B.Sc. Chemistry (C.G.) Third Year – UNIT 2B, Second Question Paper Long & Short Answer Questions

 




B.Sc. Chemistry (C.G.)

Third Year – First Question Paper


बी.एससी. रसायन विज्ञान (सी.जी.)
तृतीय वर्ष – द्वितीय प्रश्न पत्र

इकाई 2 B

दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न


1. प्रोटीन क्या है? इसका वर्गीकरण उदाहरण सहित कीजिए।
प्रोटीन जैविक यौगिक हैं, जो अमीनो एसिड की लंबी श्रृंखलाओं से बने होते हैं। ये शरीर की संरचना, कार्य और जीवन प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रोटीन को उनकी संरचना और कार्य के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, सरल प्रोटीन (Simple Proteins) केवल अमीनो एसिड से बने होते हैं, जैसे एल्ब्यूमिन और ग्लोबुलिन। संयुक्त प्रोटीन (Conjugated Proteins) में अमीनो एसिड के अलावा अन्य समूह भी शामिल होते हैं, जैसे हेमोग्लोबिन जिसमें हेम समूह होता है। इसके अतिरिक्त फाइब्रल प्रोटीन (Fibrous Proteins) और ग्लोबुलर प्रोटीन (Globular Proteins) भी मुख्य वर्ग हैं।


2. प्रोटीन के प्रमुख परीक्षण लिखिए।
प्रोटीन की पहचान के लिए कई विशिष्ट परीक्षण किए जाते हैं। प्रमुख परीक्षण हैं:

  • बायुरेट परीक्षण (Biuret Test): प्रोटीन में पेप्टाइड बंध होने पर नीला-बैंगनी रंग उत्पन्न होता है।
  • निनहाइड्रिन परीक्षण (Ninhydrin Test): मुक्त अमीनो समूह उपस्थित होने पर नीला या बैंगनी रंग बनता है।
  • Xanthoproteic परीक्षण: एरोमैटिक अमीनो एसिड होने पर पीला रंग बनता है।
  • Millon’s परीक्षण: टाइरोसिन के लिए लाल रंग।
  • Hopkin’s Cole परीक्षण: ट्रिप्टोफान के लिए बैंगनी रंग।
    ये परीक्षण प्रोटीन की उपस्थिति और संरचना की पुष्टि में सहायक होते हैं।

3. प्रोटीन के महत्वपूर्ण उपयोग का वर्णन कीजिए।
प्रोटीन शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। ये मांसपेशियों, त्वचा, बाल और नाखून की संरचना में मुख्य भूमिका निभाते हैं। एंजाइम के रूप में प्रोटीन रासायनिक अभिक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। हार्मोनल प्रोटीन शरीर में संदेशवाहक के रूप में कार्य करते हैं, जैसे इंसुलिन। हेमोग्लोबिन प्रोटीन रक्त में ऑक्सीजन का परिवहन करता है। प्रतिरक्षा प्रणाली में एंटीबॉडी प्रोटीन रोगाणुओं से सुरक्षा करते हैं। इसके अलावा, प्रोटीन का उपयोग आहार पूरक और औषधि उद्योग में भी किया जाता है।


4. प्रोटीन का निनहाइड्रिन परीक्षण (Ninhydrin Test) क्या है?
निनहाइड्रिन परीक्षण प्रोटीन में उपस्थित अमीनो समूह की पहचान के लिए किया जाता है। जब प्रोटीन या मुक्त अमीनो एसिड को निनहाइड्रिन के साथ गर्म किया जाता है, तो अमीनो समूह प्रतिक्रिया करके नीला या बैंगनी रंग उत्पन्न करता है। यह रंग प्रतिक्रिया प्रोटीन में उपस्थित α-अमीन समूह की उपस्थिति का स्पष्ट संकेत है। इस परीक्षण का उपयोग प्रोटीन का मात्रात्मक और गुणात्मक अध्ययन करने में किया जाता है।


5. भौतिक गुणों तथा विलेयता के आधार पर प्रोटीन का वर्गीकरण कीजिए।
भौतिक गुणों के अनुसार प्रोटीन को फाइब्रल प्रोटीन और ग्लोबुलर प्रोटीन में विभाजित किया जा सकता है। फाइब्रल प्रोटीन लम्बे और धागे जैसे होते हैं, जैसे केराटिन और कोलेजन। ग्लोबुलर प्रोटीन गोलाकार आकार के होते हैं, जैसे एल्ब्यूमिन।
विलेयता के आधार पर प्रोटीन को पानी में घुलनशील और अल्फा/बीटा प्रोटीन में विभाजित किया जा सकता है। एल्ब्यूमिन घुलनशील प्रोटीन है, जबकि कोलेजन पानी में कम घुलनशील होता है।


