B.Sc. Chemistry (C.G.)
Third Year – First Question Paper
इकाई 5
क्वाण्टम यांत्रिकी-I
दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न
1. श्याम वस्तु (Black body) को गर्म करने पर उत्सर्जित होने वाले विकिरणों की व्याख्या कर विभिन्न तापों पर विकिरण स्पेक्ट्रा के अभिलक्षण समझाइये।
उत्तर:
श्याम वस्तु वह आदर्श पिंड है जो उस पर पड़ने वाले समस्त विकिरण को पूर्णतः अवशोषित कर लेता है और ताप के अनुसार विकिरण उत्सर्जित करता है। जब श्याम वस्तु को गर्म किया जाता है तो वह विभिन्न तरंगदैर्ध्यों का निरंतर स्पेक्ट्रम उत्सर्जित करती है जिसे ब्लैक बॉडी विकिरण स्पेक्ट्रम कहते हैं।
कम ताप पर विकिरण मुख्यतः अवरक्त क्षेत्र में होता है, जैसे-जैसे ताप बढ़ता है, अधिक ऊर्जा वाली तरंगें उत्पन्न होती हैं और अधिकतम तीव्रता की तरंगदैर्ध्य कम हो जाती है। इसे वीन विस्थापन नियम से समझाया जाता है कि ताप बढ़ने पर शिखर छोटी तरंगदैर्ध्य की ओर खिसकता है।
ताप बढ़ने पर कुल उत्सर्जित ऊर्जा भी बढ़ती है, जो स्टेफन-बोल्ट्ज़मैन नियम के अनुसार ताप के चौथे घात के समानुपाती होती है। इस प्रकार ताप और विकिरण के बीच स्पष्ट संबंध पाया जाता है।
2. (A) प्लांक का विकिरण नियम क्या है? श्याम वस्तु द्वारा उत्सर्जित और अवशोषित विकिरण की आवृत्ति और ऊर्जा में संबंध दर्शाने वाला समीकरण लिखिये।
उत्तर:
प्लांक ने बताया कि ऊर्जा का उत्सर्जन और अवशोषण निरंतर न होकर छोटे-छोटे पैकेट्स (क्वांटा) में होता है। प्रत्येक क्वांटम की ऊर्जा आवृत्ति के समानुपाती होती है। यह संबंध निम्न समीकरण से व्यक्त होता है:
जहाँ h = प्लांक स्थिरांक और ν = आवृत्ति। यह नियम श्याम वस्तु विकिरण के पूरे स्पेक्ट्रम को समझाने में सफल रहा और आधुनिक क्वांटम सिद्धांत की नींव बना।
(B) प्रकाश की द्वैती प्रकृति स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रकाश में तरंग और कण दोनों गुण पाए जाते हैं। विवर्तन और व्यतिकरण जैसे प्रयोग तरंग प्रकृति दर्शाते हैं, जबकि प्रकाश-विद्युत प्रभाव कण (फोटॉन) प्रकृति दर्शाता है। इसलिए प्रकाश को द्वैती प्रकृति वाला कहा जाता है।
3. आइन्स्टीन के प्रकाश-विद्युत प्रभाव समीकरण पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
आइन्स्टीन ने बताया कि जब धातु की सतह पर उपयुक्त आवृत्ति का प्रकाश गिरता है तो इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। यह तभी संभव है जब प्रकाश की ऊर्जा कार्य फलन से अधिक हो। समीकरण:
जहाँ W = कार्य फलन, KE = गतिज ऊर्जा। यह सिद्धांत प्रकाश की कण प्रकृति का प्रमाण है।
4. रेखीय संकारक (Linear operator) को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
क्वांटम यांत्रिकी में भौतिक राशियों को संकारकों द्वारा व्यक्त किया जाता है। यदि कोई संकारक रेखीय हो तो वह जोड़ और गुणन के नियम का पालन करता है:
उदाहरण: अवकलन संकारक d/dx एक रेखीय संकारक है। यह वेव फंक्शन पर कार्य करता है और भौतिक राशियों का मान देता है।
5. कॉम्पटन प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब उच्च ऊर्जा का एक्स-किरण फोटॉन किसी इलेक्ट्रॉन से टकराता है तो उसकी तरंगदैर्ध्य बढ़ जाती है। इसे कॉम्पटन प्रभाव कहते हैं। यह ऊर्जा और संवेग संरक्षण पर आधारित है।
कॉम्पटन समीकरण:
यह प्रभाव प्रकाश की कण प्रकृति का महत्वपूर्ण प्रमाण है।
6. (A) डी-ब्रॉग्ली द्वारा प्रतिपादित इलेक्ट्रॉन की द्वैती प्रकृति को समझाइये।
उत्तर:
डी-ब्रॉग्ली ने 1924 में प्रस्तावित किया कि जैसे प्रकाश में तरंग और कण दोनों गुण होते हैं, वैसे ही पदार्थ (विशेषकर इलेक्ट्रॉन) में भी तरंग प्रकृति होती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गतिमान कण से एक तरंग संबद्ध होती है जिसे डी-ब्रॉग्ली तरंग कहते हैं। इसका समीकरण है:
जहाँ h = प्लांक स्थिरांक, m = द्रव्यमान और v = वेग। यह विचार परमाणु संरचना को समझाने में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।
(B) क्वाण्टम यांत्रिकी के अभिगृहीतों (Postulates) को समझाइये।
उत्तर:
क्वांटम यांत्रिकी के मुख्य अभिगृहीत इस प्रकार हैं:
- कण की अवस्था को तरंग फलन ψ द्वारा व्यक्त किया जाता है।
- किसी भौतिक राशि को रेखीय संकारक द्वारा व्यक्त किया जाता है।
- मापन करने पर संकारक के ईजेन मान प्राप्त होते हैं।
- ψ² किसी स्थान पर कण मिलने की प्रायिकता देता है।
7. इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति को दर्शाने के लिए प्रयोग लिखिये।
उत्तर:
इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति का सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण डेविसन–जर्मर प्रयोग है। इस प्रयोग में इलेक्ट्रॉनों की किरण को निकेल क्रिस्टल पर डाला गया। क्रिस्टल से विवर्तन पैटर्न प्राप्त हुआ, जो केवल तरंगों में संभव है। इससे सिद्ध हुआ कि इलेक्ट्रॉन तरंग की तरह व्यवहार करते हैं और डी-ब्रॉग्ली सिद्धांत सत्य है।
8. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धान्त क्या है?
उत्तर:
हाइजेनबर्ग ने बताया कि किसी कण की स्थिति और संवेग को एक साथ बिल्कुल सटीक नहीं मापा जा सकता।
यह सिद्धांत सूक्ष्म कणों की प्रकृति को समझाने में महत्वपूर्ण है।
9. श्रोडिन्जर तरंग समीकरण व्युत्पन्न कीजिए तथा महत्व समझाइये।
उत्तर:
डी-ब्रॉग्ली संबंध और शास्त्रीय ऊर्जा समीकरण से श्रोडिन्जर समीकरण प्राप्त किया गया:
यह समीकरण किसी कण की ऊर्जा और तरंग फलन के बीच संबंध स्थापित करता है। यह परमाणु संरचना समझाने में आधारभूत है।
10. (A) श्रोडिन्जर समीकरण की उपयोगिता तथा ψ और ψ² की भौतिक सार्थकता बताइए।
उत्तर:
श्रोडिन्जर समीकरण से ऊर्जा स्तर और तरंग फलन प्राप्त होते हैं। ψ स्वयं भौतिक नहीं है, लेकिन ψ² किसी स्थान पर कण मिलने की प्रायिकता दर्शाता है।
(B) Normalization व Orthogonality की शर्तें
Normalization:
Orthogonal:
11. (A) एकविमीय बॉक्स में कण की ऊर्जा व तरंग फलन ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
ऊर्जा स्तर:
तरंग फलन:
(B) दीवारें हटाने पर परिणाम
उत्तर:
दीवारें हटाने पर कण मुक्त हो जाएगा और उसकी ऊर्जा सतत (continuous) हो जाएगी। तरंग फलन फैल जाएगा और कण किसी भी स्थान पर मिल सकता है।
12. कार्तीय निर्देशांकों (Cartesian coordinates) x, y, z को गोलीय ध्रुवीय निर्देशांक (Spherical polar coordinates) r, θ एवं φ के रूप में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:
तीन-आयामी अंतरिक्ष में किसी बिंदु की स्थिति को कार्तीय निर्देशांक (x, y, z) अथवा गोलीय ध्रुवीय निर्देशांक (r, θ, φ) द्वारा व्यक्त किया जा सकता है। गोलीय निर्देशांकों में r मूल बिंदु से दूरी, θ ध्रुवीय कोण (z-अक्ष से) तथा φ आजिमुथ कोण (x-अक्ष से xy तल में) होता है।
इन दोनों के बीच संबंध निम्न प्रकार है—
ये समीकरण क्वांटम यांत्रिकी में विशेष रूप से उपयोगी हैं क्योंकि परमाणु जैसे गोल सममित तंत्रों का अध्ययन गोलीय निर्देशांकों में सरल हो जाता है।
13. (A) साइनोसाइडल तरंग के लिए समीकरण क्या है?
