B.Sc 2nd year chemistry 1st paper inorganic chemistry unit 4

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                   इस ब्लॉग में केवल अकार्बनिक रसायन विज्ञान की  चौथा  इकाई के प्रश्न और उत्तर हैं तथा पाँचवा  से छठी इकाई के प्रश्न अगले 

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बी.एस-सी. द्वितीय वर्ष – रसायन (प्रथम प्रश्न-पत्र)

प्रश्न-सूची (छत्तीसगढ़)

_________________इकाई 4__________________

1

2


प्रश्न 1. जल की अम्लीयता और क्षारीयता को परिभाषित कीजिए।
Answer:
जल की अम्लीयता (Acidity) उस क्षमता को दर्शाती है जिसमें जल किसी क्षार (base) के साथ प्रतिक्रिया करके उसे न्यूट्रल कर सकता है। यह जल में उपस्थित मुक्त H⁺ आयन, कार्बोनिक एसिड (H₂CO₃), लैक्टिक एसिड, सल्फ्यूरिक एसिड आदि की उपस्थिति के कारण होती है।

क्षारीयता (Alkalinity) जल की वह गुण है जिससे वह अम्ल (acid) को न्यूट्रलाइज़ करता है। यह जल में बाइकार्बोनेट (HCO₃⁻), कार्बोनेट (CO₃²⁻) एवं हाइड्रॉक्साइड (OH⁻) की उपस्थिति के कारण होती है।


प्रश्न 2. जल समपर्क की सामान्य अशुद्धियाँ क्या होती हैं?
Answer:
जल में सामान्य अशुद्धियाँ निम्नलिखित होती हैं:

  1. घुलनशील गैसें - CO₂, H₂S, NH₃
  2. घुलनशील लवण - NaCl, CaCl₂, MgSO₄
  3. अघुलनशील पदार्थ - कीचड़, रेत, मिट्टी
  4. कार्बनिक अशुद्धियाँ - बैक्टीरिया, वायरस, पौधों के अवशेष
  5. धात्विक अशुद्धियाँ - Fe, Pb, Cu आदि

प्रश्न 3. जल समपर्क की पॉर्टेबलिटी अथवा पीने योग्य और मैलिन अथवा अमैथिन जल से आप क्या समझते हैं?
Answer:
पेयजल (Potable water): वह जल जो मानव द्वारा बिना किसी नुकसान के पीने योग्य हो। इसमें किसी प्रकार के हानिकारक सूक्ष्मजीव या रासायनिक पदार्थ नहीं होते।

अमैथिन जल (Non-potable water): वह जल जो पीने योग्य नहीं होता क्योंकि उसमें अशुद्धियाँ, रोगाणु या रसायन मौजूद रहते हैं। इसे उपचारित करने की आवश्यकता होती है।


प्रश्न 4. जल समपर्क की निम्नतम अशुद्धता का निर्धारण करने के लिए सूत्र लिखिए।
Answer:
जल में अशुद्धता की मात्रा को निर्धारित करने के लिए, आप जल के नमूने में अशुद्ध पदार्थों की सांद्रता (जैसे, ppm या mg/L) को मापने के लिए विभिन्न रासायनिक या भौतिक विधियों का उपयोग कर सकते हैं।

विभिन्न अशुद्धियों को मापने के लिए कुछ सामान्य सूत्र और विधियाँ:

  • कुल ठोस (Total Dissolved Solids - TDS):
    • सूत्र: TDS (ppm) = (नमूने का वजन (g) - शुष्क नमूने का वजन (g)) / नमूने का आयतन (L) * 10^6
    • विधि: जल नमूने को सुखाकर, अशुद्धियों को मापने के लिए नमूने के वजन में कमी की गणना करें।
  • कठोरता (Hardness):
    • विधि: जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों की सांद्रता को मापने के लिए EDTA टाइट्रेशन का उपयोग करें।
    • सूत्र: कठोरता (ppm) = [(Ca आयन सांद्रता (mg/L) * 2.497) + (Mg आयन सांद्रता (mg/L) * 1.215)]
  • खनिज सांद्रता:
    • विधि: आयनिक सांद्रता को मापने के लिए आयन क्रोमैटोग्राफी या स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री का उपयोग करें।
    • उदाहरण:
      • कैल्शियम आयन (Ca2+) सांद्रता (ppm) = [Ca2+ आयन सांद्रता (mg/L) * 2.497]
      • मैग्नीशियम आयन (Mg2+) सांद्रता (ppm) = [Mg2+ आयन सांद्रता (mg/L) * 1.215]
  • अन्य अशुद्धियाँ:
    • विधि: विशिष्ट अशुद्धियों (जैसे, फ्लोराइड, नाइट्रेट, फास्फेट) के लिए विशिष्ट रासायनिक परीक्षणों का उपयोग करें।
    • उदाहरण:
      • फ्लोराइड सांद्रता (ppm) = [फ्लोराइड आयन सांद्रता (mg/L) * 1.999]
      • नाइट्रेट सांद्रता (ppm) = [नाइट्रेट आयन सांद्रता (mg/L) * 1.999] 