6. प्रोटीन की द्वितीयक संरचना का वर्णन कीजिए।
प्रोटीन की द्वितीयक संरचना में मुख्य रूप से α-हेलिक्स और β-शीट शामिल हैं। α-हेलिक्स में पोलिपेप्टाइड श्रृंखला हेलिक्स के आकार में लिपटी होती है। β-शीट में स्ट्रैंड्स आपस में हाइड्रोजन बंध से जुड़ी होती हैं। यह संरचना प्रोटीन के फोल्डिंग, स्थायित्व और कार्यात्मक गुणों को प्रभावित करती है। हाइड्रोजन बंध द्वितीयक संरचना की स्थिरता प्रदान करते हैं।
इसके अलावा, टर्न और कॉइल जैसे अन्य रूप भी प्रोटीन की त्रिविमीय संरचना में योगदान करते हैं।


7. निम्नलिखित पर टिप्पणियाँ लिखिए:

(i) अन्त्य समूह विश्लेषण (End Group Analysis):
प्रोटीन में अमीनो और कार्बोक्सिल समूह की पहचान और मापन करने की प्रक्रिया है। इससे प्रोटीन की अमीनो एसिड संरचना का अध्ययन किया जाता है।

(ii) उभयनिष्ठ आयन (Zwitter ion):
यह आयन एक ही अणु में धनात्मक और ऋणात्मक चार्ज दोनों धारण करता है। प्रोटीन अमीनो एसिड का सामान्य रूप ज़्विट्टर आयन होता है।

(iii) समविभव बिंदु (Isoelectric Point):
यह वह pH होता है जिसमें प्रोटीन अणु का कुल चार्ज शून्य होता है। इस बिंदु पर प्रोटीन कम घुलनशील होता है और प्रोटीन की इलेक्ट्रोफोरेटिक गति शून्य हो जाती है।


8. न्यूक्लिक अम्ल क्या होते हैं? इनमें विद्यमान क्षारकों तथा शर्कराओं के नाम एवं संरचना सूत्र दीजिए।
न्यूक्लिक अम्ल जैविक अणु हैं, जो जीवन की आनुवंशिक जानकारी को संग्रहित और संचालित करते हैं। ये पॉलीमर अमीनो एसिड की तरह न्यूक्लियोटाइड्स से बने होते हैं। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में फॉस्फेट समूह, पंचकार्बन शर्करा (डिऑक्सीरीबोज़ या राइबोज़) और नाइट्रोज़न युक्त क्षारक (Base) होता है। प्रमुख क्षारक हैं एडेनिन (A), गुआनिन (G), साइटोसिन (C), थायमिन (T, केवल DNA में), और युरासिल (U, RNA में)। शर्करा के उदाहरण: DNA में डिऑक्सीरीबोज़, RNA में राइबोज़। संरचना सूत्र उदाहरण:

  • एडेनिन न्यूक्लियोटाइड: C₁₀H₁₄N₅O₇P (ATP में)।
    ये न्यूक्लिक अम्ल जैविक प्रतिक्रियाओं, आनुवंशिक सूचना और कोशिकीय ऊर्जा में अहम भूमिका निभाते हैं।

9. न्यूक्लियोसाइड किसे कहते हैं? प्यूरीन युक्त एक न्यूक्लियोसाइड का नाम संरचना सूत्र सहित दीजिए।
न्यूक्लियोसाइड वह यौगिक है जिसमें नाइट्रोज़न क्षारक और शर्करा जुड़ी होती है, लेकिन फॉस्फेट समूह अनुपस्थित होता है। उदाहरण: एडेनोसिन (Adenosine), जिसमें एडेनिन (प्यूरीन) और राइबोज़ शर्करा जुड़ी होती है। संरचना सूत्र:

  • राइबोज़ से एडेनिन गायकोसिडिक बंध द्वारा जुड़ा होता है।
    न्यूक्लियोसाइड DNA और RNA के निर्माण में आधारभूत इकाई का काम करते हैं और कोशिकीय प्रक्रियाओं में संदेशवाहक की भूमिका निभाते हैं।

10. D.N.A. व R.N.A. क्या होते हैं? इनके कार्यों को संक्षेप में बताइये।
DNA (Deoxyribonucleic Acid) और RNA (Ribonucleic Acid) न्यूक्लिक अम्ल हैं। DNA आनुवंशिक जानकारी संग्रहित करता है और दोहरी हेलिक्स संरचना में होता है। RNA एकल-श्रृंखला होती है और प्रोटीन संश्लेषण में भूमिका निभाती है। कार्य:

