B.Sc. ZOOLOGY (C.G.)
Third Year – Second Question Paper
इकाई 2
Immunology
दीर्घ एवं लघु उत्तरीय प्रश्न
1. सहज या प्राकृतिक इम्यूनिटी तथा उपार्जित इम्यूनिटी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
सहज या प्राकृतिक प्रतिरक्षा (Innate Immunity) शरीर की जन्मजात सुरक्षा प्रणाली है, जो जन्म से ही उपस्थित रहती है। यह किसी भी रोगजनक के शरीर में प्रवेश करते ही तुरंत सक्रिय हो जाती है। इसमें त्वचा, श्लेष्म झिल्ली, आँसू, लार, पेट का अम्ल, बुखार तथा श्वेत रक्त कोशिकाएँ शामिल होती हैं। यह प्रतिरक्षा सामान्य और गैर-विशिष्ट होती है, यानी यह हर प्रकार के रोगजनकों के विरुद्ध समान प्रतिक्रिया देती है।
इसके विपरीत उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity) जीवन के दौरान विकसित होती है और विशेष रोगजनकों के प्रति विशिष्ट प्रतिक्रिया देती है। यह टीकाकरण या संक्रमण के बाद विकसित होती है तथा स्मृति कोशिकाओं के कारण भविष्य में उसी रोग से सुरक्षा प्रदान करती है। दोनों प्रकार की प्रतिरक्षा मिलकर शरीर को रोगों से सुरक्षित रखती हैं।
2. इम्यून तंत्र क्या है? इसमें भाग लेने वाली कोशिकाओं का वर्णन कीजिये।
उत्तर:
इम्यून तंत्र शरीर की रक्षा प्रणाली है जो रोगजनकों जैसे बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों से शरीर की सुरक्षा करता है। यह कई अंगों, ऊतकों और कोशिकाओं से मिलकर बना होता है। इसमें अस्थि मज्जा, थाइमस, प्लीहा और लसिका ग्रंथियाँ प्रमुख अंग हैं।
इस प्रणाली में कई प्रकार की कोशिकाएँ भाग लेती हैं। श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC) मुख्य भूमिका निभाती हैं। न्यूट्रोफिल और मैक्रोफेज रोगजनकों को निगल कर नष्ट करते हैं। लिम्फोसाइट्स दो प्रकार के होते हैं—बी-कोशिकाएँ एण्टीबॉडी बनाती हैं और टी-कोशिकाएँ संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करती हैं। प्राकृतिक किलर कोशिकाएँ (NK cells) भी वायरस संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करती हैं। इस प्रकार इम्यून तंत्र शरीर को संक्रमण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3. लसिका तंत्र पर टिप्पणी लिखिये।
उत्तर:
लसिका तंत्र (Lymphatic System) शरीर का एक महत्वपूर्ण भाग है जो प्रतिरक्षा और द्रव संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इसमें लसिका द्रव, लसिका वाहिकाएँ और लसिका ग्रंथियाँ शामिल होती हैं। लसिका द्रव एक पारदर्शी तरल होता है जिसमें श्वेत रक्त कोशिकाएँ होती हैं।
यह तंत्र शरीर से अतिरिक्त द्रव को हटाकर रक्त में वापस पहुँचाता है तथा रोगजनकों को पहचानकर नष्ट करता है। लसिका ग्रंथियाँ फिल्टर की तरह काम करती हैं और हानिकारक सूक्ष्मजीवों को रोकती हैं। प्लीहा और थाइमस भी इस तंत्र का भाग हैं। लसिका तंत्र शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है और संक्रमण से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
4. एण्टीबॉडी की संरचना समझाइये?
उत्तर:
एण्टीबॉडी या प्रतिपिंड (Antibody) प्रोटीन अणु होते हैं जो बी-लिम्फोसाइट्स द्वारा बनाए जाते हैं। ये विशेष रूप से एण्टीजन को पहचानकर उससे जुड़ जाते हैं और उसे निष्क्रिय कर देते हैं। एण्टीबॉडी का आकार Y के समान होता है। इसमें चार पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ होती हैं—दो भारी श्रृंखलाएँ और दो हल्की श्रृंखलाएँ।
एण्टीबॉडी के ऊपरी भाग को एण्टीजन-बाइंडिंग साइट कहते हैं, जो विशिष्ट एण्टीजन से जुड़ता है। निचला भाग Fc क्षेत्र कहलाता है जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सक्रिय करता है। एण्टीबॉडी के पाँच प्रमुख प्रकार होते हैं—IgG, IgM, IgA, IgE और IgD। ये शरीर को संक्रमण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
5. एण्टीजन क्या है या प्रतिजन क्या है?