निम्नतम अशुद्धता का निर्धारण:

  • सांद्रता सीमा:

विभिन्न जल उपयोगों (जैसे, पीने, सिंचाई) के लिए अशुद्धियों की अधिकतम स्वीकार्य सांद्रता निर्धारित करें।

  • सांद्रता की तुलना:

जल नमूने में अशुद्धियों की सांद्रता को इन सीमाओं से तुलना करें।

  • निष्कर्ष:

यदि सांद्रता स्वीकार्य सीमा से अधिक है, तो अशुद्धता को निम्नतम माना जाता है।

उदाहरण:

मान लीजिए कि आप जल में फ्लोराइड की सांद्रता को मापते हैं और पाते हैं कि यह 1.5 ppm है। यदि पीने योग्य जल के लिए फ्लोराइड की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 1.0 ppm है, तो आप निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि जल में फ्लोराइड की सांद्रता निम्नतम है।

ध्यान दें: जल में अशुद्धता की निम्नतम सीमा विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि जल का उपयोग और स्थानीय नियम।

 


प्रश्न 5. जल समपर्क की कुल अशुद्धता का निर्धारण कीजिए।
Answer:
जल की कुल अशुद्धियाँ दो प्रकार की होती हैं:

  1. घुलनशील ठोस (TDS - Total Dissolved Solids)
  2. अघुलनशील ठोस (Suspended Solids)

कुल ठोस = घुलनशील ठोस + अघुलनशील ठोस

Determination: एक निश्चित मात्रा के जल को फिल्टर कर उसे सुखाकर ठोस पदार्थ का भार निकालते हैं।


प्रश्न 6. जल समपर्क में फैकल्टी निर्धारण के विभिन्न सूत्र लिखिए।
Answer:
Fecal contamination को मापन करने हेतु निम्न विधियाँ और सूत्र उपयोग किए जाते हैं:

  • MPN (Most Probable Number) method
  • Membrane filtration method
  • Coliform count
    कोई विशेष सूत्र नहीं होता, बल्कि परीक्षण विधियाँ होती हैं।

प्रश्न 7. SPADNS क्या है?
Answer:
SPADNS एक डाई आधारित विधि है जो जल में फ्लोराइड आयन की उपस्थिति का निर्धारण करती है।
SPADNS = Sodium 2-(parasulfophenylazo)-1,8-dihydroxy-3,6-naphthalene disulfonate

फ्लोराइड की उपस्थिति में डाई का रंग फीका पड़ता है, जिसे spectrophotometer द्वारा मापा जाता है।


प्रश्न 8. घुलित ऑक्सीजन (DO) की परिभाषा कीजिए।
Answer:
घुलित ऑक्सीजन (DO) का अर्थ है — वह ऑक्सीजन जो जल में घुली रहती है और जलचर जीवों के लिए आवश्यक होती है।
यह जल की गुणवत्ता का एक मुख्य संकेतक होता है। DO की मात्रा कम होने पर जल में प्रदूषण अधिक होता है।

प्रश्न 9. COD और BOD को परिभाषित कीजिए।
Answer:
BOD (Biochemical Oxygen Demand): यह वह ऑक्सीजन की मात्रा है जो जल में उपस्थित जैविक पदार्थों को माइक्रोऑर्गेनिज्म द्वारा ऑक्सीकरण (oxidation) करने में 5 दिनों में 20-25°C तापमान पर उपयोग की जाती है। यह जल की जैविक प्रदूषण मात्रा को दर्शाता है।

