B.Sc. Chemistry (C.G.) Third Year – UNIT 1B, First Question Paper Long & Short Answer Questions

 




B.Sc. Chemistry (C.G.)

Third Year – First Question Paper


बी.एससी. रसायन विज्ञान (सी.जी.)
तृतीय वर्ष – प्रथम प्रश्न पत्र

इकाई 1 (ब ) 

दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न


प्रश्न 1-

धातु संकुलों की ऊष्मागतिकीय अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

धातु आयन और लिगैण्ड के बीच बनने वाले संकुल की स्थिरता को ऊष्मागतिकीय स्थायित्व ( Thermodynamic stability ) कहते हैं। यह बताता है कि संकुल बनने की अभिक्रिया कितनी अनुकूल (spontaneous) है।

सामान्य अभिक्रिया:

Mn++LMLn+

स्थायित्व को स्थायित्व स्थिरांक (Formation constant, Kf) द्वारा व्यक्त किया जाता है:

Kf=[ML][M][L]
  • Kf बड़ा → संकुल अधिक स्थिर
  • Kf छोटा → संकुल कम स्थिर

ऊष्मागतिक समीकरण:

ΔG=RTlnK

यदि ΔG ऋणात्मक हो → संकुल स्थायी होता है।

अतः संकुल की स्थिरता ΔG, ΔH और ΔS पर निर्भर करती है।


प्रश्न 2

ऊष्मागतिकी स्थायित्व को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिये।

उत्तर

संकुल की स्थिरता निम्न कारकों पर निर्भर करती है:

  1. धातु आयन का आवेश
    अधिक आवेश → अधिक आकर्षण → अधिक स्थिर संकुल
    उदाहरण: Fe³⁺ > Fe²⁺
  2. धातु आयन का आकार
    छोटा आयन → अधिक charge density → अधिक स्थिरता
  3. लिगैण्ड की प्रकृति
    Strong donor ligand अधिक स्थिर संकुल बनाते हैं
    क्रम: CN⁻ > NH₃ > H₂O
  4. Chelate प्रभाव
    बहुदंती (multidentate) लिगैण्ड अधिक स्थिर संकुल बनाते हैं।
  5. π-बॉन्डिंग
    π-acceptor ligands (CO, CN⁻) स्थायित्व बढ़ाते हैं।
  6. विलायक का प्रभाव
    विलायक भी स्थिरता को प्रभावित करता है।

प्रश्न 3

विलायक की प्रकृति से संकुल का स्थायित्व किस प्रकार प्रभावित होता है? समझाइए।

उत्तर

विलायक संकुल स्थिरता को solvation effect द्वारा प्रभावित करता है।

  1. धातु आयन का Solvation
    जल जैसे polar solvent धातु आयन को घेर लेते हैं।
    इससे ligand का जुड़ना कठिन हो जाता है → स्थिरता घटती है।
  2. Ligand Solvation
    यदि ligand solvent से strongly जुड़ा है तो वह धातु से कम जुड़ता है।

निष्कर्ष:
Non-polar solvent में संकुल अधिक स्थिर होते हैं।


प्रश्न 4

कीलेट संकुलों का ऊष्मागतिकीय स्थायित्व सामान्य संकुल से अधिक होता है, स्पष्ट कीजिये।

उत्तर

Chelating ligand कई donor atoms से धातु से जुड़ता है।

उदाहरण तुलना:

Ni2++6NH3[Ni(NH3)6]2+Ni2++3en[Ni(en)3]2+

दूसरा संकुल अधिक स्थिर है।

कारण:

  1. एंट्रॉपी प्रभाव
    मुक्त कणों की संख्या बढ़ती है → ΔS धनात्मक → स्थिरता बढ़ती है।
  2. रिंग निर्माण
    Chelate ring मजबूत होती है।
  3. बहु बन्ध निर्माण
    एक ligand कई बन्ध बनाता है → टूटना कठिन।