(B) समीकरण ψ = A sin(nπx/a) में A का मान क्या है?
उत्तर:
(A) साइनोसाइडल तरंग वह तरंग है जिसकी आकृति साइन फलन के समान होती है। सामान्य समीकरण:
जहाँ A आयाम, k तरंग संख्या और ω कोणीय आवृत्ति है।
(B) एकविमीय बॉक्स में कण के लिए तरंग फलन को सामान्यीकृत करने पर A का मान मिलता है—
यह मान इसलिए आवश्यक है ताकि सम्पूर्ण क्षेत्र में कण मिलने की कुल प्रायिकता 1 हो।
14. चिरसम्मत यांत्रिकी की सीमाएँ क्या हैं? क्वाण्टम यांत्रिकी की आवश्यकता पर टिप्पणी दीजिए।
उत्तर:
चिरसम्मत यांत्रिकी बड़े पिंडों के लिए उपयुक्त है लेकिन सूक्ष्म कणों के व्यवहार को नहीं समझा सकती। यह ब्लैक बॉडी विकिरण, फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव और परमाणु स्पेक्ट्रा की व्याख्या करने में असफल रही।
इन्हीं समस्याओं को हल करने के लिए क्वांटम यांत्रिकी विकसित हुई। यह ऊर्जा के क्वांटीकरण, अनिश्चितता सिद्धांत और तरंग प्रकृति जैसे सिद्धांतों के आधार पर सूक्ष्म कणों के व्यवहार को समझाती है। इसलिए आधुनिक भौतिकी में इसकी अत्यंत आवश्यकता है।
15. यदि एक विमीय बॉक्स की लम्बाई बहुत बढ़ा दी जाये तो कण की ऊर्जा क्या होगी?
उत्तर:
एकविमीय बॉक्स में कण की ऊर्जा समीकरण है—
यहाँ L बॉक्स की लंबाई है। यदि L बहुत बड़ा कर दिया जाए तो हर स्तर की ऊर्जा बहुत कम हो जाएगी और ऊर्जा स्तरों के बीच अंतर लगभग शून्य हो जाएगा। परिणामस्वरूप ऊर्जा सतत (continuous) हो जाएगी और कण मुक्त कण जैसा व्यवहार करेगा।
16. (A) संकारक (Operators) क्या होते हैं? हेमिल्टोनियन संकारक को समझाइये।
(B) टिप्पणी: लाप्लासियन ऑपरेटर।
उत्तर:
(A) संकारक वे गणितीय क्रियाएँ हैं जो तरंग फलन पर कार्य करके भौतिक राशि का मान देती हैं। हेमिल्टोनियन संकारक कुल ऊर्जा दर्शाता है—
H^=−2mℏ2∇2+V
(B) लाप्लासियन ऑपरेटर ∇² द्वितीय अवकलजों का योग है और ऊर्जा समीकरण में गतिज ऊर्जा दर्शाता है।
17. त्रिज्य तरंग फलन एवं कोणीय तरंग फलन क्या है?