COD (Chemical Oxygen Demand): यह वह कुल ऑक्सीजन की मात्रा है जो जल में उपस्थित कार्बनिक और कुछ अकार्बनिक पदार्थों को रासायनिक रूप से ऑक्सीकरण करने में प्रयोग होती है, प्रायः यह BOD से अधिक होती है क्योंकि यह सभी ऑक्सीकरणीय पदार्थों को कवर करता है।


प्रश्न 10. BOD निर्धारण को असफल बनाने वाले कारण लिखिए।
Answer:
BOD परीक्षण को असफल या गलत परिणाम देने वाले कारण:

  1. नमूने में अधिक माइक्रोऑर्गेनिज्म का अभाव
  2. उपयुक्त तापमान (20°C) बनाए न रखना
  3. दूषित उपकरणों का उपयोग
  4. इनक्यूबेशन के दौरान प्रकाश की उपस्थिति
  5. जल के pH में असंतुलन
  6. अत्यधिक जहरीले पदार्थों की उपस्थिति

प्रश्न 11. उच्च-टर्बिडिटी और टर्बिडनेस में क्या अंतर है?
Answer:
टर्बिडनेस (Turbidity): यह जल की गंदलापन (cloudiness) को दर्शाता है, जो सस्पेंडेड पार्टिकल्स के कारण होता है।

उच्च टर्बिडिटी: इसका मतलब है कि जल में बहुत अधिक गंदगी या सस्पेंडेड पदार्थ हैं जिससे जल अत्यधिक धुंधला हो जाता है।

मतलब, टर्बिडनेस एक गुण है, और "उच्च टर्बिडिटी" उसकी अधिक मात्रा को दर्शाती है।


प्रश्न 12. क्लोरीन के क्लोरिनेशन को परिभाषित कीजिए।
Answer:
क्लोरीनेशन (Chlorination): यह वह प्रक्रिया है जिसमें जल को शुद्ध करने के लिए उचित मात्रा में क्लोरीन गैस या क्लोरीन युक्त यौगिक (जैसे - ब्लिचिंग पाउडर) मिलाया जाता है। इसका उद्देश्य रोगाणुओं को मारना और जल को पीने योग्य बनाना होता है।


प्रश्न 13. विनाइल क्लोराइड मономर पदार्थ (VCM) से क्या समझते हैं?
Answer:
VCM (Vinyl Chloride Monomer): यह एक विषैली गैस होती है जिसका उपयोग PVC (Polyvinyl Chloride) प्लास्टिक बनाने में होता है।
यह जल में अवशेष रूप में मिल सकता है और यह कैंसरजनक (carcinogenic) होता है। इसकी उपस्थिति से जल की गुणवत्ता घटती है।


प्रश्न 14. कोल्ड स्टोरेज क्या है?
Answer:
Cold Storage: यह एक ऐसी भंडारण तकनीक है जहाँ खाद्य, औषधि या जल सैंपल्स को कम तापमान (0°C से 4°C) पर सुरक्षित रखा जाता है ताकि उनमें बैक्टीरियल ग्रोथ न हो और वे खराब न हों।

जल परीक्षण के लिए भी नमूनों को cold storage में रखा जाता है ताकि परीक्षण के समय तक उनका स्वरूप न बदले।


प्रश्न 15. क्लोरीन में रेजिड कंटेंट का निर्धारण कैसे किया जाता है?
Answer:
Residual Chlorine का मतलब होता है— क्लोरीनेशन के बाद जो बची हुई क्लोरीन जल में उपस्थित रहती है।

Determination:

  1. Starch-Iodide Method
  2. DPD (Diethyl Para-Phenylenediamine) Colorimetric Method

इन विधियों में रंग परिवर्तन या कलर इंटेंसिटी द्वारा बची हुई क्लोरीन की मात्रा ज्ञात की जाती है।


प्रश्न 16. जल की क्षारीयता क्या होती है? इसका निर्धारण कैसे किया जाता है?
Answer:
क्षारीयता (Alkalinity): यह जल की वह क्षमता है जिससे वह एसिड को न्यूट्रल करता है।
यह मुख्यतः बाइकार्बोनेट, कार्बोनेट और हाइड्रॉक्साइड आयनों की उपस्थिति के कारण होती है।

Determination: टाइट्रेशन विधि से H₂SO₄ या HCl से टाइट्रेट कर pH इंडिकेटर (methyl orange/phenolphthalein) द्वारा क्षारीयता की गणना की जाती है।

