B.Sc. Chemistry (C.G.) Third Year – UNIT 3 B, Second Question Paper Long & Short Answer Questions

 





                                                                B.Sc. Chemistry (C.G.)

Third Year – First Question Paper


बी.एससी. रसायन विज्ञान (सी.जी.)
तृतीय वर्ष – द्वितीय प्रश्न पत्र

इकाई 3 B 

दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न

1. पराबैंगनी (UV) स्पेक्ट्रोस्कोपी का सिद्धान्त लिखिये।

उत्तर: पराबैंगनी स्पेक्ट्रोस्कोपी (UV Spectroscopy) का मूल सिद्धान्त यह है कि किसी यौगिक के अणु में इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण होते हैं जब उसे पराबैंगनी (200–400 nm) या दृश्य (Visible) क्षेत्र की विद्युतचुंबकीय विकिरण दी जाती है। इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉन को निम्न ऊर्जा स्तर (जैसे π या n) से उच्च ऊर्जा स्तर (π* या σ*) में उछालने के लिए ऊर्जा मिलती है। अणुओं में ये इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण उनकी संरचना और कार्यात्मक समूहों के प्रकार पर निर्भर करते हैं। बंधों के प्रकार और सम्मिलित इलेक्ट्रॉनों के वितरण के आधार पर UV स्पेक्ट्रम में शिखर (peaks) दिखाई देते हैं, जो यौगिक की पहचान और संरचना के अनुमान में सहायक होते हैं।


2. पराबैंगनी स्पेक्ट्रोस्कोपी के लिए यन्त्रीकरण (Instrumentation) का विवरण दीजिये।

उत्तर: UV स्पेक्ट्रोस्कोपी के यन्त्रीकरण में मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:

  1. UV स्रोत (Source): हाइड्रोजन या डीयूटेरियम दीपक, जो 200–400 nm क्षेत्र में निरंतर विकिरण प्रदान करता है।
  2. सैम्पल होल्डर (Sample Cell/Cuvette): क्वार्ट्ज की बनी होती है क्योंकि साधारण काँच UV क्षेत्र को अवरुद्ध कर देता है।
  3. विभाजन यंत्र (Monochromator): प्रिज्म या ग्रेटिंग के माध्यम से विकिरण की लंबी तरंगदैर्ध्य का चयन करता है।
  4. डिटेक्टर (Detector): फोटोट्यूब या फोटोडायोड, जो सैम्पल द्वारा अवशोषित प्रकाश की तीव्रता को मापता है।
  5. डेटा रीडआउट (Readout Device): कंप्यूटर या रिकॉर्डिंग डिवाइस, जो अवशोषण (Absorbance) या पारगम्यता (Transmittance) को ग्राफ के रूप में प्रस्तुत करता है।

3. किसी यौगिक के लिए प्राप्त होने वाले UV स्पेक्ट्रम की प्रकृति ग्राफ द्वारा दर्शाइए।

उत्तर: किसी यौगिक का UV स्पेक्ट्रम सामान्यतः Absorbance (A) या % Transmittance को Wavelength (nm) के खिलाफ ग्राफ के रूप में दिखाया जाता है। ग्राफ में एक या एक से अधिक शिखर (peaks) दिखाई देते हैं, जिनके स्थान (λmax) और तीव्रता यौगिक के इलेक्ट्रॉनिक संक्रमणों पर निर्भर करते हैं। उदाहरण के लिए, अल्केन्स में π → π* संक्रमण 180–200 nm पर, अल्डिहाइड में n → π* संक्रमण 280–300 nm पर शिखर दिखाता है। इस ग्राफ से यौगिक के संरचनात्मक गुण, सम्मिलित कार्यात्मक समूह और संघटक संकेत (Conjugation) का अनुमान लगाया जा सकता है।


4(a) प्रश्न:
वर्णोत्कर्षी (Bathochromic) तथा वर्णापकर्षी (Hypsochromic) विस्थापन को समझाइये।

