B.Sc. Zoology (C.G.) Third Year – UNIT 1, first Question Paper Long & Short Answer Questions





                                                             B.Sc. ZOOLOGY  (C.G.)

Third Year – First Question Paper


बी.एससी. (सी.जी.)
तृतीय वर्ष 

इकाई 1

animal behavior chronobilogy and ecology

दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न


1. जन्तु व्यवहार के अध्ययन की आवश्यकता क्यों पड़ी? विस्तार से समझाइए।

जन्तु व्यवहार (Animal Behavior) का अध्ययन इसलिए आवश्यक हुआ क्योंकि केवल शरीर रचना और शरीर क्रिया विज्ञान से जीवों को पूरी तरह समझा नहीं जा सकता था। वैज्ञानिकों ने पाया कि जीवों का व्यवहार उनके जीवन, अनुकूलन, प्रजनन और अस्तित्व में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए भोजन प्राप्त करना, शत्रु से बचाव, प्रवास (migration), संचार और सामाजिक संगठन जैसे कार्य व्यवहार पर निर्भर करते हैं।

व्यवहार अध्ययन से यह समझने में मदद मिलती है कि जीव अपने पर्यावरण के साथ कैसे अनुकूलन करते हैं। इससे विकासवाद (evolution) और प्राकृतिक चयन की प्रक्रिया को समझने में भी सहायता मिली। कृषि, पशुपालन और वन्यजीव संरक्षण में भी इसका बड़ा महत्व है। जैसे– पशुओं के व्यवहार को समझकर उनकी बेहतर देखभाल और प्रजनन कराया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त, मानव व्यवहार की जड़ों को समझने में भी पशु व्यवहार का अध्ययन सहायक है, क्योंकि कई व्यवहारों की उत्पत्ति समान विकासात्मक आधार से हुई है। इसलिए जन्तु व्यवहार का अध्ययन जीवविज्ञान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया।


2. इम्प्रिंटिंग (Imprinting) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

इम्प्रिंटिंग एक विशेष प्रकार का सीखने का व्यवहार है जो जीवन के प्रारंभिक चरण में बहुत कम समय के लिए होता है और स्थायी होता है। यह सामान्यतः पक्षियों और कुछ स्तनधारियों में देखा जाता है।

इस प्रक्रिया में नवजात शिशु अपने माता-पिता या आसपास की किसी वस्तु को पहचान लेते हैं और उसी का अनुसरण करते हैं। उदाहरण के लिए, बत्तख के बच्चे अंडे से निकलते ही जिस चलती वस्तु को सबसे पहले देखते हैं, उसी को अपनी माँ मान लेते हैं और उसका पीछा करते हैं।

इम्प्रिंटिंग का अध्ययन प्रसिद्ध वैज्ञानिक कॉनराड लोरेन्ज ने किया था। उन्होंने देखा कि बत्तख के बच्चे उनके पीछे चलने लगे क्योंकि उन्होंने जन्म के समय सबसे पहले लोरेन्ज को देखा था।

इम्प्रिंटिंग का महत्व यह है कि इससे बच्चों को सुरक्षा, भोजन और सामाजिक व्यवहार सीखने में मदद मिलती है। यह सीखने की प्रक्रिया आनुवंशिक प्रवृत्ति और पर्यावरण के बीच संबंध को दर्शाती है।


3. जन्तु व्यवहार का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों के योगदान को समझाइए।

जन्तु व्यवहार के अध्ययन में कई महान वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। चार्ल्स डार्विन ने अपनी पुस्तक The Expression of Emotions in Man and Animals में बताया कि व्यवहार भी विकासवाद का परिणाम है। उन्होंने दिखाया कि मानव और पशुओं के व्यवहार में समानता होती है।

कॉनराड लोरेन्ज को आधुनिक एथोलॉजी का जनक माना जाता है। उन्होंने इम्प्रिंटिंग और स्वाभाविक व्यवहार (instinct) पर महत्वपूर्ण शोध किया। निकोलस टिनबर्गन ने व्यवहार के अध्ययन के लिए चार प्रमुख प्रश्न दिए— कारण, विकास, कार्य और विकासक्रम।

कार्ल वॉन फ्रिश ने मधुमक्खियों के “वैगल डांस” की खोज की, जिससे वे भोजन के स्थान की जानकारी देती हैं। इन वैज्ञानिकों के कार्यों ने यह सिद्ध किया कि व्यवहार वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया जा सकता है। इनके योगदान के कारण एथोलॉजी एक स्वतंत्र और महत्वपूर्ण विज्ञान के रूप में विकसित हुआ।


