B.Sc 2nd year chemistry 1st paper inorganic chemistry unit 6

  NOTE:-     In this blog there are only questions and answers of 6 th unit of inorganic chemistry 

                  

                   इस ब्लॉग में केवल अकार्बनिक रसायन विज्ञान की  छठी   इकाई के प्रश्न और उत्तर हैं 


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बी.एस-सी. द्वितीय वर्ष – रसायन (प्रथम प्रश्न-पत्र)

प्रश्न-सूची (छत्तीसगढ़)

__________________इकाई 6 ________________






 

 

इकाई 6


प्रश्न 1. ऊष्मागतिकीय साम्य से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
ऊष्मागतिकीय साम्य (Thermodynamic equilibrium) वह अवस्था होती है जब किसी प्रणाली (system) में कोई शुद्ध ऊर्जा या द्रव्यमान का प्रवाह नहीं होता, और सभी प्रकार के साम्य जैसे –

  1. यांत्रिक साम्य (Mechanical equilibrium)कोई दाब परिवर्तन नहीं
  2. ऊष्मीय साम्य (Thermal equilibrium)कोई तापमान अंतर नहीं
  3. रासायनिक साम्य (Chemical equilibrium)कोई रासायनिक अभिक्रिया नहीं हो रही
    ये सभी एक साथ प्राप्त हो जाते हैं।
    इस स्थिति में प्रणाली का गिब्स मुक्त ऊर्जा न्यूनतम होती है और प्रणाली स्थिर होती है।

प्रश्न 2(a). रासायनिक साम्यावस्था एवं ऊष्मीय साम्यावस्था में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

आधार

रासायनिक साम्यावस्था

ऊष्मीय साम्यावस्था

परिभाषा

यह वह स्थिति है जहाँ आगे और पीछे की अभिक्रिया की दर समान होती है।

यह वह स्थिति है जहाँ दो वस्तुओं या भागों के बीच ताप का कोई प्रवाह नहीं होता।

प्रमुख कारक

रासायनिक अभिक्रियाएँ

तापमान

ऊर्जा परिवर्तन

गिब्स ऊर्जा न्यूनतम

ताप ऊर्जा संतुलित

उदाहरण

N₂ + 3H₂ 2NH₃

गर्म कॉफी धीरे-धीरे कमरे के तापमान पर आ जाती है।


प्रश्न 2(b). आयनिक साम्य किसे कहते हैं?
उत्तर:
आयनिक साम्य (Ionic equilibrium) उस स्थिति को कहते हैं जब एक आयनिक यौगिक, जैसे किसी इलेक्ट्रोलाइट का अपघटन और पुनः संयोजन एक ही दर से होते हैं, जिससे आयन की सांद्रता स्थिर रहती है।
उदाहरण:
इस अभिक्रिया में आगे व पीछे की दर समान होने पर आयनिक साम्य प्राप्त होता है।


प्रश्न 3. उत्क्रमणीय तथा अनुत्क्रमणीय अभिक्रियाओं को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:

  1. उत्क्रमणीय अभिक्रिया (Reversible reaction):
    ऐसी अभिक्रिया जो दोनों दिशाओं में हो सकती है।
    उदाहरण:
    यह अमोनिया निर्माण की हाबर प्रक्रिया है।
  2. अनुत्क्रमणीय अभिक्रिया (Irreversible reaction):
    ऐसी अभिक्रिया जो केवल एक दिशा में ही पूरी होती है।
    उदाहरण:
    इसमें हाइड्रोजन गैस निकलने से अभिक्रिया उलटी नहीं हो सकती।

प्रश्न 4. रासायनिक साम्य के अभिलक्षण लिखिए।
उत्तर:
रासायनिक साम्य के मुख्य अभिलक्षण निम्नलिखित हैं:

  1. यह एक गतिशील स्थिति होती है।
  2. आगे एवं पीछे की अभिक्रिया की दर समान होती है।
  3. अभिकारकों और उत्पादों की सांद्रता स्थिर रहती है।
  4. केवल एक बंद प्रणाली में प्राप्त होता है।
  5. तापमान, दाब और सांद्रता बदलने से साम्य की स्थिति बदलती है।

प्रश्न 5. रासायनिक विभव को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
रासायनिक विभव (Chemical potential) किसी तत्व की वह आंतरिक ऊर्जा होती है जो उस तत्व की मात्रा में अत्यल्प वृद्धि करने पर प्रणाली की कुल गिब्स मुक्त ऊर्जा में होने वाले परिवर्तन को दर्शाती है।
Mathematically:
जहाँ,