  • DNA: आनुवंशिक कोड संग्रहीत करना, प्रतिकृति और संतति में सूचना देना।
  • RNA: संदेशवाहक (mRNA), राइबोसोम संरचना (rRNA), और प्रोटीन लाने वाले (tRNA) के रूप में कार्य।
    ये दोनों अणु जीवन प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य हैं।

11. α, β एवं γ अमीनो अम्लों पर ऊष्मा के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
α-अमीनो अम्ल में अमीन और कार्बोक्सिल समूह एक ही कार्बन पर स्थित होते हैं। इन पर ऊष्मा का प्रभाव हल्का होता है, क्योंकि पोलार समूह अधिक स्थिर होते हैं।
β-अमीनो अम्ल में अमीन और कार्बोक्सिल समूह दूसरे कार्बन पर होते हैं, जिससे हीटिंग पर विशिष्ट रूप से डिकार्बोक्सिलेशन और रिंग संरचना बन सकती है।
γ-अमीनो अम्लों में अमीन और कार्बोक्सिल समूह तीसरे कार्बन पर होने से ऊष्मा पर प्रतिक्रिया धीमी और स्थिर होती है।
इस प्रकार, अमीनो एसिड की ऊष्मा स्थायित्व उनके संरचनात्मक प्रकार पर निर्भर करता है।


12. प्रोटीन की तृतीयक संरचना समझाइए।
प्रोटीन की तृतीयक संरचना में पूरा पोलिपेप्टाइड श्रृंखला तीन आयामी रूप में फोल्ड होती है। इसमें α-हेलिक्स और β-शीट की आकृतियाँ आपस में हाइड्रोजन बंध, आयनिक बंध, डिसल्फाइड बंध और हाइड्रोफोबिक संपर्क द्वारा जुड़ती हैं। तृतीयक संरचना प्रोटीन के कार्य और स्थायित्व के लिए महत्वपूर्ण है। उदाहरण: एंजाइम, हार्मोन और हेमोग्लोबिन में तृतीयक संरचना कार्यात्मक साइट को निर्धारित करती है। तृतीयक संरचना बदलने पर प्रोटीन का कार्य प्रभावित हो सकता है।


13. प्रोटीन अम्लों के अम्लीय एवं क्षारीय गुणों को दर्शाइये।
अमीनो एसिड में कार्बोक्सिल समूह (–COOH) अम्लीय और अमीन समूह (–NH₂) क्षारीय गुण प्रदर्शित करता है। पानी में ये दोनों समूह आयनित होकर ज़्विटर आयन (Zwitter ion) बनाते हैं। अम्लीय माध्यम में अमीन समूह प्रोटॉन ग्रहण करके + चार्ज धारण करता है। क्षारीय माध्यम में कार्बोक्सिल समूह प्रोटॉन खोकर – चार्ज धारण करता है। इस प्रकार अमीनो एसिड दोहरी प्रकृति (Amphoteric Nature) प्रदर्शित करते हैं और उनकी घुलनशीलता, समविभव बिंदु और प्रतिक्रिया क्षार/अम्ल पर निर्भर करती है।

14. निम्नलिखित एमीनो अम्ल के रासायनिक सूत्र लिखिए:
(i) एलानिन (Alanine): C₃H₇NO₂, संरचना: CH₃–CH(NH₂)–COOH
(ii) सेरीन (Serine): C₃H₇NO₃, संरचना: HO–CH₂–CH(NH₂)–COOH
(iii) ग्लूटेमीन (Glutamine): C₅H₁₀N₂O₃, संरचना: H₂N–CO–(CH₂)₂–CH(NH₂)–COOH
(iv) ल्यूसीन (Leucine): C₆H₁₃NO₂, संरचना: (CH₃)₂–CH–CH₂–CH(NH₂)–COOH
ये सभी α-अमीनो एसिड हैं, जिनमें अमीन समूह और कार्बोक्सिल समूह α-कार्बन से जुड़े होते हैं।


15. ग्लाइसिन का उदाहरण लेकर अमीनों एसिड के गुणों का वर्णन कीजिए।
ग्लाइसिन सबसे सरल α-अमीनो एसिड है, संरचना: NH₂–CH₂–COOH। यह द्विध्रुवीय (amphoteric) होता है, क्योंकि इसमें अमीन समूह क्षारीय और कार्बोक्सिल समूह अम्लीय गुण प्रदर्शित करता है। पानी में यह ज़्विटर आयन का रूप लेता है। ग्लाइसिन प्रोटीन निर्माण में आधारभूत इकाई है और यह घुलनशील, रासायनिक रूप से स्थिर, और ऊष्मा तथा pH के प्रभाव में अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। इसका उपयोग औषधि, खाद्य और जैवप्रौद्योगिकी उद्योगों में भी किया जाता है।