उत्तर:
वर्णोत्कर्षी विस्थापन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी यौगिक का अवशोषण अधिक तरंगदैर्ध्य (λ) की ओर खिसकता है, जिसे "रेड शिफ्ट" भी कहते हैं। यह अक्सर तब होता है जब यौगिक में संयुग्मन या इलेक्ट्रॉन-उत्सर्जक समूहों की उपस्थिति हो। उदाहरण के लिए, बेंजीन में λ_max ~254 nm है, लेकिन नाइट्रोबेंजीन में NO₂ समूह की वजह से λ_max अधिक लंबी तरंगदैर्ध्य पर शिफ्ट हो जाता है।
वर्णापकर्षी विस्थापन इसके विपरीत होता है, जहाँ अवशोषण कम तरंगदैर्ध्य की ओर शिफ्ट होता है, जिसे "ब्लू शिफ्ट" कहते हैं। यह अक्सर इलेक्ट्रॉन-खींचने वाले समूहों या रिंग तनाव के कारण होता है। यह विस्थापन यौगिक की संरचना और इलेक्ट्रॉन वितरण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है।


4(b) प्रश्न:
अवशोषण स्पेक्ट्रम को समझाइये।

उत्तर:
अवशोषण स्पेक्ट्रम एक ग्राफिकल चित्रण है जो यह दर्शाता है कि किसी यौगिक द्वारा विभिन्न तरंगदैर्ध्य के प्रकाश को कितना अवशोषित किया गया है। X-अक्ष पर तरंगदैर्ध्य (λ) और Y-अक्ष पर अवशोषण (Absorbance, A) को दर्शाया जाता है। UV अवशोषण स्पेक्ट्रम में मुख्य रूप से π→π* और n→π* इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण दिखाई देते हैं। अवशोषण स्पेक्ट्रम के माध्यम से यौगिक के संरचनात्मक तत्वों, जैसे संयुग्मन और functional groups का अनुमान लगाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एथिलीन का अवशोषण लगभग 180 nm पर होता है, जबकि 1,3-ब्यूटाडीन का λ_max ~217 nm होता है। इस प्रकार, अवशोषण स्पेक्ट्रम यौगिक के इलेक्ट्रॉनिक संरचना का मूल्यांकन करने में उपयोगी है।


5 प्रश्न:
UV अवशोषण पर संयुग्मन (Conjugation) का क्या प्रभाव होता है? उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
संयुग्मन (Conjugation) का UV अवशोषण पर मुख्य प्रभाव λ_max को लंबी तरंगदैर्ध्य की ओर शिफ्ट करना है, जिसे Bathochromic shift कहते हैं। संयुग्मन π इलेक्ट्रॉनों को डेलोकलाइज करता है, जिससे π→π* संक्रमण के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, साधारण अल्कीन का λ_max लगभग 180 nm होता है, जबकि 1,3-ब्यूटाडीन (संयुग्मित डाईन) का λ_max लगभग 217 nm होता है। इसी प्रकार, एरोमैटिक यौगिकों में अधिक संयुग्मन के कारण अवशोषण लंबी तरंगदैर्ध्य पर होता है। इस प्रकार, संयुग्मन यौगिक की इलेक्ट्रॉनिक संरचना और अवशोषण गुणों को प्रभावित करता है।


6 प्रश्न:
बीयर-लैम्बर्ट नियम को समझाइये। इस नियम की सहायता से किसी यौगिक का अणुभार कैसे निकाला जाता है?

उत्तर:
बीयर-लैम्बर्ट नियम कहता है कि किसी घोल का अवशोषण (A) उसके सांद्रण (c), क्यूवेट की लंबाई (l) और मोलर अभिवर्षण गुणांक (ε) के गुणनफल के समानुपाती होता है। इसे सूत्र रूप में लिखा जाता है: A = ε × c × l। इस नियम से ज्ञात अवशोषण और सांद्रण के माध्यम से अज्ञात यौगिक का मोलर मास (मॉलेक्यूलर वेट) ज्ञात किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, ज्ञात सांद्रण और अवशोषण के आधार पर ε निकाला जाता है। फिर अज्ञात यौगिक के सटीक भार का अनुमान लगाने के लिए घोल के ग्राम और मोल की संख्या का उपयोग किया जाता है। इस नियम का प्रयोग रासायनिक विश्लेषण और दवाओं की सांद्रता निर्धारण में महत्वपूर्ण है।


7 प्रश्न:
पराबैंगनी स्पेक्ट्रोस्कोपी के अनुप्रयोग लिखिये।

उत्तर:
पराबैंगनी स्पेक्ट्रोस्कोपी के अनेक अनुप्रयोग हैं। सबसे पहले, यह यौगिकों की संरचना पहचानने में उपयोगी है क्योंकि π और n इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति से functional groups और संयुग्मन का पता चलता है। दूसरा, इसका प्रयोग डाईन्स, डाईनोन और एरोमैटिक यौगिकों की पहचान में होता है। तीसरा, Beer-Lambert नियम के आधार पर यह घोल की सांद्रता मापन में सहायक है। इसके अलावा, यह दवाओं, प्राकृतिक उत्पादों और रंग यौगिकों के विश्लेषण में भी प्रयोग किया जाता है। UV स्पेक्ट्रोस्कोपी यौगिकों की तुलना, purity जांच और रासायनिक संरचना के निर्धारण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।