उत्तर:
एण्टीजन (Antigen) वह विदेशी पदार्थ होता है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है और एण्टीबॉडी बनने को प्रेरित करता है। ये सामान्यतः बैक्टीरिया, वायरस, विष, परागकण या अन्य बाहरी पदार्थ हो सकते हैं।
जब एण्टीजन शरीर में प्रवेश करता है, तो प्रतिरक्षा तंत्र उसे पहचानकर उसके विरुद्ध प्रतिक्रिया करता है। एण्टीजन शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं, इसलिए शरीर इन्हें नष्ट करने के लिए विशेष प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। एण्टीजन और एण्टीबॉडी के बीच विशिष्ट संबंध होता है, जिससे शरीर रोगों से सुरक्षित रहता है।
6. एण्टीजन कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
एण्टीजन कई प्रकार के होते हैं, जिन्हें उनकी उत्पत्ति और प्रकृति के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। बाह्य एण्टीजन (Exogenous) शरीर के बाहर से प्रवेश करते हैं, जैसे बैक्टीरिया और वायरस। आंतरिक एण्टीजन (Endogenous) शरीर के अंदर उत्पन्न होते हैं, जैसे कैंसर कोशिकाएँ।
ऑटोएण्टीजन वे होते हैं जो शरीर की अपनी कोशिकाओं से संबंधित होते हैं और ऑटोइम्यून रोग उत्पन्न कर सकते हैं। हेटरोएण्टीजन विभिन्न प्रजातियों से आते हैं। इसके अलावा पूर्ण एण्टीजन और हैप्टेन भी होते हैं। पूर्ण एण्टीजन स्वयं प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं जबकि हैप्टेन को प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए वाहक प्रोटीन की आवश्यकता होती है।
7. एण्टीनिसिटी या प्रतिजनता क्या है?
उत्तर:
एण्टीनिसिटी या प्रतिजनता (Antigenicity) वह क्षमता है जिसके द्वारा कोई पदार्थ प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित कर एण्टीबॉडी उत्पन्न करवाता है। यह किसी पदार्थ की पहचान और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने की योग्यता को दर्शाता है।
किसी एण्टीजन की प्रतिजनता उसके आकार, रासायनिक संरचना, जटिलता और विदेशीपन पर निर्भर करती है। बड़े और जटिल प्रोटीन सामान्यतः अधिक प्रतिजन होते हैं। प्रतिजनता प्रतिरक्षा विज्ञान का महत्वपूर्ण सिद्धांत है क्योंकि इसके आधार पर टीके विकसित किए जाते हैं और रोगों की रोकथाम संभव होती है।
8. इम्यूनोजेनेसिटी क्या है?
उत्तर:
इम्यूनोजेनेसिटी (Immunogenicity) किसी पदार्थ की वह क्षमता है जिसके द्वारा वह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करके विशिष्ट प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। जब कोई विदेशी पदार्थ शरीर में प्रवेश करता है और प्रतिरक्षा तंत्र को एण्टीबॉडी तथा प्रतिरक्षा कोशिकाएँ बनाने के लिए प्रेरित करता है, तो उसे इम्यूनोजेन कहा जाता है। सभी एण्टीजन इम्यूनोजेन नहीं होते, लेकिन सभी इम्यूनोजेन एण्टीजन हो सकते हैं।
इम्यूनोजेनेसिटी कई कारकों पर निर्भर करती है जैसे अणु का आकार, जटिलता, रासायनिक संरचना और विदेशीपन। बड़े और जटिल प्रोटीन अधिक इम्यूनोजेनिक होते हैं। यह अवधारणा वैक्सीन निर्माण में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि टीकों का उद्देश्य शरीर में सुरक्षित तरीके से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करना होता है, जिससे भविष्य में रोग से बचाव संभव हो सके।
9. MHC कॉम्पलेक्स को समझाइए।
उत्तर:
MHC (Major Histocompatibility Complex) जीनों का एक समूह है जो शरीर की कोशिकाओं की सतह पर उपस्थित विशेष प्रोटीन बनाते हैं। ये प्रोटीन प्रतिरक्षा तंत्र को यह पहचानने में मदद करते हैं कि कौन-सी कोशिकाएँ शरीर की अपनी हैं और कौन-सी विदेशी हैं।
MHC दो प्रमुख प्रकार के होते हैं—MHC-I और MHC-II। MHC-I सभी नाभिकीय कोशिकाओं पर पाए जाते हैं और संक्रमित कोशिकाओं को टी-कोशिकाओं द्वारा पहचानने में मदद करते हैं। MHC-II केवल विशेष प्रतिरक्षा कोशिकाओं जैसे मैक्रोफेज और बी-कोशिकाओं पर पाए जाते हैं और बाहरी रोगजनकों के विरुद्ध प्रतिक्रिया को सक्रिय करते हैं। अंग प्रत्यारोपण में MHC की महत्वपूर्ण भूमिका होती है क्योंकि असंगतता होने पर शरीर अंग को अस्वीकार कर सकता है।
10. रुमेटीइड आर्थराइटिस या गठिया रोग का कारण एवं लक्षण बताइए।
उत्तर:
रुमेटीइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून रोग है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही जोड़ों के ऊतकों पर हमला करने लगती है। इसका सटीक कारण पूरी तरह ज्ञात नहीं है, लेकिन आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों का योगदान माना जाता है।
इसके प्रमुख लक्षणों में जोड़ों में दर्द, सूजन, जकड़न, सुबह के समय कठोरता और थकान शामिल हैं। समय के साथ यह जोड़ों को स्थायी नुकसान पहुँचा सकता है। इसका उपचार दवाओं, फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में सुधार से किया जाता है। समय पर उपचार से रोग की प्रगति को धीमा किया जा सकता है।
11. टीकाकरण (Vaccination) क्या है?