4. जन्तु व्यावहारिकी (Ethology) की अवधारणा को समझाइए।

जन्तु व्यावहारिकी या एथोलॉजी जीवों के प्राकृतिक वातावरण में उनके व्यवहार के वैज्ञानिक अध्ययन को कहते हैं। यह शब्द ग्रीक भाषा के Ethos (आदत) और Logos (अध्ययन) से बना है।

एथोलॉजी का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि जीव किसी विशेष परिस्थिति में कैसे और क्यों व्यवहार करते हैं। इसमें जन्मजात (innate) और अर्जित (learned) दोनों प्रकार के व्यवहारों का अध्ययन किया जाता है।

एथोलॉजी के अनुसार, व्यवहार प्राकृतिक चयन का परिणाम होता है और जीवों की जीवित रहने तथा प्रजनन की क्षमता को बढ़ाता है। इसमें संचार, प्रवास, सामाजिक संगठन, क्षेत्रीयता (territoriality) और परोपकारिता जैसे विषय शामिल हैं।

आज एथोलॉजी का उपयोग वन्यजीव संरक्षण, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण में किया जा रहा है। यह विज्ञान हमें जीवों और उनके पर्यावरण के बीच संबंध को समझने में सहायता देता है।


5. कुंजी या सूचक उद्दीपन या मोचक (Sign Stimuli or Releasers) की अवधारणा को समझाइए।

कुंजी उद्दीपन या मोचक ऐसे विशेष संकेत होते हैं जो किसी जीव में निश्चित व्यवहार को प्रारंभ कर देते हैं। इन्हें “Sign Stimuli” या “Releasers” कहा जाता है।

यह संकेत बाहरी वातावरण से आते हैं और जीव के अंदर मौजूद जन्मजात प्रतिक्रिया (Innate Releasing Mechanism) को सक्रिय करते हैं। उदाहरण के लिए, चूजे अपनी माँ की चोंच पर लाल धब्बे को देखकर चोंच मारते हैं, जिससे उन्हें भोजन मिलता है। यह लाल धब्बा कुंजी उद्दीपन है।

इसी प्रकार, नर पक्षियों के चमकीले रंग मादा को आकर्षित करते हैं, जो प्रजनन व्यवहार को शुरू करते हैं। कुंजी उद्दीपन व्यवहार को सही समय और सही परिस्थिति में सक्रिय करने में मदद करते हैं।

यह अवधारणा दर्शाती है कि व्यवहार केवल सीखने पर आधारित नहीं होता, बल्कि कई प्रतिक्रियाएँ जन्मजात होती हैं और विशेष संकेतों से नियंत्रित होती हैं।


6. अन्तर्जात मोचक क्रियाविधि (Innate Releasing Mechanism – IRM) की अवधारणा को विस्तार से समझाइए।

अन्तर्जात मोचक क्रियाविधि (IRM) वह जन्मजात तंत्र है जो किसी विशेष बाहरी संकेत (Sign Stimulus) मिलने पर स्वतः एक निश्चित व्यवहार को शुरू कर देता है। यह व्यवहार पहले से जीव के मस्तिष्क में प्रोग्राम्ड होता है और इसे सीखने की आवश्यकता नहीं होती।

IRM का कार्य यह है कि जब कोई विशिष्ट संकेत प्राप्त होता है, तो यह तंत्र सक्रिय होकर Fixed Action Pattern (FAP) नामक व्यवहार को शुरू कर देता है। उदाहरण के लिए, पक्षियों के बच्चों में भोजन मांगने का व्यवहार— जब वे माँ की चोंच देखते हैं, तो तुरंत चोंच मारने लगते हैं। यह प्रतिक्रिया IRM द्वारा नियंत्रित होती है।

IRM का महत्व यह है कि यह जीवों को बिना प्रशिक्षण के तुरंत सही प्रतिक्रिया देने में मदद करता है, जिससे जीवित रहने और प्रजनन की संभावना बढ़ जाती है। यह विकासवाद और प्राकृतिक चयन का परिणाम है।


7. व्यवहारीय आनुवंशिकी (Behavioral Genetics) को समझाइए।

व्यवहारीय आनुवंशिकी वह शाखा है जो यह अध्ययन करती है कि आनुवंशिकता (genes) और पर्यावरण मिलकर व्यवहार को कैसे प्रभावित करते हैं। इसका उद्देश्य यह समझना है कि कौन-से व्यवहार जन्मजात होते हैं और कौन-से सीखकर विकसित होते हैं।