उत्तर:
हाइड्रोजन परमाणु में कुल तरंग फलन को दो भागों में लिखा जाता है—
R(r) त्रिज्य भाग है और Y कोणीय भाग है।
s ऑर्बिटल में नोड बढ़ते जाते हैं (1s < 2s < 3s)। p ऑर्बिटल में कोणीय नोड होता है। ये परमाणु संरचना समझने में सहायक हैं।
18. श्रोडिन्जर तरंग समीकरण का हल हाइड्रोजन परमाणु के लिए संक्षिप्त में दीजिए।
उत्तर:
हाइड्रोजन परमाणु के लिए श्रोडिन्जर समीकरण हल करने पर ऊर्जा स्तर प्राप्त होते हैं—
यहाँ n मुख्य क्वांटम संख्या है। समाधान से चार क्वांटम संख्याएँ प्राप्त होती हैं जो इलेक्ट्रॉन की स्थिति और ऊर्जा को पूर्णतः निर्धारित करती हैं।
19. सिद्ध कीजिए कि [Lx,Ly]=iℏLz, जहाँ Lx,Ly,Lz कोणीय संवेग ऑपरेटर के घटक हैं।
उत्तर:
क्वांटम यांत्रिकी में कोणीय संवेग के घटकों को संकारक के रूप में परिभाषित किया जाता है:
कम्यूटेटर की परिभाषा है:
इन संकारकों को किसी उपयुक्त तरंग फलन पर क्रमशः लागू करके अवकलजों का विस्तार करने पर प्राप्त होता है कि मिश्रित अवकलजों के संयोजन से अंतिम परिणाम
मिलता है। इसी प्रकार अन्य संबंध भी प्राप्त होते हैं:
[Ly,Lz]=iℏLx और [Lz,Lx]=iℏLy। ये संबंध कोणीय संवेग के क्वांटीकरण और अनिश्चितता सिद्धांत से जुड़े हैं।
20. कोणीय संवेग संकारक पर टिप्पणी लिखिये।
उत्तर:
क्वांटम यांत्रिकी में कोणीय संवेग को संकारक के रूप में व्यक्त किया जाता है। कुल कोणीय संवेग का वर्ग
से दिया जाता है। इसके ईजेन मान
और
होते हैं, जहाँ l कक्षीय क्वांटम संख्या और m चुम्बकीय क्वांटम संख्या है।
कोणीय संवेग संकारक परमाणु संरचना, ऑर्बिटल आकृति और स्पेक्ट्रा की व्याख्या में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
21. चुम्बकीय क्वाण्टम संख्या की संपूर्ण व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
चुम्बकीय क्वांटम संख्या m इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग के z-अक्ष पर प्रक्षेप को दर्शाती है। इसका मान
होता है।
यह संख्या बताती है कि किसी ऑर्बिटल के कितने संभावित अभिविन्यास (orientations) हो सकते हैं। उदाहरण: यदि l=1 है तो m = -1, 0, +1 होंगे, अर्थात तीन p-ऑर्बिटल। बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में ये विभिन्न ऊर्जा स्तर देते हैं, जिसे जीमन प्रभाव कहते हैं।
22. क्वांटम यांत्रिकी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
19वीं शताब्दी के अंत में कई प्रयोगात्मक परिणाम शास्त्रीय भौतिकी से नहीं समझाए जा सके, जैसे ब्लैक बॉडी विकिरण, फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव और परमाणु स्पेक्ट्रा। प्लांक ने ऊर्जा के क्वांटीकरण का विचार दिया, आइन्स्टीन ने प्रकाश की कण प्रकृति बताई और डी-ब्रॉग्ली ने पदार्थ तरंग का सिद्धांत दिया।
इसके बाद श्रोडिन्जर, हाइजेनबर्ग और डिराक ने आधुनिक क्वांटम यांत्रिकी विकसित की। आज यह सिद्धांत परमाणु, अणु और ठोस अवस्था भौतिकी की आधारशिला है।


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