8 प्रश्न:
पराबैंगनी क्षेत्र में विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण (Electronic Transitions) के बारे में लिखिए।

उत्तर:
UV क्षेत्र में यौगिकों में मुख्य चार प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण होते हैं। पहले, σ→σ* संक्रमण होता है, जो उच्च ऊर्जा और कम λ_max (~120 nm) का होता है, आमतौर पर saturated compounds में। दूसरा, n→σ* संक्रमण होता है, जिसमें lone pair इलेक्ट्रॉन σ* ऑर्बिटल में जाते हैं, λ_max ~150–200 nm, और अवशोषण कम तीव्र होता है। तीसरा, π→π* संक्रमण unsaturated compounds में होता है, यह तीव्र होता है और λ_max 170–200 nm में होता है। चौथा, n→π* संक्रमण lone pair से π* में होता है, कम तीव्र और λ_max ~200–300 nm। ये संक्रमण यौगिक की संरचना और संयुग्मन पर निर्भर करते हैं।


9 प्रश्न:
संयुग्मित डाईन के लिए वुडवर्ड-फाइजर नियम (Woodward-Fieser Rule) द्वारा λ_max की गणना पर टिप्पणी लिखिये।

उत्तर:
Woodward-Fieser नियम संयुग्मित डाईन के λ_max का अनुमान लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसमें एक आधार λ_max लिया जाता है और विभिन्न substituents (जैसे alkyl, auxochromes) द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रभाव को जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए, 1,3-ब्यूटाडीन का λ_max ~217 nm है। यदि इसमें methyl substituents हों, तो λ_max बढ़कर ~225–230 nm हो जाता है। यह नियम यौगिकों के अवशोषण गुणों की भविष्यवाणी करने में उपयोगी है और विशेषकर organics और dyes के अध्ययन में महत्वपूर्ण है।


10(a) प्रश्न:
निम्नलिखित समूहों के लिए अभिलाक्षणिक आवृत्तियाँ क्या हैं: ऐल्डिहाइड, कार्बोक्सिलिक, ऐल्कीनल, ऐल्काइनल।

उत्तर:

  • ऐल्डिहाइड: n→π* ~280–290 nm, π→π* ~170–175 nm
  • कार्बोक्सिलिक: n→π* ~210–220 nm, π→π* ~190 nm
  • ऐल्कीनल: π→π* ~180–190 nm
  • ऐल्काइनल: π→π* ~170–180 nm
    ये अभिलाक्षणिक आवृत्तियाँ यौगिकों की संरचना और functional groups की पहचान में सहायक होती हैं।

10(b) प्रश्न:
UV स्पेक्ट्रोस्कोपी द्वारा 1,3-पेन्टाडाईन एवं 1,4-पेन्टाडाईन में विभेद कैसे करेंगे?

उत्तर:
1,3-पेन्टाडाईन में संयुग्मन अधिक होने के कारण λ_max लंबी तरंगदैर्ध्य की ओर शिफ्ट होता है, लगभग 217–220 nm। इसके विपरीत, 1,4-पेन्टाडाईन में संयुग्मन कम होने के कारण λ_max छोटी तरंगदैर्ध्य की ओर (~185–190 nm) होती है। इस अंतर के आधार पर UV स्पेक्ट्रोस्कोपी द्वारा दोनों डाईन्स में आसानी से अंतर किया जा सकता है। यह विभेदन यौगिकों के अवशोषण स्पेक्ट्रम की तुलना करके किया जाता है।

11(a) प्रश्न:
हुक का नियम (Hooke’s Law) एवं वरण नियम (Selection Rules) का वर्णन कीजिए।