इस क्षेत्र में जुड़वाँ बच्चों, पशुओं की नस्लों और प्रयोगात्मक अध्ययन का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, कुछ कुत्तों की नस्लें स्वाभाविक रूप से शिकार करने में सक्षम होती हैं, जबकि कुछ नस्लें सुरक्षा के लिए अधिक उपयुक्त होती हैं। यह व्यवहार आनुवंशिक आधार को दर्शाता है।

व्यवहारीय आनुवंशिकी यह भी बताती है कि बुद्धिमत्ता, आक्रामकता, सामाजिक व्यवहार आदि पर genes और पर्यावरण दोनों का प्रभाव होता है। इससे मानव व्यवहार, मानसिक रोगों और पशु सुधार कार्यक्रमों को समझने में सहायता मिलती है।


8. व्यवहार वैज्ञानिक (Ethologists) एवं मनोवैज्ञानिकों (Psychologists) के बीच क्या अंतर है? स्पष्ट कीजिए।

Ethologists और Psychologists दोनों व्यवहार का अध्ययन करते हैं, लेकिन उनका दृष्टिकोण अलग होता है। Ethologists मुख्य रूप से जानवरों के व्यवहार का अध्ययन उनके प्राकृतिक वातावरण में करते हैं, जबकि Psychologists अक्सर प्रयोगशाला में नियंत्रित परिस्थितियों में अध्ययन करते हैं।

Ethologists जन्मजात व्यवहार, विकासवाद और अनुकूलन पर जोर देते हैं। वे यह जानने की कोशिश करते हैं कि व्यवहार जीवित रहने में कैसे मदद करता है। दूसरी ओर, Psychologists सीखने की प्रक्रिया, स्मृति, और मानसिक प्रक्रियाओं पर अधिक ध्यान देते हैं।

Ethologists तुलनात्मक अध्ययन करते हैं और विभिन्न प्रजातियों के व्यवहार की तुलना करते हैं। Psychologists मानव व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं को अधिक महत्व देते हैं।

इस प्रकार, Ethology प्राकृतिक और विकासवादी दृष्टिकोण अपनाती है, जबकि Psychology प्रयोगात्मक और मानसिक प्रक्रियाओं पर आधारित होती है।


9. अभिविन्यास (Orientation) को विस्तृत में वर्णित कीजिए।

अभिविन्यास वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने वातावरण के संबंध में दिशा और स्थिति को पहचानते हैं। यह जीवों को भोजन खोजने, शत्रु से बचने और प्रवास करने में मदद करता है।

Orientation मुख्यतः दो प्रकार का होता है – Kinesis और Taxis। इसमें प्रकाश, तापमान, गुरुत्वाकर्षण, रासायनिक संकेत और चुंबकीय क्षेत्र जैसे कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उदाहरण के लिए, पक्षियों का प्रवास (migration) अभिविन्यास का उत्कृष्ट उदाहरण है। वे सूर्य, तारे और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करके हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं।

अभिविन्यास जीवों के अस्तित्व के लिए आवश्यक है क्योंकि इससे वे सही दिशा में जाकर संसाधनों का उपयोग कर पाते हैं और अपने जीवन चक्र को पूरा कर पाते हैं।


10. गतिक्रम (Kinesis) को विस्तार से वर्णित कीजिए।

Kinesis एक प्रकार का अभिविन्यास व्यवहार है जिसमें जीव किसी उद्दीपन की दिशा में सीधे नहीं जाते, बल्कि उनकी गति या गतिविधि की दर बदल जाती है। इसमें दिशा निश्चित नहीं होती, बल्कि गति में परिवर्तन होता है।

Kinesis दो प्रकार की होती है – Orthokinesis और Klinokinesis। Orthokinesis में गति की गति (speed) बदलती है, जबकि Klinokinesis में दिशा बदलने की दर बदलती है।

उदाहरण के लिए, लकड़ी के कीड़े (woodlice) सूखे स्थान में तेजी से चलते हैं और नम स्थान में धीरे चलते हैं। इससे वे अंततः नम वातावरण में रुक जाते हैं, जो उनके लिए अनुकूल होता है।

Kinesis जीवों को अनुकूल वातावरण खोजने में मदद करता है और उनके अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है।