इसे Chelate Effect कहते हैं।


प्रश्न 5

धातु-संकुलों में धातु आयन के आकार एवं आवेश का उसके ऊष्मागतिकीय स्थायित्व से क्या सम्बन्ध होता है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिये।

उत्तर

  1. आवेश का प्रभाव
    अधिक आवेश → अधिक आकर्षण → अधिक स्थिरता
    उदाहरण: Fe³⁺ > Fe²⁺
  2. आकार का प्रभाव
    छोटा आयन → उच्च charge density → अधिक स्थिर संकुल
    उदाहरण: Mg²⁺ > Ca²⁺ > Ba²⁺
  3. Charge Density
Charge density=ChargeSize

अधिक charge density → अधिक स्थिर संकुल।

उदाहरण:

Al3++F[AlF6]3

यह अत्यंत स्थिर संकुल है।

प्रश्न 6

धातु संकुलों की बलगतिकी ( Kinetics ) की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

धातु संकुलों की बलगतिकी (Kinetics) से तात्पर्य है कि संकुल बनने या टूटने की गति (rate) कितनी है।

ध्यान रखें:

  • ऊष्मागतिकी → संकुल कितना स्थिर है
  • बलगतिकी → संकुल कितनी तेजी से बनता/टूटता है

धातु संकुल दो प्रकार के होते हैं:

  1. Labile complexes
    जिनमें ligand तेजी से बदल जाते हैं।
    उदाहरण: Cu²⁺, Zn²⁺
  2. Inert complexes
    जिनमें ligand बहुत धीरे बदलते हैं।
    उदाहरण: Co³⁺, Cr³⁺

निष्कर्ष:
बलगतिकी संकुलों की प्रतिक्रिया गति से सम्बन्धित है।


प्रश्न 7

ऐक्वा धनायनों से जल के विनिमय की बलगतिकी के लिये ग्रे एवं लैंगफोर्ड के वर्गीकरण का वर्णन कीजिये।

उत्तर

Gray और Langford ने धातु आयनों को जल विनिमय की गति के आधार पर वर्गीकृत किया।

सामान्य अभिक्रिया:

[M(H2O)6]n++H2O[M(H2O)5(H2O)]n+

वर्गीकरण:

(1) Labile ions

जल तेजी से बदलता है।
उदाहरण: Na⁺, Ca²⁺, Cu²⁺, Zn²⁺

(2) Intermediate ions

मध्यम गति से विनिमय।
उदाहरण: Fe²⁺, Co²⁺, Ni²⁺

(3) Inert ions

जल बहुत धीरे बदलता है।
उदाहरण: Cr³⁺, Co³⁺


प्रश्न 8

धातु संकुलों की परिवर्तनीयता (Lability) को प्रभावित करने वाले कारकों को समझाइये।

उत्तर

(1) धातु आयन का आवेश

अधिक आवेश → मजबूत बन्ध → कम lability
उदाहरण: Co³⁺ inert, Co²⁺ labile


(2) धातु आयन का आकार

बड़ा आयन → कमजोर बन्ध → अधिक lability


(3) इलेक्ट्रॉनिक संरचना (CFSE)

अधिक CFSE → कम lability
d³ और low-spin d⁶ → inert


(4) लिगैण्ड की प्रकृति

Strong ligand → inert complex
Weak ligand → labile complex


(5) ऑक्सीकरण अवस्था

उच्च ऑक्सीकरण अवस्था → कम lability


प्रश्न 9

स्पष्ट कीजिये कि [Cu(H2O)6]2+[Cu(H_2O)_6]^{2+} तीव्रता से क्रिया करता है।

उत्तर

[Cu(H2O)6]2+[Cu(H_2O)_6]^{2+} एक labile complex है।

कारण:

  1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
    Cu²⁺ → d⁹ configuration
    यह अस्थिर होता है।

  1. Jahn–Teller प्रभाव
    Cu²⁺ में octahedral संकुल विकृत हो जाता है।
    Axial बन्ध कमजोर हो जाते हैं → ligand आसानी से निकल जाते हैं।