प्रश्न 17. जल की कठोरता क्या होती है? इसका निर्धारण कैसे किया जाता है?
Answer:
जल की कठोरता (Hardness of Water): यह जल में उपस्थित कैल्शियम (Ca²⁺) और मैग्नीशियम (Mg²⁺) आयनों के कारण होती है। यह आयन साबुन के साथ रिएक्ट कर अनघुलनशील पदार्थ बना लेते हैं जिससे झाग नहीं बनता।
कठोर जल को पीना या उपयोग करना स्वास्थ्य और घरेलू उपयोग के लिए हानिकारक हो सकता है।

निर्धारण की विधियाँ:

  1. EDTA टाइट्रेशन विधि (Complexometric Titration)
    • इसमें Eriochrome Black T को indicator के रूप में प्रयोग करते हैं।
    • EDTA, Ca²⁺ और Mg²⁺ आयनों से complex बनाता है।
  2. SOAP टेस्ट (पुरानी विधि)
  3. Gravimetric विधि (कम प्रयोग होती है)

प्रश्न 18. जल में कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा का निर्धारण EDTA द्वारा कैसे किया जाता है?
Answer:
EDTA विधि द्वारा Ca²⁺ और Mg²⁺ का विश्लेषण:

सिद्धांत: EDTA (Ethylenediaminetetraacetic acid) एक complexing agent है जो Ca²⁺ और Mg²⁺ आयनों से स्थायी complex बनाता है।

प्रक्रिया:

  1. जल के नमूने में buffer मिलाया जाता है जिससे pH लगभग 10 पर बना रहे।
  2. Eriochrome Black-T indicator मिलाते हैं — यह आयनों के साथ वाइन रेड रंग देता है।
  3. अब EDTA से टाइट्रेशन करते हैं — जब सभी आयन complex बना लेते हैं तो रंग वाइन रेड से नीला हो जाता है (endpoint)
  4. EDTA की खपत से मात्रा की गणना की जाती है।

प्रश्न 19. टर्बिडिटी विधि लिखिए।
Answer:
टर्बिडिटी (Turbidity): यह जल में उपस्थित सस्पेंडेड पदार्थों (जैसे मिट्टी, सिल्ट, माइक्रोब्स आदि) के कारण होने वाले धुंधलापन को दर्शाता है।

मापन की विधियाँ:

  1. Turbidimeter:
    • यह एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो प्रकाश के प्रकीर्णन (scattering) के आधार पर turbidity मापता है।
    • इकाई: NTU (Nephelometric Turbidity Units)
  2. जैरी जार विधि / विजुअल कंपेरेटर मेथड (पुरानी):
    • एक ट्यूब या जार में जल भरकर नीचे के निशान को देखकर turbidity का आकलन करते थे।

प्रश्न 20. स्थायी कठोरता का निर्धारण से आप क्या समझते हैं? अस्थायी एवं स्थायी कठोरता में क्या अंतर है?
Answer:
स्थायी कठोरता (Permanent Hardness):
यह कठोरता सल्फेट्स, क्लोराइड्स आदि जैसे घुलनशील लवणों (CaSO₄, MgCl₂ आदि) की उपस्थिति के कारण होती है और उबालने से दूर नहीं होती

अस्थायी कठोरता (Temporary Hardness):
यह बाइकार्बोनेट्स (Ca(HCO₃)₂, Mg(HCO₃)₂) की उपस्थिति के कारण होती है और उबालने से हटाई जा सकती है

अंतर सारणी में:

बिंदु

अस्थायी कठोरता

स्थायी कठोरता

मुख्य कारण

बाइकार्बोनेट्स

क्लोराइड्स, सल्फेट्स

हटाने की विधि

उबालकर

रासायनिक विधियों द्वारा (EDTA, आयन एक्सचेंज)

आसान हटाना

हाँ

नहीं

 

प्रश्न 21. (i) जल सैम्पल में फ्लोराइड का निर्धारण, (ii) SPADNS विधि, (iii) घुलित ऑक्सीजन विधि।

(i) जल में फ्लोराइड का निर्धारण:

जल में फ्लोराइड आयन (F⁻) की उपस्थिति स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। सामान्यतः SPADNS method का उपयोग होता है।

(ii) SPADNS विधि:

  • SPADNS (Sodium 2-(parasulfophenylazo)-1,8-dihydroxy-3,6-naphthalene disulfonate) एक dye indicator है।
  • इसमें फ्लोराइड ज़िरकोनियम डाई कॉम्प्लेक्स से प्रतिक्रिया करता है और इसका रंग हल्का हो जाता है।
  • रंग की कमी को spectrophotometer द्वारा मापा जाता है (570 nm पर absorbance)
  • जितना अधिक फ्लोराइड होगा, absorbance उतना कम होगा।