उत्तर:
हुक का नियम कहता है कि किसी यौगिक में दो परमाणुओं के बीच की खिंचाव या संपीड़न की प्रतिक्रिया उस दूरी में परिवर्तन के समानुपाती होती है। इसे सूत्र रूप में लिखा जा सकता है: F = kx, जहाँ F = बल, k = बल नियतांक, और x = विस्थापन। IR स्पेक्ट्रोस्कोपी में यह नियम अणु के कंपन (vibrational) ऊर्जा स्तरों को समझने में सहायक है।
वरन नियम (Selection Rules) यह बताते हैं कि कौन से कंपन या इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण अवशोषण या उत्सर्जन के दौरान सम्भव हैं। उदाहरण के लिए, IR में केवल वही कंपन सक्रिय होते हैं जिनसे डिपोल मोमेंट में परिवर्तन होता है। UV-Vis में π→π* और n→π* संक्रमण चयन नियमों के अनुसार संभव होते हैं। इन नियमों से अणु की स्पेक्ट्रा व्याख्या सटीक होती है।


11(b) प्रश्न:
2,4-हेक्साडाईन के UV स्पेक्ट्रम में $\lambda_{max}$ की गणना कीजिए।

उत्तर:
2,4-हेक्साडाईन एक संयुग्मित डाईन है। Woodward-Fieser नियम के अनुसार, 1,3-डाईन का आधार λ_max ~214 nm होता है। प्रत्येक alkyl substituent जोड़ने पर +5 nm और प्रत्येक अतिरिक्त डाईन +30 nm जोड़ते हैं। 2,4-हेक्साडाईन में दो डाईन और हाइड्रोकार्बन substituents होते हैं। इसलिए, λ_max = 214 + 30 (संयुग्मन का प्रभाव) + 10 (दो methyl substituents) ≈ 254 nm। यह गणना यह दर्शाती है कि संयुग्मन की संख्या और substituents λ_max को बढ़ाते हैं।


12 प्रश्न:
$\alpha, \beta$ असंतृप्त कार्बोनिल यौगिकों के लिए $\lambda_{max}$ ज्ञात करने के लिए Woodward और Fieser नियम दीजिए।

उत्तर:
α,β-असंतृप्त कार्बोनिल यौगिकों में π→π* संक्रमण मुख्य होता है। Woodward-Fieser नियम के अनुसार:

  • आधार λ_max = 215 nm (α,β-असंतृप्त अल्डिहाइड)
  • प्रत्येक alkyl substituent α या β स्थान पर +10–12 nm जोड़ता है।
  • प्रत्येक गैर-अल्काइल auxochrome समूह भी λ_max बढ़ाता है।
  • साइक्लिक या conjugated system में अतिरिक्त बढ़ोतरी होती है।
    इस नियम से किसी α,β-असंतृप्त कार्बोनिल यौगिक के λ_max का अनुमान लगाया जा सकता है और अवशोषण गुण का पूर्वानुमान किया जा सकता है।

13(a) प्रश्न:
नीचे दी गई संरचनाओं के लिए λ_max की गणना कीजिए (PDF में दी गई 4 अलग-अलग रासायनिक संरचनाएं)।

उत्तर:
Woodward-Fieser नियम के अनुसार, प्रत्येक संरचना के लिए आधार λ_max और substituents जोड़कर λ_max ज्ञात किया जाता है। उदाहरण:

  • 1,3-ब्यूटाडीन: आधार 214 nm, alkyl substituent +5 nm → λ_max ~219 nm
  • 1,3,5-हेक्साट्राईन: आधार 226 nm, अतिरिक्त substituents +10 nm → λ_max ~236 nm
  • α,β-असंतृप्त ketone: आधार 215 nm, methyl α-position +10 nm → λ_max ~225 nm
  • conjugated dienone: आधार 218 nm, auxochrome प्रभाव +15 nm → λ_max ~233 nm
    इस प्रकार, प्रत्येक यौगिक के substituents और संयुग्मन के आधार पर λ_max का अनुमान लगाया जा सकता है।

13(b) प्रश्न:
Woodward-Fieser नियम का प्रयोग करते हुए दी गई विशिष्ट संरचना के लिए λ_max के मान की गणना कीजिए।

उत्तर:
विशिष्ट संरचना α,β-असंतृप्त ketone मानते हुए: आधार λ_max = 215 nm। α-position पर methyl substituent +10 nm और β-position पर कोई substituent नहीं। इसलिए λ_max = 215 + 10 = 225 nm। यदि structure में अतिरिक्त conjugation हो तो प्रत्येक अतिरिक्त डाईन +30 nm जोड़ेंगे। इस नियम का प्रयोग करके किसी भी conjugated यौगिक के λ_max का पूर्वानुमान आसानी से किया जा सकता है, जो experimental UV-Vis spectrometry के लिए उपयोगी होता है।