उत्तर:
टीकाकरण एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें कमजोर या निष्क्रिय रोगजनकों को शरीर में प्रविष्ट कराया जाता है ताकि प्रतिरक्षा तंत्र सक्रिय होकर एण्टीबॉडी बना सके। इससे शरीर भविष्य में उसी रोग के विरुद्ध तैयार रहता है।
टीके शरीर में स्मृति कोशिकाएँ बनाते हैं, जिससे दोबारा संक्रमण होने पर शरीर तेजी से प्रतिक्रिया देता है। पोलियो, खसरा और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की रोकथाम में टीकाकरण ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे प्रभावी और सुरक्षित विधियों में से एक है।
12. एपीटॉप्स, हेप्टेन्स, एड्ज्यूवेन्ट और इम्युनोग्लोब्यूलिन क्या हैं? इनकी विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
एपीटॉप एण्टीजन का वह छोटा भाग होता है जिससे एण्टीबॉडी जुड़ती है। हेप्टेन छोटे अणु होते हैं जो अकेले प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न नहीं कर सकते, लेकिन वाहक प्रोटीन के साथ मिलकर प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं।
एड्ज्यूवेन्ट वे पदार्थ होते हैं जो टीकों की प्रभावशीलता बढ़ाते हैं और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को मजबूत बनाते हैं। इम्युनोग्लोब्यूलिन एण्टीबॉडी का दूसरा नाम है और ये शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। इनके विभिन्न प्रकार शरीर के अलग-अलग भागों में कार्य करते हैं और रोगों से रक्षा प्रदान करते हैं।
13. थायरॉइड की समस्या (Thyroid problem) क्या है? उसके प्रकार, लक्षणों और कारणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
थायरॉइड समस्या तब होती है जब थायरॉइड ग्रंथि हार्मोन का उत्पादन कम या अधिक करती है। इसके दो प्रमुख प्रकार हैं—हाइपोथायरॉइडिज्म और हाइपरथायरॉइडिज्म। हाइपोथायरॉइडिज्म में हार्मोन कम बनते हैं, जिससे वजन बढ़ना, थकान और ठंड सहन न होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
हाइपरथायरॉइडिज्म में हार्मोन अधिक बनते हैं, जिससे वजन घटना, घबराहट और तेज धड़कन होती है। इसका कारण आयोडीन की कमी, ऑटोइम्यून रोग या आनुवंशिक कारण हो सकते हैं। समय पर जांच और उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
14. मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (Monoclonal antibody) क्या है? इनका रोगों के उपचार में क्या योगदान है?