(iii) घुलित ऑक्सीजन (DO) की विधि:

  • इसे Winkler विधि द्वारा मापा जाता है।
  • इसमें मैंगनीज सल्फेट और क्षारीय आयोडाइड मिलाकर DO को स्थिर किया जाता है।
  • बाद में इसे एसिड डालकर आयोडीन में बदला जाता है जिसे सोडियम थायोसल्फेट से titrate किया जाता है।

प्रश्न 22. COD निर्धारण की विधि को समझाइए।

COD (Chemical Oxygen Demand):

यह उस ऑक्सीजन की मात्रा है जो किसी जल सैम्पल में उपस्थित ऑर्गेनिक पदार्थों को पूरी तरह से ऑक्सीकृत करने के लिए चाहिए।

विधि:

  • जल सैम्पल को potassium dichromate (K₂Cr₂O₇) और sulfuric acid (H₂SO₄) के साथ गर्म किया जाता है।
  • इसमें silver sulfate (Ag₂SO₄) catalyst होता है और mercury (HgSO₄) chloride को हटाने के लिए।
  • ऑक्सीकरण के बाद बचा हुआ K₂Cr₂O₇ को ferrous ammonium sulfate (FAS) से titrate किया जाता है।

निष्कर्ष:
जितना अधिक FAS लगेगा, उतना ही कम ऑक्सीजन का उपयोग हुआ यानी COD कम।


प्रश्न 23. कोलोरिमिट्री को कार्यान्वित कीजिए।

कोलोरिमिट्री (Colorimetry):

यह एक analytical technique है जिसमें किसी solution की रंग तीव्रता (color intensity) को मापकर उसमें उपस्थित तत्वों की मात्रा ज्ञात की जाती है।

Principle:

  • यह Beer-Lambert’s law पर आधारित है:
    A=εclA = \varepsilon c lA=εcl
    जहाँ A = absorbance, ε = molar absorptivity, c = concentration, l = path length

Steps:

  1. रंगीन solution तैयार किया जाता है।
  2. एक standard solution के साथ तुलना की जाती है।
  3. Spectrophotometer से absorbance measure करते हैं।
  4. Calibration curve से concentration निकालते हैं।

प्रश्न 24. उच्च तापमान कलोरीमीटर और निम्न तापमान कलोरीमीटर में अंतर स्पष्ट कीजिए।

 

 

बिंदु

उच्च तापमान कलोरीमीटर

निम्न तापमान कलोरीमीटर

उपयोग

Combustion reactions

Physiological reactions

तापमान सीमा

300°C से अधिक

0-100°C

निर्माण सामग्री

Steel-lined

Glass-lined

Application

Fuel, coal analysis

Food, biochemical reactions


प्रश्न 25. कोल गैस क्या है? इसका संगठन एवं अनुप्रयोग लिखिए।

कोल गैस (Coal Gas):

यह एक gaseous fuel है जो कोयले को बिना ऑक्सीजन के गर्म करके प्राप्त होती है।

संगठन:

  • Hydrogen (H₂) ≈ 50%
  • Methane (CH₄) ≈ 30%
  • Carbon monoxide (CO) ≈ 10%
  • बाकी gases: CO₂, N₂, etc.

उपयोग:

  1. घरेलू ईंधन के रूप में (Gas stoves)
  2. औद्योगिक भट्टियों में heating के लिए
  3. Street lighting (old times)
  4. Raw material for ammonia synthesis

प्रश्न 26. BOD का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है?

BOD (Biochemical Oxygen Demand):

यह वह ऑक्सीजन की मात्रा है जो जल में उपस्थित सूक्ष्मजीवों द्वारा ऑर्गेनिक पदार्थों के विघटन में उपयोग होती है।

विधि:

  1. जल सैम्पल लिया जाता है और उसमें DO की मात्रा पहले दिन (initial DO) मापी जाती है।
  2. सैम्पल को 5 दिनों तक 20°C पर अंधेरे में रखा जाता है।
  3. 5वें दिन की DO फिर से मापते हैं।
  4. दोनों DO के बीच का अंतर ही BOD है।

Formula:
BOD = DO(initial) – DO(final)

 

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