को लाभ होता है या कम से कम किसी को हानि नहीं होती। उदाहरण—सहजीवन (Mutualism), सहभोजिता (Commensalism)।
ऋणात्मक अंतःक्रिया में एक या दोनों जीवों को हानि होती है। उदाहरण—परजीविता (Parasitism), प्रतिस्पर्धा (Competition), शिकारी-शिकार संबंध (Predation)।
इन अंतःक्रियाओं के कारण पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है और जैव विविधता प्रभावित होती है।
7. एलिलोपैथी (Allelopathy) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
एलिलोपैथी वह प्रक्रिया है जिसमें एक पौधा रासायनिक पदार्थों का स्राव करके दूसरे पौधों की वृद्धि को प्रभावित करता है। ये रसायन मिट्टी या हवा में फैलकर अन्य पौधों के अंकुरण और विकास को रोक सकते हैं।
उदाहरण के लिए, नीलगिरी और अखरोट के पौधे ऐसे रसायन छोड़ते हैं जो आसपास के पौधों की वृद्धि को रोकते हैं। एलिलोपैथी संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा कम करने का एक प्राकृतिक तरीका है।
यह प्रक्रिया कृषि में भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे खरपतवार नियंत्रण और फसल उत्पादन प्रभावित होता है।
8. सकारात्मक पारस्परिक क्रियाएँ एवं विरोधता (Antagonism), निष्प्रभाविता (Neutralism) को विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
सकारात्मक पारस्परिक क्रियाएँ:
इसमें दोनों जीव लाभ प्राप्त करते हैं या एक को लाभ होता है और दूसरे को हानि नहीं होती। उदाहरण—Mutualism (मधुमक्खी और फूल), Commensalism (पक्षी और पेड़)।
विरोधता (Antagonism):
इसमें एक जीव को लाभ और दूसरे को हानि होती है। उदाहरण—Predation और Parasitism।
निष्प्रभाविता (Neutralism):
इसमें दोनों जीव एक-दूसरे को प्रभावित नहीं करते। यह दुर्लभ स्थिति है क्योंकि अधिकांश जीव किसी न किसी रूप में जुड़े होते हैं।
ये सभी संबंध पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन को बनाए रखते हैं।
9. पर्यावरण नैतिकता (Environmental Ethics) को विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
पर्यावरण नैतिकता वह नैतिक सिद्धांत है जो मनुष्य और प्रकृति के बीच जिम्मेदार संबंधों को निर्धारित करता है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना है।
यह विचार बताता है कि मनुष्य केवल संसाधनों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि पृथ्वी का संरक्षक भी है। इसमें जैव विविधता संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग शामिल है।
पर्यावरण नैतिकता सतत विकास की आधारशिला है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को सुरक्षित रखने में सहायक है।
10. प्रदूषण की परिभाषा, प्रदूषकों के प्रकार को समझाते हुए विभिन्न प्रकार के प्रदूषक के नाम लिखिए।
उत्तर:
प्रदूषण वह प्रक्रिया है जिसमें पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे जीवों और पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान होता है।
प्रदूषकों के प्रकार:
- वायु प्रदूषक: कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड।
- जल प्रदूषक: कीटनाशक, भारी धातुएँ, औद्योगिक अपशिष्ट।
- मृदा प्रदूषक: रासायनिक उर्वरक, प्लास्टिक, ठोस कचरा।
- ध्वनि प्रदूषण: वाहन, मशीनरी, लाउडस्पीकर।
प्रदूषण मानव स्वास्थ्य और जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा है, इसलिए इसके नियंत्रण के लिए जागरूकता और प्रभावी उपाय आवश्यक हैं।
11. प्रदूषण पर एक निबंध लिखिए।
उत्तर:
प्रदूषण पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों के अत्यधिक संचय की वह स्थिति है जिससे जीवित प्राणियों और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुँचता है। यह आधुनिक औद्योगीकरण और शहरीकरण का प्रमुख दुष्परिणाम है। प्रदूषण मुख्यतः वायु, जल, मृदा और ध्वनि के रूप में देखा जाता है।
वायु प्रदूषण वाहनों और उद्योगों से निकलने वाली गैसों से होता है, जबकि जल प्रदूषण औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज और रासायनिक पदार्थों के कारण होता है। मृदा प्रदूषण रासायनिक उर्वरकों और प्लास्टिक के उपयोग से बढ़ता है।
प्रदूषण के कारण जलवायु परिवर्तन, ओजोन परत क्षरण और स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इसके नियंत्रण के लिए वृक्षारोपण, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग और कचरा प्रबंधन आवश्यक है। जागरूकता और सरकारी नीतियाँ प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
12. ध्वनि प्रदूषण का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ध्वनि प्रदूषण तब होता है जब अनावश्यक और तेज ध्वनि वातावरण में असंतुलन पैदा करती है। यह मुख्यतः वाहनों, उद्योगों, लाउडस्पीकर और निर्माण कार्यों से उत्पन्न होता है।
ध्वनि प्रदूषण के कारण सुनने की क्षमता में कमी, तनाव, उच्च रक्तचाप और नींद में बाधा जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। वन्य जीवों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि यह उनके संचार और प्रजनन व्यवहार को प्रभावित करता है।
ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए ध्वनि नियंत्रण नियमों का पालन, हरित पट्टी का विकास और सार्वजनिक जागरूकता आवश्यक है।
13. प्राकृतिक संपदाएँ क्या हैं? इनके संरक्षण की विधियाँ लिखिए।
उत्तर:
प्राकृतिक संपदाएँ वे संसाधन हैं जो प्रकृति से प्राप्त होते हैं और मानव जीवन के लिए आवश्यक हैं, जैसे जल, वन, खनिज और जीव-जंतु। ये संसाधन सीमित हैं, इसलिए उनका संरक्षण आवश्यक है।
संरक्षण की विधियाँ—
- वृक्षारोपण और वनों की रक्षा
- जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन
- ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग
- पुनर्चक्रण और कचरा प्रबंधन
- वन्य जीव संरक्षण
सतत विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग आवश्यक है।
14. जैव-विविधता क्या है? उनके प्रकारों का वर्णन कीजिये तथा उसके महत्व को बताइये।
उत्तर:
जैव-विविधता पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीवों की विविधता को दर्शाती है। इसमें पौधे, पशु, सूक्ष्मजीव और उनके पारिस्थितिक तंत्र शामिल हैं।
प्रकार:
- आनुवंशिक विविधता
- प्रजातीय विविधता
- पारिस्थितिक तंत्र विविधता
महत्व:
जैव विविधता पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखती है, भोजन और औषधि प्रदान करती है तथा जलवायु नियंत्रण में मदद करती है। इसका संरक्षण मानव अस्तित्व के लिए आवश्यक है।
15. भौगोलिक संरचना के अनुसार जैव-विविधता के नमूने कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
भौगोलिक संरचना के अनुसार जैव-विविधता के नमूने मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं—
- अल्फा विविधता: किसी छोटे क्षेत्र या आवास में प्रजातियों की संख्या।
- बीटा विविधता: दो अलग-अलग आवासों के बीच प्रजातियों की विविधता का अंतर।
- गामा विविधता: बड़े भौगोलिक क्षेत्र में कुल प्रजातीय विविधता।
ये नमूने जैव विविधता के वितरण और संरक्षण रणनीतियों को समझने में सहायक हैं।
16. जैव-विविधता के तप्त स्थल (Hot Spot) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
जैव-विविधता के तप्त स्थल (Biodiversity Hotspots) वे क्षेत्र होते हैं जहाँ अत्यधिक प्रजातीय विविधता पाई जाती है और जो विलुप्ति के खतरे में होते हैं। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में स्थानिक (Endemic) प्रजातियाँ होती हैं जो केवल उसी क्षेत्र में पाई जाती हैं।
इन क्षेत्रों को “हॉटस्पॉट” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ जैव विविधता अत्यधिक है लेकिन मानव गतिविधियों जैसे वनों की कटाई, प्रदूषण और शहरीकरण के कारण इनका अस्तित्व खतरे में है। विश्व में लगभग 36 प्रमुख जैव-विविधता हॉटस्पॉट माने जाते हैं। भारत में पश्चिमी घाट और हिमालय प्रमुख उदाहरण हैं।
इन क्षेत्रों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यहाँ पृथ्वी की जैव विविधता का बड़ा हिस्सा पाया जाता है।
17. जैव-विविधता की कमी या हानि के क्या कारण हैं? समझाइए।
उत्तर:
जैव-विविधता की कमी आज विश्व की गंभीर पर्यावरणीय समस्या है। इसके प्रमुख कारण निम्न हैं—
- वनों की कटाई और आवास विनाश
- प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन
- अत्यधिक शिकार और अवैध व्यापार
- विदेशी प्रजातियों का प्रवेश
- जनसंख्या वृद्धि और शहरीकरण
इन कारणों से अनेक प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर पहुँच गई हैं। जैव विविधता की हानि पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित करती है और मानव जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
18. रेड डाटा बुक (Red Data Book) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
रेड डाटा बुक वह आधिकारिक दस्तावेज है जिसमें संकटग्रस्त और विलुप्ति के खतरे वाली प्रजातियों की सूची दी जाती है। इसमें पौधों और जानवरों की संरक्षण स्थिति का विवरण होता है।
इस पुस्तक में प्रजातियों को विभिन्न श्रेणियों में बाँटा जाता है जैसे—संकटग्रस्त, अति संकटग्रस्त और दुर्लभ। इसका उद्देश्य संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देना और लोगों में जागरूकता फैलाना है।
यह संरक्षण नीतियों और वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ स्रोत है।
19. जैव-विविधता संरक्षण की विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
जैव-विविधता संरक्षण दो प्रमुख विधियों से किया जाता है—
- इन-सिटू संरक्षण: जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में संरक्षित करना, जैसे राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य।
- एक्स-सिटू संरक्षण: जीवों को प्राकृतिक आवास से बाहर संरक्षित करना, जैसे चिड़ियाघर और वनस्पति उद्यान।
इसके अलावा वृक्षारोपण, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण शिक्षा भी संरक्षण में सहायक हैं। यह पृथ्वी के पारिस्थितिक संतुलन के लिए आवश्यक है।
20. वन्य जीवन संरक्षण के राष्ट्रीय संगठन कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
भारत में वन्य जीवन संरक्षण के लिए कई राष्ट्रीय संगठन कार्यरत हैं—
- राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (National Board for Wildlife)
- भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India)
- वन्यजीव संरक्षण प्राधिकरण
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
ये संगठन वन्यजीव संरक्षण, अनुसंधान और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से जैव विविधता को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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