  •  = रासायनिक विभव
  •  = गिब्स मुक्त ऊर्जा
  •  = मोल की संख्या
    यह ऊर्जा का वह रूप है जो साम्य के विश्लेषण और पदार्थ के प्रवाह को निर्धारित करती है।

प्रश्न 6. अभिक्रिया की प्रगति की कोटि को समझाइये।
उत्तर:
अभिक्रिया की प्रगति की कोटि (Extent of reaction) उस माप को कहते हैं जिससे किसी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों से उत्पादों में परिवर्तन हुआ है। इसे ξ\xiξ (xi) से व्यक्त किया जाता है।
यदि कोई सामान्य अभिक्रिया हो:
तो,
अभिक्रिया की प्रगति की कोटि:
यह बताती है कि कितनी मोल्स की मात्रा में अभिकारक समाप्त या उत्पाद बने हैं।

प्रश्न 7. अभिक्रिया विभव एवं रासायनिक संभाव्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अभिक्रिया विभव (Reaction potential): यह एक अभिक्रिया के घटित होने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। यह रासायनिक परिवर्तन की दिशा और उसमें ऊर्जा के परिवर्तन को बताता है।

रासायनिक संभाव्य (Chemical potential): यह एक विशेष पदार्थ की उस ऊर्जा को दर्शाता है जो उस पदार्थ की मोल संख्या में सूक्ष्म वृद्धि करने पर प्रणाली की कुल गिब्स मुक्त ऊर्जा में परिवर्तन के रूप में आती है।

यह thermodynamic equilibrium के अध्ययन में अत्यंत उपयोगी होता है।


प्रश्न 8. रासायनिक अभिक्रिया को निम्न स्थितियों तथा साम्यस्थिरांक के समबंध द्वारा समझाइए।
उत्तर:
रासायनिक अभिक्रिया की दिशा और सीमा को Gibbs free energy (ΔG) एवं साम्यस्थिरांक (K) के माध्यम से समझाया जाता है।

  • यदि → अभिक्रिया स्वतः आगे बढ़ेगी।

साम्यावस्था पर:



प्रश्न 9. गिब्स प्लास ऊर्जा परिवर्तन की परिभाषा कीजिए तथा इसकी गणना की विधि को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
गिब्स मुक्त ऊर्जा (Gibbs Free Energy, G): यह वह थर्मोडायनामिक फलन है जो किसी प्रणाली की अधिकतम कार्य करने की क्षमता को दर्शाता है।

गणना:
अभिक्रिया में गिब्स ऊर्जा परिवर्तन:

यदि ΔG < 0 है, तो अभिक्रिया स्वतः घटित होती है। यह समीकरण हमें यह जानने में मदद करता है कि कोई अभिक्रिया spontaneous होगी या नहीं।


प्रश्न 10. फ्लगेसिटी (Fugacity) की भौतिक सार्थकता समझाइए।
उत्तर:
Fugacity गैस की "effective pressure" होती है जो किसी आदर्श गैस के व्यवहार से विचलन को दर्शाती है।

  • यह आदर्श गैस के लिए दाब (P) के बराबर होती है।
  • वास्तविक गैसों के लिए:

फुगेसिटी, रासायनिक संभाव्य की गणना में उपयोगी होती है और यह वास्तविक गैसों में थर्मोडायनामिक गुणों का अधिक सटीक मापन देती है।


प्रश्न 11. गैस दाब तथा अभिक्रिया विभव के मध्य संबंध को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
गैस दाब (P) और रासायनिक विभव (μ) के बीच सीधा संबंध होता है।

जहाँ,

यह संबंध बताता है कि जैसे-जैसे गैस का दाब बढ़ता है, रासायनिक विभव भी बढ़ता है। यह गैसीय अभिक्रियाओं में साम्य की स्थिति को निर्धारित करने में सहायक होता है।


प्रश्न 12. स्थूल रूप से एवं ऊष्मीय अभिक्रिया विभव के लिए संबंध स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
स्थूल रूप से अभिक्रिया विभव (Macroscopic chemical potential): यह सम्पूर्ण प्रणाली के स्तर पर गिब्स ऊर्जा परिवर्तन को दर्शाता है।

ऊष्मीय अभिक्रिया विभव (Thermal chemical potential): यह उस विभव को दर्शाता है जो ताप और एंट्रॉपी से जुड़ा होता है।

संबंध:

यह थर्मोडायनामिक समीकरण ताप, दाब एवं मोल संख्या के आधार पर रासायनिक विभव का निर्धारण करता है।