11. अनुचलन (Taxis) पर टिप्पणी कीजिए।

Taxis एक प्रकार का अभिविन्यास व्यवहार है जिसमें जीव किसी उद्दीपन (stimulus) की दिशा में या उससे दूर सीधे गति करते हैं। इसमें दिशा निश्चित होती है, इसलिए यह Kinesis से अलग है।

Taxis कई प्रकार की होती है जैसे— Phototaxis (प्रकाश की ओर/दूर), Chemotaxis (रासायनिक पदार्थों की ओर/दूर), Geotaxis (गुरुत्वाकर्षण के प्रति), Thermotaxis (तापमान के प्रति) आदि। उदाहरण के लिए पतंगे प्रकाश की ओर आकर्षित होते हैं, यह Positive Phototaxis है।

Taxis जीवों को भोजन खोजने, साथी ढूँढने और अनुकूल वातावरण तक पहुँचने में मदद करती है। यह व्यवहार जीवित रहने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे जीव सही दिशा में गति करके अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर पाते हैं।


12. ऋणात्मक एवं धनात्मक अभिविन्यास (Negative and Positive Orientation) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

जब कोई जीव किसी उद्दीपन की ओर बढ़ता है, तो इसे धनात्मक अभिविन्यास (Positive Orientation) कहते हैं, और जब वह उद्दीपन से दूर जाता है, तो इसे ऋणात्मक अभिविन्यास (Negative Orientation) कहते हैं।

उदाहरण के लिए, पौधों का प्रकाश की ओर बढ़ना Positive Phototropism है। दूसरी ओर, कुछ जीव तेज प्रकाश से दूर जाते हैं, यह Negative Phototaxis है।

ये दोनों प्रकार के अभिविन्यास जीवों को अनुकूल वातावरण चुनने में सहायता करते हैं। इससे वे हानिकारक परिस्थितियों से बचते हैं और जीवन के लिए आवश्यक संसाधनों को प्राप्त करते हैं। यह व्यवहार प्राकृतिक चयन का परिणाम है।


13. जंतुओं में पाए जाने वाले व्यवहार के विभिन्न प्रकार को विस्तार से समझाइए।

जंतुओं में व्यवहार कई प्रकार के होते हैं जिन्हें मुख्यतः जन्मजात और अर्जित व्यवहार में बाँटा जाता है।

जन्मजात व्यवहार (Innate Behavior) – यह जन्म से ही मौजूद होता है, जैसे परावर्त क्रिया (reflex), प्रवास, और Fixed Action Pattern।
अर्जित व्यवहार (Learned Behavior) – अनुभव और अभ्यास से विकसित होता है, जैसे सीखना, स्मृति और समस्या समाधान।

अन्य महत्वपूर्ण प्रकार –
सामाजिक व्यवहार – समूह में रहने और सहयोग करने का व्यवहार।
प्रजनन व्यवहार – साथी आकर्षण और संतान पालन।
आक्रामक व्यवहार – क्षेत्र और संसाधनों की रक्षा।
परमार्थ व्यवहार (Altruism) – दूसरों की सहायता करना।

ये सभी व्यवहार जीवों के जीवन, सुरक्षा और प्रजनन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


14. हॉर्मोन और व्यवहार (Hormones and Behavior) पर एक निबंध लिखिए।

हॉर्मोन शरीर में बनने वाले रासायनिक संदेशवाहक हैं जो व्यवहार को नियंत्रित और प्रभावित करते हैं। ये अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा निर्मित होते हैं और रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचते हैं।

हॉर्मोन प्रजनन, आक्रामकता, माता-पिता का व्यवहार, तनाव और भावनाओं को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए टेस्टोस्टेरोन आक्रामकता और प्रजनन व्यवहार को बढ़ाता है, जबकि ऑक्सीटोसिन मातृत्व और सामाजिक संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

तनाव की स्थिति में एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल शरीर को “Fight or Flight” प्रतिक्रिया के लिए तैयार करते हैं। इसी प्रकार मेलाटोनिन नींद और जैविक घड़ी को नियंत्रित करता है।

इस प्रकार हॉर्मोन व्यवहार और शरीर के बीच संबंध स्थापित करते हैं और जीवों को पर्यावरण के अनुसार अनुकूलन करने में मदद करते हैं।


15. हॉर्मोन के कार्य की क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।

हॉर्मोन की क्रियाविधि (Mechanism of Hormone Action) उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसके द्वारा हॉर्मोन शरीर की कोशिकाओं पर प्रभाव डालते हैं।