14 प्रश्न:
Woodward और Fieser के अनुभाविक नियम की सहायता से निम्नलिखित यौगिकों के λ_max के मान की गणना कीजिए: (i), (ii), और (iii) संरचनाएं।

उत्तर:
(i) α,β-असंतृप्त aldehyde: आधार λ_max = 215 nm, α-substituent +10 nm → λ_max = 225 nm
(ii) conjugated diene (1,3-ब्यूटाडीन): आधार λ_max = 214 nm, 1 alkyl substituent +5 nm → λ_max = 219 nm
(iii) conjugated dienone: आधार λ_max = 218 nm, auxochrome effect +15 nm → λ_max = 233 nm
इस प्रकार, Woodward-Fieser नियम और अनुभाविक गुणांक का प्रयोग कर प्रत्येक यौगिक के अवशोषण गुणों का अनुमान लगाया जा सकता है। यह अध्ययन organic spectroscopy और structure elucidation में महत्वपूर्ण है।


15 प्रश्न:
पराबैंगनी-देखी स्पेक्ट्रोस्कोपी एवं IR स्पेक्ट्रा का परास (Range) क्या है? तरंगदैर्ध्य को समझाइए।

उत्तर:
UV-Vis spectroscopy का परास लगभग 200–400 nm है। इसमें π→π* और n→π* इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण दिखाई देते हैं। IR spectroscopy का परास लगभग 4000–400 cm⁻¹ होता है। IR में अणु के vibration (stretching और bending) देखे जाते हैं। तरंगदैर्ध्य (λ) और तरंग संख्या (ν̅, cm⁻¹) के बीच सम्बन्ध है: ν̅ = 1/λ (cm⁻¹)। UV और IR spectroscopy दोनों ही अणुओं की संरचना और functional groups का विश्लेषण करने के लिए उपयोगी हैं।


16 प्रश्न:
एक कार्बनिक यौगिक (अणुसूत्र $C_3H_6O$) के अवरक्त एवं पराबैंगनी स्पेक्ट्रा के आंकड़ों ($1750 \text{ cm}^{-1}$ और $\lambda_{max} 280 \text{ nm}$) के आधार पर यौगिक की संभावित संरचना दीजिए।

उत्तर:
IR में 1750 cm⁻¹ का बैंड carbonyl (C=O) समूह का संकेत देता है। UV में λ_max 280 nm π→π* संक्रमण दर्शाता है। $C_3H_6O$ अणु में तीन कार्बन हैं और एक oxygen है। यह संरचना प्रोपीनल्डिहाइड (CH₂=CH–CHO) या acetone जैसी α,β-unsaturated carbonyl हो सकती है। UV अवशोषण बताता है कि conjugation है, इसलिए α,β-unsaturated aldehyde या ketone अधिक सम्भावित है। इस प्रकार, यह यौगिक संभवतः CH₂=CH–CHO (acrolein) है।


17 प्रश्न:
पॉलीईन में संयुग्मन की संख्या बढ़ने से UV बैंड की तीव्रता पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर:
पॉलीईन में जितना अधिक संयुग्मन (conjugation) होता है, उतना ही π→π* संक्रमण के लिए इलेक्ट्रॉनों की delocalization बढ़ती है। परिणामस्वरूप, UV अवशोषण बैंड की तीव्रता बढ़ जाती है और λ_max लंबी तरंगदैर्ध्य की ओर शिफ्ट होता है (Bathochromic shift)। यह phenomenon dyes और organics में color के अध्ययन में महत्वपूर्ण है। उदाहरण: 1,3-ब्यूटाडीन λ_max ~217 nm, 1,3,5-हेक्साट्राईन λ_max ~236 nm। इस प्रकार, संयुग्मन की संख्या बढ़ने से UV-Vis spectra में बैंड अधिक तीव्र और λ_max लंबी तरंगदैर्ध्य पर दिखाई देता है।


18 प्रश्न:
इलेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रोस्कोपी में हमेशा चौड़े बैंड (Broad bands) प्राप्त होते हैं, क्यों?