उत्तर:
मोनोक्लोनल एंटीबॉडी प्रयोगशाला में बनाई गई विशेष एण्टीबॉडी होती हैं जो किसी एक विशिष्ट एण्टीजन को पहचानती हैं। इन्हें हाइब्रिडोमा तकनीक द्वारा तैयार किया जाता है।
इनका उपयोग कैंसर, ऑटोइम्यून रोगों और संक्रमणों के उपचार में किया जाता है। ये रोगजनक कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट करने में मदद करती हैं और स्वस्थ कोशिकाओं को कम नुकसान पहुँचाती हैं। आधुनिक चिकित्सा में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का महत्व तेजी से बढ़ रहा है और ये कई जटिल रोगों के उपचार में प्रभावी साबित हो रही हैं।
15. वैक्सीन या टीके की अवधारणा (Concept of vaccine) को समझाइए।
उत्तर:
वैक्सीन एक जैविक तैयारी है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को किसी विशेष रोग के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाई जाती है। इसमें रोगजनक सूक्ष्मजीवों के कमजोर, निष्क्रिय या उनके अंश शामिल होते हैं, जो शरीर में रोग उत्पन्न किए बिना प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं। जब वैक्सीन शरीर में प्रवेश करती है, तो प्रतिरक्षा तंत्र एण्टीबॉडी और स्मृति कोशिकाएँ बनाता है। भविष्य में वही रोगजनक शरीर में प्रवेश करता है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली तेजी से उसे नष्ट कर देती है।
वैक्सीन के प्रकारों में जीवित कमजोर, निष्क्रिय, सबयूनिट और टॉक्सॉइड टीके शामिल हैं। टीकाकरण व्यक्तिगत और सामूहिक स्वास्थ्य की रक्षा करता है और महामारी नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
16. इम्युनोग्लोब्यूलिन के गुण, वर्गीकरण और कार्यों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
इम्युनोग्लोब्यूलिन (Antibodies) प्रतिरक्षा तंत्र द्वारा निर्मित विशेष प्रोटीन होते हैं जो एण्टीजन को पहचानकर निष्क्रिय करते हैं। इनके मुख्य गुणों में विशिष्टता, विविधता और स्मृति शामिल हैं।
इन्हें पाँच वर्गों में बाँटा जाता है—IgG, IgM, IgA, IgE और IgD। IgG सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है और दीर्घकालिक सुरक्षा देता है। IgM प्रारंभिक संक्रमण में सक्रिय होता है। IgA श्लेष्म झिल्ली की रक्षा करता है। IgE एलर्जी में महत्वपूर्ण है और IgD बी-कोशिकाओं के विकास में भूमिका निभाता है।
इनका मुख्य कार्य रोगजनकों को निष्क्रिय करना, विषाक्त पदार्थों को नष्ट करना और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सक्रिय करना है।
17. ह्यूमरल (Humoral Immune response) प्रतिरक्षा का विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ह्यूमरल प्रतिरक्षा वह प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है जिसमें बी-लिम्फोसाइट्स एण्टीबॉडी बनाकर शरीर की रक्षा करते हैं। जब एण्टीजन शरीर में प्रवेश करता है, तो बी-कोशिकाएँ सक्रिय होकर प्लाज्मा कोशिकाओं में बदल जाती हैं और एण्टीबॉडी का उत्पादन करती हैं।
ये एण्टीबॉडी रक्त और लसिका में घूमकर रोगजनकों को पहचानती हैं और उन्हें निष्क्रिय करती हैं। कुछ बी-कोशिकाएँ स्मृति कोशिकाओं में बदल जाती हैं, जो भविष्य में तेज प्रतिक्रिया देती हैं। यह प्रतिरक्षा बाहरी रोगजनकों जैसे बैक्टीरिया और वायरस से रक्षा करने में महत्वपूर्ण है।
18. B- कोशिकाओं और T- कोशिकाओं की इम्युनिटी में क्या भूमिका (Role) है?
उत्तर:
बी-कोशिकाएँ और टी-कोशिकाएँ प्रतिरक्षा तंत्र की मुख्य कोशिकाएँ हैं। बी-कोशिकाएँ एण्टीबॉडी बनाकर ह्यूमरल प्रतिरक्षा में भाग लेती हैं। वे एण्टीजन को पहचानकर प्लाज्मा कोशिकाओं में बदल जाती हैं और एण्टीबॉडी बनाती हैं।
टी-कोशिकाएँ कोशिकीय प्रतिरक्षा में भाग लेती हैं। हेल्पर टी-कोशिकाएँ अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय करती हैं, जबकि साइटोटॉक्सिक टी-कोशिकाएँ संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करती हैं। दोनों मिलकर शरीर को संक्रमण से सुरक्षित रखते हैं।
19. अतिसंवेदनशीलता या हाइपरसेंसिटिविटी (Hypersensitivity) क्या है? इसके प्रकारों के बारे में समझाइए।
उत्तर:
हाइपरसेंसिटिविटी वह स्थिति है जिसमें प्रतिरक्षा तंत्र किसी हानिरहित पदार्थ के प्रति अत्यधिक प्रतिक्रिया करता है। यह एलर्जी और ऑटोइम्यून रोगों का कारण बन सकता है।
इसके चार प्रमुख प्रकार होते हैं। प्रकार-I त्वरित एलर्जी प्रतिक्रिया है, जैसे दमा और एलर्जिक राइनाइटिस। प्रकार-II में एण्टीबॉडी शरीर की कोशिकाओं पर हमला करती हैं। प्रकार-III में एण्टीजन-एण्टीबॉडी कॉम्पलेक्स ऊतकों को नुकसान पहुँचाते हैं। प्रकार-IV विलंबित प्रतिक्रिया है, जैसे त्वचा एलर्जी।
समुचित उपचार और एलर्जी से बचाव से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।



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