  1. कम CFSE
    कम स्थिरीकरण ऊर्जा → बन्ध कमजोर → तीव्र अभिक्रिया।

इसलिए यह संकुल तेजी से ligand exchange करता है।


प्रश्न 10

वर्गाकार समतलीय संकुलों में प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं को संक्षेप में समझाइये।

उत्तर

Square planar complexes (विशेषकर Pt²⁺, Pd²⁺) में प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ Associative mechanism (A-mechanism) से होती हैं।

अभिक्रिया क्रम:

ML4+YML4YML3Y+L

चरण:

  1. नया ligand (Y) पहले जुड़ता है
  2. पाँच समन्वयी intermediate बनता है
  3. पुराना ligand निकल जाता है

Trans Effect

Square planar complexes में एक ligand दूसरे ligand के निकलने की गति बढ़ाता है।

Strong trans-effect ligands:

CN>CO>PR3>NH3>H2O


निष्कर्ष:
वर्गाकार समतलीय संकुलों में प्रतिस्थापन associative mechanism और trans effect द्वारा नियंत्रित होता है।

प्रश्न 11

वर्गाकार समतलीय संकुलों की प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं के वेग स्थिरांक (Rate constant) के लिये समीकरण की व्युत्पत्ति कीजिये।

उत्तर

वर्गाकार समतलीय संकुलों में प्रतिस्थापन अभिक्रिया सामान्यतः Associative (A) mechanism से होती है।

अभिक्रिया:

ML4+YML3Y+LML_4 + Y \rightarrow ML_3Y + L

यह दो चरणों में होती है:

चरण 1 (धीमा, Rate determining step):

ML4+Yk1ML4YML_4 + Y \xrightarrow{k_1} ML_4Y

चरण 2 (तेज):

ML4Yk2ML3Y+L

क्योंकि पहला चरण धीमा है, इसलिए वेग उसी पर निर्भर करेगा।

Rate=k1[ML4][Y]

यदि Y की सान्द्रता अधिक हो (pseudo first order):

Rate=kobs[ML4]

जहाँ

kobs=k1[Y]

यही वर्गाकार समतलीय संकुलों के लिये वेग समीकरण है।


प्रश्न 12

वर्गाकार समतलीय संकुल में नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन की क्रिया विधि को समझाइये।

उत्तर

Square planar complexes (Pt²⁺, Pd²⁺) में nucleophilic substitution Associative mechanism (A) से होती है।

अभिक्रिया:

[PtCl4]2+NH3[PtCl3(NH3)]+Cl

क्रिया विधि:

  1. नाभिकस्नेही ligand (NH₃) धातु से जुड़ता है
  2. 5-coordinate intermediate बनता है
  3. पुराना ligand निकल जाता है

यह SN2 के समान है।

Trans Effect

Trans ligand प्रतिस्थापन की गति को बढ़ाता है।


प्रश्न 13

वर्गाकार समतलीय संकुलों में प्रतिस्थापन अभिक्रिया दर को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिये।

उत्तर

(1) धातु आयन की प्रकृति

दर का क्रम:

Pd2+>Pt2+>Ni2+


(2) Leaving group

अच्छा leaving group → तेज अभिक्रिया

I>Br>Cl>NH3


(3) Entering group (Nucleophile)

मजबूत nucleophile → तेज दर

CN>NH3>H2O


(4) Trans Effect

Strong trans ligand → तेजी से प्रतिस्थापन।


(5) Steric effect

बड़े ligand → अभिक्रिया धीमी।


प्रश्न 14

बलगतिकी तथा ऊष्मागतिकीय स्थायित्व में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

आधारऊष्मागतिकी स्थायित्वबलगतिकी
अर्थ    संकुल कितना स्थिर हैसंकुल कितनी तेजी से बनता/टूटता है
निर्भरताΔG, KfRate constant
सम्बन्धऊर्जागति
उदाहरणCo³⁺ complex स्थिरCu²⁺ complex तेजी से प्रतिक्रिया करता