प्रश्न 13. साम्यास्थिरांक लिखिए एवं इसका निर्गमन कीजिए।
उत्तर:
साम्य अवस्था पर किसी रासायनिक अभिक्रिया के लिए साम्यस्थिरांक (Equilibrium constant) को K से दर्शाते हैं।

मान लीजिए,



इससे K का मान ज्ञात किया जाता है।


प्रश्न 14. साम्यावस्था के साम्यांग दर्शकांक स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
साम्यांग दर्शकांक (Equilibrium constant expression) वह सूत्र है जो अभिक्रियाओं में भाग लेने वाले पदार्थों की सांद्रताओं या दाबों के अनुपात को दर्शाता है।

दो प्रकार के साम्यांग होते हैं:

दोनों के बीच संबंध:

प्रश्न 15. साम्यास्थिरांक Kp एवं Kc के मध्य संबंध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
Kp और Kc किसी रासायनिक अभिक्रिया के साम्य के लिए उपयोग किए जाने वाले दो प्रकार के साम्यस्थिरांक हैं –

  • Kc: सांद्रता (mole/litre) पर आधारित होता है।
  • Kp: दाब (atm) पर आधारित होता है।

संबंध:

जहाँ,

उदाहरण:


प्रश्न 16. साम्यस्थिरांक Kp एवं Kc किसके लिए समान होते हैं?
उत्तर:
Kp और Kc तभी समान होते हैं जब गैसीय अभिक्रिया में गैसों के मोल का परिवर्तन ना हो, अर्थात्

इस स्थिति में:



प्रश्न 17 (a). गैस–शीलता संतुलन को कैसे प्राप्त किया जाता है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
गैस-शीलता संतुलन (Gas-phase equilibrium) उस अवस्था को कहते हैं जहाँ गैसीय अभिकारक और उत्पाद एक निश्चित अनुपात में स्थिर रहते हैं।

प्राप्ति का तरीका:

  • आरंभ में अभिकारकों की सांद्रता अधिक होती है।
  • समय के साथ उत्पाद बनते हैं।
  • एक समय बाद अभिक्रिया की गति आगे और पीछे समान हो जाती है – यही साम्य की अवस्था होती है।

इस अवस्था को सांद्रता या दाब के आधार पर साम्यस्थिरांक Kc या Kp द्वारा व्यक्त किया जाता है।


प्रश्न 17 (b). रासायनिक विभव – दाब ताप एवं एकाग्रता पर प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
रासायनिक विभव (μ) पर निम्न का प्रभाव होता है:

  1. दाब का प्रभाव (For gases):

जैसे-जैसे दाब बढ़ता है, रासायनिक विभव भी बढ़ता है।

  1. एकाग्रता का प्रभाव (For solutions):

जहाँ [C] = सांद्रता

  1. तापमान का प्रभाव:
    R और T का गुणनफल μ को बढ़ाता या घटाता है। उच्च तापमान पर विभव अधिक होता है।

प्रश्न 17 (c). साम्यावस्था दिशा–निर्देशन पर आधारित ताप, दाब एवं एकाग्रता प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
Le Chatelier का नियम बताता है कि यदि किसी साम्य प्रणाली पर बाहरी प्रभाव (ताप, दाब, एकाग्रता) डाला जाए, तो वह उस प्रभाव का प्रतिकार करती है।

  1. तापमान का प्रभाव:
  • Endothermic अभिक्रिया में ताप बढ़ाने से उत्पाद बढ़ते हैं।
  • Exothermic में ताप घटाने से उत्पाद बढ़ते हैं।
  1. दाब का प्रभाव (गैसों में):
  • दाब बढ़ाने पर वो दिशा जिसमें कम गैसीय मोल हैं, वरीयता पाती है।
  1. एकाग्रता का प्रभाव:
  • अभिकारक की एकाग्रता बढ़ाने से अभिक्रिया आगे बढ़ती है।
  • उत्पाद की बढ़ाने से अभिक्रिया पीछे जाती है।

(a) इस अभिक्रिया पर ताप, दाब एवं एकाग्रता का प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यह endothermic reaction है (ΔH = +ve)

  1. ताप का प्रभाव:
    ताप बढ़ाने से उत्पाद (NO) का निर्माण बढ़ेगा।
  2. दाब का प्रभाव:

  1. एकाग्रता का प्रभाव:
  • N₂ या O₂ की एकाग्रता बढ़ाने से NO का निर्माण बढ़ेगा।
  • NO की मात्रा बढ़ाने से अभिक्रिया पीछे जाएगी।