हॉर्मोन दो प्रकार के होते हैं— स्टेरॉयड हॉर्मोन और पेप्टाइड हॉर्मोन। स्टेरॉयड हॉर्मोन कोशिका झिल्ली को पार कर सीधे नाभिक में जाकर जीन अभिव्यक्ति को प्रभावित करते हैं। इससे प्रोटीन संश्लेषण होता है और दीर्घकालिक प्रभाव दिखाई देता है।

पेप्टाइड हॉर्मोन कोशिका झिल्ली को पार नहीं कर पाते, इसलिए वे कोशिका की सतह पर रिसेप्टर से जुड़ते हैं और द्वितीय संदेशवाहक (Second Messenger) प्रणाली को सक्रिय करते हैं। इससे कोशिका में रासायनिक प्रतिक्रियाएँ शुरू होती हैं।

इस प्रकार हॉर्मोन शरीर की विभिन्न प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं और व्यवहार तथा शारीरिक क्रियाओं में समन्वय स्थापित करते हैं।


16. तंत्रिकीय व्यवहार नियंत्रण (Neural Control of Behavior) की प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।

तंत्रिकीय नियंत्रण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा तंत्रिका तंत्र (Nervous System) जीवों के व्यवहार को नियंत्रित और समन्वित करता है। यह प्रणाली मस्तिष्क, मेरुरज्जु (Spinal cord) और तंत्रिकाओं से मिलकर बनी होती है।

जब कोई उद्दीपन (stimulus) जैसे प्रकाश, ध्वनि या स्पर्श प्राप्त होता है, तो संवेदन अंग (sense organs) उसे पहचानकर तंत्रिका संकेत (nerve impulse) के रूप में मस्तिष्क तक भेजते हैं। मस्तिष्क इस सूचना का विश्लेषण करता है और उचित प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए मोटर तंत्रिकाओं के माध्यम से मांसपेशियों या ग्रंथियों को निर्देश देता है।

न्यूरॉन्स के बीच संचार न्यूरोट्रांसमीटर द्वारा होता है। यह प्रक्रिया बहुत तेज होती है और तत्काल प्रतिक्रिया उत्पन्न करती है, जैसे भागना, हमला करना या भोजन पकड़ना।

तंत्रिकीय नियंत्रण और हार्मोनल नियंत्रण मिलकर व्यवहार को नियंत्रित करते हैं और जीवों को पर्यावरण के अनुसार शीघ्र प्रतिक्रिया देने में सहायता करते हैं।


17. कोर्टसिप (Courtship / प्रणय व्यवहार) का विस्तृत वर्णन कीजिए।

प्रणय व्यवहार वह प्रक्रिया है जिसमें नर और मादा प्रजनन से पहले एक-दूसरे को आकर्षित करने के लिए विशेष व्यवहार प्रदर्शित करते हैं। यह व्यवहार प्रजाति की पहचान, साथी चयन और सफल प्रजनन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

प्रणय व्यवहार में नृत्य, गीत, रंग प्रदर्शन, सुगंध और उपहार देना शामिल हो सकता है। उदाहरण के लिए, कई पक्षी आकर्षक नृत्य और मधुर गीत के माध्यम से मादा को आकर्षित करते हैं। कुछ कीट फेरोमोन नामक रसायन छोड़ते हैं जिससे साथी आकर्षित होता है।

यह व्यवहार गलत प्रजाति के साथ संगम को रोकता है और स्वस्थ साथी का चयन करने में मदद करता है। प्रणय व्यवहार प्राकृतिक चयन का परिणाम है और प्रजाति के अस्तित्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


18. संगम (Mating) प्रक्रिया को वर्णित कीजिए।

संगम वह प्रक्रिया है जिसमें नर और मादा के बीच युग्मकों (gametes) का मिलन होता है, जिससे निषेचन और नई संतान का निर्माण होता है। यह प्रजनन का मुख्य चरण है।

संगम दो प्रकार का होता है— बाह्य निषेचन (External fertilization) और आंतरिक निषेचन (Internal fertilization)। बाह्य निषेचन में अंडे और शुक्राणु शरीर के बाहर मिलते हैं, जैसे मछलियों और उभयचरों में। आंतरिक निषेचन में शुक्राणु मादा के शरीर के अंदर अंडे से मिलते हैं, जैसे पक्षियों और स्तनधारियों में।

संगम के दौरान हार्मोन और तंत्रिका तंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सफल संगम के बाद भ्रूण विकास शुरू होता है। यह प्रक्रिया प्रजाति की निरंतरता और जैव विविधता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।




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