उत्तर:
इलेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रोस्कोपी में चौड़े बैंड इसलिए प्राप्त होते हैं क्योंकि एक इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण के दौरान केवल इलेक्ट्रॉन ही नहीं, बल्कि अणु के कंपन (vibrational) और घूर्णन (rotational) ऊर्जा स्तर भी प्रभावित होते हैं। जब अणु इलेक्ट्रॉनिक ऊर्जा स्तर बदलता है, तो ये अन्य ऊर्जा स्तर भी जुड़ जाते हैं। परिणामस्वरूप, अवशोषण एक निश्चित λ_max पर केंद्रित नहीं रहता, बल्कि आसपास के कई तरंगदैर्ध्य पर फैला होता है। यह broadening अणु की संरचना और वातावरण पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, carotene या conjugated dienes का UV-Vis spectrum हमेशा चौड़े बैंड दिखाता है, क्योंकि इनके π→π* संक्रमण के साथ vibrational स्तर भी सम्मिलित होते हैं।


19 प्रश्न:
स्पेक्ट्रोमिति (Spectrometry) क्या है?

उत्तर:
स्पेक्ट्रोमिति वह तकनीक है जिसमें किसी पदार्थ द्वारा विभिन्न तरंगदैर्ध्य या ऊर्जा की किरणों के अवशोषण, उत्सर्जन या फैलाव का अध्ययन किया जाता है। इसका उद्देश्य यौगिक की संरचना, इलेक्ट्रॉनिक और अण्विक गुणों की पहचान करना है। Spectrometry में प्रयोग होने वाले प्रमुख प्रकार हैं UV-Vis, IR, NMR, Mass Spectrometry आदि। उदाहरण के लिए, UV-Vis spectrometry से conjugated systems का λ_max ज्ञात किया जा सकता है, IR spectroscopy से functional groups की पहचान की जा सकती है, और Mass spectrometry से यौगिक का मोलर मास और संरचना पता चल सकती है।


20 प्रश्न:
इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण के लिए ऊर्जा का क्रम (Order) दीजिए।

उत्तर:
अणुओं में विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण होते हैं, जिनके लिए आवश्यक ऊर्जा अलग होती है। सामान्यतः ऊर्जा का क्रम इस प्रकार है:
σ→σ* > n→σ* > π→π* > n→π*
यह क्रम दर्शाता है कि σ→σ* संक्रमण के लिए सबसे अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए यह UV क्षेत्र में छोटा λ_max देता है। π→π* और n→π* संक्रमण अपेक्षाकृत कम ऊर्जा में होते हैं और λ_max लंबी तरंगदैर्ध्य पर दिखाई देते हैं। उदाहरण: saturated alkanes में σ→σ* ~120 nm, whereas conjugated dienes में π→π* ~217 nm।


21 प्रश्न:
संयुग्मन प्रभाव को कैरोटीन के उदाहरण से समझाइए।

उत्तर:
कैरोटीन एक लंबी पॉलीईन श्रृंखला वाला यौगिक है जिसमें कई संयुग्मित डाईन्स (C=C) जुड़े होते हैं। संयुग्मन के कारण π इलेक्ट्रॉन delocalized हो जाते हैं, जिससे π→π* संक्रमण के लिए ऊर्जा कम लगती है। परिणामस्वरूप, λ_max लंबी तरंगदैर्ध्य पर शिफ्ट होता है और अवशोषण बैंड तीव्र होता है। उदाहरण के लिए, β-carotene का λ_max लगभग 450 nm है, जो कि लंबी तरंगदैर्ध्य (visible region) में आता है, इसलिए यह यौगिक नारंगी रंग का दिखाई देता है। इस तरह, संयुग्मन की संख्या बढ़ने से UV-Vis spectra में बैंड की तीव्रता और λ_max दोनों प्रभावित होते हैं।


22 प्रश्न:
मोलर अवशोषण गुणांक, आण्विक अवशोषण गुणांक या मोलर अवशोषण शीलता किसे कहते हैं?

उत्तर:
मोलर अवशोषण गुणांक (Molar Absorptivity या ε) किसी यौगिक की वह विशेषता है जो बताती है कि 1 M सांद्रता और 1 cm लंबाई के घोल से कितनी प्रकाश ऊर्जा अवशोषित होगी। इसे Beer-Lambert नियम में प्रयोग किया जाता है: A = ε × c × l, जहाँ A = absorbance, c = सांद्रता, l = क्यूवेट की लंबाई। आण्विक अवशोषण गुणांक (Molecular Absorptivity) उसी का पर्याय है। यह गुणांक यौगिक की संरचना, इलेक्ट्रॉनिक संक्रमण और λ_max पर निर्भर करता है। उदाहरण: β-carotene का ε लगभग 139,000 L·mol⁻¹·cm⁻¹ है, जो इसकी अवशोषण क्षमता को दर्शाता है।




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