निष्कर्ष:
स्थिर संकुल हमेशा inert नहीं होते।


प्रश्न 15

ऊष्मागतिकी स्थायित्व में पाई बंधन (π-bonding) का महत्व समझाइए।

उत्तर

π-बॉन्डिंग धातु और लिगैण्ड के बीच अतिरिक्त स्थिरता प्रदान करती है।

प्रकार:

(1) π-donation

Ligand → Metal
उदाहरण: Cl⁻, OH⁻


(2) π-back bonding

Metal → Ligand
उदाहरण: CO, CN⁻

Back bonding के लाभ:

  1. बन्ध मजबूत होता है
  2. ΔH अधिक ऋणात्मक होता है
  3. संकुल की स्थिरता बढ़ती है

उदाहरण:

[Fe(CN)6]4 अत्यंत स्थिर है

प्रश्न 16

निम्नलिखित पर टिप्पणियाँ लिखिये—
(i) विषम प्रभाव (Trans Effect)
(ii) टेम्पलेट प्रभाव (Template Effect)

(i) विषम प्रभाव (Trans Effect)

वर्गाकार समतलीय संकुलों में कोई ligand अपने trans स्थिति वाले ligand के प्रतिस्थापन की गति को बढ़ा देता है, इसे Trans Effect कहते हैं।

Trans effect का क्रम (series):

CN>CO>PR3>NO2>I>Br>Cl>NH3>H2O

उदाहरण:

[PtCl4]2+NH3

यहाँ Cl⁻ के स्थान पर NH₃ trans दिशा में प्रवेश करता है।


(ii) टेम्पलेट प्रभाव (Template Effect)

जब कोई धातु आयन ligand को एक विशेष आकार/रिंग बनाने में सहायता करता है, उसे Template effect कहते हैं।

धातु आयन ligand को सही स्थिति में पकड़कर macrocyclic complex बनवाता है।

उदाहरण:
Ni²⁺ द्वारा macrocyclic ligand का निर्माण।


प्रश्न 17

संकुलों में स्थायित्व से संबंधित इरविंग–विलियम क्रम क्या है?

उत्तर

द्विसंयोजी संक्रमण धातुओं के संकुलों की स्थिरता का क्रम:

Mn2+<Fe2+<Co2+<Ni2+<Cu2+>Zn2+

इसे Irving–Williams Series कहते हैं।

कारण:

  1. आयन आकार घटता है
  2. Charge density बढ़ती है
  3. CFSE बढ़ती है
  4. Cu²⁺ में Jahn–Teller प्रभाव

प्रश्न 18

ट्रांस (विषम) प्रभाव क्या है? ट्रांस प्रभाव के π-बंध सिद्धान्त को समझाइए।

उत्तर

Trans Effect

वर्गाकार समतलीय संकुल में कोई ligand अपने trans ligand के प्रतिस्थापन की दर बढ़ाता है।


π-बन्ध सिद्धान्त

Strong π-acceptor ligands (CO, CN⁻) धातु से π-back bonding करते हैं।

जब ऐसा ligand धातु से जुड़ा होता है:

  • धातु की d-इलेक्ट्रॉन घनता कम हो जाती है
  • trans बन्ध कमजोर हो जाता है
  • trans ligand आसानी से निकल जाता है

इससे प्रतिस्थापन की गति बढ़ जाती है।


प्रश्न 19

लिगैण्ड की प्रकृति धातु संकुलों के स्थायित्व को कैसे प्रभावित करती है?

उत्तर

(1) Donor क्षमता

Strong donor ligand → अधिक स्थिर संकुल
क्रम:

CN>NH3>H2O

(2) Chelating क्षमता

Multidentate ligand → अधिक स्थिर (Chelate effect)


(3) π-बॉन्डिंग

π-acceptor ligands स्थिरता बढ़ाते हैं।
उदाहरण: CO, CN⁻


(4) Steric effect

बड़े ligand → स्थिरता घटती है।


(5) Basicity

अधिक basic ligand → मजबूत बन्ध → अधिक स्थिर संकुल।

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