16. न्यूक्लियोसाइड एवं न्यूक्लियोटाइड में अन्तर लिखिए।
न्यूक्लियोसाइड और न्यूक्लियोटाइड दोनों न्यूक्लिक अम्ल से संबंधित हैं। न्यूक्लियोसाइड में केवल नाइट्रोज़न क्षारक और शर्करा जुड़ी होती है, फॉस्फेट समूह अनुपस्थित होता है। उदाहरण: एडेनोसिन।
न्यूक्लियोटाइड में न्यूक्लियोसाइड के अलावा एक या अधिक फॉस्फेट समूह जुड़े होते हैं। उदाहरण: एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट (ATP)। न्यूक्लियोटाइड DNA और RNA का निर्माण करते हैं और ऊर्जा, संदेशवाहन तथा कोशिकीय प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

क्र.सं.

विशेषता

न्यूक्लियोसाइड (Nucleoside)

न्यूक्लियोटाइड (Nucleotide)

1

संरचना

केवल क्षारक + शर्करा

क्षारक + शर्करा + फॉस्फेट समूह

2

फॉस्फेट समूह की उपस्थिति

अनुपस्थित

उपस्थित

3

निर्माण का आधार

न्यूक्लिक अम्ल का उप-ब्लॉक

न्यूक्लिक अम्ल का वास्तविक निर्माण ब्लॉक

4

उदाहरण

एडेनोसिन (Adenosine), गुआनोसिन

एडेनोसिन मोनोफॉस्फेट (AMP), ATP

5

ऊर्जा की भूमिका

कोई प्रत्यक्ष ऊर्जा भंडारण नहीं

कोशिका में ऊर्जा भंडारण और हस्तांतरण (जैसे ATP)

6

DNA/RNA निर्माण

सीधे नहीं जुड़ते

DNA और RNA की लंबी श्रृंखला बनाने में सक्रिय

7

पानी में घुलनशीलता

अधिक घुलनशील

फॉस्फेट समूह के कारण अधिक ध्रुवीय और घुलनशील

8

जैविक क्रियाओं में भूमिका

संदेशवाहक (कुछ मामलों में)

आनुवंशिक सूचना और जैवऊर्जा का संचरण

9

स्थिरता

अपेक्षाकृत स्थिर

फॉस्फेट समूह के कारण अधिक प्रतिक्रियाशील

10

संश्लेषण

क्षारक और शर्करा जोड़कर बनता है

न्यूक्लियोसाइड + फॉस्फेट → न्यूक्लियोटाइड

11

कोशिका में वितरण

न्यूक्लियोटाइड से पहले बनते हैं

DNA/RNA, ATP, cAMP आदि के रूप में कार्य करते हैं

12

जैविक महत्व

न्यूक्लिक अम्ल निर्माण का प्रारंभिक चरण

आनुवंशिक कोड, ऊर्जा और सिग्नलिंग में केंद्रीय



17. रेशेदार प्रोटीन और ग्लोबुलिन प्रोटीन के बीच में अंतर लिखिए।
रेशेदार प्रोटीन (Fibrous Proteins): लंबी, धागे जैसी संरचना, पानी में कम घुलनशील, स्थिर और संरचनात्मक भूमिका जैसे कोलेजन और केराटिन।
ग्लोबुलिन प्रोटीन (Globular Proteins): गोलाकार संरचना, पानी में अधिक घुलनशील, कार्यात्मक भूमिका जैसे एंजाइम, हार्मोन और हेमोग्लोबिन।
मुख्य अंतर: रेशेदार प्रोटीन मुख्य रूप से संरचना और ताकत प्रदान करते हैं, जबकि ग्लोबुलिन प्रोटीन जैविक प्रतिक्रियाओं और जीवन क्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।


18. एमीनों अम्ल को परिभाषित करते हुए उनके वर्गीकरण एवं नामकरण के बारे में बताइए।
एमीनो अम्ल वे कार्बनिक यौगिक हैं जिनमें एक या अधिक अमीन समूह (–NH₂) और कार्बोक्सिल समूह (–COOH) उपस्थित होते हैं। ये प्रोटीन के निर्माण खंड हैं। वर्गीकरण:

  • α-अमीनो एसिड: अमीन और कार्बोक्सिल समूह एक ही कार्बन पर (जैसे एलानिन)
  • β-अमीनो एसिड: अमीन समूह दूसरे कार्बन पर (जैसे β-एलानिन)
  • γ-अमीनो एसिड: अमीन समूह तीसरे कार्बन पर (जैसे γ-एминोब्यूटिरिक एसिड)
    नामकरण IUPAC नियमों के अनुसार α, β, γ आदि से किया जाता है और सामान्य नामकरण उनके प्राकृतिक स्रोत या खोजकर्ता के नाम पर आधारित हो सकता है।




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