प्रश्न 18

(b). इस अभिक्रिया के लिए Kp के ताप पर प्रभाव को समझाइए।
उत्तर:
ΔH > 0 होने के कारण यह अभिक्रिया ताप ग्रहण करती है। अतः ताप बढ़ाने पर साम्य स्थिरांक (Kp) का मान बढ़ता है।

Van’t Hoff समीकरण:

यह दर्शाता है कि ताप बढ़ने पर K का मान बढ़ता है यदि ΔH > 0 हो।


प्रश्न 19. औसत अयनन के स्तर तथा इसकी सीमाओं की विवेचना कीजिए। इसका उपयोग कहाँ किया जाता है?
उत्तर:
औसत अयनन (Mean ionization):
किसी इलेक्ट्रोलाइट के आयनित होने वाले आयनों की औसत संख्या को दर्शाता है, विशेषतः जब complex आयन होते हैं।

उदाहरण:
कुछ आयनित होते हैं, कुछ नहीं औसत अयनन मान (i) आता है।

सीमाएँ:

  • यह केवल अनुमान देता है।
  • व्यावहारिक परिस्थितियों में deviation आ सकता है।
  • केवल dilute solutions में सटीक होता है।

उपयोग:

  • Osmotic pressure
  • Boiling point elevation
  • Colligative properties की गणना में प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 20. अयनन के स्तर एवं औसत अयनन में क्या अंतर है?
उत्तर:

बिंदु

अयनन का स्तर

औसत अयनन

परिभाषा

कुल अयनित अणुओं की संख्या

सभी प्रकार के आयनों की औसत संख्या

गणना

α = आयनित अणु / कुल अणु

i = वास्तविक कणों की कुल संख्या / प्रारंभिक अणु

उपयोग

डिग्री ऑफ डिसोसिएशन के लिए

कॉलिगेटिव गुणों की गणना में

लागू

सरल इलेक्ट्रोलाइट्स

complex इलेक्ट्रोलाइट्स

 

प्रश्न 23. पफर विलयन क्या है? इसके दो महत्वपूर्ण अनुप्रयोग लिखिए।
उत्तर:
Buffer solution (पफर विलयन) ऐसे विलयन होते हैं जो बाहरी अम्ल या क्षार जोड़ने पर भी अपने pH में बहुत कम परिवर्तन करते हैं।

प्रकार:

अनुप्रयोग:

  1. Biological systems में pH नियंत्रित रखने के लिए (जैसे रक्त में)
  2. Chemical analysis में reactions को नियंत्रित pH पर बनाए रखने के लिए।

प्रश्न 24. क्षारीय पफर विलयन के लिए हेंडरसन समीकरण की व्युत्पत्ति कीजिए।
उत्तर:
क्षारीय पफर में: कमजोर क्षार + उसके लवण होते हैं।

Henderson-Hasselbalch equation:

या

व्युत्पत्ति:
Weak base के dissociation से:

taking –log, rearranging और simplifying करने पर Henderson equation मिलती है।


प्रश्न 25. अम्ल–अभिकर एवं क्षार–अभिकर में क्या अंतर है?
उत्तर:

बिंदु

अम्ल-अभिकर

क्षार-अभिकर

परिभाषा

ऐसा पदार्थ जो अम्ल के साथ अभिक्रिया करे

ऐसा पदार्थ जो क्षार के साथ अभिक्रिया करे

उदाहरण

Na₂CO₃, NH₃

Al(OH)₃, Zn(OH)₂

प्रयोग

अम्ल को neutralize करने में

क्षार को neutralize करने में

प्रकृति

आमतौर पर basic या amphoteric

आमतौर पर acidic या amphoteric


प्रश्न 26. निम्नलिखित के संक्षेप में उत्तर लिखिए:

(a) प्रबल अम्ल एवं क्षार द्वारा बने लवण हेतु Kh=KwKbK_h = \frac{K_w}{K_b}Kh​=Kb​Kw​​ की व्युत्पत्ति कीजिए।
उत्तर:
जब कोई प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार मिलते हैं, तो लवण का विलयन अम्लीय होता है।

यह समीकरण लवण के जल-अवपात के संतुलन से प्राप्त होता है, जहाँ Kw = आयनीकरण स्थिरांक और Kb = क्षार की बेसिकिटी।


(b) दुर्बल अम्ल एवं दुर्बल क्षार से बने लवण के लिए निर्धारणीय व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर:
यदि लवण दुर्बल अम्ल (HA) और दुर्बल क्षार (BOH) से बना हो, तो जल-अवपात में:

A−+BH++H2OHA+BOHA^- + BH^+ + H_2O HA + BOHA−+BH++H2​OHA+BOH

Hydrolysis constant (Kh):

यह pH लवण के acid-base nature पर निर्भर करता है।


प्रश्न 27. प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षार से बने लवण के जल–अवपात हेतु समीकरण ​​ की व्युत्पत्ति कीजिए।
उत्तर:
प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण (जैसे NaCl) जल में पूर्ण रूप से आयनित होते हैं।
इनका कोई जल-अवपात नहीं होता।

Note:


प्रश्न 28. दुर्बल अम्ल एवं प्रबल क्षार से बने लवण के लिए जल–अवपात की मात्रा तथा लवण विलयन का pH ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
उदाहरण: CH₃COONa (दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षार)


प्रश्न 29. pH, pOH तथा pK के मध्य सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
pH और pOH किसी विलयन की अम्लता और क्षारता को दर्शाते हैं।

संबंध:

pKa, pKb और pKw का संबंध:

pH और pKa का संबंध –

Henderson Equation: pH=pKa+log([Salt][Acid])\text{Henderson Equation: } pH = pKa + \log \left( \frac{[\text{Salt}]}{[\text{Acid}]} \right)Henderson Equation: pH=pKa+log([Acid][Salt]​)


प्रश्न 30. विद्युतगति गुणधर्मों एवं 2 उदाहरण द्वारा वर्णन कीजिए।
उत्तर:
Electrochemical properties (विद्युतगतिक गुण):
ये वह गुण हैं जो विलयन में आयनों की उपस्थिति और गति से संबंधित होते हैं।

मुख्य गुणधर्म:

  1. Specific conductance (κ)
  2. Equivalent conductance (Λeq)
  3. Molar conductance (Λm)
  4. Electrochemical cell potential
  5. Transport number

उदाहरण:

  1. HCl का conductance पानी में सबसे ज्यादा होता है।
  2. Electrolytic dissociation NaCl पानी में  करता है।

 

 प्रश्न31: समआयान प्रभाव क्या है? उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।

(What is Inductive Effect? Explain with example.)

उत्तर:

परिभाषा (Definition):
जब किसी कार्बन श्रृंखला (carbon chain) में कोई अधिक वैद्युतीय ऋणात्मक (more electronegative) परमाणु या समूह जोड़ा जाता है, तो वह अपने निकट के परमाणुओं से इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर खींचता है। इस प्रकार इलेक्ट्रॉन घनत्व एक दिशा में शिफ्ट हो जाता है। इस इलेक्ट्रॉनिक विस्थापन को ही समआयान प्रभाव (Inductive Effect) कहा जाता है।

इसे आमतौर पर σ-बॉन्ड (sigma bond) के माध्यम से संचरित होने वाला प्रभाव माना जाता है।


🔸 प्रकार (Types of Inductive Effect):

  1. -I प्रभाव (Negative Inductive Effect):
    जब कोई समूह इलेक्ट्रॉन खींचता है (electron withdrawing), तो वह –I प्रभाव दिखाता है।
    उदाहरण: –NO₂, –Cl, –CN, –COOH आदि।
  2. +I प्रभाव (Positive Inductive Effect):
    जब कोई समूह इलेक्ट्रॉन धकेलता है (electron donating), तो वह +I प्रभाव दिखाता है।
    उदाहरण: –CH₃, –C₂H₅, –(CH₃)₃C आदि।

 

🧪 उदाहरण:

मान लीजिए हमारे पास दो अम्ल (acids) हैं:

  1. CH₃COOH (Acetic acid)
  2. ClCH₂COOH (Chloroacetic acid)

यहाँ, Cl (क्लोरीन) एक इलेक्ट्रॉन खिंचने वाला समूह है, जो –I प्रभाव दिखाता है। इस वजह से ClCH₂COOH में Cl, COOH ग्रुप की H⁺ आयन रिलीज करने की प्रवृत्ति को बढ़ा देता है।

🔹 इसलिए ClCH₂COOH > CH₃COOH की तुलना में अधिक अम्लीय होता है।

समआयान प्रभाव एक स्थायी प्रभाव है जो किसी अणु में σ-बॉन्ड के माध्यम से इलेक्ट्रॉन खिंचाव या धकेलाव के कारण उत्पन्न होता है। इससे अणु की अम्लता, क्षारता, स्थायित्व आदि प्रभावित होते हैं।

 


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